Loading...

रविवार, 21 अक्तूबर 2012

शर्लिन की बोल्ड तस्वीरों से एक बार फिर हॉट हुआ ट्विटर

0


प्लेब्वॉय मैगज़ीन के लिए हाल ही में न्यूड होकर तहलका मचाने के बाद शर्लिन चोपड़ा लगातार ऐसा कुछ कर रही हैं जिससे वह चर्चा में बनी रहें.
वह आए दिन ट्विटर पर अपने बोल्ड कमेन्ट पोस्ट करने के साथ साथ न्यूड और सेमी न्यूड तस्वीरें भी अपलोड कर रही हैं.

हाल ही में शर्लिन ने ट्विटर पर अपनी सेमी न्यूड तस्वीरें अपलोड कर तहलका मचा दिया था.
अब इस बार उन्होंने कुछ हॉट और टॉपलेस तस्वीरें अपलोड कर सनसनी फैला दी है


sabhar : bhaskar.com
.PICS:शर्लिन की बोल्ड तस्वीरों से एक बार फिर हॉट हुआ ट्विटर
PICS:शर्लिन की बोल्ड तस्वीरों से एक बार फिर हॉट हुआ ट्विटर
PICS:शर्लिन की बोल्ड तस्वीरों से एक बार फिर हॉट हुआ ट्विटरPICS:शर्लिन की बोल्ड तस्वीरों से एक बार फिर हॉट हुआ ट्विटरPICS:शर्लिन की बोल्ड तस्वीरों से एक बार फिर हॉट हुआ ट्विटरPICS:शर्लिन की बोल्ड तस्वीरों से एक बार फिर हॉट हुआ ट्विटरPICS:शर्लिन की बोल्ड तस्वीरों से एक बार फिर हॉट हुआ ट्विटरPICS:शर्लिन की बोल्ड तस्वीरों से एक बार फिर हॉट हुआ ट्विटर

Read more

कैंसर, डायबिटीज, दिल की बीमारियों का इलाज आसान होगा

0


बेकार, बंजर, बिना काम का डार्क मैटर। वर्ष 2000 में जब पहली बार मनुष्य के जीन समूह (जीनोम) को सिलसिलेवार तरीके से जमाया गया तब वैज्ञानिकों ने उसके ज्यादातर हिस्से का इस तरह वर्णन किया था। तीन अरब मूल जोड़ों से बने हमारे डीएनए को केवल 22000 जीन्स में बांटा गया। यह मानवीय जीनोम का केवल दो प्रतिशत है। वैज्ञानिकों का कहना था, बाकी बहुत ज्यादा काम का नहीं है।
 
 
 
हमारे आनुवंशिक गौरव के लिए सौभाग्य की बात है कि यह निष्कर्ष गलत निकले हैं। अमेरिकी राष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थान (एनआईएच) की अगुवाई में हो रही खोज से पता लगा है, 98 प्रतिशत जीनोम का अधिकतर हिस्सा बायो केमिकल हलचल की जीवंत दुनिया है। इनसाइक्लोपीडिया ऑफ डीएनए एलिमेंट्स (एनकोड) प्रोजेक्ट ने कुछ लाइलाज बीमारियों के उपचार की संभावनाएं पेश की हैं। एनआईएच के राष्ट्रीय मानव जीनोम रिसर्च इंस्टीट्यूट के डायरेक्टर डॉ एरिक ग्रीन ने पत्रकारों को बताया, जीवन ने कैसे आकार लिया- इस बुनियादी सवाल का हल खोजने के लिए यह एक शक्तिशाली संसाधन है। इससे हमें मनुष्य की बीमारियों के जीनोमिक आधार को समझने में मदद मिलेगी।
 
 
 
डीएनए का वह हिस्सा जो जीन नहीं बनाता, निठल्ला नहीं बैठा है। वह जीन्स को बताता है, कब काम करना है और किस वक्त आराम से बैठना है। वह यह भी निर्देश देता है, विभिन्न कोशिकाओं (सेल्स) में जीवन के किस बिंदु पर कितनी प्रोटीन का निर्माण करना है। उदाहरण के लिए उस 80 प्रतिशत डीएनए में किसी जगह से किसी कोशिका को दिमाग का न्यूरॉन बनाने या पैनक्रियास को इंसुलिन बनाने या चमड़ी की कोशिका को बूढ़ी कोशिका का स्थान लेने का निर्देश दिया जाता है।
 
 
 
