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ब्रह्मचारी पर यौन शोषण का आरोप

महर्षि महेश योगी विश्वविद्यालय के कुलाधिपति ब्रह्मचारी गिरीश वर्मा एक नई मुसीबत में फंस गए हैं। वर्मा पर यौन शोषण का आरोप लगाने वाली महिला के पति ने मीडिया के सामने यह कहते हुए सनसनी पैदा कर दी कि, उनके संग भी दुष्कर्म होता रहा। उधर, कोर्ट द्वारा 1 जनवरी तक पुलिस रिमांड पर भेजे गए गिरीश वर्मा मंगलवार को महिला थाने बयान के लिए लाए गए। उससे कुछ देर पहले पीडि़ता भी अपने पति के संग बयान देने पहुंची।

जिस ब्रह्मचारी के आगे हजारों लोग श्रद्धा से झुक जाते हैं, वे मंगलवार जब महिला थाने में बयान के लिए लाए गए, तब उनके चेहरे का रंग उड़ा हुआ था। तेजस्वी सूरत मुरझाई हुई थी। देर रात तक पुलिस की पूछताछ के कारण थकावट और टेंशन पूरी बॉडी में स्पष्ट दिखाई पड़ रही थी। सोमवार को महर्षि महेश योगी विश्वविद्यालय के कुलाधिपति गिरीश वर्मा को मजिस्ट्रेट वर्षा शर्मा की कोर्ट में पेश किया गया था, जहां से उन्हें 1 जनवरी तक के लिए पुलिस रिमांड पर भेजा गया है।



ऐसे आलीशान महलनुमा कोठी में रहते है गिरीश वर्माः गिरीश वर्मा का महलनुमा कोठी दस एकड़ में फैली है। पहले यह पांच एकड़ में बनी थी। इसमें एक गार्डन है जिसमें जयपुर …

स्कूल छोड़ने के 74 साल बाद पीएचडी की.

लंदन के एक मजदूर के बेटे डॉ वूफ ने सोलह साल की उम्र में नौकरी करने के लिए स्कूल छोड़ दिया था लेकिन बाद में उन्होंने गणित के शिक्षक के रूप में नौकरी की और सेवानिवृत होने के बाद पढ़ाई पूरी करने लौट आए.
स्कूल के दिनों में उन्हें स्कॉलरशिप मिली थी लेकिन युद्ध शुरू होने के कारण उन्हें 16 साल की उम्र में ही पढ़ाई छोड़ के जाना पड़ा और उनकी विश्वविद्यालय की पढ़ाई अधूरी रह गई.डॉ वूफ ने कहा, " डॉक्टरेट होना मेरे जीवन का सबसे सम्मानजनक अनुभव है. स्कूल के दिनों में मैं विश्वविद्यालय के बारे में नहीं सोचता था." मेरे पिता का मानना था कि "मुझे काम करके घर के बजट में योगदान देना चाहिए. आक्रमण शुरू होने से पहले मैं वापस लंदन आ गया और शहर के पश्चिमी भाग के एक ऑफिस में नौकरी करने लगा. घर ध्वस्त होने से पहले हमें घर छोड़ के जाना था." युद्ध में सेना को अपनी सेवा देने के बाद जब वो नौकरी पर लौटे तो उनके पास 39 साल की अवस्था में एक अच्छी खासी नौकरी के साथ बीवी और चार बच्चे थे." वे कहते हैं, "मैंने अपने आप से पूछा क्या मैं ऐसी ही जिंदगी जीना चाहता था शायद नहीं. मेरी बीवी का रवैया…

