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मंगलवार, 31 दिसंबर 2013

ब्रह्मचारी पर यौन शोषण का आरोप

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 UPDATE:'जब मैं 26 का था, तब से ब्रह्मचारी मेरे संग भी करते आ रहे थे दुष्कर्म'!


महर्षि महेश योगी विश्वविद्यालय के कुलाधिपति ब्रह्मचारी गिरीश वर्मा एक नई मुसीबत में फंस गए हैं। वर्मा पर यौन शोषण का आरोप लगाने वाली महिला के पति ने मीडिया के सामने यह कहते हुए सनसनी पैदा कर दी कि, उनके संग भी दुष्कर्म होता रहा। उधर, कोर्ट द्वारा 1 जनवरी तक पुलिस रिमांड पर भेजे गए गिरीश वर्मा मंगलवार को महिला थाने बयान के लिए लाए गए। उससे कुछ देर पहले पीडि़ता भी अपने पति के संग बयान देने पहुंची।

जिस ब्रह्मचारी के आगे हजारों लोग श्रद्धा से झुक जाते हैं, वे मंगलवार जब महिला थाने में बयान के लिए लाए गए, तब उनके चेहरे का रंग उड़ा हुआ था। तेजस्वी सूरत मुरझाई हुई थी। देर रात तक पुलिस की पूछताछ के कारण थकावट और टेंशन पूरी बॉडी में स्पष्ट दिखाई पड़ रही थी। सोमवार को महर्षि महेश योगी विश्वविद्यालय के कुलाधिपति गिरीश वर्मा को मजिस्ट्रेट वर्षा शर्मा की कोर्ट में पेश किया गया था, जहां से उन्हें 1 जनवरी तक के लिए पुलिस रिमांड पर भेजा गया है।

UPDATE:'जब मैं 26 का था, तब से ब्रह्मचारी मेरे संग भी करते आ रहे थे दुष्कर्म'!

ऐसे आलीशान महलनुमा कोठी में रहते है गिरीश वर्माः गिरीश वर्मा का महलनुमा कोठी दस एकड़ में फैली है। पहले यह पांच एकड़ में बनी थी। इसमें एक गार्डन है जिसमें जयपुर से मंगाया हुआ सफेद मार्बल का फव्वारा लगा हुआ है। तकरीबन 11 हजार स्क्वायर फुट में बनी हुई कोठी में दो फ्लोर है। दोनों फ्लोर अपने आप में अलग है। गिरीश वर्मा ऊपर वाले फ्लोर में रहते है। इस कोठी में दोनों फ्लोर में ड्राइंग और डायनिंग रूम के अलावा चार कमरे है। ऊपर जाने के लिए एक लिफ्ट लगी हुई है। कोठी में ऊपरी ओर पीतल का कलश लगा हुआ है। अंदर गार्डन के आसपास हाथी सहित विभिन्न कलाकृति लगी हुई है। पूरी कोठी में सफेद मार्बल का काम हुआ है।
पीडि़ता के पति ने भी लगाया दुराचार होने का आरोपः गिरीश वर्मा को सोमवार को जब अदालत में ले जाया गया था, वहां पर पीडि़ता के पति पहुंच गए। पीडि़ता के पति ने मीडिया के सामने इस बात का खुलासा किया कि गिरीश वर्मा ने उनके साथ भी दुराचार किया है। उन्होंने बताया कि जब वे 26 वर्ष के तब से श्री वर्मा ने उनके साथ लगातार दुराचार किया। उसके बाद उन्होंने वर्मा से दूरी बनाने के लिए कई प्रयास किए उनका कहना था कि वे भय वश ये बात किसी को नहीं बता पाए। उनका कहना है कि अब जब गिरीश वर्मा की करतूत सामने आई तो वे दुनिया को बताना चाहते है कि गिरीश वर्मा बहुत ही खराब व्यक्ति हैं।
रहस्यमय तरीके से बयान देने पहुंचे गिरीश वर्मा: निज सचिव की पत्नी के साथ ज्यादती का आरोप लगने के 10 महीने बाद महर्षि महेश योगी वैदिक विश्वविद्यालय के कुलाधिपति गिरीश वर्मा 27 दिसंबर को बयान दर्ज कराने रहस्यमय तरीके से महिला थाने पहुंचे थे। उन्होंने पुलिस को बताया था कि आरोप लगाने वाली महिला के पति को काम में गड़बड़ी करने के कारण संस्थान से निकाल दिया था। इसीलिए उसने उन्हें बदनाम करने का षड्यंत्र रचा और ब्लैकमेल कर रही है। इससे पहले वर्मा ने यह भी कहा था कि शिक्षिका का पति घर खरीदने के लिए संस्थान ने पैसे मांग रहा था, जो कि उसे नहीं दिए गए। पैसे ने मिलने से नाराज पति-पत्नी मेरे साथ इस तरह का गंदा खेल खेल रहे हैं।
आरोप के बाद स्कूल से निकाल दिया गया शिक्षिका को: गिरीश वर्मा की गिरफ्तारी की मांग को लेकर पीडि़त महिला अपने पति के साथ थाना परिसर में ही धरने पर बैठ गई थी। इस दौरान उसके पति ने गुस्से में वर्मा को कुछ बोलने की कोशिश की, लेकिन महिला और पुलिस ने उन्हें रोक लिया। पुलिस में मामले की शिकायत होने के 278 दिन बाद पहली बार थाने पहुंचे वर्मा तीन घंटे चालीस मिनट तक बयान देने के बाद वहां से चले गए थे। जाते-जाते मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए उन्होंने कहा था कि मुझे इस मामले में कुछ नहीं कहना है। मेरे वकील ही इस बारे में बात करेंगे।महिला महर्षि विद्या मंदिर रतनपुर की शिक्षिका थी। वर्मा पर आरोप लगाने के बाद उसे और उसके पति को स्कूल से निकाल दिया गया था। sabhar : bhaskar.com


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सोमवार, 30 दिसंबर 2013

स्कूल छोड़ने के 74 साल बाद पीएचडी की.

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बुजुर्ग और पीएचडी
लंदन के एक मजदूर के बेटे डॉ वूफ ने सोलह साल की उम्र में नौकरी करने के लिए स्कूल छोड़ दिया था लेकिन बाद में उन्होंने गणित के शिक्षक के रूप में नौकरी की और सेवानिवृत होने के बाद पढ़ाई पूरी करने लौट आए.

स्कूल के दिनों में उन्हें स्कॉलरशिप मिली थी लेकिन युद्ध शुरू होने के कारण उन्हें 16 साल की उम्र में ही पढ़ाई छोड़ के जाना पड़ा और उनकी विश्वविद्यालय की पढ़ाई अधूरी रह गई.डॉ वूफ ने कहा, " डॉक्टरेट होना मेरे जीवन का सबसे सम्मानजनक अनुभव है. स्कूल के दिनों में मैं विश्वविद्यालय के बारे में नहीं सोचता था."
मेरे पिता का मानना था कि "मुझे काम करके घर के बजट में योगदान देना चाहिए. आक्रमण शुरू होने से पहले मैं वापस लंदन आ गया और शहर के पश्चिमी भाग के एक ऑफिस में नौकरी करने लगा. घर ध्वस्त होने से पहले हमें घर छोड़ के जाना था."

युद्ध में सेना को अपनी सेवा देने के बाद जब वो नौकरी पर लौटे तो उनके पास 39 साल की अवस्था में एक अच्छी खासी नौकरी के साथ बीवी और चार बच्चे थे."
वे कहते हैं, "मैंने अपने आप से पूछा क्या मैं ऐसी ही जिंदगी जीना चाहता था शायद नहीं. मेरी बीवी का रवैया काफी सहयोगपूर्ण था."
इसलिए उन्होंने कॉलेज़ में प्रशिक्षिण लेने के बाद क्यूमबरिया के एप्पलबाई स्कूल में गणित शिक्षक के रूप में नौकरी शुरू कर दी. वे पढ़ाने के काम से 20 साल तक जुड़े रहे.
उनका कहना है, "पढ़ाने में मुझे बहुत मजा आता है और इसमें मुझे आत्मसंतुष्टि मिलती है."
डॉ वूफ ने वर्ष 2003 में ईस्ट एंजेलिया विश्वविद्यालय से एमए की डिग्री हासिल की.
जब उन्होंने साल 2008 में क्यूमबरिया विश्वविद्यालय में फिर से अपनी पढ़ाई शुरू की तो वहां के काम करने वालों ने लैंसेस्टर विश्वविद्यालय से पीएचडी करने के लिए प्रोत्साहित किया.
बूफ बताते हैं, " विश्वविद्यालय का महौल बहुत उत्साहवर्द्धक और प्रेरणादायी था. दूसरे छात्र और कर्माचारी काफी मददगार थे. उनसे मिलना-जुलना मुझे बहुत अच्छा लगता था."
उनकी बीवी की मौत हो चुकी है. उनका कहना है " मैं बहुत भाग्यशाली हूं कि इस उम्र में भी स्वस्थ हूं और इतने सारे लोग मुझे प्यार करते हैं . sabhar :
http://www.bbc.co.uk

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खजुराहो जैसी अद्भुत कला की दुनिया अकेले 23 साल के कठिन परिश्रम से तैयार कर दी

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एक इंसान ने 23 साल में तैयार कर दी खजुराहो जैसी अद्भुत कला की दुनिया
नार्वे के महान मूर्तिकार गुस्ताव विगेलैंड (11 अप्रैल 1869-12 मार्च 1943) ने कला की एक अद्भुत की दुनिया को अकेले 23 साल के कठिन परिश्रम से तैयार कर दी। इस समय इसे दर्शकों के लिए खोल दिया गया है। गुस्ताव विगेलैंड वह ऑर्टिस्ट हैं, जिन्होंने दुनिया के सबसे श्रेष्ठ नोबल शांति पुरस्कार के पदक को भी डिजाइन किया था।
इस कला के विशाल संग्रह के शिल्प के नमूनों में मानवीय मनोवीय भावों की कुछ उसी तरह की अभिव्यक्ति दिखाई देती है जैसी खजुराहों की प्रतिमाओं में। इन आर्ट वर्क में पुरुष और महिला के बीच के रिश्ते को चित्रित किया गया। मनुष्य की विभिन्न अवस्थाओं जैसे, वयस्क अवस्था और बचपन को दिखाया है।
यहां मानवीय व्यवहार जैसे शौक, पेशा, तलाश, दौड़, पहलवानी, नृत्य, आलिंगन आदि को कला के माध्यम से चित्रित किया गया  है। हालांकि, गुस्ताव विगेलैंड के कुछ आर्ट बेहद अब्सट्रैक्ट (अबूझ) हैं।

एक इंसान ने 23 साल में तैयार कर दी खजुराहो जैसी अद्भुत कला की दुनिया
ओस्लो सिटी प्रशासन ने 1921 में एक लंबे विवाद के बाद इस महान कलाकार का मकान गिराना तय किया था। गुस्ताव विगेलैंड के मकान मेंं उनका आर्ट स्टूडियो और लाइब्रेरी थी। उन्होंने शहर से दूर नई बिल्डिंग में रहना स्वीकार कर लिया था। आर्टिस्ट गुस्ताव विगेलैंड ने यह भी वादा किया था कि वह इसके बदले सिटी को अपने सभी आर्ट वर्क जैसे शिल्प के नमूने, ड्राइंग, रेखाचित्र, नक्काशी आदि दान में वापस कर देंगे

