इस "विषम" क्षेत्र में लगातार रहस्यमयी घटनाएं घटती रहती हैं, और कोई भी नहीं बता सकता है कि ये घटनाएं क्यों घटती हैं। यही कारण है कि दुनिया के कोने-कोने से लोग यहाँ आते हैं और वे इस उम्मीद से यहाँ आते हैं कि शायद परग्रह-वासियों से उनकी मुलाकात हो सके।
इस इलाके में पहुँचना कोई आसान काम नहीं है। यहाँ सड़कें नहीं हैं। यहाँ जंगलों के बीचों-बीच गुज़रना पड़ता है। वाहन कीचड़ में फंस जाते हैं। वीडियो कैमरे बंद हो जाते हैं। झाड़ियों में से दूधिया रोशनी निकलती दिखाई देती है मानो धरती के गर्भ से किरणें निकल रही हों। आकाश में आग के गोले उड़ते दिखाई देते हैं।
अचानक पेड़ों की चोटियों से ऊपर आकाश में विशाल मानव आकृतियां दिखाई देने लगती हैं। गाइड पर्यटकों को सलाह देता है कि अगर किसी को ठंड लगती है तो वे गुनगुने भोज वृक्षों से चिपक जाएँ को क्योंकि ये वृक्ष ठंड के मौसम में भी गर्मी देते हैं। इस विचित्र जगह का सबसे पहले एक भूविज्ञानी एमिल बचूरिन ने पता लगाया था। बाद में, एक दिन रहस्यमयी परिस्थितियों में अपने घर में ही उनकी जलकर मृत्यु हो गई थी। अपने जीवनकाल में एक बार उन्होंने बताया था कि मलियोब्का त्रिकोण में परग्रह-वासियों से उनकी मुलाकात हुई थी। उन्होंने बताया था-
मैंने आकाश में बादलों के बीचों-बीच नीले-बैंगनी रंग की चमकती हुई कोई चीज़ देखी। वह बड़ी तेज़गति से नीचे उतर रही थी। जब वह ज़मीन की सतह से टकराई तो उसने एक चमकदार गोलार्द्ध का रूप धारण कर लिया। वह चलती-चलती गाँव की ओर बढ़ने लगी। अब तक वह एक गुंबद में बदल गई थी। मैंने इस जगह को याद कर लिया और अगले दिन वहाँ पहुँच गया। रात को कुछ हिमपात हुआ था। मैंने उस जगह पर एक गोल दायरा देखा। वहाँ घास दबी हुई थी। और तापमान शून्य से नीचे होने के बावजूद गोल दायरे के केंद्र से भाप निकल रही थी।
अब इस क्षेत्र में घटी घटनाओं का उल्लेख न केवल रूस में बल्कि विदेशों में भी किया जाता है। जापान, अमरीका, इंग्लैंड, कनाडा, इटली और अन्य देशों की उफो पत्रिकाओं में मलियोब्का त्रिकोण का हवाला दिया जाता है। शोधकर्ताओं ने इस क्षेत्र में ऐसे लगभग चालीस स्थान खोज डाले हैं जहाँ समय भी अपनी गति बदल लेता है। चाबी वाली यांत्रिक घड़ियाँ दिन में कुछ घंटे पीछे चलने लगती हैं और इलेक्ट्रॉनिक घड़ियों पर केवल शून्य दिखाई देता है या फिर बड़ी अजीब-सी संख्या दिखाई देने लगती है। हालांकि, भूभौतिकीविदों को इन घटनाओं में कोई रहस्य दिखाई नहीं देता। उनका कहना है कि यहाँ की चुंबकीय विसंगति और भूमि संरचना की क्रस्टल-गति के कारण ही ऐसी घटनाएं घट रही हैं। बात दरअसल यह है कि इस इलाके में भूमि के नीचे कम गहराई पर ही गैस का एक भंडार मौजूद है। गर्मियों में यहाँ कुछ स्थानों पर दरारें पड़ जाती हैं और इन दरारों के ज़रिए गैस बाहर निकल आती है। इसलिए वहाँ आनेवाले किसी भी व्यक्ति पर इस मादक गैस का असर हो जाता है। “यहाँ शांति और खुशी की भावनाओं का अनुभव होता है। जिस किसी बात की समझ नहीं आती, यहाँ आकर उसका समाधान भी उपलब्ध हो जाता है।” इस प्रकार की कई टिप्पियाँ वेबसाइट molebka.ru पर छपी हुई हैं। इस सिलसिले में एक स्थानीय खोजकर्ता वालेरी यकीमोव ने कहा-
दुनिया के कोने-कोने से यात्री यहाँ आते हैं। हमारे यहाँ बहरीन से भी कुछ मेहमान आए थे। इस अरब देश की एक महिला नेसंयोग से ही हमारी वेबसाइट देख ली। इस साइट पर छपे चित्रों को देखते ही वह इतनी आकर्षित हुईं कि उनके साथ एक पूरा ग्रुप यहाँ पहुँच गया। इन लोगों ने पूरे बीस दिन यहाँ बिताए।
मलियोब्का त्रिकोण की यात्रा बहुत सस्ती है। इसके आयोजकों के अनुसार, अगर कोई टेंट आदि आपने साथ लेकर यहाँ की यात्रा पैदल करता है तो उससे एक पैसा भी नहीं लिया जाता है। केवल भोजन की लागत ही वसूल की जाती है। लेकिन यदि कोई यात्री कारों और स्नोमोबाइल की सेवाएं लेनी चाहता है तो उससे भी केवल एक सौ डॉलर ही वसूल किए जाते हैं sabhar :http://hindi.ruvr.ru
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