खजुराहो जैसी अद्भुत कला की दुनिया अकेले 23 साल के कठिन परिश्रम से तैयार कर दी

नार्वे के महान मूर्तिकार गुस्ताव विगेलैंड (11 अप्रैल 1869-12 मार्च 1943) ने कला की एक अद्भुत की दुनिया को अकेले 23 साल के कठिन परिश्रम से तैयार कर दी। इस समय इसे दर्शकों के लिए खोल दिया गया है। गुस्ताव विगेलैंड वह ऑर्टिस्ट हैं, जिन्होंने दुनिया के सबसे श्रेष्ठ नोबल शांति पुरस्कार के पदक को भी डिजाइन किया था। इस कला के विशाल संग्रह के शिल्प के नमूनों में मानवीय मनोवीय भावों की कुछ उसी तरह की अभिव्यक्ति दिखाई देती है जैसी खजुराहों की प्रतिमाओं में। इन आर्ट वर्क में पुरुष और महिला के बीच के रिश्ते को चित्रित किया गया। मनुष्य की विभिन्न अवस्थाओं जैसे, वयस्क अवस्था और बचपन को दिखाया है। यहां मानवीय व्यवहार जैसे शौक, पेशा, तलाश, दौड़, पहलवानी, नृत्य, आलिंगन आदि को कला के माध्यम से चित्रित किया गया  है। हालांकि, गुस्ताव विगेलैंड के कुछ आर्ट बेहद अब्सट्रैक्ट (अबूझ) हैं।
ओस्लो सिटी प्रशासन ने 1921 में एक लंबे विवाद के बाद इस महान कलाकार का मकान गिराना तय किया था। गुस्ताव विगेलैंड के मकान मेंं उनका आर्ट स्टूडियो और लाइब्रेरी थी। उन्होंने शहर से दूर नई बिल्डिंग में रहना स्वीकार कर लिया था। आर्ट…

त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक सरकार सबसे गरीब मुख्यमंत्री

त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक सरकार (फोटो ऊपर देखें) भारत के सबसे गरीब मुख्यमंत्री हैं। उनके पास करीब 2.5 लाख रुपए की चल-अचल संपत्ति है। इनमें 9720 रुपए का बैंक जमा और 1080 रुपए की नकद राशि शामिल है। माणिक के मुताबिक, उन्होंने ज्वैलरी, शेयर, बांड और अन्य निवेश के साधनों में कोई पैसा नहीं लगाया है। उनका कहना है कि जब उन्हें देश का सबसे गरीब मुख्यमंत्री कहा जाता है, तो उन्हें शर्म महसूस होने की बजाय अच्छा लगता है।आम आदमी के हक की लड़ाई लड़ने की बात कर रहे अरविंद देश के सबसे गरीब मुख्यमंत्री नहीं हैंकेजरीवाल दपंत्ति देश के करोड़पति मुख्यमंत्री दंपत्तियों की लिस्ट में शामिल हो जाएंगे। दिलचस्प है कि उनके और उनकी पत्नी सुनीता के पास कुल मिलाकर 2.10 करोड़ रुपए की संपत्ति है।
केजरीवाल द्वारा चुनाव आयोग को दी गई जानकारी के मुताबिक, अरविंद के नाम 93.62 लाख रुपए की दौलत है। इनमें गाजियाबाद (यूपी) के इंद्रापुरम में 55 लाख रुपए का फ्लैट और हरियाणा में करनाल जिले के शिवानी में 37 लाख रुपए का एक फ्लैट शामिल है। इसके अलावा दिल्ली के नवनियुक्त मुख्यमंत्री के पास 1.62 लाख रुपए का बैंक डिपॉजिट और 5000 र…

