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April 15, 2012 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

बाबा रामदेव के नुस्‍खे में यकीन नहीं रखने वाले धोनी देश भर में खोलेंगे जिम

नई दिल्‍ली. टीम इंडिया के कप्‍तान महेंद्र सिंह धोनी का मानना है कि योग से उन्‍हें ज्‍यादा फायदा नहीं होता है। लेकिन धोनी ने देश भर में जिम खोलने का फैसला किया है। यह देश में किसी खिलाड़ी का अपनी तरह का पहला वेंचर होगा।

एक अखबार ने धोनी के बिजनेस पार्टनर और मैनेजर अरुण पांडेय के हवाले से लिखा है कि इस वेंचर (स्पोर्ट्सफिट वर्ल्ड प्राइवेट लिमिटेड) के तहत पांच सालों में देश भर में 200 जिम खोले जाएंगे। सूत्रों के मुताबिक कुछ विदेशी निवेशकों ने स्पोर्ट्सफिट वर्ल्ड में हिस्सेदारी खरीदी है और कंपनी अगले पांच सालों में 1,500-2,000 करोड़ रुपए निवेश करेगी।  

धोनी की सोच के उलट सचिन तेंडुलकर मानसिक, शारीरिक और आध्‍यात्मिक मजबूती हासिल करने के लिए योग पर भरोसा करते हैं। यह खुलासा किया है कि आईपीएल की दिल्‍ली डेयरडेविल्‍स टीम के योग प्रशिक्षक जेम्‍स हैरिंगटन ने। हैरिंगटन ने 2010-11 में टीम इंडिया के दक्षिण अफ्रीका दौरे के वक्‍त भारतीय क्रिकेटरों को योग के गुर सिखाए थे। हैरिंगटन ने कहा कि दक्षिण अफ्रीका दौरे के समय उन्‍होंने योग का एक सेशन लिया जिसमें धोनी ‘स्‍ट्रेचिंग’ पर जोर देने के मूड में नहीं द…

घर में न्यूड होकर करेंगी सफाई, चार्ज सिर्फ $100 !

टेक्सास. घर में काम करने वाली बाई यदि आपके सामने न्यूड होकर सफाई करने ऑफर दे तो आप क्या करेंगे? अजी चौंकिए मत। हिंदुस्तान में भले ही ऐसा कुछ नहीं होता हो लेकिन टेक्सास सिटी में यह संभव है।
शहर में एक न्यूड मेड सर्विस अपने ग्राहकों को ऐसी ही सुविधा उपलब्ध कराने का दावा कर रही है। जिसके बाद से पुलिस की नींद गायब हो गई है। स्थानीय पुलिस लगातार इस कंपनी पर नजर रखी हुई है।
मेलिशा बोरेत्त नाम की एक 26 वर्षीय महिला ने फेंटेसी मेड सर्विस नाम से एक कंपनी शुरू किया। मोहतरमा अपने ग्राहकों से प्रति घंटे का 100 डॉलर रूपए लेती हैं सफाई के नाम पर। इतना ही नहीं, ग्राहकों के अनुरोध पर यह मेड कम कपड़े या बिना कपड़ों के भी सफाई कर सकती है।

फिलहाल मेलिशा की कंपनी में तीन और महिलाएं काम कर रही हैं और धंधा अच्छा चल रहा है। लेकिन पुलिस के नजर रखने के बाद और मीडिया में उछलने से पूरा मामला बिगड़ गया है। स्थानीय पुलिस का कहना है कि मेलिशा अपने ग्राहकों को सेक्स के नाम पर रिझा रही हैं, जो कि गलत है। ऐसे काम की इजाजत हमारा कानून नहीं देता है। sabhar : bhaskar.com