एनकोड ने बेकार समझे जाने वाले 98 प्रतिशत जीनोम की रिसर्च को नई दिशा दी है। अगर कोई बीमारी जेनेटिक ऑन-ऑफ स्विच में गड़बड़ी से हुई है तो शोधकर्ता या डॉक्टर उसका पता लगाकर इलाज कर सकेंगे।  यह खोज दिल के रोगों, डायबिटीज, अल्जीमर्स और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज को आसान बनाएगी। सबसे अधिक फायदा कैंसर मरीजों को होने की संभावना है। यह बीमारी कई टिश्यूज में अनेक तरह से होती है।
 
 
 
कोशिकाओं की अनियंत्रित वृद्धि कैंसर का मुख्य कारण है। इधर, कैंसर रोधी नई दवाएं ट्यूमर निर्माण की प्रक्रिया को निशाना बनाती हैं। अब एनकोड ने कैंसर की कोशिकाओं को जीवित रखने वाले समूचे सर्किट का पता लगा लिया है। इससे मौजूदा दवाओं का नए तरीके से उपयोग हो सकेगा। उदाहरण के लिए स्तन और फेफड़े के ट्यूमर एक ही सर्किट में हैं तो किसी मरीज के इलाज में इस्तेमाल की गई दवा का उपयोग दूसरे के लिए भी हो सकेगा।
 
 
 
 
सेंट लुई में वाशिंगटन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने कच्चे डीएनए को आरएनए में बदलने वाले दो दर्जन ट्रांसक्रिप्शन फैक्टर की पहचान की है। फिर इनसे 17 किस्म के कैंसर में पाए जाने वाले प्रोटीन की पहचान की गई। इन फैक्टर के अधिक सक्रिय होने से ट्यूमर बढ़ सकते हैं। अगर इन पर काबू पाने का तरीका खोज लिया जाता है तो एक उपचार से 17 कैसरों को ठीक किया जा सकेगा। एनकोड से मानव शरीर की सेहत से संबंधित कई गुत्थियां सुलझेंगी। जीन के समूह का ब्योरा मौजूद होने से डॉक्टर आपको होने वाली बीमारियों के खतरे के प्रति सचेत रहेंगे। sabhar :bhaskar.com

Read more

टेबलेट लें या गैलेक्सी नोट?

0

सैमसंग का गैलेक्सी नोट भारतीय और विदेशी बाजार में तेजी से पॉपुलर हुआ है। मगर इसके फीचर्स के बारे में लोगों के मन में काफी दुविधा भी है। क्या यह एक एडवांस मोबाइल है? जिसमें टेबलेट की खूबियां भी समाहित हैं। या फिर यह टेबलेट का छोटा रूप है? बेहतर होगा कि हम गैलेक्सी नोट्स के फीचर्स पर एक निगाह डालते हैं, जिससे आप इसके बारे में बेहतर फैसला कर सकें।

टेबलेट की खूबियां
यह तो तय है कि गैलेक्सी नोट एक अलग किस्म की मोबाइल डिवाइस है, जिसमें टेबलेट की खूबियां और मोबाइल फोन की सहूलियत का सुंदर तालमेल है। सबसे पहली खूबी है इसका बड़े साइज का स्क्रीन। करीब 5.3 इंच का इसका एचडी सुपर एमोलेड स्क्रीन दुनिया में अपनी तरह का पहला है। इस स्क्रीन की मदद से आप न सिर्फ वेबपेज का ज्यादा बेहतर डिस्प्ले पाते हैं बल्कि वीडियो और इ-बुक्स की भी बेहतर प्रस्तुति मिलती है और उन्हें स्क्रोल या जूम-इन करने की जरूरत नहीं पड़ती है।

स्मार्ट पेन
इसकी दूसरी खूबी है- स्मार्ट पेन। इसे स्टेट-आफ-द-आर्ट-इनपुट टेक्नोलाजी के नाम से भी जाना जाता है। इसकी मदद से आप न सिर्फ स्क्रीन पर कुछ लिख सकते हैं बल्कि ड्रा कर सकते हैं या उनमें रंग भी भर सकते हैं। यह डिवाइस आपको काफी रचनात्मक आजादी देती है। इस लिहाज से गैलेक्सी नोट उन लोगों के मिजाज से ज्यादा मेल खाता है जो रचनात्मक कार्यों से जुड़े हैं। यह एक ऐसा फीचर है जिसकी मदद से आप कभी भी, कहीं भी अपनी अभिव्यक्ति को रिकार्ड कर सकते हैं। चाहे तस्वीर उतारनी हो, फटाफट कुछ लिखना हो (टाइप नहीं- क्योंकि वह झंझट भरा होता है और जब तक मेल न करनी हो आप उससे परहेज करते हैं) या फिर कुछ रेखांकन करना हो।

