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गुरुवार, 5 सितंबर 2013

600 कालगर्ल थीं इस 'इच्छाधारी' के सेक्स रैकेट में!

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नई दिल्ली। आईबीएन7 की खास पेशकश ‘विवादों वाले बाबा’ में हम बता रहे हैं विवादों में घिरे बाबाओं और स्वामी की कहानियां। इन्हीं में एक नाम स्वामी भीमानंद का भी शामिल है जो सेक्स रैकेट के धंधे में पहले से लिप्त था और बाबा बनने का ढोंग बाद में रचा था। पैसे ब्याज पर देने के धंधे से भीमानंद ने कई सौ करोड़ रुपए की जायदाद और काला खजाना जुटाया। सांप का साथ होना स्वामी भीमानंद की पहचान बन गया।
भीमानंद भगवा चोला ओढ़कर दुनिया को अच्छा बनने का प्रवचन देता था। जब ये गेरुआ वस्त्र पहन कर प्रवचन देता था तो इसका नाम होता था- इच्छाधारी संत स्वामी भीमानंद महाराज चित्रकूटवाले। लेकिन सांप वाला ये इच्छाधारी बाबा रात ढलते ही अपने असली रूप में आ जाता था। गेरुआ वस्त्र उतर जाता था, पैरों पर टाइट जींस, जिस्म पर नए फैशन की टीशर्ट। हाथों में मोबाइल और महंगी कार से रात के अंधेरे में जिस्म के धंधे का संचालन।
सेक्स रैकेट की काली दुनिया में इच्छाधारी कई नाम से बदनाम था। राजीव रंजन द्विवेदी इसका एक नाम था, शिवमूरत द्विवेदी दूसरा। इच्छाधारी संत भीमानंद का ये चेहरा कभी सामने न आ पाता अगर दिल्ली पुलिस की चौकसी की वजह से वो पकड़ा न जाता।
तारीख- 26 फरवरी 2010
दक्षिण दिल्ली में दिल्ली पुलिस की टीम ने जाल बिछाकर दो कारों को रोका। इसके साथ ही एक हाईप्रोफाइल रैकेट का भांडाफोड़ किया। आठ लोग पकड़े गए। इनमें छह लड़कियां भी थीं। दो लड़कियां एयरहोस्टेस थीं। जिसमें से एक यूरोपियन एयरलाइंस में तो दूसरी एक भारतीय एयरलाइंस में काम करती थी। पुलिस ने जिन दो दलालों को पकड़ा उन्हीं में से एक था शिवमूरत द्विवेदी। शिवमूरत का रिकॉर्ड खंगालना शुरू किया तो पुलिस भी ये जानकर चौंक गई कि वो कोई और नहीं बल्कि बदरपुर में साधू के तौर पर मशहूर इच्छाधारी संत स्वामी भीमानंद था।
इच्छाधारी संत स्वामी भीमानंद की गिरफ्तारी की खबर दिल्ली के खानपुर के लोगों के लिए भी चौंकाने वाली रही। आम श्रद्धालु यकीन ही नहीं कर सके कि सात्विक जीवन का पालन करने की सीख देने वाले गेरुआ वस्त्र धारी जिस शख्स को वो साधु समझते थे, वो शैतान निकला। दिल्ली ही नहीं देश में सेक्स रैकेट का सबसे बड़ा दलाल निकला।
अपने आश्रम की आड़ में भीमानंद सेक्स रैकेट चलाता था। उसके नेटवर्क में करीब 600 हाई प्रोफाइल लड़कियां शामिल थीं, जिनमें कॉलेज गर्ल, मॉडल, एयरहोस्टेस, एक्जक्यूटिव हर तरह के पेशे से जुड़ी कॉलगर्ल थीं। पुलिस को भीमानंद के ठिकाने से उसकी 6 लाल डायरियां भी मिलीं। इन डायरियों में देश के 100 हाईप्रोफाइल लोगों के नाम दर्ज थे। इनमें कई सांसद, नेता, पुलिसवाले, बिजनेसमैन और बड़ी हैसियत वाले सफेदपोश लोग थे। इच्छाधारी संत भीमानंद के सेक्स रैकेट का लंबा-चौड़ा नेटवर्क देखकर पुलिस भी हैरान रह गई।