मां बनने के लिए एक फीमेल फैन ने मांगे जॉन से स्पर्म

एक्टर से प्रोड्यूसर बने जॉन अब्राहम की फिल्म 'विकी डोनर' इस महीने रिलीज हो रही है। वह स्पर्म डोनेशन के मुद्दे पर शुरू से बोलते आए हैं और खुद डोनेट करने की बात करते रहे हैं। अब, जॉन से एक महिला प्रशंसक ने सचमुच में उनका स्पर्म मांगा है, ताकि वह मां बन सके।



मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, जॉन अब्राहम से एक शादीशुदा महिला ने स्पर्म डोनेट करने का रिक्वेस्ट किया है, जो मां नहीं बन पा रही हैं। उनके लिए आर्टिफिसियल इंसेमिनेशन ही मात्र एक रास्ता है।



महिला का कहना है कि वह जॉन के अलावा किसी और से स्पर्म लेने को तैयार नहीं हैं। स्पर्म डोनेशन के मुद्दे पर जॉन के विचारों का वह महिला सम्मान करती हैं।



जॉन ने हाल में ही एक फंक्शन में कहा था कि वह स्पर्म डोनेट करना चाहते हैं। इसलिए अब देखना है कि जॉन अपने वादे को निभाते हैं कि नहीं। sabhar : bhaskar.com

धरती बचाने के लिए ऊंट मारो प्रस्ताव

ऑस्ट्रेलिया में प्रदूषण कम करने के लिए ऊंटों को मारने का फैसला लिया जा रहा है. ऊंटों के कारण पर्यावरण में मीथेन गैस बढ़ जाती है जो धरती के तापमान को बढाती है. ऊंटों की मौत के बदले कंपनियों को मिलेगा कार्बन क्रेडिट. ऑस्ट्रेलिया की संसद में अगले हफ्ते एक अजीबोगरीब कानून को मंजूरी मिल सकती है. संसद में प्रस्ताव दिया जा रहा है कि ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन को कम करने के लिए ऊंटों की हत्या करनी जरूरी है. इस प्रस्ताव के अनुसार हर ऊंट के बदले 75 डॉलर का कार्बन क्रेडिट दिया जाएगा. कार्बन क्रेडिट उस अनुमति को कहते हैं जिस के तहत कंपनियों या देशों को कार्बन डाई ऑक्साइड के उत्सर्जन के लिए एक सीमा तय की जाती है और इसके लिए सर्टिफिकेट दिया जाता है. एक कार्बन क्रेडिट का मतलब है एक टन कार्बन डाई ऑक्साइड के उत्सर्जन की अनुमति. यानी एक ऊंट को मारने के बदले कंपनियों को एक टन अधिक कार्बन डाई ऑक्साइड का उत्सर्जान करने की अनुमति मिल सकेगी धरती का तापमान बढ़ने की सबसे बड़ी वजह कार्बन डाई ऑक्साइड को ही बताया जाता है. कार्बन डाई ऑक्साइड (CO2) के अलावा मीथेन (CH4) भी एक ऐसी गैस है जिसके कारण धरती का तापमान बढ़…

इंसानों से मिल जुल कर काम करेगा रोबोट

रजनीकांत का चिटी भले ही बॉलीवुड का रोबोट हो लेकिन दुनिया में ऐसे रोबोटों की भी कल्पना की जा रही है, जो इंसानों के करीब हों. भले ही वे दिखने में इंसानों जैसे न हों लेकिन उनके काम का तरीका हमारे जैसा ही हो. हाथी की सूंड़ की बात करते हैं. कैसा लचीला होता है. देख कर कभी कभी हंसी आ जाती है लेकिन अगर गौर से देखा जाए तो यह सूंड़ कितने काम की होती है. लकड़ी के मोटे गट्ठर उठाने हों या बड़ा पूरा तरबूज. हाथी बड़े आराम से ये काम कर सकता है. सोचिए अगर हाथी की सूंड़ की तरह कोई रोबोट बन जाए तो कितना आसान होगा. जर्मनी की मशीनरी टूल्स बनाने वाली मशहूर कंपनी फेस्टो ने हाथी को ध्यान में रख कर रोबोट तैयार किया है, जो अभी परीक्षण के स्तर पर है और कंपनी का कहना है कि इसके शानदार नतीजे आ रहे हैं. कंपनी के प्रोसेस ऑटोमेशन मैनेजमेंट प्रमुख डॉक्टर एकहार्ड रूस का कहना है, "हमारा लक्ष्य ऐसे उपकरण तैयार करना है, जो किसी भी जगह पर इंसानों के साथ मिल कर काम कर सकें. आम तौर पर रोबोट बेहद भारी भरकम और खतरनाक सा दिखने वाला होता है. लेकिन हम इस अवधारणा को बदलना चाहते हैं." कंपनी बायोनिक्स को आधार बना कर काम करन…