एक इंसान ने 23 साल में तैयार कर दी खजुराहो जैसी अद्भुत कला की दुनिया

गुस्ताव विगेलैंड 1924 में नए स्टूडियो में पहुंचे। यह फ्रोगनर पार्क के पास स्थित था। उन्होंने अकेले ही यहां 23 साल तक काम करके अदभुत कलाकृतियां तैयार कर दी। उनकी इन कलाकृतियों को 320,000 वर्ग मीटर (80 एकड़) क्षेत्र में फैले पार्क में रखा गया है। इसमें 212 ब्रॉन्ज और ग्रेनाइट के शिल्प हैं।
एक इंसान ने 23 साल में तैयार कर दी खजुराहो जैसी अद्भुत कला की दुनिया
गुस्ताव विगेलैंड के शिल्प में सैकड़ों पुरुष, महिला और बच्चों के जीवन की विभिन्न अवस्थाओं (नवजात, बचपन, वयस्क, किशोर, यौवन और प्रौढ़ावस्था आदि)में दिखाया गया है। इस पार्क का मुख्य आकर्षण द मोनोलिथ है। यह 14 मीटर लंबा ग्रेनाइट का स्ट्रक्चर है, जो आकाश की ओर रुख किए नजर आता है। इसमें 121 फिगर टॉप पर चढऩे के लिए संघर्ष करते हुए नजर आते हैं।

एक इंसान ने 23 साल में तैयार कर दी खजुराहो जैसी अद्भुत कला की दुनिया

इस पार्क का मुख्य आकर्षण द मोनोलिथ है। यह 14 मीटर लंबा ग्रेनाइट का स्ट्रक्चर है, जो आकाश की ओर रुख किए नजर आता है। इसमें 121 फिगर टॉप पर चढऩे के लिए संघर्ष करते हुए नजर आते हैं।


गुस्ताव विगेलैंड की कला का यह विशाल संग्रह विश्व की एक धरोहर है। दुनिया के इस सबसे विशाल स्कल्चर पार्क में मूर्ति, रेखाचित्र, नक्शी के नमूने और मॉडल उपलब्ध हैं, जिनमें 212 कांस्य और ग्रेनाइट की कलाकृतियां हैं। 80 एकड़ के विशाल क्षेत्र में फैला यह कला पार्क ओस्लो के फ्रोगनर गेट के पास स्थित है। इसे विगीलैंड स्कल्पचर अरेंजमेंट इन फ्रोगनर पार्क कहा जाता है।

गुस्ताव विगेलैंड की मूर्तिकला का मुख्य उद्देश्य पुरुष और महिला के बीच के रिश्ते को चित्रित करना है। इसमें वयस्क अवस्था और बचपन की अवस्थाओं में मनुष्य की स्थितियों को दिखाना है। इसमें मनुष्य के व्यवहार को दर्शाने वाली बातें शौक, पेशा, तलाश, दौड़, पहलवानी, नृत्य, आलिंगन आदि को दिखाया है। इतना सबके बावजूद भी गुस्ताव विगेलैंड के कुछ आर्ट अब्सट्रैक्ट हैं।
एक इंसान ने 23 साल में तैयार कर दी खजुराहो जैसी अद्भुत कला की दुनिया

गुस्ताव विगेलैंड ने अपने सभी शिल्पों का आकार बिना किसी व्यक्ति या कलाकार की सहायता के किया है। गुस्ताव अपनी कला के नमूनों को संग्रहित रूप में देखने के लिए जिंदा नहीं रहे। 1950 तक उनके अधिकांश शिल्प और ऑर्किटेक्चर डिजाइन बिखरे ही पड़े रहे। इसके बाद इन्हें इकट्ठा करने की कोशिश की गई और बाद में यह कला पार्क का रूप ले पाया। sabhar : bhaskar.com


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शनिवार, 28 दिसंबर 2013

त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक सरकार सबसे गरीब मुख्यमंत्री

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देश के सबसे गरीब मुख्यमंत्री से 100 गुना अमीर हैं केजरीवाल, जानें पूरा सच

त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक सरकार (फोटो ऊपर देखें) भारत के सबसे गरीब मुख्यमंत्री हैं। उनके पास करीब 2.5 लाख रुपए की चल-अचल संपत्ति है। इनमें 9720 रुपए का बैंक जमा और 1080 रुपए की नकद राशि शामिल है। माणिक के मुताबिक, उन्होंने ज्वैलरी, शेयर, बांड और अन्य निवेश के साधनों में कोई पैसा नहीं लगाया है। उनका कहना है कि जब उन्हें देश का सबसे गरीब मुख्यमंत्री कहा जाता है, तो उन्हें शर्म महसूस होने की बजाय अच्छा लगता है।आम आदमी के हक की लड़ाई लड़ने की बात कर रहे अरविंद देश के सबसे गरीब मुख्यमंत्री नहीं हैंकेजरीवाल दपंत्ति देश के करोड़पति मुख्यमंत्री दंपत्तियों की लिस्ट में शामिल हो जाएंगे। दिलचस्प है कि उनके और उनकी पत्नी सुनीता के पास कुल मिलाकर 2.10 करोड़ रुपए की संपत्ति है।
केजरीवाल द्वारा चुनाव आयोग को दी गई जानकारी के मुताबिक, अरविंद के नाम 93.62 लाख रुपए की दौलत है। इनमें गाजियाबाद (यूपी) के इंद्रापुरम में 55 लाख रुपए का फ्लैट और हरियाणा में करनाल जिले के शिवानी में 37 लाख रुपए का एक फ्लैट शामिल है। इसके अलावा दिल्ली के नवनियुक्त मुख्यमंत्री के पास 1.62 लाख रुपए का बैंक डिपॉजिट और 5000 रुपए की नकदी भी है।

देनदारियों की बात करें तो केजरीवाल के नाम कुल 23 हजार रुपए की देनदारी है, जो कि उनके द्वारा बिजली का बिल न जमा करने के चलते आई है।

उधर, अरविंद की पत्नी सुनीता के पास पति से ज्यादा दौलत है। चुनाव आयोग को दी गई जानकारी के मुताबिक सुनीता के नाम गुड़गांव में 1 करोड़ रुपए का घर, 9 लाख रुपए की ज्वैलरी सहित 16.85 लाख रुपए का बैंक डिपॉजिट और 10 हजार रुपए की नकदी है। sabhar : bhaskar.com