दिल्ली पुलिस ने भीमानंद पर संगठित अपराध के खिलाफ बने सख्त कानून मकोका के तहत मामला दर्ज किया। उसकी गिरफ्तारी के करीब 6 महीने बाद पुलिस ने भीमानंद के खिलाफ अदालत में 1215 पन्नों की चार्चशीट दायर की। मामला अदालत में है लेकिन सवाल ये भी है कि भीमानंद के हाईप्रोफाइल ग्राहकों तक कानून के लंबे हाथ क्यों नहीं पहुंचे।
मोटे तौर पर माना जाता है कि जिस्मफरोशी के धंधे, धर्म को कारोबार में बदलकर किए गए धंधे और पैसे ब्याज पर देने के धंधे से भीमानंद ने कई सौ करोड़ रुपए की जायदाद और काला खजाना जुटाया।
तहखाने में था सेक्स के धंधे का हेडक्वार्टर
शिवमूरत द्विवेदी उर्फ इच्छाधारी संत भीमानंद ज्यादा पढ़ा लिखा नहीं है। लेकिन जिस्मफरोशी के धंधे में कूदने के बाद उसने किसी प्रशिक्षित मैनेजर की तरह क्लाइंट और लड़कियों का नेटवर्क तैयार किया। धंधा चलाने के लिए उसने स्पेशल ऑपरेशन प्रोसीजर की तरह तय तौर-तरीके बनाए। इस धंधे का संचालन वो उस आश्रम से करता था, जहां बने तहखाने में था सेक्स के धंधे का हेडक्वार्टर।
मोहम्मदपुर और हुमायूंपुर में भी आश्रम की आड़ में जिस्म का बाजार चल रहा था। शिवमूरत द्विवेदी उर्फ इच्छाधारी संत स्वामी भीमानंद का मंदिर बिल्कुल अलग था। यहां एक गुफानूमा पोशीदा रास्ता था। रास्ता, तहखानेनुमा अंधेरे कमरे में जा कर खत्म होता था। देह के धंधे के इस पाताललोक में आकर अच्छे घरों की पढ़ी-लिखी लड़कियां रास्ता भूल जाती थीं। वो इच्छाधारी संत की इच्छा की गुलाम बन जाती थीं।
करीब तीन साल पहले भी आईबीएन7 के संवाददाता अमित पांडेय शिवमूरत द्विवेदी उर्फ इच्छाधारी संत स्वामी भीमानंद के गुप्त ठिकाने पर पहुंचे थे। वहां गुफा, खुफिया निगाह रखने के लिए बने झरोखों को देखकर ये समझने में परेशानी नहीं हुई कि मंदिर में ये सारे बदलाव क्यों किए गए। भीमानंद मंदिर की आड़ में सेक्स रैकेट का हेडक्वार्टर चला रहा था।
ये मंदिर दरअसल दो मंजिल की एक इमारत थी। ग्राउंड फ्लोर पर मंदिर बना था। फर्स्ट फ्लोर पर सेक्स रैकेट का कंट्रोल रूम। यहां एक झरोखा भी था। इस झरोखे से भीमानंद मंदिर में आने-जाने वाले लोगों पर निगाह रखता था। ढोंगी बाबा की मायावी दुनिया में 14 सीसीटीवी कैमरे भी लगे हुए थे। पहली मंजिल में झरोखे के बाद शुरू हो जाती थी वो गुफा जिसके जरिए इच्छाधारी के तहखाने तक पहुंचने का रास्ता था। वो करीब 20 मीटर लंबा था।
इसी गुफा के पीछे एक छोटा कमरा था। इसी छोटे से कमरे में इच्छाधारी के राज छुपे थे। इसी कमरे में ही हाई प्रोफाइल कॉलगर्ल से लेकर बड़े-बड़े दलाल तक जुटते थे। इसी पाताललोक से वो लाल डायरियां मिली थीं जिससे शिवमूरत द्विवेदी उर्फ इच्छाधारी संत स्वामी भीमानंद के जिस्म के धंधे के सारे राज खुल गए। राज खुले तो वो भक्त भी हैरान रह गए जो लगभग रोजाना मंदिर आते थे। भीमानंद का प्रवचन सुनते थे। भीमानंद यहीं उन्हें प्रवचन सुनाता था।
मंदिर की आड़ में भीमानंद के प्रवचन का खेल लंबे वक्त तक चला। बाद में ये मालूम चला कि भीमानंद दक्षिण दिल्ली के तीन इलाकों आर के पुरम, मोहम्मदपुर और हुमायूंपुर में भी आश्रम की आड़ में जिस्म का बाजार चल रहा था।
अमेरिका तक फैला कमाई का नेटवर्क!