स्पेशल फीचर्स
कलात्मकता के साथ इसके कई फिचर एक कामकाजी व्यक्ति या उसके बिजनेस मोबाइल की जरूरतों को भी पूरा करते हैं। S-प्लानर में आप को अपने डे-प्लान के लिए कई एडवांस फीचर मिलते हैं। इसके अलावा S-चॉयस के जरिए आप कई ऐसे एप्लीकेशन डाउनलोड कर सकते हैं- जो कि खास गैलेक्सी नोट्स को ध्यान में रखकर तैयार किए गए हैं। सैमसंग चैट-ऑन फीचर आपको न सिर्फ रीयल टाइम चैट की सुविधा देता है बल्कि इसकी मदद से टेक्स्ट, हाथ से लिखे नोट्स, तस्वीरें और वीडियो अपने मित्रों के साथ आसानी से शेयर कर सकते हैं।

मनोरंजन भी
जहां तक मनोरंजन की बात है तो इसके 1.4 गीगा हर्ट्ज ड्यूएल कोर प्रोसेसर की मदद से आप बखूबी रीयल टाइम वीडियो देख सकते हैं या फिर वीडियो गेम का आनंद उठा सकते हैं। गेम के शौकीन लोगों के लिए सैमसंग का गेम हब मदद कर सकता है। और अंत में यह फोन आसानी से आपकी जेब में समा जाता है sabhar : amarujala.com

Read more

फेसबुक पर अपना दूध बेच रही हैं मम्मियां

0



अपने फिगर को संतुलित रखने की चाह में मॉडर्न महिलाएं एक ओर जहां अपने बच्चों को अपना दूध नहीं पिलाना चाहतीं वहीं ब्रिटेन व अमेरिका की मम्मियां जल्दी पैसा बनाने के लिए फेसबुक समेत कई सामुदायिक मंचों से अपना दूध बेच रही हैं। हालांकि दूध खरीदने वाले माता-पिताओं का मानना है कि उनके शिशुओं को इससे फायदा हो रहा है। लेकिन विशेषज्ञों ने इस दूध के सुरक्षित होने पर आंशका जताई है। उनका कहना है कि दानदाता महिला के पूर्ण रूप से स्वस्थ होने की कोई निश्चितता नहीं होती। 

एक अध्ययन के अनुसार एस्सेक्स से न्यूकैसल तक की महिलाएं ताजा या फ्रीज किया हुआ दूध बेच रही हैं। इसकी कीमत एक पाउंड प्रति इकाई है जबकि अमेरिका में इसकी कीमत दो अमेरिकी डॉलर है। डेली मेल को एक वेबसाइट ने बताया कि हमारी इस व्यवस्था में साफ सुथरा दूध निजता पूर्ण तरीके से खरीदा जा सकता है। दानदाता माताएं अपने शिशु की उम्र के साथ अपने दूध को सूचीबद्ध कराती हैं। लेकिन जर्मनी के डॉक्टरों ने नए अभिभावकों को फेसबुक जैसे सोशल नेटवर्कों के जरिए निजी रूप से बच्चे के लिए दूध लेने के खिलाफ चेतावनी दी है।

साथ ही शिशु रोग विशेषज्ञों की संस्था के अध्यक्ष वूल्फरैम हार्टमैन ने कहा कि हो सकता है कि दानदाता महिलाएं कोई दवाई या नशीला पदार्थ ले रही हों, या उन्हें एड्स या हिपेटाइटिस जैसा कोई संक्रमित रोग हो। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ सप्ताह के बच्चे और कुछ महीने के बच्चे की पोषण की जरूरतों भी अलग-अलग होती हैं।

सामुदायिक मंचों के अतिरिक्त मातृ दुग्ध दान करने या प्राप्त करने के लिए कानूनी तरीके भी मौजूद हैं। कुछ केंद्र स्तनपान न करवा सकने वाली माताओं के बच्चों के लिए दूसरी महिलाओं का दूध लेकर संरक्षित करते हैं। ये बैंक पूर्व निगरानी से गुजरीं उन माताओं से दूध इकट्ठा करते हैं जिनके पास पर्याप्त दूध आपूर्ति हो और जिनका बच्चा छह माह से कम उम्र का हो। इसके बाद इसे पाश्च्युरीकृत किया जाता है और फिर नजदीकी अस्पतालों को दे दिया जाता है। sabhar: amarujala.com

Read more

 
Design by ThemeShift | Bloggerized by Lasantha - Free Blogger Templates | Best Web Hosting