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गुरुवार, 26 दिसंबर 2013

दस नयी तकनीकें, जो बदलेंगी दुनिया

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आज के नॉलेज में चर्चा 2013 में सामने आयी उम्मीद जगानेवाली दस ऐसी तकनीकों की, जो आनेवाले वर्षो में हमारे जीने का अंदाज बदल सकती है.
नया सोलर पैनल
मौजूदा समय में बाजार में उपलब्ध सोलर पैनल में सिंगल सेमीकंडक्टिंग सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है, जिसे आम तौर पर सिलिकॉन के रूप में जाना जाता है. चूंकि सोलर स्पेक्ट्रम के संकरे बैंड महज कुछ ही सामग्री को अवशोषित कर पाते हैं, इसलिए सूर्य से हासिल होनेवाली अधिकांश गरमी ऊर्जा के तौर पर परिवर्तित नहीं हो पाती है और वह विनष्ट हो जाती है. इस तरह ये पैनल 20 फीसदी से भी कम ऊर्जा को इलेक्ट्रिसिटी में तब्दील कर पाते हैं. हाल ही में ईजाद की गयी नयी तकनीक के माध्यम से अब इसकी क्षमता को कम से कम 50 फीसदी तक बढ़ाया जा सकेगा. इसे कुछ इस तरह से डिजाइन किया गया है कि इसमें छह से आठ कम्पोनेंट वेवलेंथ लगाये गये हैं. इसके माध्यम से प्रत्येक अलग तरह प्रकाश का रंग बिखेरेगा और प्रिज्म की भांति यह कार्य करेगा. इसके बाद प्रत्येक रंग को सेमीकंडक्टर निर्मित सेल को भेजेगा, जो इसे अवशोषित करेगा. जैसे ही प्रकाश इस सामग्री में दाखिल होगा, तो पतले ऑप्टिकल फिल्टरों की श्रृंखला से यह टकरायेगा.
हालांकि, इस दिशा में कार्यरत टीम ने कई अलग प्रकार के डिजाइनों का विकास किया है. अब तक पूरी तरह से यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि किस डिजाइन का प्रदर्शन बेहतर हो सकता है. यह टीम सोलर पैनल की लागत कम करने की दिशा में काम कर रही है. उम्मीद है कि इसकी कीमत कम करने में भी कामयाबी मिलेगी. इसके ज्यादा सक्षम मॉड्यूल का निर्माण करते हुए पहले के मुकाबले कम पैनलों के माध्यम से ही समान मात्र में ऊर्जा उत्पन्न की जायेगी. ऐसा होने से हार्डवेयर और इसे स्थापित करने की लागत में कमी आ सकती है. माना जा रहा है कि सोलर उपकरण की क्षमता दोगुनी होने से नवीकरणी ऊर्जा के अर्थशास्त्र में व्यापक बदलाव आ सकता है.
 टेम्पररी सोशल मीडिया
निजता का एक आवश्यक तत्व यह है कि दूसरों को जिन तथ्यों की हम जानकारी दे रहे हैं, उन पर हमारा कितना नियंत्रण है. आजकल सोशल मीडिया का जमाना है. दुर्भाग्य से हम अपने जिस फोटो को सोशल मीडिया साइट पर पोस्ट करते हैं या अपने स्टेटस को अपडेट करते हैं; वह सभी चीजें आपके नियंत्रण से बाहर हो जाती हैं. इतना ही नहीं, वह इंटरनेट के संजाल में स्टोर भी हो सकता है. पिछले वर्षो के दौरान स्नेपचैट मोबाइल फोन एप की लोकप्रियता में बेहद नाटकीय तरीके से बढ़ोतरी देखी गयी है. बताया गया है कि स्नेपचैट के माध्यम से रोजाना दस करोड़ से ज्यादा फोटो और वीडियो भेजे जा रहे हैं. मार्क जुकरबर्ग ने   इसे लेकर फेसबुक की निजता पर चिंता जतायी है.
सवाल है कि आखिर टेम्पररी सोशल मीडिया लोगों को अपनी ओर इतना क्यों खींचती है? स्नेपचैट के संस्थापकों का मानना है कि वे लोगों को उनकी सोच के मुताबिक कुछ भी अभिव्यक्त करने की आजादी प्रदान करते हैं. अन्य सोशल मीडिया पोस्ट्स की तुलना में भेजने और प्राप्त करने के दृष्टिकोण से यह ज्यादा रोचक है, क्योंकि यह अल्पकालिक होते हैं. लेकिन इसे वाकई में आजकल संवाद करने का एक स्वाभाविक तरीका माना जाने लगा है. जहां एक ओर फेसबुक और ट्विटर आपके प्रत्येक ऑब्जर्वेशन और गतिविधियों को स्टोर करते हैं, वहीं टेम्पररी सोशल मीडिया में ऐसा नहीं होता. स्नेपचैट की तकनीक कुछ मायनों में बेहद उल्लेखनीय है. इस तकनीक के माध्यम से प्रदर्शित होनेवाली चीजें कुछ ही समय के लिए स्टोर करके रखी जा सकती हैं. इसमें कुछ खास कमांड का बारीकी से ख्याल रखने पर भेजनेवाले को यह पता चल जाता है कि जिसे भेजा गया है, उसने तस्वीर को सुरक्षित रखा है या फिर किसी दूसरे को भेजा है. हालांकि, कंपनी की प्राइवेसी पॉलिसी में स्पष्ट तौर पर लिखा गया है कि इस बात की गारंटी नहीं दी जा सकती कि सभी मैसेज डाटा को अनिवार्य रूप से नष्ट कर दिया गया होगा.
 चिप फोन्स
सामान्य मोबाइल फोन्स से एकत्र की गयी सूचना के विश्लेषण से लोगों में व्यापक जागरूकता कायम की जा सकती है और यह हमें बीमारियों के फैलने की जानकारी मुहैया कराता है. दुनियाभर में तकरीबन छह अरब मोबाइल फोन्स से भारी तादाद में आंकड़ों का सृजन होता है. इसमें कॉमर्शियल गतिविधियों की सूचना और स्थान को ट्रैक करने समेत सोशल नेटवर्क के लिंक मौजूद रहते हैं. ज्यादातर इस्तेमाल होनेवाले मोबाइल फोन चिप आधारित हैं. इनके माध्यम से किये जा रहे कॉल और टेक्स्ट मैसेज के अलावा अन्य गतिविधियों में भी ये व्यापक बदलाव ला सकते हैं.  पर ऐसी गतिविधियों को सेल-फ ोन टावर ट्रैक कर सकता है और किसी व्यक्ति की सामान्य गतिविधियों को आसानी से समझ सकता है. मोबाइल भुगतान तकनीक के विस्तार से सामान्य कारोबार का स्वरूप बदल रहा है और इससे रोजगार की नयी प्रवृत्तियां सामने आ रही हैं. हाल ही में केन्या में लोगों के आपसी टेक्स्ट मैसेज से यह जानने में सहायता मिली है कि किस खास इलाके में ज्यादा मच्छर पैदा हो रहे हैं. इससे वहां मलेरिया जैसी बीमारी से निबटने में जरूरी रसायनों के छिड़काव के लिए स्थानों की पहचान की जाती है. अन्य कई देशों में भी कई तरीकों से इन आंकड़ों का इस्तेमाल नागरिक सुविधा के लिए लागू की जानेवाली योजनाओं के कार्यान्वयन में किया जा रहा है.
 स्मार्ट वॉच
यदि आप सामान्य जानकारी हासिल करने, इमेल चेक करने आदि के लिए कंप्यूटर तक नहीं जाना चाहते, तो आप के लिए खास हैं ये स्मार्ट वॉच. नीदरलैंड में डेल्फ्ट यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी के एक छात्र ने पांच वर्ष पहले ही इसका डिजाइन तैयार कर लिया था. पेबल वॉच के नाम से मशहूर ये घड़ियां बेहद उपयोगी हैं. पेबल का इस्तेमाल आइफोन या एंड्रोयड फोन से बिना तार के ब्लूटूथ से संपर्क में लाने में मदद करता है और इस्तेमाल करनेवाले की इच्छा के मुताबिक जरूरी सूचना, संदेशों और सामान्य आंकड़ों को प्रदर्शित करता है. संगीतकारों के समूह को प्रस्तुति के दौरान यह उन्हें नियंत्रित रखने के तौर पर इस्तेमाल में लाया जा सकता है. बिना किसी बैटरी के इसकी ब्लैक एंड व्हाइट स्क्रीन को सूर्य की रोशनी में आसानी से देखा जा सकता है. बताया गया है कि ये घड़ियां कुछ ही महीनों में बाजार में लोगों के लिए मुहैया करायी जानेवाली हैं. इसकी खासियतों को देखते हुए ऐसा माना जा रहा है कि यह लोगों के बीच लोकप्रिय होगी.
 मेमोरी इंप्लांट्स
अब वह दिन दूर नहीं जब किसी कारणवश किसी व्यक्ति की याददाश्त खोने पर इलेक्ट्रॉनिक इंप्लांट्स की मदद से उसे मदद हासिल हो सकती है. यूनिवर्सिटी ऑफ साउदर्न कैलिफोर्निया, लॉस एंजिल्स के एक बायोमेडिकल इंजीनियर और न्यूरोसाइंटिस्ट ने इस तकनीक का इजाद किया है. अलजाइमर, स्ट्रोक या किसी दुर्घटना से न्यूरोनल नेटवर्क के बाधित होने की दशा में यह फायदेमेंद साबित होगा. आरंभिक शोध के दौरान चूहे और बंदर के मस्तिष्क को इलेक्ट्रॉड्स के द्वारा कनेक्ट करते हुए यह दर्शाया गया कि यह तकनीक किस प्रकार काम करती है. बताया गया है कि इससे इससे याददाश्त की क्षमता को फिर से दिमाग में सृजित किया जाता है. एक शोधकर्ता का दावा है कि यह दो लाख से ज्यादा सुनने में अक्षम लोगों के लिए मददगार साबित हो रहा है. ध्वनि को इलेक्ट्रिकल सिग्नल में तब्दील करते हुए इनके ऑडियोटोरी नर्व तक इसे भेजा जाता है, जो इन्हें सुनने में मदद करता है. हालांकि, पूर्व के प्रयोगों में इसका इस्तेमाल केवल लकवाग्रस्त लोगों तक ही सीमित था, जिनमें इलेक्ट्रॉड्स प्रत्यारोपित करते हुए इधर-उधर घूमने में सहायता करता था. बताया गया है कि एक न्यूरोसाइंटिस्ट ने दिमाग में लंबी अवधि तक याददाश्त को कायम रखनेवाली चीज को समझने में सफलता पायी है. इसी चीज को इंप्लांट करते हुए यह कारनामा करने में कामयाबी हासिल हुई है.
 बाक्टर रोबोट
बाक्टर के नाम से जाना जानेवाला यह रोबोट अधिकतर औद्योगिक रोबोट के मुकाबले ज्यादा सस्ता है. इसके सॉफ्टवेयर सामान्य कंप्यूटर से संचालित किये जाते हैं, जो इसके बीच में लगा होता है. इसे सेंट्रल कमांड के नाम से जाना जाता है. इसका फेस ही इसके स्टेटस को सूचित करता है. यह अपने आसपास मौजूद लोगों को भांप लेता है. यह कामगारों को अपना कार्य पूरा करना भी सिखाता है. निर्माणकार्यो में मददगार मौजूदा रोबोट में से ज्यादातर साथ-साथ काम करने में खतरनाक होते हैं, लेकिन बाक्टर बेहद सजहता से गतिविधियों को अंजाम देता है और गड़बड़ियों को आसानी से समझ लेता है. इसमें दोनों तरफ से कैमरे लगे होते हैं, जिससे इसकी देखरेख भी ज्यादा आसान है.
 भाषाओं की समझ
गणना करने की क्षमता में बढ़ोतरी होने के बीच मशीन अब चीजों को पहचान सकता है और उसे निर्धारित समयसीमा में बोलते हुए बता भी सकता है. कृत्रिम प्रतिभा आखिरकार बेहद स्मार्ट हो चुकी है. दुनिया में इंटरनेट खोज से जुड़ी बड़ी सेवा प्रदाता कंपनी गूगल इस दिशा में कार्य कर रहा है. यह कंपनी एक खास तरह का सॉफ्टवेयर इजाद कर रही है, जिससे इनसान को कंप्यूटर माध्यम से काम करने में बेहद आसानी होगी. सही मायने में यह सॉफ्टवेयर ध्वनि, तसवीर और अन्य आंकड़ों के डिजीटल प्रस्तुतिकरण में तरीकों की पहचान करने में सक्षम है. माना जा रहा है कि ऐसा होने से किसी एक भाषा से दूसरी भाषा में चीजों को रूपांतरित करने में यह मददगार साबित होगा. गूगल ने कम-से-कम गलतियों के साथ शब्दों की पहचान के लिए इस तकनीक का इस्तेमाल हालिया लॉन्च की गयी एंड्रॉयड मोबाइल सॉफ्टवेयर में किया है. इतना ही नहीं, माइक्रोसॉफ्ट ने इसे एक व्याख्यान को अंगरेजी भाषा से चीनी भाषा में रूपांतरित किया है.
 3-डी प्रिंटिंग
जनरल इलेक्ट्रिक ने इस क्षेत्र में एक नयी क्रांति का सूत्रपात करते हुए पारंपरिक तौर पर निर्मित की जा रही चीजों को बिल्कुल बदल दिया है. दुनिया में सबसे ज्यादा जेट इंजनों की आपूर्ति करनेवाली इस कंपनी की एविएशन डिवीजन ने नये एयरक्राफ्ट इंजन की मरम्मत के लिए फ्यूज नोजल का पिंट्र तैयार करते हुए इसे ठीक किया. पहले इसके लिए धातु की वेल्डिंग की जाती थी. इस तकनीक को ‘एडीटिव मैन्यूफैक्चरिंग’ कहा जाता है, क्योंकि इसमें किसी मेटेरियल को बेहद पतले लेयर में विभाजित करते हुए उस खास वस्तु को बनाया जाता है. 3-डी पिंट्रिंग का औद्योगिक वजर्न, जिसे एडीटिव मैन्यूफैक्चरिंग के नाम से जाना जाता है, मेडिकल इंप्लांट्स के कार्यो में भी मददगार साबित हो रहा है. साथ ही, यह इंजीनियरों और डिजाइनरों के लिए प्लास्टिक प्रोटोटाइप का भी उत्पादन कर रहा है. किसी मशीन या उपकरण के पार्ट्स को शीघ्रता से कहीं भी बनाने में इसकी अहम भूमिका देखी जा रही है. पारंपरिक तकनीक से होनेवाली निर्माण प्रक्रिया के मुकाबले इस तकनीक से की जानेवाली निर्माण प्रक्रिया में कम सामग्री का इस्तेमाल किया जा रहा है. बताया गया है कि इससे जीइ कंपनी की वस्तुओं के निर्माण की लागत कम हुई है. आम लोगों के लिए भी यह तकनीक बहुत ही उपयोगी साबित हो रही है. कंप्यूटर नियंत्रित इस तकनीक के माध्यम से किसी भी चीज का नमूना बना कर उसका निर्माण करना बेहद आसान हो गया है.
 प्रसवपूर्व डीएनए अनुक्रमण
भ्रूण का डीएनए पढ़ना जीनोम क्रांति की अगली सीमा है. क्या आप वास्तविक में अपने अजन्मे बच्चे के आनुवंशिक भाग्य के बारे में जानना चाहते हैं? दुनियाभर में इस्तेमाल हो रही डीएनए सिक्वेंसिंग मशीन का निर्माण करनेवाली कंपनी इल्यूमिना ने इस वर्ष एक अन्य कंपनी वेरीनाटा को तकरीबन 50 करोड़ डॉलर का भुगतान किया है. दरअसल, वेरीनाटा के पास ऐसी तकनीक है, जिससे जन्म से पहले ही मानवीय भ्रूण के डीएनए को समग्रता से समझा जा सकता है. अमेरिका की इस कंपनी का दावा है कि गर्भवती माताओं का परीक्षण करते हुए यह घातक डीएनए के बारे में पता लगाने में सीरींज से ही सक्षम है. इससे इन माताओं में डाउन सिंड्रोम के बारे में भी आसानी से पता लगाया जा सकता है. अब तक, डाउन सिंड्रोम का पता लगाने के लिए गर्भनाल से घातक कोशिकाओं या तरल पदार्थो को निकाला जाता था. इस प्रक्रिया में बहुत जोखिम हुआ करता था. शरीर विज्ञान में क्रोमोसोम 21 एक ऐसी परिघटना में, जिसमें भ्रूण पर इसका घातक प्रभाव पड़ने की आशंका रहती है. देखा गया है कि अमेरिका में ही इस तरह के मामलों में तकरीबन 65 फीसदी महिलाएं इसका इलाज कराने की बजाय गर्भपात कराने को तवज्जो देती हैं. इस समस्या के निदान के तौर पर भी इस तकनीक को बेहद कारगर माना जा रहा है.
 सुपर ग्रिड्स
उच्च-वोल्टेज डीसी पावर लाइन्स से हजारों किलोमीटर की दूरी तक काफी सक्षम तरीके से बिजली का संचरण किया जा सकता है. नये ट्रांसमिशन ग्रिड से लंबी दूरी तक पानी की सतह से नीचे से होकर भी एसी पावर लाइन्स को गुजारा जा सकता है. लेकिन अब तक बिंदु से बिंदु तक विद्युत संचरण के लिए उच्च-वोल्टेज डीसी का इस्तेमाल किया जाता रहा है. इसलिए इसका ग्रिड बनाने में दिक्कत होती है.

