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शुक्रवार, 11 मई 2012

विटामिन-डी की कमी से परेशान रहेगा मन

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डिप्रेशन सिर्फ मनोरोग नहीं है। पैराथायरॉयड हार्मोन के साथ मेटाबॉलिज्म की गड़बड़ी और विटामिन बी-12 की कमी भी इसके लिए जिम्मेदार है।
एक हालिया रिसर्च से पता चला है कि विटामिन-डी की कमी भी डिप्रेशन की वजह बन सकती है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, परीक्षणों से साबित हुआ है कि विटामिन-डी की कमी से डिप्रेशन हो सकता है या फिर इसमें और बढ़ोतरी हो सकती है। अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास के वैज्ञानिकों ने करीब पांच साल की रिसर्च के बाद यह निष्कर्ष पेश किया है। इसके लिए उन्होंने 12,594 लोगों पर रिसर्च की। इसके तहत लोगों को 2 समूहों में बांटा गया। इनमें से पहले समूह में ऐसे लोग शामिल थे, जिन्हें पहले से डिप्रेशन था। दूसरे में वे थे, जिन्हें इसकी शिकायत नहीं थी।

बढ़ रही है संख्या 

विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, दुनिया भर में आज की तारीख में डेढ़ अरब से ज्यादा लोग डिप्रेशन के शिकार हैं। भारत में मानसिक रोगियों की मौजूदा संख्या करीब 24 करोड़ है। इनमें से कम से कम 20 फीसदी लोग डिप्रेशन की चपेट में हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ते तनाव और प्रतिस्पर्धा के कारण इस संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ 

वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. विपुल त्यागी कहते हैं कि डिप्रेशन सिर्फ मनोरोग नहीं है। बीमारियों के साथ ही मेटाबॉलिज्म की गड़बडिय़ों और पैराथायरॉयड ग्लैंड के ठीक से काम न करने के कारण भी डिप्रेशन हो सकता है। उनकी सलाह है कि डिप्रेशन का इलाज सिर्फ मन की बीमारी मानकर न किया जाए, बल्कि विटामिन बी-12 का स्तर जांचने के साथ ही पैराथायरॉयड ग्लैंड और मेटाबॉलिज्म से जुड़ी जांच भी की जानी चाहिए। इसके अलावा कोई विटामिन लेने से पहले इस बात की जांच जरूर करा लेनी चाहिए कि शरीर में उसकी कमी है या नहीं।

विटामिन-डी का स्रोत 

विटामिन-डी का सबसे अच्छा और प्राकृतिक स्रोत सूर्य की किरणें हैं। इसके अलावा कॉड लिवर ऑयल, अंडे और फैटी फिश में भी यह भरपूर मात्रा में होता है। शाकाहारी लोग इसकी पूर्ति दूध व अन्य दुग्ध उत्पादों से कर सकते हैं। sabhar : bhaskar.com

 

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