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1 लाख साल बाद कैसा दिखेगा इंसान, छोड़नी पड़ेगी धरती, नहीं मिलेगी सूर्य की रोशनी

1 लाख साल बाद कैसा दिखेगा इंसान, छोड़नी पड़ेगी धरती, नहीं मिलेगी सूर्य की रोशनी

लंदन. मानव आदिकाल में क्‍या खाता था, कैसे चलता था, उसके शरीर की बनावट कैसी थी, इस बारे में तो वैज्ञानिकों के पास कई अहम जानकारियां हैं, लेकिन क्‍या आपने कभी सोचा है कि आज से 1 लाख वर्ष बाद मानव का चेहरा कैसा होगा? उसकी आंखें छोटी हो जाएंगी या बड़ी। उसका माथा कैसा होगा और कैसी होगी नाक? मानव आज जैसा दिखता है, क्‍या 20,000 साल बाद भी ऐसा ही दिखेगा? इन सवालों के ठोस जवाब आज दुनिया में किसी के पास नहीं है, लेकिन दो शख्‍स ऐसे हैं, जिन्‍होंने इस पहेली का हल निकालने की कोशिश है। इनके के नाम हैं डिजाइनर-रिसर्चर निकोलस लैम और वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी में कम्‍प्‍यूटेश्‍नल जीनोमिक्‍स विशेषज्ञ डॉक्‍टर एलन क्‍वान।
 
'ऑब्‍जर्वर टैक मंथली' में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, इन दोनों ने रिसर्च और शानदार आर्टवर्क के जरिये ये बताया है कि मानव आज से 20,000, 60,000 या 1 लाख वर्ष बाद कैसा दिखेगा? शायद हालीवुड फिल्‍म 'क्‍लोज एनकाउंटर ऑफ द थर्ड काइंड' में दिखाए गये एलियन के जैसा या फिर...? जानें आगे...
1 लाख साल बाद कैसा दिखेगा इंसान, छोड़नी पड़ेगी धरती, नहीं मिलेगी सूर्य की रोशनी


हवा-प्रकाश के असर से बदलेगा चेहरा
 
वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी में कम्‍प्‍यूटेश्‍नल जीनोमिक्‍स विशेषज्ञ डॉक्‍टर क्‍वान की रिसर्च के मुताबिक, 1 लाख वर्ष बाद इंसान के चेहरे की उनकी परिकल्‍पना में दो बातें बेहद अहम हैं। एक, हमारा पर्यावरण तेजी बदलेगा और दूसरी महत्‍वपूर्ण बात यह है कि वैज्ञानिक ह्यूमन बायलॉजी पर और ज्‍यादा पकड़ बना लेंगे। इंसान के चेहरे में बदलाव के लिए हवा और प्रकाश में बदलाव बेहद अहम होंगे। ये दोनों कारण तय करेंगे कि इंसान का चेहरा 1 लाख वर्ष बाद कैसा आकार लेगा। साथ ही इंसान जिस चेहरे के साथ जन्‍म लेगा, वैज्ञानिक उसे बदलने में भी सक्षम होंगे। डॉक्‍टर क्‍वान कहते हैं कि आज से 60,000 वर्ष बाद इंसानी चेहरे में बदलाव या यूं कहें कि क्रमिक विकास चर्चा का केंद्र रहेगा। ह्यूमन जीनोम कंट्रोल करने की वैज्ञानिको की क्षमता भी बहुत विकसित हो जाएगी। 
1 लाख साल बाद कैसा दिखेगा इंसान, छोड़नी पड़ेगी धरती, नहीं मिलेगी सूर्य की रोशनी
सिर का साइज बढ़ेगा, छोड़नी पड़ेगी धरती
 
बदलाव के इस क्रम में सबसे रोचक तथ्‍य यह है कि इंसान का सिर बहुत बड़ा होगा। आंखें कुछ ऐसी दिखेंगी जैसे बाहर निकल आई हों। इसके अलावा, माथा और नाक के नथुने भी बड़े होंगे, जिससे दूसरे ग्रहों पर सांस लेने में दिक्‍कत नहीं होगी। ऐसा भी कह सकते हैं कि मानव खुद अपने चेहरे को ऐसा आकार भी दे सकेगा, जिससे वह अन्‍य ग्रहों पर रहने में सक्षम हो सके, क्‍योंकि आने वाले वर्षों में इंसान को धरती छोड़कर अन्‍य ग्रहों पर रहने के लिये मजबूर होना पड़ सकता है। शायद ऐसी जगहों पर जहां प्रकाश कम होगा। ये स्‍थान सूर्य की पहुंच से काफी दूर हो सकते हैं। जब बड़ी संख्‍या में लोग ओजोन परत के बाहर रहने लगेंगे, तब उन्‍हें अल्‍ट्रावायलेट किरणों यानी यूवी रेडिएशन से रोगों का खतरा रहेगा और इंसान की स्किन प्रभावित होगी। 
 
60,000 साल बाद मानव मॉर्फोलॉजी जेनेटिक्‍स में मास्‍टर हो जाएगा और तब हम बच्‍चों का DNA बदल पाने में भी सक्षम होंगे। ऐसे में संभव है कि उनकी नाक सीधी हो और चेहरे को परफेक्‍ट आकार दिया जा सकेगा। लैम को उम्‍मीद है कि उनका यह आर्टवर्क वैज्ञानिकों को 1 वर्ष बाद इंसानी चेहरे की परिकल्‍पना के बारे में और ठोस तथ्‍य तालाशने में मदद देगा। 

1 लाख साल बाद कैसा दिखेगा इंसान, छोड़नी पड़ेगी धरती, नहीं मिलेगी सूर्य की रोशनी
(फोटो कैप्‍शन: लैम और क्‍वान की रिसर्च के अनुसार 60,000 साल बाद इंसान का चेहरा इस प्रकार से बदलेगा। रिसर्च के मुताबिक, बदलाव का सबसे ज्‍यादा प्रभाव मानव के माथे और आंखों पर पड़ेगा। आंखों का आकार बहुत बड़ा जाएगा। इतना ही नहीं, उस समय तक वैज्ञानिकों के पास इतनी क्षमता होगी कि चेहरे में आमूलचूल बदलाव कर सकें। sabhar : bhaskar.com



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