एक स्विस कंपनी ने इसका समाधान किया है और इस तरह के ग्रिड के निर्माण में आनेवाली बाधाओं को दूर किया है. इसने एक व्यवहारिक उच्च-वोल्टेज डीसी सर्किट ब्रेकर का विकास किया है, जो ग्रिड में बाधा उत्पन्न करने वाले पार्ट्स को डिसकनेक्ट कर देता है. माना जा रहा है कि यह नवीकरणीय ऊर्जा को ज्यादा सक्षमता से सुदूर इलाकों तक संचरण में सहायक होगा. इससे सौर ऊर्जा का संग्रहण करते हुए हजारों किमी दूर देश तक पहुंचाया जा सकेगा. इतना ही नहीं, ‘विंड पावर’ से पैदा हुई बिजली से समूचे यूरोप की सड़कों पर प्रकाश की व्यवस्था की जा सकती है. sabhar : http://www.prabhatkhabar.com

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मेडिकल साइंस की दुनिया में क्या कुछ रहा खास 2013

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वर्तमान समय में जिस तरह तकनीक जीवन का एक अहम हिस्सा बन गई है कुछ उसी तरह विज्ञान भी प्रत्येक व्यक्ति के लिए बहुत उपयोगी सिद्ध हो रहा है. नए-नए आविष्कार मानव जीवन को बहुत सहज बना देते हैं और इस साल भी विज्ञान के क्षेत्र में कुछ ऐसे आविष्कार हुए, ऐसी क्रांतियां आईं जिन्होंने विकास की राह को और आसान कर दिया. साल 2013 अपने अंतिम क्षणों में हैं तो चलिए जाते-जाते हम आपको बताते हैं कि इस साल विज्ञान के क्षेत्र में हमें क्या उपलब्धियां हासिल हुईं:
कैंसर इम्यूनोथेरेपी: इस साल विज्ञान के क्षेत्र में सबसे बड़ी उपलब्धि या कहें क्रांति साबित हुई कैंसर इम्यूनोथेरेपी. इस थेरेपी के अर्थ है मानव शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को कुछ इस हद तक बढ़ाना ताकि वह ट्यूमर से मुकाबला करने में सक्षम हो जाए. वैसे तो कई दशक पहले से ही वैज्ञानिक ऐसे तरीके की खोज में लगे थे जिससे कि कैंसर के ट्यूमर को शरीर पर हावी ना होने दिया जा सके लेकिन अभी तक ऐसा मुमकिन नहीं हो पाया था. परंतु इस साल वैज्ञानिकों को यह उपलब्धि हासिल हो गई और आखिरकार कैंसर के ट्यूमर से लड़ने के लिए वैज्ञानिकों एंटीबॉडीज का आविष्कार कर लिया जो शरीर के भीतर टी सेल्स से लड़ने में कामयाब सिद्ध होगी.
जेनेटिक माइक्रोसर्जरी: सीएएस 9 नामक प्रोटीन पर आधारित इस तकनीक में माइक्रोसर्जरी की सहायता से मानव जीन को संशोधित किया जा सकेगा. सीएएस 9 नामक प्रोटीन में मौजूद बैक्टीरिया को एक ऐसे हथियार के तौर पर प्रयोग किया जाएगा जो हिंसक वाइरस को काटने में कामयाब सिद्ध होंगे.
ह्युमैन क्लोनिंग का सफल परीक्षण: बहुप्रतीक्षित मानव क्लोनिंग जैसी रिसर्च के क्षेत्र में इस साल एक बड़ी उपलब्धि हासिल हुई जब अध्ययनकर्ताओं ने यह घोषणा कर दी है कि स्टेम सेल की सहायता से उन्होंने क्लोंड मानव भ्रूण विकसित कर लिया है. यूं तो पहले भी विभिन्न प्रजातियों के जानवरों की क्लोनिंग की गई है लेकिन मानव की क्लोनिंग एक जटिल विषय बना हुआ था जिसपर इस साल सफलता पा ली गई है.
आपके जीवाणु, आपका शरीर: वैज्ञानिकों ने यह बात प्रमाणित कर दी है कि शरीर में मौजूद लाखो-करोड़ों बैक्टीरिया यह निर्धारित करते हैं कि कुपोषण के समय या कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से चुनौती मिलने के बाद आपका शरीर किस तरह की प्रतिक्रिया देगा. इस प्रतिक्रिया के मिलने के बाद ही यह निर्धारित होगा कि आपको किस तरह के ट्रीटमेंट की जरूरत है.
लैब में किडनी और लीवर का निर्माण: प्लुरिपोटेंट स्टेम सेल्स की सहायता से वैज्ञानिकों ने मिनी किडनी, मिनी लीवर की सहायता से ऑर्गनॉइड्सविकसित करने में इस साल वैज्ञानिकों ने सफलता हासिल की. यानि कि अब लैब में ही छोटी किडनी और छोटा लीवर बना लिया जा सकेगा. sabhar : http://www.palpalindia.com

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बेटे की लाश पर सोता रहा बाप, रंगरेलियां मनाती रही बहू

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PICS: बेटे की लाश पर सोता रहा बाप, रंगरेलियां मनाती रही बहू

लखनऊ/रायबरेली. यदि आस-पास वहशी इंसान हो तो जिदंगी का कितना क्रूर रंग देखने को मिल सकता है, इसकी मिसाल पिछले दिनों रायबरेली से सामने आई। यहां एक बूढ़ा बाप 6 महीने तक अपने बेटे की लाश के ऊपर चारपाई डाले रातों को करवटें बदलता रहा।
 
इस बुजुर्ग और मजबूर इंसान को यह नहीं मालूम था कि जिस इकलौते बेटे को वह लापता मान रहा है वह उसकी तख्त के नीचे जमीन में गड़ा हुआ है। यही नहीं उस पिता की गैर मौजूदगी में उसके बेटे की हत्या करने वाले उसी तख़्त पर नाजायज संबंध बनाते रहे। जब बीती बरसात में घर में पानी भरा तो पूरा मामाल उजागर हुआ साथ ही सामने आई शर्मसार करने वाले रिश्ते और इंसानियत।
 
इस घटना की नींव पिछले साल फ़रवरी में पड़ी, जब रायबरेली के भदोखर थानाक्षेत्र के बेलहिया गांव के रहने वाले चन्द्रपाल यादव ने थाने में अपने 22 वर्षीय बेटे राम कुमार यादव की गुमशुदगी दर्ज कराई। वह 14 जनवरी 2013 से लापता है, जो काफी खोजबीन के बाद भी नहीं मिला। तत्कालीन थानाध्यक्ष ने एफआईआर नंबर-34 में गुमुशदुगी दर्ज कर राम कुमार को खोजने का प्रयास किया, लेकिन कुछ पता न चला।
 
बुजुर्ग दंपति चन्द्रपाल और उनकी पत्नी जनक दुलारी यादव अपने बुढापे के एक मात्र सहारा राम कुमार को खोजने के लिए जिले के एसपी राजेश कुमार पाण्डेय के सामने भी पेश हुए और अपनी आपबीती सुनाई। एसपी ने उनको विश्वास दिलाया कि जल्द ही उनके पुत्र को ढूंढ लिया जाएगा औए एसओ भदोखर को निर्देशित किया कि गुमशुदा राम कुमार को ढूंढने का हर सम्भव प्रयास करें। इसके साथ ही क्राइम ब्रांच की सर्विलांस सेल को भी थानाध्यक्ष भदोखर के साथ सहयोग करने के लिए कहा गया, लेकिन काफी कोशिशों के बावजूद भी उसका कुछ पता न चला।
 
अब यह मामला ब्लाइंड केस की तरह पुलिस के सामने चुनौती की तरह था, लेकिन बीती जून में जैसे भगवान ने चंद्रपाल की पुकार सुन ली। जून में बरसात होने के कारण चन्द्रपाल यादव का घर टपकने लगा और कमरे में जगह-जगह पानी भर गया। घर के अन्दर कमरे की कच्ची जमीन फूल गई, जिसे चन्द्रपाल ने फूली जमीन की गीली मिट्टी को फावड़े से साफ करना चाहा।
 
इसी दौरान उसे अपने ही कमरे में अपने एक शरीर के पांव के पंजे का कुछ हिस्सा दिखाई पड़ा थोड़ा और खोदने के बाद उसे एक शव मिला, जो लगभग कंकाल बन चुका था। चन्द्रपाल ने उस शव को पहचान लिया, वह उसके अपने लाडले राम कुमार का ही था। चंद्रपाल ने उसे अपने आस-पास के लोगों को इकठ्ठा कर पूरी बात बताई और एक एसपी रायबरेली राजेश कुमार पाण्डेय के पास पहुंचा और उन्हें इस घटना की जानकारी दी। उसने अपने जिस बेटे की गुमशुदगी दर्ज करवा उसे ढूंढने का प्रयास कर रहा था, उसकी लाश उसी कमरे में गड़ी हुई मिली है, जहां वह सोता है।
 
