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बुधवार, 28 अगस्त 2013

कर्ज में डूबे अमेरिका के पास नहीं हैं वेतन तक के पैसे, बचेगा सिर्फ चार दिन का खर्च

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कर्ज में डूबे अमेरिका के पास नहीं हैं वेतन तक के पैसे, बचेगा सिर्फ चार दिन का खर्च

अमेरिका की हालत खस्‍ता है। दुनिया का सबसे ताकतवर मुल्‍क गहरे वित्तीय संकट की ओर बढ़ रहा है। मध्य अक्टूबर तक उसके पास केवल तीन-चार दिन के खर्च के लिए 50 अरब डॉलर (लगभग 3.31 लाख करोड़ रुपए) का कैश ही बचेगा। इसके बाद वह अपने सैनिकों को न तो वेतन दे पाएगा और न लोगों को सामाजिक सुरक्षा के मद में दी जाने वाली रकम।
 
 
ओबामा प्रशासन ने सोमवार को साफ तौर पर आर्थिक संकट की बात स्वीकार की। साथ ही कहा कि देश अब और ज्यादा कर्ज लेने की स्थिति में भी नहीं है। उस पर पहले से 16.7 लाख करोड़ डॉलर का कर्ज है। खर्चों में कटौती की जा रही है। लोगों को नौकरियों से निकाला जा रहा है। वेतन कम किए जा रहे हैं। खुद ओबामा और उनकी सरकार के कई मंत्री भी अपनी सैलरी कटवा रहे हैं।

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कर्मचारियों को जबरन अवैतनिक छुट्टी 
कर्मचारियों को जबरन अवैतनिक छुट्टी पर भेजा जा रहा है। अब नए सिरे से कटौतियां करनी होंगीं। राष्ट्रपति बराक ओबामा ने देश की कर्ज सीमा बढ़ाने या इस संबंध में कोई मध्यस्थता करने से इनकार कर दिया। उन्होंने संकट के लिए देश की संसद (कांग्रेस) खासकर रिपब्लिकन पार्टी को दोषी ठहराया। अमेरिकी संसद के निचले सदन में रिपब्लिकन का बहुमत है। व्हाइट हाउस के प्रेस सचिव जे. कार्नी ने साफ कहा कि रिपब्लिकन पार्टी के सांसदों से इस मामले में कोई बात नहीं की जाएगी। कई महीनों से प्रस्ताव उनके पास है। हम केवल उनके जवाब का इंतजार करेंगे। 
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कर्ज की सीमा बढ़ाए कांग्रेस : वित्त मंत्री 
वित्त मंत्री जैक ल्यू ने सोमवार को सांसदों को पत्र लिखा है। इसमें कहा है कि अगर कर्ज की सीमा नहीं बढ़ाई गई तो निवेशक सरकारी बॉन्ड्स में रकम लगाने से मना कर सकते हैं। वे पहले ही लाख करोड़ डॉलर के सरकारी बांड खरीद चुके हैं। कर्ज लेने की वर्तमान सीमा मई में तय की गई थी। वित्त विभाग कर्ज लेने के लिए नई तकनीक खोज रहा है। 
 
ओबामा के ड्रीम प्रोजेक्ट पर भी खतरा 
ओबामा प्रशासन ने सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में महत्वाकांक्षी मेडिकेयर योजना चला रखी है। इस पर भी संकट मंडरा रहा है। इस योजना के लिए एक दिन में 30 अरब डॉलर (करीब 1.98 लाख करोड़ रुपए) की रकम विभिन्न विभागों को ट्रांसफर करनी होती है। 
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अमेरिका और उसके मित्र देश मंगलवार को सीरिया पर सैन्य कार्रवाई की योजना बनाने में जुट गए। अमरीकी रक्षा मंत्री चक हेगेल ने कहा है कि अगर राष्ट्रपति बराक ओबामा हमले का आदेश देते हैं तो अमरीकी सेनाएं सीरिया पर हमले के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा है कि हमने साजो-सामान को उचित जगह पर पहुंचा दिया है ताकि जो भी फैसला राष्ट्रपति लें उस पर तुरंत अमल किया जा सके। सीरियाई विद्रोहियों को संकेत दिए गए हैं कि कुछ दिन में अमेरिका सीरिया पर हमला कर सकता है। अमेरिका ने यूरोप और मध्यपूर्व के अपने मित्र देशों के शीर्ष फौजी अफसरों से जॉर्डन में बातचीत की है।  इसे ‘युद्ध परिषद’ कहा गया है। राष्ट्रपति ओबामा ने ब्रिटिश प्रधानमंत्री डेविड कैमरन तथा फ्रांस के राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद और ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री केविन रड से बातचीत की है। फिलहाल रूस से बातचीत स्थगित कर दी गई है क्योंकि उसने सीरिया में अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप में सहयोग करने से इनकार कर दिया है। चीन भी रूस के साथ है। ये दोनों संयुक्त राष्ट्र में असद के खिलाफ कार्रवाई को वीटो करने को तैयार हैं। ईरान पहले से असद के साथ है। 

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विद्रोहियों का खनासीर पर कब्जा, 53 सैनिक मारे गए 
 
सीरिया के विद्रोहियों ने सोमवार को अलेप्पो से लगे खनासीर शहर पर कब्जा कर लिया। इसमें 53 सरकारी सैनिक मारे गए। विद्रोहियों ने राष्ट्रपति असद को जहरीली गैस का हमला करने की धमकी दी है। सीरिया में तैनात ब्रिटेन के मानवाधिकार पर्यवेक्षक अब्दुल रहमान ने बताया कि विद्रोहियों ने खनासीर शहर पर कब्जा किया। उत्तरी हमा प्रांत को जोड़ने वाला सड़क संपर्क काट दिया। इससे पहले लेबनान की सीमा से लगे तालखलाख शहर पर भी विद्रोहियों ने कब्जा करने का प्रयास किया।
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आज फिर शुरू होगी जांच
 
सीरिया पहुंचे संयुक्त राष्ट्र जांच दल ने दूसरी बार जांच बुधवार तक टाल दी है। सोमवार को उनके काफिले और होटल पर हमले के बावजूद उन्होंने जांच की थी। सीरियाई विदेश मंत्री वालिद अल-मुआलम ने साफ कहा है कि सीरिया सरकार ने रासायनिक हथियारों या पदार्थ का इस्तेमाल नहीं किया है। जबकि अमेरिकी विदेश मंत्री जॉन केरी ने कहा कि इसमें कोई शक नहीं कि राष्ट्रपति असद की सेना ने ही रासायनिक पदार्थ का इस्तेमाल किया है। sabhar : bhaskar.com



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