जीपीएस तकनीक से इंसान का ऑपरेशन

बहुत जल्द सर्जन भी रास्ता बताने वाली तकनीक का ऑपरेशन में उपयोग करेंगे. थ्री डी तस्वीरों का इस्तेमाल कर ऑपरेशन सटीक और सुरक्षित बन पाएंगे. इंफ्रारेड कैमरों ने डॉक्टरों को रास्ता दिखा दिया है. एक मिनट के लिए सोच कर देखिए आप ऑपरेशन थिएटर में हैं और सर्जन, प्रोफेसर गेरे स्ट्राउस साइनस का ऑपरेशन करने वाले हैं. पांच मॉनिटर अर्धगोलाकार स्थिति में ऑपरेशन टेबल पर रखे हुए हैं. ऊपर एक बड़ा मॉनिटर टंगा हुआ है और बीच में दो इन्फ्रारेड कैमरे लगे हैं. गेरो स्ट्राउस कहते है जिस तरह से ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम जीपीएस कारों में इस्तेमाल किए जाते हैं ठीक उसी तरह यहां भी होगा. स्ट्राउस के मुताबिक, "कार में आपके पास सेटेलाइट होता है और यह सेटेलाइट मैप के हिसाब से कार की स्थिति बताता है." ऑपरेशन में इंफ्रारेड कैमरे यही काम करते हैं, वो लगातार ऑपरेशन की तस्वीरें भेजते रहते हैं. एक छोटा रिसीवर उस मरीज से जुड़ा होता है जिसकी तस्वीर कैमरे से उतारी जाती है. जीपीएस सिस्टम में इस्तेमाल होने वाले मैप की जगह डॉक्टरों के पास सीटी स्कैन या फिर एमआरई की तस्वीर होती है जो उन्हें बताती है कि वो ठीक जा रहे हैं . हाई…

क्लासरूम में दिखा रहा था छात्रा को पोर्न फिल्म और...

कैलिफोर्निया स्टेट यूनिवर्सिटी से जुड़े हुए फ्रैंस्को कॉलेज के पब्लिक हेल्थ प्रोफेसर पैगी गिश पर एक छात्रा ने क्लासरूम में पोर्न फिल्म दिखाने का आरोप लगाया है। बकौल कैंपसरीफोर्म.ओआरजी साइट छात्रा ने आरोप लगाया है कि पैगी ने उसे 20 मिनट की पोर्न फिल्म क्लासरूम में दिखाई।

'एडवांस्ड सेक्सुअल टेक्नीक्स, वाल्यूम वन' नामक इस वीडियो में सेक्सुअल एक्सप्लिक्ट ऑडियो और ग्राफिक्स कंटेट था। छात्रा की शिकायत के बाद प्रशासन का ध्यान इस ओर गया। ह्यूमेन सेक्सुअलटी कोर्स के नाम पर इस वीडियो को दिखाया गया था।

पैगी का बचाव करते हुए फ्रैंस्को स्टेट कॉलेज के डीन एंड्र्यू हॉफ ने बताया कि 20 मिनट का यह वीडियो ह्यूमैन सेक्सुअलटी जनरल एजुकेशन कोर्स के तहत दिखाया गया था और इसका पोर्न फिल्म से कोई संबंध नहीं था।

स्कूल प्रशासन द्वारा शिक्षा कार्यक्रम के तहत दिखाई गई इस वीडियो के कारण प्रोफेसर पर कोई शिकायत दर्ज नहीं की गई है और मामले को दबा दिया गया है। SABHAR : BHASKAR.COM

ये है 'बाबाओं' के रहस्यमयी शक्तियों और चमत्कारों का राज!