एसपी ने तत्काल पुलिस की एक टीम फॉरेंसिक टीम के साथ चन्द्रपाल के घर रवाना किया। जहां आगे खुदाई कर नर कंकाल को निकाला गया। वहीं उस गड्ढे में एक दुपट्टा भी मिला। नर कंकाल का पंचनामा भर कर उसे पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार रामकुमार की गला दबा कर हत्या की गई थी।
अब पुलिस को हत्या का कारण ढूंढना था, लेकिन कोई कारण नहीं मिल रहा था। बीच-बीच में पुलिस को कभी-कभी मृतक के पिता पर ही शक होता रहा कि उसने ही तो अपने बेटे की हत्या नही की, लेकिन पुलिस के सामने पिता द्वारा पुत्र की हत्या का कोई कारण नहीं था। दुश्मनी या जमीन-जायदाद का भी कोई प्रकरण सामने नहीं आया, जिससे हत्या की वजह बन सके। पुलिस की सारी तफ्तीश अब राम कुमार के शव के पास मिले दुपट्टे की तरफ मुड़ गई। पुलिस ने इसी आधार पर अपनी छानबीन प्रारम्भ की तो पता हुआ कि घटना के कुछ समय पहले एक रेखा नाम की महिला जो बिहार की रहने वाली है, मृतक के घर रह रही थी। रेखा घटना के कुछ दिन बाद अपने भाई के पास अम्बाला चली गई। पुलिस को अम्बाला में भी उसका कहीं पता-ठिकाना न चल सका। रेखा की खोज के दौरान पुलिस को जो कहानी पता चली वह काफी चौंका देने वाली थी।
पुलिस की तफ्तीश के मुताबिक चन्द्रपाल यादव के एक रिश्तेदार दिनेश कुमार जो रायबरेली के ही थाना डलमऊ के ठाकुर द्वार का रहने वाला है और अम्बाला में अपने साले सन्तोष के साथ रहता था। वहीं रेखा और उसका भाई जो बिहार के निवासी हैं, अम्बाला में ही रहकर मजदूरी करते थे। रेखा और दिनेश के परिवार की आपस में जान-पहचान हो गई। कुछ दिन बाद दिनेश ने रेखा के भाई से प्रस्ताव रखा कि उसके साले संतोष के मामा के लड़के राम कुमार से वह रेखा की शादी कराना चाहता है। रेखा का भाई इस बात पर राजी हो गया और दिनेश ने अपने साले सन्तोष के साथ रेखा और उसके भाई को अम्बाला से रायबरेली भेज दिया।रेखा और राम कुमार की शादी भी तय हो गई। रेखा का भाई उसको रायबरेली छोड़कर वापस अम्बाला चला गया। इस दौरान दिनेश के साले सन्तोष का नाजायज संबंध रेखा से हो गए थे। यही वजह थी कि संतोष की पत्नी ने रेखा को अपने घर पर रखे जाने से एतराज किया था। अब रेखा राम कुमार के घर रहने लगी और संतोष का आना-जाना राम कुमार के घर बढ़ गया, जब भी रेखा व संतोष को अवसर मिलता इन दोनों में नाजायज संबंध कायम होते रहे। एक दिन राम कुमार यादव ने अपनी होने वाली पत्नी रेखा को संतोष के साथ आपत्तिजनक अवस्था में देख लिया तो होने वाली शादी से इंकार कर दिया। संतोष पहले से शादीशुदा था, जिसकी एक बेटी भी है वह भी रेखा को अपना नहीं सकता था। रेखा के सामने अब समस्या थी कि वह किसके साथ जाए। साथ ही बदनामी का भी डर था यदि राम कुमार ने यह बात किसी को बता दी तो भविष्य में उसकी शादी कहीं भी होना मुश्किल हो जाएगी। रेखा और संतोष के साथ मिलकर राम कुमार की हत्या की योजना बना डाली।योजना के अनुसार बीती 14 जनवरी को जब चंद्रपाल खेतों पर सोने के लिए गया और रामकुमार की मां बरामदे में सो रही थी, उसी वक़्त संतोष राम कुमार के घर पहुंचा और रेखा ने दरवाजा खोलकर उसे अन्दर बुला लिया तथा दोनों ने मिलकर नीद में सो रहे राम कुमार के गले में दुपट्टा फंसाकर उसकी हत्या कर दी और लाश को उसी कमरे में तख्त हटाकर लगभग डेढ़ फीट का गढ्ढा खोदकर गाड़ दी। इसके बाद घर में रखा लगभग 3-4 किलो नमक लाश के ऊपर डाल दिया कि दुर्गन्ध ना आए और लाश जल्दी गल जाए। चंद्रपाल लौटकर उसी जगह तख्त पर पर विस्तर लगाकर सोने लगा, जिसके नीचे उसी के अपने बेटे राम कुमार की लाश दबी थी।इसके बाद जब रेखा और संतोष को यकीन हो गया कि चन्द्रपाल अपने बेटे को लापता मानकर उसकी तलाश कर रहे हैं, उसकी हत्या हो जाने की आशंका किसी को नहीं है तो रेखा भी अपने भाई के पास अम्बाला चली। उधर संतोष भी अपने बहनोई दिनेश के पास अम्बाला चला गया। इन 6-7 दिनों में संतोष राम कुमार ढूंढने के बहाने चन्दपाल के घर पर ही रहा और राम कुमार के शव के उपर लगे तख़्त पर ही दोनों का नाजायज संबंध बनता रहा। जब दोनों अम्बाला गए तो संतोष को अब यह डर लगने लगा कि जब इसका राज खुलेगा तो रेखा सारी बाते पुलिस को बता सकती है। उसने चालाकी से रेखा की शादी भोपाल में रामपाल यादव से करवा दी।
 sabhar : bhaskar.com

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मेडिकल साइंस का एक अजूबा महिला ने 10 बच्चों को जन्म दिया।

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वह महिला अगर चीन में होती तो शायद सजा की हकदार होती लेकिन वह भारत में है तो सुरक्षित है। बच्चे एक-दो नहीं बल्कि दस! आज के जमाने में छोटा परिवार सुखी परिवार माना जाता है लेकिन हर चीज आपके मन मुताबिक नहीं होती। कुछ चीजें आज भी विधाता की मर्जी से ही होती हैं। आप लाख परिवार नियोजन अपना लो कि बस एक ही बच्चा चाहिए लेकिन भगवान की मर्जी.आपको जुड़वा बच्चे हो गए तो कुछ नहीं कर सकते। लेकिन जुड़वा बच्चों में भी दो-तीन, चार भी आपने सुना होगा..
10 बच्चों के बारे शायद न सुना हो। अभी हाल ही में ऐसी ही घटना सामने आई तो सभी हैरान रह गए। अब तक के मेडिकल इतिहास में यह सबसे अधिक जुड़वा बच्चों का रिकॉर्ड है। मध्य प्रदेश का रीवा शहर उस वक्त मीडिया की सुर्खियों में आ गया जब यहां अंजू नाम की गर्भवती महिला के 10 बच्चे होने की खबर आई। रीवा के संजय गाधी मेमोरियल अस्पताल में 28 वर्षीय अंजू ने 10 बच्चों को जन्म दिया। हालांकि सभी बच्चे मृत पैदा हुए लेकिन मेडिकल साइंस के इतिहास में भी यह एक अजूबा से कम नहीं। डॉक्टर भी इसे एक अजूबा ही मान रहे हैं।
मध्य प्रदेश में सतना जिले की अंजू कुशवाहा और संतोष की शादी 10 साल पहले हुई थी। तब से उनके कोई बच्चा नहीं था। चार महीने पहले अंजू के पेट में दर्द होने के बाद जब संतोष ने स्थानीय डॉक्टरों को दिखाया तो उन्हें समझ नहीं आया। जबलपुर आकर वहां डॉक्टरों को दिखाने पर पता चला कि अंजू के पेट में एक से अधिक भ्रूण पल रहे हैं। डॉक्टरों ने इसे चिंताजनक बताते हुए तत्काल संतोष से अंजू का फीडल रिडक्शन कराने की बात कही। इस प्रक्रिया में एक भ्रूण को बचाते हुए अन्य भ्रूण को नष्ट कर दिया जाता है।
संतोष इसके लिए तत्काल तैयार नहीं था। बीते रविवार आधी रात के करीब अंजू के पेट में तेज दर्द हुआ। संतोष उसे संजय गांधी मेमोरियल अस्पताल लेकर गया लेकिन अस्पताल पहुंचने से पहले रास्ते में ही 9 बच्चों का जन्म हो चुका था। अस्पताल में 10वें बच्चे का जन्म हुआ लेकिन प्री-मैच्योर बारह माह के इस बच्चे को भी बचाया नहीं जा सका। डॉक्टरों की मानें तो यह घटना अजूबा है लेकिन शायद बांझपन के ईलाज में दवाइयों के ज्यादा इस्तेमाल का कुप्रभाव हो सकती है।
हालांकि अंजू और उसके परिजन सतना के स्थानीय डॉक्टरों की दवाइयों के अलावा बांझपन के लिए अन्य किसी भी प्रकार के डॉक्टरी इलाज लेने से इनकार करते हैं लेकिन डॉक्टर अंजू का मेडिकल इतिहास जानने की कोशिश कर रहे हैं कि कहीं उसने कभी आईवीएफ ट्रीटमेंट तो नहीं लिया था। बहरहाल हर किसी के लिए यह एक अजूबी खबर है लेकिन अंजू के लिए यह एक और दुख भरी खबर है। 10 साल के बाद दस बच्चों की मां बनकर भी उसके आज भी बच्चा नहीं है। sabhar ;http://www.jagran.com

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मंगलवार, 24 दिसंबर 2013

जीपीएस तकनीक से इंसान का ऑपरेशन

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बहुत जल्द सर्जन भी रास्ता बताने वाली तकनीक का ऑपरेशन में उपयोग करेंगे. थ्री डी तस्वीरों का इस्तेमाल कर ऑपरेशन सटीक और सुरक्षित बन पाएंगे. इंफ्रारेड कैमरों ने डॉक्टरों को रास्ता दिखा दिया है.