दस नयी तकनीकें, जो बदलेंगी दुनिया

आज के नॉलेज में चर्चा 2013 में सामने आयी उम्मीद जगानेवाली दस ऐसी तकनीकों की, जो आनेवाले वर्षो में हमारे जीने का अंदाज बदल सकती है. नया सोलर पैनल मौजूदा समय में बाजार में उपलब्ध सोलर पैनल में सिंगल सेमीकंडक्टिंग सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है, जिसे आम तौर पर सिलिकॉन के रूप में जाना जाता है. चूंकि सोलर स्पेक्ट्रम के संकरे बैंड महज कुछ ही सामग्री को अवशोषित कर पाते हैं, इसलिए सूर्य से हासिल होनेवाली अधिकांश गरमी ऊर्जा के तौर पर परिवर्तित नहीं हो पाती है और वह विनष्ट हो जाती है. इस तरह ये पैनल 20 फीसदी से भी कम ऊर्जा को इलेक्ट्रिसिटी में तब्दील कर पाते हैं. हाल ही में ईजाद की गयी नयी तकनीक के माध्यम से अब इसकी क्षमता को कम से कम 50 फीसदी तक बढ़ाया जा सकेगा. इसे कुछ इस तरह से डिजाइन किया गया है कि इसमें छह से आठ कम्पोनेंट वेवलेंथ लगाये गये हैं. इसके माध्यम से प्रत्येक अलग तरह प्रकाश का रंग बिखेरेगा और प्रिज्म की भांति यह कार्य करेगा. इसके बाद प्रत्येक रंग को सेमीकंडक्टर निर्मित सेल को भेजेगा, जो इसे अवशोषित करेगा. जैसे ही प्रकाश इस सामग्री में दाखिल होगा, तो पतले ऑप्टिकल फिल्टरों की श्रृ…

मेडिकल साइंस की दुनिया में क्या कुछ रहा खास 2013

वर्तमान समय में जिस तरह तकनीक जीवन का एक अहम हिस्सा बन गई है कुछ उसी तरह विज्ञान भी प्रत्येक व्यक्ति के लिए बहुत उपयोगी सिद्ध हो रहा है. नए-नए आविष्कार मानव जीवन को बहुत सहज बना देते हैं और इस साल भी विज्ञान के क्षेत्र में कुछ ऐसे आविष्कार हुए, ऐसी क्रांतियां आईं जिन्होंने विकास की राह को और आसान कर दिया. साल 2013 अपने अंतिम क्षणों में हैं तो चलिए जाते-जाते हम आपको बताते हैं कि इस साल विज्ञान के क्षेत्र में हमें क्या उपलब्धियां हासिल हुईं: कैंसर इम्यूनोथेरेपी: इस साल विज्ञान के क्षेत्र में सबसे बड़ी उपलब्धि या कहें क्रांति साबित हुई कैंसर इम्यूनोथेरेपी. इस थेरेपी के अर्थ है मानव शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को कुछ इस हद तक बढ़ाना ताकि वह ट्यूमर से मुकाबला करने में सक्षम हो जाए. वैसे तो कई दशक पहले से ही वैज्ञानिक ऐसे तरीके की खोज में लगे थे जिससे कि कैंसर के ट्यूमर को शरीर पर हावी ना होने दिया जा सके लेकिन अभी तक ऐसा मुमकिन नहीं हो पाया था. परंतु इस साल वैज्ञानिकों को यह उपलब्धि हासिल हो गई और आखिरकार कैंसर के ट्यूमर से लड़ने के लिए वैज्ञानिकों एंटीबॉडीज का आविष्कार कर लिया जो शरीर के भीतर ट…

बेटे की लाश पर सोता रहा बाप, रंगरेलियां मनाती रही बहू

लखनऊ/रायबरेली. यदि आस-पास वहशी इंसान हो तो जिदंगी का कितना क्रूर रंग देखने को मिल सकता है, इसकी मिसाल पिछले दिनों रायबरेली से सामने आई। यहां एक बूढ़ा बाप 6 महीने तक अपने बेटे की लाश के ऊपर चारपाई डाले रातों को करवटें बदलता रहा। इस बुजुर्ग और मजबूर इंसान को यह नहीं मालूम था कि जिस इकलौते बेटे को वह लापता मान रहा है वह उसकी तख्त के नीचे जमीन में गड़ा हुआ है। यही नहीं उस पिता की गैर मौजूदगी में उसके बेटे की हत्या करने वाले उसी तख़्त पर नाजायज संबंध बनाते रहे। जब बीती बरसात में घर में पानी भरा तो पूरा मामाल उजागर हुआ साथ ही सामने आई शर्मसार करने वाले रिश्ते और इंसानियत। इस घटना की नींव पिछले साल फ़रवरी में पड़ी, जब रायबरेली के भदोखर थानाक्षेत्र के बेलहिया गांव के रहने वाले चन्द्रपाल यादव ने थाने में अपने 22 वर्षीय बेटे राम कुमार यादव की गुमशुदगी दर्ज कराई। वह 14 जनवरी 2013 से लापता है, जो काफी खोजबीन के बाद भी नहीं मिला। तत्कालीन थानाध्यक्ष ने एफआईआर नंबर-34 में गुमुशदुगी दर्ज कर राम कुमार को खोजने का प्रयास किया, लेकिन कुछ पता न चला। बुजुर्ग दंपति चन्द्रपाल और उनकी पत्नी जनक दुलारी यादव अपने…

