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सोमवार, 23 जुलाई 2012

तंत्र ने सेक्‍स को स्प्रिचुअल बनाने का दुनिया में सबसे पहला प्रयास किया था

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OSHO SATSANG LIVE


तंत्र ने सेक्‍स को स्प्रिचुअल बनाने का दुनिया में सबसे पहला प्रयास किया था। खजुराहो में खड़े मंदिर, पुरी और कोणार्क के मंदिर सबूत है। कभी आप खजुराहो की मूर्तियों देखी। तो आपको दो बातें अदभुत अनुभव होंगी। पहली तो बात यह है कि नग्‍न मैथुन की प्रतिमाओं को देखकर भी आपको ऐसा नहीं लगेगा कि उन में जरा भी कुछ गंदा है। जरा भी कुछ अग्‍ली है। नग्‍न मैथुन की प्रतिमाओं को देख कर कहीं भी ऐसा नहीं लगेगा कि कुछ कुरूप है; कुछ गंदा है, कुछ बुरा है। बल्‍कि मैथुन की प्रतिमाओं को देखकर एक शांति, एक पवित्रता का अनुभव होगा जो बड़ी हैरानी की बात है। वे प्रतिमाएं आध्‍यात्‍मिक सेक्‍स को जिन लोगों ने अनुभव किया था, उन शिल्‍पियों से निर्मित करवाई गई है।
उन प्रतिमाओं के चेहरों पर……आप एक सेक्‍स से भरे हुए आदमी को देखें, उसकी आंखें देखें,उसका चेहरा देखें, वह घिनौना, घबराने वाला, कुरूप प्रतीत होगा। उसकी आंखों से एक झलक मिलती हुई मालूम होगी। जो घबराने वाली और डराने वाली होगी। प्‍यारे से प्‍यारे आदमी को, अपने निकटतम प्‍यारे से प्‍यारे व्‍यक्‍ति को भी स्‍त्री जब सेक्‍स से भरा हुआ पास आता हुआ देखती है तो उसे दुश्‍मन दिखाई पड़ता है, मित्र नहीं दिखाई पड़ता। प्‍यारी से प्‍यारी स्‍त्री को अगर कोई पुरूष अपने निकट सेक्‍स से भरा हुआ आता हुआ दिखाई देगा तो उसे आसे भीतर नरक दिखाई पड़ेगा, स्‍वर्ग नहीं दिखाई पड़ सकता।
लेकिन खजुराहो की प्रतिमाओं को देखें तो उनके चेहरे को देखकर ऐसा लगता है, जैसे बुद्ध का चेहरा हो, महावीर का चेहरा हो, मैथुन की प्रतिमाओं और मैथुन रत जोड़े के चेहरे पर जो भाव है, वे समाधि के है, और सारी प्रतिमाओं को देख लें और पीछे एक हल्‍की-सी शांति की झलक छूट जाएगी और कुछ भी नहीं। और एक आश्‍चर्य आपको अनुभव होगा।
आप सोचते होंगे कि नंगी तस्‍वीरें और मूर्तियां देखकर आपके भीतर कामुकता पैदा होगी,तो मैं आपसे कहता हूं, फिर आप देर न करें और सीधे खजुराहो चले जाएं। खजुराहो पृथ्‍वी पर इस समय अनूठी चीज है। अध्यात मिक जगत में उस से उत्‍तम इस समय हमारे पास और कोई धरोहर उस के मुकाबले नहीं बची है।
लेकिन हमारे कई निति शास्‍त्री पुरूषोतम दास टंडन और उनके कुछ साथी इस सुझाव के थे कि खजुराहो के मंदिर पर मिटटी छाप कर दीवालें बंद कर देनी चाहिए, क्‍योंकि उनको देखने से वासना पैदा हो सकती है। मैं हैरान हो गया।
खजुराहो के मंदिर जिन्‍होंने बनाए थे, उनका ख्‍याल यह था कि इन प्रतिमाओं को अगर कोई बैठकर घंटे भर देखे तो वासना से शून्‍य हो जाएगा। वे प्रतिमाएं आब्‍जेक्‍ट फार मेडि़टेशन रहीं हजारों वर्ष तक वे प्रतिमाएं ध्‍यान के लिए आब्‍जेक्‍ट का काम करती रही। जो लोग अति कामुक थ, उन्‍हें खजुराहो के मंदिर के पास भेजकर उन पर ध्‍यान करवाने के लिए कहा जाता था। कि तुम ध्‍यान करों—इन प्रतिमाओं को देखो और इनमें लीन हाँ जाओ।
अगर मैथुन की प्रतिमा को कोई घंटे भर तक शांत बैठ कर ध्‍यानमग्‍न होकर देखे तो उसके भीतर जो मैथुन करने का पागल भाव है, वह विलीन हो जाता है।
खजुराहो के मंदिर या कोणार्क और पुरी के मंदिर जैसे मंदिर सारे देश के गांव-गांव में होने चाहिए।
बाकी मंदिरों की कोई जरूरत नहीं है। वे बेवकूफी के सबूत है, उनमें कुछ नहीं है। उनमें न कोई वैज्ञानिकता है, न कोई अर्थ, न कोई प्रयोजन है। वे निपट गँवारी के सबूत है। लेकिन खजुराहो के मंदिर जरूर अर्थपूर्ण है।
जिस आदमी का भी मन सेक्‍स से बहुत भरा हो, वह जाकर इन पर ध्‍यान करे और वह हल्‍का लौटेगा शांत लोटेगा। तंत्रों ने जरूर सेक्‍स को आध्‍यात्‍मिक बनाने की कोशिश की थी। लेकिन इस मुल्‍क के नीति शास्त्री और मारल प्रीचर्स है उन दुष्‍टों ने उनकी बात को समाज तक पहुंचने नहीं दिया। वह मेरी बात भी पहुंचने देना नहीं चाहते है। मेरा चारों तरफ विरोध को कोई और कारण थोड़े ही है। लेकिन मैं न इन राजनितिगों से डरती हूं और न इन नीतिशास्‍त्रीयों से। जो सच है वो में कहता रहूंगा। उस की चाहे मुझे कुछ भी कीमत क्‍यों न चुकानी पड़े।
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ओशो द्वारा दिए गए विभिन्न अमृत प्रवचनों का संकलन.. shabhar :http://satsanglive.com