एक मिनट के लिए सोच कर देखिए आप ऑपरेशन थिएटर में हैं और सर्जन, प्रोफेसर गेरे स्ट्राउस साइनस का ऑपरेशन करने वाले हैं. पांच मॉनिटर अर्धगोलाकार स्थिति में ऑपरेशन टेबल पर रखे हुए हैं. ऊपर एक बड़ा मॉनिटर टंगा हुआ है और बीच में दो इन्फ्रारेड कैमरे लगे हैं. गेरो स्ट्राउस कहते है जिस तरह से ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम जीपीएस कारों में इस्तेमाल किए जाते हैं ठीक उसी तरह यहां भी होगा. स्ट्राउस के मुताबिक, "कार में आपके पास सेटेलाइट होता है और यह सेटेलाइट मैप के हिसाब से कार की स्थिति बताता है."
ऑपरेशन में इंफ्रारेड कैमरे यही काम करते हैं, वो लगातार ऑपरेशन की तस्वीरें भेजते रहते हैं. एक छोटा रिसीवर उस मरीज से जुड़ा होता है जिसकी तस्वीर कैमरे से उतारी जाती है. जीपीएस सिस्टम में इस्तेमाल होने वाले मैप की जगह डॉक्टरों के पास सीटी स्कैन या फिर एमआरई की तस्वीर होती है जो उन्हें बताती है कि वो ठीक जा रहे हैं.
नाड़ियों और तंत्रिकाओं की रक्षा
हाई रिजोल्यूशन वाले सिटी स्कैन और एमआरआई की तस्वीरें सर्जनों को हड्डियों, नाड़ियों और तंत्रिकाओं की अलग अलग और सूक्ष्म तस्वीरें दिखा सकती हैं. मरीज की ऑपरेशन से पहले जांच के दौरान ली गई तस्वीरों को ऑपरेशन के दौरान ही ली गई तस्वीरों से उसी वक्त तुलना की जा सकती है. इसका मतलब यह है कि सर्जन मरीज का ऑपरेशन करते वक्त ही देख समझ कर यह जान सकते हैं कि कहां क्या है और किससे बचना है. इसका असर यह होगा कि सर्जन उस हिस्से को ज्यादा बेहतर तरीके से पहचान कर निशान लगा सकेंगे. साइनस के ऑपरेशन में ऑपरेशन वाला हिस्सा चेहरे की तंत्रिकाओं के आस पास होगा. इस हिस्से पर निशान लगाने के लिए प्रोफेसर स्ट्राउस कंप्यूटर माउस का इस्तेमाल कर तस्वीर पर छोटे छोटे बिंदु से निशान लगा देते हैं और फिर सारे आंकड़े सॉफ्टवेयर की मदद से जुटा लिए जाते हैं.
दूरी नियंत्रक से चेतावनी
स्ट्राउस बताते हैं, "कैमरा मरीज और उपरकण की स्थिति पहचान लेता है और एक दूसरे के अनुसार उनकी जानकारी दे देता है." दूरी नियंत्रक बहुत कुछ कार में लगे पार्किंग सेंसर की तरह काम करता है, लेकिन यह उसकी तुलना में बहुत ज्यादा सटीक और बारीक है. इंफ्रारेड कैमरे मरीज की स्थिति चौथाई मिलीमीटर तक बता देते हैं. यह करीब दो तीन बालों की मोटाई के बराबर होती है. अगर सर्जन किसी बेहद संवेदनशील हिस्से के जरूरत से ज्यादा करीब पहुंच जाता है तो फिर अलार्म बज जाता है और उपकरण
अपने आप ही बंद हो जाता है. रास्ता बताने वाली सारी जानकारियां एक मॉनीटर में होती हैं जबकि दूसरा मॉनीटर मरीज के शरीर के भीतरी अंगों की तस्वीर दिखाता रहता है जो इंडोस्कोप की मदद से ली जाती हैं.
थ्रीडी में सुरक्षा
ऐसी उम्मीद की जा रही है कि रास्ता बताने वाली तकनीक ऑपरेशन को सुरक्षित बना देगी. जर्मन शहर लाइपजिग के इंटरनेशनल रेफरेंस एंड डेवलपमेंट सेंटर फॉर सर्जिकल टेक्नोलॉजी(आईआरडीसी) में भविष्य के ऑपरेशन थिएटर बन रहे हैं. यहां तक कि थ्रीडी तस्वीरों के साथ काम करना भी बहुत जल्द ही मुमकिन हो जाएगा.
रिपोर्टः डॉरमान, एन्ना लेना/एन रंजन
संपादनः आभा मोंढे sabhar :http://www.dw.de