मेडिकल साइंस का एक अजूबा महिला ने 10 बच्चों को जन्म दिया।

वह महिला अगर चीन में होती तो शायद सजा की हकदार होती लेकिन वह भारत में है तो सुरक्षित है। बच्चे एक-दो नहीं बल्कि दस! आज के जमाने में छोटा परिवार सुखी परिवार माना जाता है लेकिन हर चीज आपके मन मुताबिक नहीं होती। कुछ चीजें आज भी विधाता की मर्जी से ही होती हैं। आप लाख परिवार नियोजन अपना लो कि बस एक ही बच्चा चाहिए लेकिन भगवान की मर्जी.आपको जुड़वा बच्चे हो गए तो कुछ नहीं कर सकते। लेकिन जुड़वा बच्चों में भी दो-तीन, चार भी आपने सुना होगा.. 10 बच्चों के बारे शायद न सुना हो। अभी हाल ही में ऐसी ही घटना सामने आई तो सभी हैरान रह गए। अब तक के मेडिकल इतिहास में यह सबसे अधिक जुड़वा बच्चों का रिकॉर्ड है। मध्य प्रदेश का रीवा शहर उस वक्त मीडिया की सुर्खियों में आ गया जब यहां अंजू नाम की गर्भवती महिला के 10 बच्चे होने की खबर आई। रीवा के संजय गाधी मेमोरियल अस्पताल में 28 वर्षीय अंजू ने 10 बच्चों को जन्म दिया। हालांकि सभी बच्चे मृत पैदा हुए लेकिन मेडिकल साइंस के इतिहास में भी यह एक अजूबा से कम नहीं। डॉक्टर भी इसे एक अजूबा ही मान रहे हैं। मध्य प्रदेश में सतना जिले की अंजू कुशवाहा और संतोष की शादी 10 साल पहल…

जीपीएस तकनीक से इंसान का ऑपरेशन

बहुत जल्द सर्जन भी रास्ता बताने वाली तकनीक का ऑपरेशन में उपयोग करेंगे. थ्री डी तस्वीरों का इस्तेमाल कर ऑपरेशन सटीक और सुरक्षित बन पाएंगे. इंफ्रारेड कैमरों ने डॉक्टरों को रास्ता दिखा दिया है.

एक मिनट के लिए सोच कर देखिए आप ऑपरेशन थिएटर में हैं और सर्जन, प्रोफेसर गेरे स्ट्राउस साइनस का ऑपरेशन करने वाले हैं. पांच मॉनिटर अर्धगोलाकार स्थिति में ऑपरेशन टेबल पर रखे हुए हैं. ऊपर एक बड़ा मॉनिटर टंगा हुआ है और बीच में दो इन्फ्रारेड कैमरे लगे हैं. गेरो स्ट्राउस कहते है जिस तरह से ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम जीपीएस कारों में इस्तेमाल किए जाते हैं ठीक उसी तरह यहां भी होगा. स्ट्राउस के मुताबिक, "कार में आपके पास सेटेलाइट होता है और यह सेटेलाइट मैप के हिसाब से कार की स्थिति बताता है." ऑपरेशन में इंफ्रारेड कैमरे यही काम करते हैं, वो लगातार ऑपरेशन की तस्वीरें भेजते रहते हैं. एक छोटा रिसीवर उस मरीज से जुड़ा होता है जिसकी तस्वीर कैमरे से उतारी जाती है. जीपीएस सिस्टम में इस्तेमाल होने वाले मैप की जगह डॉक्टरों के पास सीटी स्कैन या फिर एमआरई की तस्वीर होती है जो उन्हें बताती है कि वो ठीक जा रहे हैं. न…