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क्यों करें योग?

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क्यों करें योग? 
अनिरुद्ध जोशी 'शतायु'

...तो नहीं है आपके लिए योग

आप कह सकते हैं कि इस सबके बावजूद हम क्यों करें योग, जबकि हम स्वस्थ हैं, मानसिक और शारीरिक रूप से हमें कोई समस्या नहीं है? ‍तब पहले तो यह जानना जरूरी है कि आपके भीतर आपका 'क्यों' है कि नहीं।

आनंद की अनुभूति : एक होता है सुख और एक होता है दु:ख। जो लोग योग करते हैं उन्हें पहली दफा समझ में आता है कि आनंद क्या होता है। जैसे सेक्स करते समय समझ में आता है कि सुख और दु:ख से अलग भी कोई अनुभूति है। इस तरह योगस्थ चित्त समस्त प्रकार के सुखों से ऊपर आनंद में स्थि‍त होता है। उस आनंद की अनुभूति न भोग में है न संभोग में और न ही अन्य किन्हीं क्षणिक सुखों में।

चेतना का विकास : मोटे तौर पर सृष्ट‍ि और चेतना के वेद और योग में पाँच स्तर बताए गए हैं। यह पाँच मंजिला मकान है- (1) जड़ (2) प्राण (3) मन (4) आत्मा और (5) परमात्मा।

जड़ : आप तमोगुणी हो, अजाग्रत हो तो आप जिंदा होते हुए भी मृत हो अर्थात् आपकी चेतना या आप स्वयं जड़ हो। बेहोशी में जी रहे हो आप। आपकी अवस्था स्वप्निक है। आपको इस बात का जरा भी अहसास नहीं है कि आप जिंदा हैं। आप वैसे ही जीते हैं जैसे क‍ि एक पत्थर या झाड़ जीता है या ‍फिर वैसा पशु जो चलाने पर ही चलता है।