इच्छाधारी संत स्वामी भीमानंद एक आश्रम से सेक्स रैकेट का नेटवर्क चलाता था। लेकिन उसके तार सात समंदर पार दुनिया में जुए के सबसे बड़े शहर लास वेगास तक जुड़े हुए थे। यही नहीं जांच के दौरान पुलिस को ये भी पता चला कि इच्छाधारी सिर्फ सेक्स रैकेट से ही कमाई नहीं कर रहा था। उस पर हवाला नेटवर्क से जुड़े होने का शक भी था। इन मामलों में सजा पाने से बचना अब इच्छाधारी के लिए लगभग नामुमकिन हो गया है। हैरानी की बात है कि उसके धंधे में साथी रहे ज्यादातर लोग कानून के शिकंजे से आजाद ही रहे।
धार्मिक समारोह में डांस परोसना और भक्तों की भीड़ जुटाना। उसके पाखंड का एक और चेहरा था। नृत्य कार्यक्रम में आखिर में इच्छाधारी पटाखे की लंबी लड़ी में आग कर पाखंड का डांस करता था। जैसे-जैसे पटाखें की लड़ी जलती जाती- ढोल- नगाड़े की आवाज के साथ बाबा के बदन की थिरकन बढ़ती जाती।
धार्मिक समारोहों में डांस परोसने का बाबा भीमानंद का मकसद पैसा कमाना होता था, क्योंकि भीमानंद अच्छी तरह से जानता था कि सिर्फ साईं के नाम के प्रवचन से ही वो पैसे नहीं कमा सकता। इस पाखंडी की पैसे कमाने की भूख इतनी ज्यादा थी कि वो ब्याज पर पैसे देने से लेकर, कई तरह के ऐसे धंधे में मशगूल था। जिससे उसे करोड़ों की कमाई होती थी।
सेक्स रैकेट से इच्छाधारी की कमाई
हालांकि बाबा भीमानंद के कई तरह के धंधे थे लेकिन उसकी कमाई का सबसे बड़ा जरिया सेक्स रैकेट ही था। उसके मोबाइल नंबर का एक साल का बिल था 5 लाख 21 हजार 744 रुपये। चार्जशीट के मुताबिक इस पाखंडी के फोन से एक दिन में 5-5 सौ काल्स इन और आउटगोईंग थी। समझा जा सकता है कि उसके धंधे की कमाई कितनी थी।
2010 में इच्छाधारी के अड्डे से काले रंग की एक डायरी भी मिली। डायरी में दुनिया में जुए के सबसे बड़े शहर अमेरिका के लास-वेगास से हो रही कमाई का सुराग था। इसके एक पन्ने पर ढाई हजार करोड़ रुपए की इंट्री थी। साथ में लिखा था 5 पर्सेंट। अगले पन्ने में ये रकम घट कर 125 करोड़ रुपए हो गई। लेकिन उसके सामने आईएन दर्ज था। यानी ये रकम बाबा को मिल चुकी थी। अगले पन्ने पर कोलकाता की एक संस्था और अमेरिका का लास वेगास शहर का नाम था। लिहाजा हवाला नेटवर्क का शक हुआ। पुलिस का मानना है कि भीमानंद हवाला नेटवर्क के जरिए कालेधन को सफेद करने के धंधे में भी डूबा था।
भीमानंद पर सभी मामले दिल्ली की साकेत कोर्ट में चल रहे हैं, पुलिस के 60 गवाहों में से 35 लोगों की गवाही हो चुकी है। मकोका के तहत चल रहे केस में भीमानंद के साथ उसका साथी प्रवीण भी आरोपी है। कानूनी जानकारों का मानना है कि केस इतना पुख्ता है कि भीमानंद का बचना मुश्किल है।
मुकद्दमें में भीमानंद के दो पासपोर्ट के बारे में भी सबूत रखे गए हैं। दिल्ली से कोलकाता, कोलकाता से लासवेगास तक फैले जिस्मफरोशी के धंधे को चमकाने के लिए ही भीमानंद ने दो पासपोर्ट भी बनवाए थे। पहला पासपोर्ट H 3782510 है। ये 23 फरवरी 2009 को दिल्ली से जारी हुआ था। 22 फरवरी 2019 तक वैध पासपोर्ट को बाबा ने कैंसिल करा दिया था। दूसरा पासपोर्ट उसने सरस्वती स्वामी बाबा भीमानंद के नाम से 13 जनवरी 2010 को जारी करवाया।