चेतना और नई भौतिकी

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चेतना और भौतकी को समझने के लिये  क़ुछ वैज्ञानिको ने  किताबे लिखी है जिसमे चेतना और भौतकी को समझा जा सकता है  धारणा का विकास " क्रिस ऑट द्वारा. उन्होंने कहा कि वह आज है कि जटिल आध्यात्मिक सिद्धांतों था पहले बहुत पहले, आदमी को समझाने के लिए अपने अनुभव था. समय के साथ, वह अपने अनुभव को समझाने के लिए सैद्धांतिक संस्थाओं का आविष्कार किया. वह धीरे धीरे इन आविष्कार बातें समझा आवश्यक बातें जो बन आदि देवताओं, लोगो, रूपों, क्या बात है, मोनाड्स, बुद्धि तत्व, मन, आत्मा, आकाश, अन्तरिक्ष, सूपेर्स्त्रिंग्स, आयाम, आविष्कार किया. ग्रेट तर्क वह अनुभव की व्याख्या करने का आविष्कार किया था संस्थाओं के अस्तित्व को साबित करने के लिए, उन्हें समझाने के लिए उत्पन्न किया गया. धीरे - धीरे आदमी यह अब अपने सिद्धांतों के साथ संगत लग रहा था के बाद से, अनुभव ही सवाल करने लगे. अनुभव, एक बार विवाद और आदमी की जांच की शुरुआती बिंदु से परे हो गया था जो कि घटना, अब सैद्धांतिक इकाई था, और वह कोई सीधा सबूत नहीं था जिसके लिए इस तरह के पदार्थ और ऊर्जा के रूप में अपने आविष्कार संस्थाओं,,, वास्तविकता थे. दुनिया …

रहस्य वैज्ञानिक अब तक न समझ सके

देश का गुजरात राज्य विविधताओं से परिपूर्ण है और अपने विशिष्ट भौगोलिक स्थानों के लिए विश्व विख्यात है।

तुलसीश्याम : प्रसिद्ध एशियाटिक लायंस के जंगल ‘गिर’ की यात्रा के समय आप इस रहस्यमयी स्थल का मुआयना कर सकते हैं। तुलसीश्याम नामक यह जगह पहले गरम पानी के सोते के लिए प्रसिद्ध थी, लेकिन अब इससे और एक नया रहस्य जुड़ गया है। तुलसीश्याम से मात्र 3 किमी दूर एक ढलवां सड़क है। इसकी खासियत यह है कि अगर ढाल पर आप अपना वाहन बंद कर लुढ़काना शुरू कर दें तो आपका वाहन नीचे आने की बजाय ऊपर की ओर आने लगता है। इतना ही नहीं, अगर इस ढाल पर आप पानी गिरा दें तो वह भी नीचे आने की बजाय ऊपर की ओर चढ़ने लगता है। अब यह ढलवां सड़क इतनी प्रसिद्ध हो चुकी है कि यहां सैलानियों का हर समय तांता लगा रहता है।


काला डुंगर : यह कच्छ की सबसे ऊंची जगह है। तुलसीश्याम की तरह यह स्थल भी अचरज से परिपूर्ण है। यहां से गुजरने वाली सड़क की खासियत यह है कि ढाल से उतरते समय अचानक ही रफ्तार बढ़ जाती है। इतना ही नहीं ढाल चढ़ते समय भी वाहन की रफ्तार बढ़ जाती है। आमतौर पर ढाल चढ़ते समय काफी परेशानी होती है, लेकिन इस रहस्यमयी जगह का मामला ठीक …