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चेतना और नई भौतिकी

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चेतना और भौतकी को समझने के लिये  क़ुछ वैज्ञानिको ने  किताबे लिखी है जिसमे चेतना और भौतकी को समझा जा सकता है 
  • धारणा का विकास " क्रिस ऑट द्वारा. उन्होंने कहा कि वह आज है कि जटिल आध्यात्मिक सिद्धांतों था पहले बहुत पहले, आदमी को समझाने के लिए अपने अनुभव था. समय के साथ, वह अपने अनुभव को समझाने के लिए सैद्धांतिक संस्थाओं का आविष्कार किया. वह धीरे धीरे इन आविष्कार बातें समझा आवश्यक बातें जो बन आदि देवताओं, लोगो, रूपों, क्या बात है, मोनाड्स, बुद्धि तत्व, मन, आत्मा, आकाश, अन्तरिक्ष, सूपेर्स्त्रिंग्स, आयाम, आविष्कार किया. ग्रेट तर्क वह अनुभव की व्याख्या करने का आविष्कार किया था संस्थाओं के अस्तित्व को साबित करने के लिए, उन्हें समझाने के लिए उत्पन्न किया गया. धीरे - धीरे आदमी यह अब अपने सिद्धांतों के साथ संगत लग रहा था के बाद से, अनुभव ही सवाल करने लगे. अनुभव, एक बार विवाद और आदमी की जांच की शुरुआती बिंदु से परे हो गया था जो कि घटना, अब सैद्धांतिक इकाई था, और वह कोई सीधा सबूत नहीं था जिसके लिए इस तरह के पदार्थ और ऊर्जा के रूप में अपने आविष्कार संस्थाओं,,, वास्तविकता थे. दुनिया पूरी तरह से उल्टा अंत था.
  • "विज्ञान से भगवान को" पीटर रसेल द्वारा. परंपरागत वैज्ञानिक प्रतिमान भौतिक दुनिया असली दुनिया है, और हम वास्तव में, पूरी तरह से इस वास्तविकता को समझते हैं, जब हम स्वयं जागरूक चेतना सहित, ब्रह्मांड में सब कुछ समझा जा सकता है. मौलिक चेतना के साथ, बाहर के अंदर इस प्रतिमान बदल गया बीत रहा है, रसेल हमें कई खजाने प्रदान करता है. प्रकाश सारहीन है, अंत में एक वैज्ञानिक भावना में और दुनिया के आध्यात्मिक साहित्य में एक आवर्ती विषय के रूप में दोनों एक रूपक, चेतना और भौतिक दुनिया के बीच एक पुल, अज्ञेय, हो जाता है. आवश्यक आत्म अंतरिक्ष और समय से परे, अनन्त हो जाता है. विज्ञान एक मौलिक वास्तविकता की गुणवत्ता, और धर्म होने की चेतना को देखता है जब हमारी प्रजाति के आगे विकास "अंतरिक्ष में बाहर आगे है, लेकिन आवक चेतना और अंततः परमात्मा को की छिपी गहराई में नहीं चलता है. का प्रकाश होने के लिए भगवान लेता है चेतना हम सब के भीतर चमक रहा है, दो दुनियाओं एकाग्र करने लगते हैं. "
  • "फील्ड" लीनी मक्टॅगर्ट द्वारा. अग्रणी धार वैज्ञानिकों और चिकित्सकों फील्ड के उदाहरण से इस जमीन को तोड़ने संग्रह में एक साथ लाया जाता है. यह मौलिक क्षेत्र, ब्रह्मांड के कपड़े, एक दूसरे के लिए और सभी के जीवन के लिए हर किसी को जोड़ता है. लीनी भी जीवन ऊर्जा आध्यात्मिक चिकित्सा, एक्यूपंक्चर और ऊर्जा चिकित्सा में क्षेत्र के माध्यम से यात्रा कैसे की कई चित्र से पता चलता है.
  • "आत्म जागरूक यूनिवर्स: चेतना सामग्री दुनिया बनाता है कैसे" अमित गोस्वामी और दूसरों के द्वारा. सब कुछ परमाणुओं के शामिल है कि शिक्षण - - यहाँ खलनायक भौतिकवाद है और अपने इलाके के सिद्धांतों के साथ टैग (वस्तुओं के बीच बातचीत स्थानीय समय अंतरिक्ष में होते हैं), मजबूत निष्पक्षता (वस्तुओं चेतना का स्वतंत्र रूप से मौजूद है), और एपीफेनॉमेनलिस्म (कि मन द्वारा उत्पाद मस्तिष्क समारोह की एक आकस्मिक है). गोस्वामी के मुताबिक, क्वांटम भौतिकी वास्तविकता के इस दृश्य आराम दिया गया है.
  • "रेफ्लेक्सिव यूनिवर्स: चेतना का विकास" आर्थर एम. यंग द्वारा. शारीरिक ऊर्जा ब्रह्मांड के बुनियादी चीजें है कि इस धारणा पर आधारित है, आधुनिक विज्ञान एन्ट्रापी, ऊष्मप्रवैगिकी के दूसरे कानून द्वारा शासित एक ब्रह्मांड में जीवन या चेतना की उपस्थिति को समझाने के लिए एक नुकसान में है. गहरे स्तर पर, इसलिए, आधुनिक विज्ञान एक बुनियादी सवाल से स्टम्प्ड है: "चेतना कारण हो सकता है?" कैसे, दूसरे शब्दों में, इस मामले पर अधिनियम आपत्ति कर सकते हैं? किसी भी तरह, यह चेतना क्वांटम लहर समारोह गिर, लगता है, और अस्तित्व में वास्तविक दुनिया में लाता है. यह कैसे से निपटने के लिए विज्ञान है? कई विद्वानों के अनुसार, विज्ञान एक क्रांतिकारी परिवर्तन, पहले से आ गई है कि किसी भी प्रतिद्वंद्वी को एक क्रांति से गुजरना करने के बारे में है.
  • "आत्मा उबर: एक वैज्ञानिक और आध्यात्मिक दृष्टिकोण" लैरी दॉस्सेय द्वारा. दवा के एक चिकित्सक और प्रमुख सुधारक एक सार्वभौमिक चेतना के लिए मजबूर, चिकित्सा वैज्ञानिक और आध्यात्मिक सबूत में विशद जानकारी देता है और यहां तक ​​कि ट्रान्सेंडैंटल अनुभव के लिए खातों कि मन और वास्तविकता का एक नॉन्लोकलिज़ेड, समग्र दृष्टिकोण के लिए ठोस सबूत प्रस्तुत करता है.
  • "होलोग्राफिक यूनिवर्स" माइकल टैलबोट द्वारा. मन, भौतिक विज्ञान की नवीनतम सीमाओं, और मस्तिष्क और शरीर की अनसुलझी पहेलियों की असाधारण क्षमता में रुचि किसी के लिए एक खुशी, होलोग्राफिक यूनिवर्स समय के बारे में हमारी अवधारणाओं, व्यक्तित्व, यहां तक ​​कि चेतना, परिभाषित करने से बदल रहे हैं जिसमें तरीकों की पड़ताल उन्हें ही स्वलिखित. इस पढ़ना, आप फिर से काफी उसी तरह से दुनिया में नहीं लगेगा.
  • "कोड नाम: भगवान" मणि भौमिक द्वारा. इस आध्यात्मिक ओडिसी अपने नाटक में तीव्र है और इसकी गहराई से अंतर्दृष्टि में खुलासा. मणि किसी को भी समझ सकते हैं कि मामले में दर्शन, ब्रह्मांड विज्ञान और क्वांटम भौतिकी समझाने के लिए एक उपहार है. उन्होंने कहा कि उनकी आम धागा दिखाने के लिए एक साथ विज्ञान और आध्यात्मिकता वीव्स - चेतना का एक एकीकृत क्षेत्र सृष्टि के सभी कि अंडरलाइस.
  • "- चेतना के यांत्रिकी पर वन्य पेंडुलम पीछा" इट्ज़ाक बेंतोव द्वारा. इस पुस्तक में मानव चेतना और इसकी असीम संभावनाओं पर एक क्रांतिकारी परिप्रेक्ष्य प्रदान करता है. व्यापक रूप से जाना और उनकी स्पष्टता, हास्य, और कल्पना के लिए प्यार करता था, बेंटोव हमें एक विस्तारित, जागरूक, समग्र ब्रह्मांड में खुद की एक चौंकाने नए दृष्टिकोण दे, घटना की परिचित दुनिया पर नया प्रकाश डालती है.
  • "सेना बनाम पावर" डेविड आर हॉकिन्स ने. इस पुस्तक के लिए अपने सभी उपशीर्षक के बारे में है, "मानव व्यवहार के छुपे निर्धारकों." हॉकिन्स वे जो कर रहे हैं होने के लिए लोगों को मजबूर जो बलों के रहस्यों को जानने के लिए गहरी मानव मानस में विशद जानकारी देता है. सामूहिक बेहोश में कार्ल जंग आर्केटाइप्स की याद ताजा, 'हॉकिन्स अटरॅकटर क्षेत्रों चेतना के विभिन्न आवृत्तियों के लिए रेज़नेट. वह भी एक हजार करने के लिए एक के पैमाने पर उन आवृत्तियों जांच करने के लिए पर चला गया. इसका क्या मतलब ग्रह पृथ्वी पर मानव चेतना के स्तर के बारे में जानें और. आप अपने ग्रह के लिए और अधिक सेवा की जा सकती है कि कैसे के बारे में जानें. एक व्यक्ति सच्चा अहसास का सिर्फ एक पल में अनुभव के जीवन काल के लायक मेंढक कूद सकता है बाहर का पता लगाएं.
  • "विज्ञान और भगवान की प्रकृति हरियाली का पुनर्जन्म" रूपर्ट शेल्डरेक द्वारा. मानव जाति की है कि सहित माँ प्रकृति के विकास और ग्रहों की चेतना के लिए गोंद प्रदान कि 'जानकारी क्षेत्रों' का एक क्रांतिकारी नई समझ.
  • "भविष्य मेमोरी" प्म्ह अट्वॅटर से. इस तत्वमीमांसा के एक एकीकृत क्षेत्र सिद्धांत है, उसे मॉडल, भली भांति बंद तेओसोफिक, और नास्टिक स्रोतों में सब कुछ के लिए खातों. इस किताब को सच्चाई का अचूक अंगूठी है. यह उत्थान और परिवर्तनकारी है. अट्वॅटर उसे असाधारण अनुभवों से हमें बताता है, और हम ब्रह्मांड की समझ के नए स्तर तक दूर किया जाता है. उन्होंने कहा कि हम आसानी से वे सुझाव देते हैं, जो सच्चाई स्वीकार करते हैं और यह रूप में अच्छी तरह से इस एक ही वास्तविकता अनुभव करने के लिए एक ण्डे कभी नहीं किया है, जो हम लोगों के लिए निश्चित रूप से संभव है कि पता कर सकते हैं कि इस तरह से प्रस्तुत कर रहे हैं.
  • "समय, स्थान, और ज्ञान: वास्तविकता की एक नई दृष्टि" तारथंग तुलकू द्वारा. पुस्तक वास्तविकता के तीन पहलुओं में गहराई से विशद जानकारी देता है: समय, स्थान, और ज्ञान, और एक कट्टरपंथी डिग्री करने के लिए उन्हें ऊपर खुलता है. क्षणों की अनुक्रमिक प्रकृति चर्चा कैसे जो समय के अपने विश्लेषण में '. समय' (- - अतीत वर्तमान भविष्य) द्वारा दी ही है, जो हमारे बेहद सीमित परिप्रेक्ष्य, के केवल एक घटना है हमारे भ्रम, हमारे मिसपेर्सेप्टीओन्स, और जीवन में अंततः हमारी पीड़ा 'समय' से दिया जाता है कैसे. किताब पढ़ने के लिए आसान नहीं है, लेकिन यह बहुत स्पष्ट रूप से लिखा है. अवधारणाओं तो कट्टरपंथी हैं, और आप जानते हैं कि 'बहुत ज्यादा सब कुछ के लिए चुनौती है क्योंकि यह मुश्किल है. यह चर्चा की जा रही है कि दृष्टि 'देखना' वास्तव में आपकी मदद करने के लिए तैयार कर रहे हैं कि अनुभवात्मक अभ्यास के बहुत से आता है.
  • "अनंत ध्यान रखें: चेतना के मानव कंपन की विज्ञान" वैलेरी हंट द्वारा. मानव ऊर्जा के क्षेत्रों में पिछले 30 वर्षों में अनुसंधान मन और भावनाओं को मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र के लिए प्रतिबंधित है, बल्कि आभा में आरंभ, जिसमें से शरीर मूल रूप से बनाई है नहीं कर रहे हैं कि पता चलता है. गैर सामग्री घटनाएं अब दर्ज की गई और मापा जा सकता है, यह वे आत्मा, मन और ऊर्जा क्षेत्र की आम जमीन का हिस्सा दिखा रहा है कि विज्ञान और धर्म को एकजुट करने में एक सफलता है.
  • "उच्च चेतना के एक संक्षिप्त दौरे" इट्ज़ाक बेंटोव द्वारा. उसकी असामयिक मौत के बाद उसकी पत्नी द्वारा प्रकाशित पूरा किया गया है कि "जंगली पेंडुलम पीछा" के बाद बेंटोव की दूसरी पुस्तक, /. इट्ज़ाक बेंटोव भौतिकी और तत्वमीमांसा के क्षेत्र में एक प्रतिभाशाली था, और मानव जाति (बुद्धि के साथ उन लोगों, और खुला / प्रबुद्ध मन) ब्रह्मांड की लौकिक रहस्यों को पता चलता है.
  • "ब्रह्मांड एक ग्रीन अजगर है" ब्रायन स्विम्मे द्वारा. इस किताब को काव्य शब्दों में भौतिक विज्ञान का नृत्य, जीव विज्ञान, संज्ञानात्मक सोचा, निर्माण, विकास, अध्यात्म, मनोविज्ञान, प्रेम, जीवन, मृत्यु, जिसका अर्थ है, और किसी और अनिवार्य रूप से सब कुछ इस ब्रह्मांड रखती है डाल करने के लिए कार्य करता है. यह इस काम संवादों के मामले में किया देखना दिलचस्प था - यह कठिन विषयों को पढ़ाने के लिए यूनानियों के लिए काम किया. पाठक वास्तव में स्विम्मे के विचारों को समझने के क्रम में एक पूरी तरह से अलग तरीके से सोचने के लिए मजबूर किया जाता है. आप अलग तरह से यह पढ़ने के बाद सब कुछ देखो, तुम जीवन का एक नया प्यार हासिल है और इस प्रक्रिया में अधिक मानवीय हो गया.
  • "गैया - पृथ्वी पर जीवन पर एक नया रूप" जेम्स घूंघर द्वारा. घूंघर सदियों के लिए व्यस्त वैज्ञानिकों रखना होगा कि इस पुस्तक में एक शक्तिशाली और रोचक बहस पैदा कर दी है. उन्होंने कहा कि हो "चाहिए" क्या की सरल टिप्पणियों को खारिज कर देता है कि एक तापमान, वातावरण, लवणता और महासागरों के पीएच में अपेक्षाकृत स्थिर स्थिति बनाए रखने के लिए पृथ्वी के लिए क्षमता है, और प्रदूषण में कटौती है कि नोटिस. इस से, वह वह गैया परिकल्पना के रूप में परिभाषित करता है जो एक जीवित जीव, की तरह काम करते हैं कि भौतिक, रासायनिक और जैविक अंतर्संबंधों की एक जटिल है कि निष्कर्ष निकाला है.
    नई भौतिकी
    • "पूर्णता और आदेश फंसाना" डेविड बॉम द्वारा. एक प्रसिद्ध भौतिक विज्ञानी और आइंस्टीन के सहयोगी, बॉम वैज्ञानिकों ने भी सोचा था और इस मामले की अलग और विशिष्ट हैं और विचारक के बारे में वह क्या सोचता है से अलग है जिसमें एक खंडित दुनिया को देखने पर रख दिया जाता है कि बात करता है. उन्होंने ब्रह्मांड के किसी भी तत्व के भीतर ही ब्रह्मांड की समग्रता जिसमें एक अटूट पूरी है कि तत्वों. उन्होंने यह भी स्पष्ट रूप से सबसे अधिक वैज्ञानिकों से दूर भागते हैं एक विषय है जो चेतना की चर्चा है.
    • "भौतिकी के ताओ" फ्रिट्जॉफ कॅप्रा द्वारा. इस पुस्तक चाल के पंथ सफलता के साथ में स्वर्म्ड और नेतृत्व से खाना पकाने के लिए सब कुछ का एक "ताओ" अब वहाँ है. लेखक, अपने ही अधिकार में एक वैज्ञानिक, क्वांटम भौतिकी के एक सिंहावलोकन देता है और उसके प्रभाव पर दार्शनिक बताती हैं. यह अच्छी तरह से लिखा जाता है और आप इसे समझने के लिए एक वैज्ञानिक पृष्ठभूमि के ज्यादा के अधिकारी की जरूरत नहीं है. उन्होंने कहा कि पूर्वी रहस्यवाद और आधुनिक भौतिकी के बीच समानताएं ड्राइंग और समझाने में विशेष रूप से अच्छा है. आप भी अपने सह लेखक पुस्तक, पता लगाने के लिए इच्छा हो सकती है "ब्रह्मांड से संबंधित".
    • "मानदंड खोया: मनुष्य की छवियाँ विज्ञान के आईने में ' जॉन एल कसती द्वारा. कसती, प्रशिक्षण के द्वारा एक गणितज्ञ, जैसे कि "मानव जाति के वास्तविक स्वरूप क्या है?" के रूप में गहरे सवाल पर चर्चा उन्होंने क्वांटम वास्तविकता, अलौकिक बुद्धि और जीवन की उत्पत्ति मानते हैं. प्रत्येक मामले में वह विरोध दृष्टिकोण और प्रत्येक के लिए साक्ष्य प्रस्तुत करता है और फिर एक पक्ष या दूसरे पर उसकी न्यायिक टोपी और प्लॉप्स पर डालता है. इस किताब का एक विशेष रूप से स्वच्छ सुविधा कसती कई प्रसिद्ध वैज्ञानिकों ने काम किया है और उनके राजनीतिक और अन्य विश्वासों अपने निष्कर्षों को योगदान कैसे पता चलता है, जिसमें सामाजिक संदर्भ प्रस्तुत करता है.
    • "यूनिवर्स परेशान" फ्रीमैन डाइसन द्वारा. प्रिंसटन की उन्नत अध्ययन संस्थान में एक भौतिक विज्ञानी, डाइसन ओप्पेन्हेइमेर और फेनमैन सहित क्षेत्र में सबसे प्रसिद्ध नामों में से कई के साथ काम किया. किताब का शीर्षक एक टीएस एलियट कविता से आता है और लेखक के हितों की चौड़ाई का वर्णन करता है. उन्होंने कहा कि परमाणु और जैविक हथियारों के लिए अंतर - गांगेय औपनिवेशीकरण से कई विषयों पर बताती हैं और राजनीतिक वास्तविकता के लिए एक गहरी लग रहा है. इंग्लैंड में बॉम्बर कमान में युद्ध के वर्षों का उनका विवरण विशेष रूप से सार्थक है.
    • "इस सुरुचिपूर्ण यूनिवर्स ' ब्रायन ग्रीन द्वारा. सापेक्षता के एक विशेष रूप से चमकदार चर्चा के साथ भौतिकी की अस्पष्टीकृत रहस्यों में से एक अद्भुत प्रदर्शनी. आइंस्टीन के प्रसिद्ध खोज अभी भी आप हतप्रभ छोड़ देता है, तो इस किताब को आप समझ दे देंगे. लेखक स्ट्रिंग सिद्धांत के एक मजबूत समर्थक है और वह यह अच्छी तरह से ज्यादा 'सब कुछ के सिद्धांत' के बाद की मांग के लिए सैद्धांतिक आधार हो सकता है कि कैसे बताते हैं.
    • "कॉस्मिक संयोग: काले पदार्थ, मनुष्य और आंत्रॉपिक ब्रह्मांड विज्ञान" जॉन ग्रिब्बिन और मार्टिन रीस द्वारा. एक विज्ञान लेखक और एक भौतिक विज्ञान से उभरने के लिए सबसे क्रांतिकारी विचारों में से कुछ की एक साज़िश का दौरे पर ले:, ब्लैक होल, ब्रह्मांडीय तार, गुरुत्वाकर्षण लेंस, कोपेनहेगन और क्वांटम यांत्रिकी के कई संसारों व्याख्या, कण चिड़ियाघर और बहुत कुछ. लेखन को साफ़ करें.
    • "भौतिकी और परे" वर्नर हाइजेनबर्ग द्वारा. बहस हाइजेनबर्ग, मैनहट्टन परियोजना के नाजी बराबर का सिर, प्रयास या उसके चेहरे पर गिर गया जो एक अक्षम प्रबंधक पलीता लगाया जो एक साहसी वैज्ञानिक था कि क्या बारे में फिर से उग्र है. वहां उन्होंने सभी समय के महानतम भौतिकविदों में से एक था कि इसमें कोई संदेह नहीं है और उनकी अनिश्चितता सिद्धांत ब्रह्मांड के बारे में हमारी समझ की आधारशिला है. उन्होंने कहा कि राजनीति, इतिहास, धर्म और अन्य विषयों और आइंस्टीन, बोह्र और श्रोडिंगर की तरह अन्य वैज्ञानिक महान खिलाड़ियों के साथ अपनी बातचीत पर रिपोर्ट पर बताती हैं.
    • "वास्तविकता के हाशिये" रॉबर्ट जी जॅन और ब्रेंडा जे ड्यूनी द्वारा. प्रिंसटन विश्वविद्यालय में इंजीनियरिंग और एक नासा सलाहकार जॅन के स्कूल के एक पूर्व डीन अभी भी काफी हद तक इतना कठोर वैज्ञानिक पद्धति, तो वर्जित थे जो विषयों और कर रहे हैं का उपयोग कर रहा है, वह जांच करने के लिए चुना है जब मुखर हमलों को रोकने नहीं किया जो एक विशाल प्रतिष्ठा की थी. पुस्तक के उपशीर्षक भौतिक दुनिया में चेतना की भूमिका है और वह चेतना और बात दर्जे का मायनों में बातचीत दिखा रहा है कि अपने प्रयोगों के परिणामों दस्तावेजों.
    • "कॉस्मिक जोय और स्थानीय दर्द: एक फकीर वैज्ञानिक की सोच" एच. मोरोविट्ज़ द्वारा. बायोफिज़िक्स के एक येल के प्रोफेसर एक विश्राम के दौरान और जब हवाई में अपने सेलबोट पर अपने क्षेत्र को बताती हैं. कई सरल, और विज्ञान के क्षेत्र में कुछ काफी जटिल हैं, विषय - जैविक जीवन, ऊर्जा प्रवाह और एन्ट्रापी में पानी के महत्व - सरल भाषा में स्पष्ट कर दिया जाता है.
    • "क्यों भगवान दूर नहीं जाना होगा: मस्तिष्क विज्ञान और विश्वास के जीवविज्ञान" एंड्रयू न्यूबर्ग, यूजीन डी 'अक़ुईल्ल और विंस रौसे द्वारा. कई परंपराओं में मनीषियों ब्रह्मांड के साथ एक बनने की, ब्रह्मांड के साथ विलय की, एकता की शक्तिशाली अनुभवों की बात करते हैं. अधिकांश लोगों को प्रतीकात्मक रूप में इस तरह के वर्णन खारिज. लेकिन वे क्या नहीं कर रहे हैं? आधुनिक विज्ञान मस्तिष्क नेउरॉनिक गतिविधि नक्शा करने के लिए कभी अधिक शक्तिशाली उपकरण के साथ हमें प्रदान किया है. लेखकों वहाँ विलय की ऐसी हालत है, वास्तव में, है और यह एक अद्वितीय मस्तिष्क नक्शे के साथ जुड़ा हुआ है कि पढ़ाई कि शो पर रिपोर्ट. नेउरोतेओलोग्य एक नई विधा है और यह इस तरह के रूप में दिलचस्प सवाल बन गया है "भगवान ब्रेन बनाने या मस्तिष्क भगवान पैदा किया था?"
    • "कॉस्मिक कोड: प्रकृति की भाषा के रूप में क्वांटम भौतिकी" हाइन्ज़ आर पगेल्स द्वारा. पगेल्स, विज्ञान के न्यूयॉर्क अकादमी के पूर्व अध्यक्ष, कैसे क्वांटम न्यूटोनियन भौतिकी से विकसित भौतिकी समझाने का एक बहुत अच्छा काम करता है. उन्होंने स्पष्ट रूप से पूर्व की "रचना" जो मजबूर उत्तरार्द्ध की प्रयोगात्मक विसंगतियों बताते हैं. उन्होंने यह भी एक उत्कृष्ट 1920s में विकसित हुई है जो महान भौतिक विज्ञानियों का व्यक्तिगत योगदान का वर्णन करने का काम और कैसे संचयी है कि दूसरों के साथ बंधा हुआ है और प्रत्येक की सैद्धांतिक काम भौतिकी में एक बुनियादी बदलाव विकसित करता है.
    • "जीवन क्या है?" ई. श्रोडिंगर द्वारा. एक नोबेल पुरस्कार विजेता भौतिक विज्ञानी अपनी खोजों के प्रभाव पर विचार करता. भाग्य और स्वतंत्र इच्छा, विज्ञान और धर्म, चेतना का भौतिक आधार, विषय वस्तु भेदभाव, और अधिक.
    • "क्वांटम परे: नई वैज्ञानिक क्रांति में भगवान, हकीकत, चेतना" माइकल टैलबोट द्वारा. वैसे हाल ही में वैज्ञानिक प्रयोगों बताते हैं कि किताब लिखी और वे क्यों महत्वपूर्ण हैं. सच है, वह देखने की अपनी बात को आगे कि केवल प्रयोगों का चयन करता है, लेकिन वे वैसे भी आकर्षक हैं. उनके शोध विज्ञान है कि एक दिन की व्याख्या, या कम से कम, रहस्यवाद और असाधारण स्वीकार करते हैं और इतने सारे वैज्ञानिकों विस्सेराल्‍ल्य उनका विरोध क्यों की पड़ताल करेगा.
    • "पानी में छिपा संदेश" मसरू एमॉतो द्वारा. पानी के अणुओं को मानव के विचारों और भावनाओं से प्रभावित हैं. मसरू एमॉतो के अग्रणी काम करने के लिए शुक्रिया, अब हम जमे हुए पानी क्रिस्टल के अपने विशद, रंग तस्वीरों में इस बात का सबूत देख सकते हैं. इस काम के लिए कुंजी पानी जीवन ऊर्जा और चेतना स्थितियां जीवन ऊर्जा वहन करती है. इसलिए, पानी मामले में निहित जीवन ऊर्जा पर जागरूक आशय का शारीरिक प्रभाव देखने के लिए आदर्श जगह है. sabhar : http://hi.trans4mind.com

