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July 22, 2012 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

तंत्र ने सेक्‍स को स्प्रिचुअल बनाने का दुनिया में सबसे पहला प्रयास किया था

तंत्र ने सेक्‍स को स्प्रिचुअल बनाने का दुनिया में सबसे पहला प्रयास किया था। खजुराहो में खड़े मंदिर, पुरी और कोणार्क के मंदिर सबूत है। कभी आप खजुराहो की मूर्तियों देखी। तो आपको दो बातें अदभुत अनुभव होंगी। पहली तो बात यह है कि नग्‍न मैथुन की प्रतिमाओं को देखकर भी आपको ऐसा नहीं लगेगा कि उन में जरा भी कुछ गंदा है। जरा भी कुछ अग्‍ली है। नग्‍न मैथुन की प्रतिमाओं को देख कर कहीं भी ऐसा नहीं लगेगा कि कुछ कुरूप है; कुछ गंदा है, कुछ बुरा है। बल्‍कि मैथुन की प्रतिमाओं को देखकर एक शांति, एक पवित्रता का अनुभव होगा जो बड़ी हैरानी की बात है। वे प्रतिमाएं आध्‍यात्‍मिक सेक्‍स को जिन लोगों ने अनुभव किया था, उन शिल्‍पियों से निर्मित करवाई गई है। उन प्रतिमाओं के चेहरों पर……आप एक सेक्‍स से भरे हुए आदमी को देखें, उसकी आंखें देखें,उसका चेहरा देखें, वह घिनौना, घबराने वाला, कुरूप प्रतीत होगा। उसकी आंखों से एक झलक मिलती हुई मालूम होगी। जो घबराने वाली और डराने वाली होगी। प्‍यारे से प्‍यारे आदमी को, अपने निकटतम प्‍यारे से प्‍यारे व्‍यक्‍ति को भी स्‍त्री जब सेक्‍स से भरा हुआ पास आता हुआ देखती है तो उसे दुश्‍मन दि…

क्यों करें योग?

क्यों करें योग? 
अनिरुद्ध जोशी 'शतायु'

...तो नहीं है आपके लिए योग

आप कह सकते हैं कि इस सबके बावजूद हम क्यों करें योग, जबकि हम स्वस्थ हैं, मानसिक और शारीरिक रूप से हमें कोई समस्या नहीं है? ‍तब पहले तो यह जानना जरूरी है कि आपके भीतर आपका 'क्यों' है कि नहीं।

आनंद की अनुभूति : एक होता है सुख और एक होता है दु:ख। जो लोग योग करते हैं उन्हें पहली दफा समझ में आता है कि आनंद क्या होता है। जैसे सेक्स करते समय समझ में आता है कि सुख और दु:ख से अलग भी कोई अनुभूति है। इस तरह योगस्थ चित्त समस्त प्रकार के सुखों से ऊपर आनंद में स्थि‍त होता है। उस आनंद की अनुभूति न भोग में है न संभोग में और न ही अन्य किन्हीं क्षणिक सुखों में।

चेतना का विकास : मोटे तौर पर सृष्ट‍ि और चेतना के वेद और योग में पाँच स्तर बताए गए हैं। यह पाँच मंजिला मकान है- (1) जड़ (2) प्राण (3) मन (4) आत्मा और (5) परमात्मा।

जड़ : आप तमोगुणी हो, अजाग्रत हो तो आप जिंदा होते हुए भी मृत हो अर्थात् आपकी चेतना या आप स्वयं जड़ हो। बेहोशी में जी रहे हो आप। आपकी अवस्था स्वप्निक है। आपको इस बात का जरा भी अहसास नहीं है कि आप जिंदा हैं। …

हिग्स बोसोन से बदलेगी दुनिया

एक्सपट्र्स का मानना है कि गॉड पार्टिकल की खोज के बाद तकनीक, चिकित्सा और लाइफ साइंस के क्षेत्र में तरक्की होगी

जयपुर। आखिरकार पिछले चार वर्षो की कड़ी मेहनत के बाद वैज्ञानिकों ने हिग्स बोसॉन यानी गॉड पार्टिकल जैसे कण को खोज ही निकाला। लगभग 40 वर्ष पहले इसका नाम पहली बार वैज्ञानिक रूप से सामने आया था। हालांकि दुनिया के सबसे प्राचीन वेद ऋगवेद में ब्रह्मकण के नाम से इसका वर्णन मिलता है।

शहर के एक्सपट्र्स का भी मानना है कि हिग्स बोसॉन की उत्पत्ति से न सिर्फ ब्रह्मांड की अनदेखी परतों का पर्दाफाश होगा, बल्कि कम्यूनिकेशन और मेडिकल की फील्ड में भी नई क्रांति आएगी। शहर में विभिन्न वैज्ञानिकों से मेट्रो मिक्स टीम ने जाना, आखिर कैसे होगा हिग्स बोसॉन की खोज से इंसान को फायदा...

इंटरनेट होगा और भी तेज
बिग बैंग थ्योरी के कारण अब लाइफ साइंस को समझने में ज्यादा आसानी होगी। इसका सबसे ज्यादा फायदा कम्यूनिकेशन को मिलने की संभावना बढ़ गई है। इलेक्ट्रॉन, प्रोटोन और नैनो पार्टिकल्स की बदौलत अब समूचे विश्व में वापस संचार क्रांति का सूत्रपात हो सकता है। इससे न केवल इंटरनेट की स्पीड में तेजी आएगी, बल्कि मोबाइल …