प्राण : प्राण अर्थात फेफड़ों में भरी जाने वाली प्राणवायु जिससे कोई जिंदा है, इस बात का पता चलता है। यदि आपकी चेतना या कि आप स्वयं अपनी भावनाओं, भावुक क्षणों या व्यग्रताओं के गुलाम हैं तो आप प्राणिक चेतना हैं। आपमें विचार-शक्ति क्षीण है। आप कभी भी क्रोधी हो सकते हैं और किसी भी क्षण प्रेमपूर्ण हो सकते हैं। प्राणिक चेतना रजोगुण-प्रधान मानी जा सकती है।

योग का प्रथम सूत्र है- अथ:योगानुशासनम्। योगश्चित्तिवृत्तिनिरोध। अर्थात यदि आप अपने मन और शरीर से थक गए हैं, आपने जान लिया है क‍ि संसार असार है तो अब योग का अनुशासन समझें, क्योंकि अब आपका मन तैयार हो गया है। मन : मन में जीना अर्थात मनुष्य होना। मन का स्वयं का कोई अस्तित्व नहीं है। भावनाओं और विचारों के संगठित रूप को मन कहते हैं। मन के योग में भी कई स्तर बताए गए हैं। विचारशील मनुष्य मन से श्रेष्ठ बुद्धि में जीता है। उसमें तर्क की प्रधानता होती है। जो तर्कातीत है वही विवेकी है।

आत्मा : योग है मन से मुक्ति। जो मनुष्य मन से मुक्त हो गया है, वही शुद्ध आत्मा है, वही आत्मवान है अर्थात उसने स्वयं में स्वयं को स्थापित कर लिया है।

परमात्मा : परमात्मा को ब्रह्म कहा गया है, जिसका अर्थ विस्तार होता है। उस विराट विस्तार में लीन व्यक्ति को ब्रह्मलीन कहा जाता है और जो उसे जानने का प्रयास ही कर रहा है, उसे ब्राह्मण कहा गया। योगी योग बल द्वारा स्वयं को ब्रह्मलीन कर अमर हो जाता है, फिर उसकी न कोई मृत्यु है और न जन्म और यह भी क‍ि वह चाहे तो जन्मे न चाहे तो न जन्मे।

जागरण : चेतना की चार अवस्थाएँ हैं- (1) जाग्रत (2) स्वप्न (3) सुसुप्ति (4) तंद्रा। योगी व्यक्ति चारों अवस्थाओं में जाग्रत रहता है। तंद्रा उसे कहते हैं, जबकि व्यक्ति शरीर छोड़ चीर निद्रा में चला जाता है। ऐसी तंद्रा में भी योगी जागा हुआ होता है।

अधिकतर जागकर भी सोए-सोए से नजर आते हैं अर्थात बेहोश यंत्रवत जीवन। फिर जब सो जाते हैं तो अच्छे और बुरे स्वप्नों में जकड़ जाते हैं और फिर गहरी नींद अर्थात सुसुप्ति में चले जाते हैं वहाँ भी उन्हें स्वयं के होने का बोध नहीं रहता। यह बेहोशी की चरम अवस्था जड़ अवस्था है, तब तंद्रा कैसी होगी सोचें। योग आपकी तंद्रा भंग करता है। वह आपमें इतना जागरण भर देता है कि मृत्यु आती है तब आपको नहीं लगता क‍ि आप मर रहे हैं। लगता है कि शरीर छूट रहा है।

इस परम विस्तृत ब्रह्मांड में धरती पर खड़े आप स्वयं क्या हो, क्यों हो, कैसे हो, कब से हो, हो भी क‍ि नहीं, कब तक रहोगे। मेरा अस्तित्व है कि नहीं। ऐसा सोचने वाले के लिए ही योग है। जिसने योग के अनुशासन को निभाया उसने सुपर कांसेस मन को जाग्रत करने की दिशा में एक कदम बढ़ाया।

स्वयं की स्थिति समझे : योग का प्रथम सूत्र है- अथ:योगानुशासनम्। योगश्चित्तिवृत्तिनिरोध। अर्थात यदि आप अपने मन और शरीर से थक गए हैं, आपने जान लिया है क‍ि संसार असार है तो अब योग का अनुशासन समझें, क्योंकि अब आपका मन तैयार हो गया है, आप मैच्योर हो गए हैं तो अब समझें और अब भी नहीं समझते हैं तो अंधकार में खो जाने वाले हैं। यदि आपके भीतर का 'क्यों' मर गया है तो नहीं है आपके लिए योग।