हैरानी की बात है कि पासपोर्ट के लिए होने वाली पुलिस की बैकग्राउंड जांच में भी भीमानंद आसानी से बच निकला था। पुलिस को सफाई देनी मुश्किल हो गई थी। बाबा की डायरी के मुताबिक उसने 17 लाख रुपये पांच फीसदी महीने के ब्याज पर लोगों को उधार भी दिया था, हालांकि हैरानी की बात है कि उसके धंधे में साथी रहे ज्यादातर लोग कानून के शिकंजे से आजाद ही रहे।
नेटवर्क में थीं 600 कॉलगर्ल्स
इच्छाधारी संत स्वामी भीमानंद जब पकड़ा गया तब उसके नेटवर्क में करीब 600 कॉलगर्ल्स थीं, ज्यादातर लड़कियां पढ़ी-लिखी थीं और अच्छे परिवारों से आती थीं। लिहाजा ये एक पहेली ही है कि इच्छाधारी संत उन्हें अपने जाल में फंसाने में कामयाब कैसे हो जाता था। सवाल ये भी है कि क्या उसने कुछ लड़कियों को इस धंधे में शामिल होने के लिए मजबूर भी किया था। शक है कि भीमानंद ने उस लड़की का भी इस्तेमाल किया या फिर उसे ब्लैकमेल किया।
नामी एयरलाइंस में काम करने वाली एयरहोस्टेस, दिल्ली के प्रतिष्ठित कॉलेजों में पढ़ने वाली लड़कियां, महीने में लाखों रुपये कमानें वाली मॉडल्स, यानी जिन्हें पैसे की जरूरत नहीं थी, जिन्हें आसानी से सेक्स रैकेट में शामिल होने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता था, वो भी शिव मूरत द्विवेदी उर्फ इच्छाधारी संत स्वामी भीमानंद के सेक्स रैकेट में शामिल थीं। पूछताछ में इच्छाधारी ने बताया था कि ज्यादातर लड़कियां उसके धंधे में अपनी मजबूरी से आईं। लेकिन शक ये भी है कि कुछ लड़कियां जोर-जबरस्ती इस धंधे में धकेल दी गईं।
लड़कियों को जोर-जबरदस्ती से सेक्स रैकेट में धकेलने का इच्छाधारी बाबा शक तब हुआ जब जयपुर पुलिस शिव मूरत द्विवेदी की तलाश करते दिल्ली पहुंची। पुलिस के साथ एक नौजवान था। जिसकी बहन लापता हो गई थी। उसके मोबाइल फोन के कॉल रिकॉर्ड से पता चला था कि वो शिव मूरत द्विवेदी के संपर्क में थी। लड़की का परिवार खानपुर के आश्रम में संत के रूप में मौजूद इच्छाधारी से मिला भी था। उसने वादा किया था कि लड़की 15 दिन में जयपुर पहुंच जाएगी। लेकिन वो कभी नहीं लौटी।
इच्छाधारी बाबा ने सिर्फ जयपुर लड़की को ही धोखा नहीं दिया था, बल्कि जांच के दौरान पुलिस को उसके पास से उसकी माशूका की चिट्ठी भी मिली थी। इस चिट्ठी से साफ था कि पैसा कमाने की हवस में इच्छाधारी बाबा ने अपनी प्रेमिका को भी धोखा दे दिया था।
इच्छाधारी बाबा के पास से उसकी माशूका जो लव लेटर मिला उसे नोएडा की एक लड़की ने लिखा था। लवलेटर की इबारत से साफ है कि इस ढोंगी ने अपनी दोस्त से भी दगाबाजी की। चिट्ठी में उसने लिखा था मैं हार गई, वाकई आपने मुझे हरा दिया, मुझे अपनी जिंदगी कहने वाले आप मुझे छोड़कर बहुत आगे निकल गए। आज आपके लिए पैसा ही सब कुछ है। तुम्हें ना लगे, पर मुझे लगता है कि हम एक दूसरे से बहुत दूर हो गए।
भीमानंद की माशूका को तलाशने की पुलिस की हर कोशिश नाकाम हो गई। शक है कि भीमानंद ने उस लड़की का भी इस्तेमाल किया या फिर उसे ब्लैकमेल किया। sabhar :http://hindi.in.com

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