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रहस्य वैज्ञानिक अब तक न समझ सके

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देश का गुजरात राज्य विविधताओं से परिपूर्ण है और अपने विशिष्ट भौगोलिक स्थानों के लिए विश्व विख्यात है।


तुलसीश्याम :
 
प्रसिद्ध एशियाटिक लायंस के जंगल ‘गिर’ की यात्रा के समय आप इस रहस्यमयी स्थल का मुआयना कर सकते हैं। तुलसीश्याम नामक यह जगह पहले गरम पानी के सोते के लिए प्रसिद्ध थी, लेकिन अब इससे और एक नया रहस्य जुड़ गया है। तुलसीश्याम से मात्र 3 किमी दूर एक ढलवां सड़क है। इसकी खासियत यह है कि अगर ढाल पर आप अपना वाहन बंद कर लुढ़काना शुरू कर दें तो आपका वाहन नीचे आने की बजाय ऊपर की ओर आने लगता है। इतना ही नहीं, अगर इस ढाल पर आप पानी गिरा दें तो वह भी नीचे आने की बजाय ऊपर की ओर चढ़ने लगता है।
 
अब यह ढलवां सड़क इतनी प्रसिद्ध हो चुकी है कि यहां सैलानियों का हर समय तांता लगा रहता है।

ऐसी जगहें, जिनका रहस्य वैज्ञानिक अब तक न समझ सके...


काला डुंगर :
 
यह कच्छ की सबसे ऊंची जगह है। तुलसीश्याम की तरह यह स्थल भी अचरज से परिपूर्ण है। यहां से गुजरने वाली सड़क की खासियत यह है कि ढाल से उतरते समय अचानक ही रफ्तार बढ़ जाती है। इतना ही नहीं ढाल चढ़ते समय भी वाहन की रफ्तार बढ़ जाती है। आमतौर पर ढाल चढ़ते समय काफी परेशानी होती है, लेकिन इस रहस्यमयी जगह का मामला ठीक इसके विपरीत है।

ऐसी जगहें, जिनका रहस्य वैज्ञानिक अब तक न समझ सके...


जादुई पत्थर :
 
अमरेली जिले के बाबरा शहर से मात्र 7 किमी दूर करियाणा गांव में एक पहाड़ी आकषर्ण का केंद्र हैं। इस पहाड़ी ही खासियत यह है कि यहां कई पत्थर ऐसे हैं, जिनमें से झालर बजने जैसी आवाज आती है। इस पहाड़ी पर ग्रेनाइट के पत्थर काफी मात्रा में हैं। अब तक इन पत्थरों का रहस्य भी सुलझाया नहीं जा सका है।
 
इन पत्थरों के साथ एक धार्मिक मान्यता भी जुड़ी हुई है कि प्राचीन समय में यहां एक बार स्वामीनारायण भगवान आए थे। कहा जाता है कि पूजा-अर्चना के समय उन्होंने यहां के पत्थरों का घंटी के रूप में उपयोग किया था।

ऐसी जगहें, जिनका रहस्य वैज्ञानिक अब तक न समझ सके...

नगारिया पत्थर :
 
जूनागढ़ स्थित पवित्र गिरनार के बगल में दातार पर्वत के नगरिया पत्थर श्रद्धालुओं के आकषर्ण का केंद्र हैं। इन पत्थरों की विशेषता यह है कि इन पर ठोकर मारते ही नगाड़े बजने की आवाज आती है। दातार पर्वत गिरनार के दक्षिण में जूनागढ़ से मात्र 2 किमी की दूरी पर स्थित है।
ऐसी जगहें, जिनका रहस्य वैज्ञानिक अब तक न समझ सके...
कुंड :
 
तुलसीश्याम में स्थित एक कुंड भी आकषर्ण का केंद्र है। यह तीर्थधाम कुदरती सौंदर्य के लिए प्रसिद्ध है। इस कुंड की खासियत यह है कि यह हर समय पानी से भरा रहता है और हर समय इसका पानी गर्म रहता है। इस तीर्थस्थल से भगवान विष्णु की पौराणिक कथा जुड़ी हुई है।



ऐसी जगहें, जिनका रहस्य वैज्ञानिक अब तक न समझ सके...


sabhar : bhaskar.com




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