नई दिल्ली. अपनी रहस्यमयी शक्तियों के जरिए लोगों के कल्याण का दावा करने वाला बाबाओं का 'सच' धीरे-धीरे सामने आ रहा है। उनके चमत्कार के कायल लोगों के आंखों पर से अंधविश्वास की पट्टी धीरे-धीरे हट रही है। कहीं बिना गए वहां के बारे में बता देना। किसी से बिना मिले उस तक अपनी बात पहुंचा देना। यह जादू या चमत्कार नहीं बल्कि टेलीपैथी है।

टेलीपैथी परामनोविज्ञान की एक शाखा है। इसका मतलब है दूर रहकर आपसी सूचनाओं का बगैर किसी भौतिक साधनों के आदान-प्रदान करना। यह एक ऐसी मानसिक तकनीक है जो दूरियों के बावजूद हमारी बातों को इच्छित लक्ष्य तक पहुंचा देती है। हालांकि इसे अभी विज्ञान की कसौटी पर कसा जा रहा है। इस पर शोध हो रहे हैं। अब तक हुए शोधों में शोधकर्ताओं को सकारात्मक परिणाम मिले हैं।

टेलीपैथी दो व्यक्तियों के बीच विचारों और भावनाओं के आदान-प्रदान को कहते हैं जिसमें हमारी पांच ज्ञानेंद्रियों का इस्तेमाल नहीं होता। यानी इसमें देखने, सुनने, सूंघने, छूने और चखने की शक्ति का इस्तेमाल नहीं होता है।

टेलीपैथी शब्द का सबसे पहले इस्तेमाल 1882 में फैड्रिक डब्लू एच मायर्स ने किया था। कहते हैं कि जिस व्य…

रात के अंधेरे में भी दिखता है इस अद्भुत बच्चे को

उसकी आंखें जन्म के समय आम इंसान की तरह काली या भूरे रंग की नहीं थीं। उसकी आंखें नीले रंग की थीं। विलक्षण आंखों वाला ये बच्चा अपने माता-पिता के साथ चीन के एक सुदूर गांव ग्वांज़ी में रहता है। उसका नाम नॉग यूहुई (nong youhui) है।



उसकी आंखों की एक और विशेषता ये है कि आंखों पर जब रोशनी पड़ती है, तो वो हल्की नीली होकर और भी चमकने लगती हैं। ठीक वैसे ही, जैसे किसी जानवर या बिल्ली की आंखों पर रोशनी पड़ते ही वो चमकने लगती हैं। जब पहली बार उसके माता-पिता को इस बारे में पता चला तो वे चिंतिंत हो गए।



ऐसा होना लाजिमी था। इसलिए उन्होंने नॉग यूहुई को स्थानीय डॉक्टर को दिखाया। डॉक्टर ने कहा कि बढ़ती उम्र के साथ ही इसकी आंखों का रंग भी अपने-आप ठीक हो जाएगा। सब कुछ ठीक-ठाक चल रहा था। ऐसे ही दिन बीतने लगे।



यह घटना 2009 की है। एक दिन उसे स्कूल में दिन के वक्त ही सूरज के उजाले में देखने पर परेशानी हुई तो उसके एक सहपाठी ने मज़ाक में कहा कि उसकी आंखें बिल्ली की आंखों की तरह दिख रही हैं। नॉग यूहुई के शिक्षक को जब इस बारे में पता चला, तो उन्होंने कंफर्म करने के लिए उसकी आंखों को टॉर्च की रोशनी में देखा। वह चौंक…