अतत: : योग उनके लिए है जो अपना जीवन बदलना चाहते हैं। योग उनके लिए है जो इस ब्रह्मांड के सत्य को जानना चाहते हैं। योग उनके लिए भी है जो शक्ति सम्पन्न होना चाहते हैं और योग उनके लिए जो हर तरह से स्वस्थ होना चाहते हैं। आप किसी भी धर्म से हैं, यदि आप स्वयं को बदलना चाहते हैं तो योग आपकी मदद करेगा। आप विचार करें क‍ि आप योग क्यों और क्यों नहीं करना चाहते हैं।
प्रकाशन तिथि:  


Source: http://hi.shvoong.com  http://pratima_avasthi@yahoo.com/

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हिग्स बोसोन से बदलेगी दुनिया

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एक्सपट्र्स का मानना है कि गॉड पार्टिकल की खोज के बाद तकनीक, चिकित्सा और लाइफ साइंस के क्षेत्र में तरक्की होगी

जयपुर। आखिरकार पिछले चार वर्षो की कड़ी मेहनत के बाद वैज्ञानिकों ने हिग्स बोसॉन यानी गॉड पार्टिकल जैसे कण को खोज ही निकाला। लगभग 40 वर्ष पहले इसका नाम पहली बार वैज्ञानिक रूप से सामने आया था। हालांकि दुनिया के सबसे प्राचीन वेद ऋगवेद में ब्रह्मकण के नाम से इसका वर्णन मिलता है।

शहर के एक्सपट्र्स का भी मानना है कि हिग्स बोसॉन की उत्पत्ति से न सिर्फ ब्रह्मांड की अनदेखी परतों का पर्दाफाश होगा, बल्कि कम्यूनिकेशन और मेडिकल की फील्ड में भी नई क्रांति आएगी। शहर में विभिन्न वैज्ञानिकों से मेट्रो मिक्स टीम ने जाना, आखिर कैसे होगा हिग्स बोसॉन की खोज से इंसान को फायदा...

इंटरनेट होगा और भी तेज
बिग बैंग थ्योरी के कारण अब लाइफ साइंस को समझने में ज्यादा आसानी होगी। इसका सबसे ज्यादा फायदा कम्यूनिकेशन को मिलने की संभावना बढ़ गई है। इलेक्ट्रॉन, प्रोटोन और नैनो पार्टिकल्स की बदौलत अब समूचे विश्व में वापस संचार क्रांति का सूत्रपात हो सकता है। इससे न केवल इंटरनेट की स्पीड में तेजी आएगी, बल्कि मोबाइल भी सुपर कम्प्यूटर के जैसे काम करने लगेगा। जेनेवा में होना वाला यह प्रयोग सच में वैश्विक स्तर पर जीव उत्पत्ति की भी अनेक परतों का खुलासा करने में कामयाबी हासिल करेगा।
- डॉ. रोहित जैन, रिसर्च स्कॉलर, आरयू

गॉड पार्टिकल या हिग्स बोसॉन की खोज से जीवन की उत्पति की विभिन्न परतों पर प्रकाश डाला जा सकेगा। इससे यूनिवर्स की उत्पत्ति और उसकी वर्किग के बारे में गहन अध्ययन करने में आसानी होगी। साथ ही इससे ऑरिजिन ऑफ लाइफ और उसकी निरन्तरता के बारे में भी नए सिरे से सोचा जा सकेगा। यदि बॉयोलॉजी के दृष्टिकोण से सोचा जाए तो यह वैज्ञानिकों की ओर से की जाने वाली अति महत्वपूर्ण खोज में एक है, जिससे दुनिया के बनने की परतों पर भी गौर किया जा सकेगा और कई चीजों के बारे में जानकारी भी हासिल की जा सकेगी।
- प्रो. एसएल कोठारी, साइंटिस्ट, बॉटनी, आरयू

रिसर्च अभी भी चल रही है और कई तरह के तथ्य भविष्य में सामने आते रहेंगे। मेरा मानना है कि इस रिसर्च से सबसे ज्यादा डवपलमेंट टेक्नोलॉजी फील्ड में आएगा। जो पार्टिकल इस रिसर्च में वैज्ञानिकों को मिले हैं, वो मौजूद पार्टिकल से कई लाख गुना क्षमता लिए हुए हैं। ऎसे में टेक्नोलॉजी डवलपमेंट को गति मिल सकती है। इससे संचार और तकनीक में क्रांति आ सकती है, लेकिन इस रिसर्च के कई दुष्प्रभाव भी हो सकते हैं। जिस तरह से हर टेक्नोलॉजी के अच्छे-बुरे दोनों तरह के प्रभाव होते हैं। भविष्य में इन पार्टिकल के जरिए ज्यादा प्रभावी परमाणु बम बनाए जा सकते हैं, जो मानव जाति के लिए हानिकारक भी साबित हो सकते हैं।
- त्रिभुवन सिंह रमन, साइंटिस्ट

उपचार की दिशा में नया रिवोल्यूशन
जब भी कोई बीमारी होती है तो वो जेनेटिक बेस पर होती है। जिसमें कई छोटे-छोटे पार्टिकल मौजूद होते हैं। इन पार्टिकल में बदलाव स्वास्थ्य पर प्रभाव डालता है। रिसर्च में जो पार्टिकल्स सामने आए वो पार्टिकल्स ह्यूमन बॉडी में मौजूद पार्टिकल्स की तरह ही हैं। इन पर रिसर्च और उसके परिणाम मेडिकल फील्ड में बीमारी की उत्पत्ति, इसे खत्म करने और इसके उपचार की दिशा में रिवोल्यूशन लेकर आएंगे। इस रिसर्च से नैनो पार्टिकल टेक्नोलॉजी पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। वर्तमान में चिकित्सा पद्धति में यह पार्टिकल महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। जहां डॉक्टर पहुंचकर उपचार नहीं कर सकते हैं वहां डॉक्टर इन पार्टिकल की मदद से इलाज कर रहे हैं। यह उसी तरह है जिस तरह आरबीसी के अंदर ड्रग पहुंचाने के लिए इस पार्टिकल की सहायता से उपचार किया जा रहा है।
- डॉ. रमेश रूपरॉय, मेडिकल एक्सपर्ट

धर्म से जुडे लोग बोले
खोज से विज्ञान और धर्म की दूरियां होंगी कम
आज जिन तथ्यों की खोज वैज्ञानिक कर रहे हैं वो हजारों सालों पहले ही हमारे शास्त्रों में लिखे जा चुके हैं। हमारी संस्कृति में आदिकाल से ही विज्ञान रहा है। मैं यही कहूंगा कि विज्ञान और धर्म की तुलना करना सही नहीं है, क्योंकि ये दोनों ही अपनी जगह है। हमारे हिंदू धर्म की मान्यताओं से करोड़ों लोगों की आस्था जुड़ी हुई है । मैं वैज्ञानिकों की इस खोज की सराहना करना चाहूंगा, क्योंकि इसमें उन्होंने काफी प्रयास किए हैं। ये उनकी बहुत बड़ी उपलब्घि है। गॉड पार्टिकल की खोज होने से उम्मीद है कि विज्ञान और धर्म के बीच की दूरियां भी कम हो जाए, क्योंकि इससे पहले विज्ञान को ईश्वर के अस्तित्व पर विश्वास नहीं था।
- पंडित रामकिशोर शास्त्री, ज्योतिष्ााचार्य।

हमें विज्ञान से कभी भी एतराज नहीं रहा। मगर विज्ञान ने अब वही खोजा है जिसके बारे में हम पहले से जानते हैं। ये खोज हमारे विचारों का समर्थन करती है। ईश्वर का अस्तित्व तो पहले भी था, बस अब उसे विज्ञान ने भी मान लिया हैा। अब आम आदमी विज्ञान की मदद से इसकी गहराई को और अधिक समझ सकेगा। विज्ञान और आध्यात्म दोनों ही अपनी-अपनी जगह है उनकी तुलना नहीं की जा सकती। वैज्ञानिकों ने उसी शक्ति को खोजा है जिसका अस्तित्व पहले से है। ये खोज नई नहीं है। हां, मगर इस खोज का फायदा हमें किसी न किसी तरह से जरूर मिलेगा।  sabhar :
http://www.dailynewsnetwork.in

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