गुरुवार, 17 मई 2012

अब दान के जरिए नहीं 'दुकान' से मिल सकेंगे मानव अंग




शरीर का कोई अंग खराब या दुर्घटनावश नष्ट होने पर उसे किसी से लेने (डोनेट ऑर्गन) की जरूरत पड़ती है। इसके लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है क्योंकि अंग आमतौर पर उपलब्ध नहीं होते। लेकिन जल्दी ही यह बीते जमाने की बात होगी।

ब्रिटेन के यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन (यूसीएल) के प्रोफेसर अलेक्जेंडर सीफालियन ने मानव अंगों को प्रयोगशाला में बनाना शुरू कर दिया है। दुनिया में यह पहली बार है जब किसी व्यक्ति को डोनेट किए गए नहीं बल्कि प्रयोगशाला में बनाए गए अंग लगाए जाएंगे।

फिलहाल सीफालियन एक नाक तैयार कर चुके हैं जो अगले महीने एक मरीज को लगाई जाएगी। यूसीएल के नैनोटेक्नोलॉजी एंड रिजनरेटिव मेडिसिन विभाग को सीफालियन एक मानव अंग स्टोर करार देते हैं। खास बात यह कि अंगों को बनाने के लिए मरीज की कोशिकाओं का ही इस्तेमाल किया जाता है।

नैनो मटेरियल से अंग निर्माण की इस परियोजना पर यूसीएल एक लाख पौंड (करीब 80 लाख रुपए) खर्च कर चुका है। ऐसे लोग जो कैंसर या दुर्घटना में अपनी नाक खो चुके हैं, उनके लिए अंग प्रतिस्थापन की यह विधि चमत्कारिक साबित हो सकती है।

ऐसे बनते हैं अंगः सीफालियन के मुताबिक, अंग निर्माण करने वाले पदार्थ बेहद पतले लेटैक्स रबर की तरह हैं। कई अरब परमाणु से पॉलीमर का निर्माण होता है जिनमें प्रत्येक एक नैनोमीटर (एक मीटर का अरबवां हिस्सा) का होता है। इसकी मोटाई हमारे बाल से 40 हजार गुना कम होती है।

इस नैनो मटेरियल में कई हजार छोटे छिद्र होते हैं। इन्हीं छिद्रों के अंदर ऊतक (टिश्यू) की वृद्धि होती है और वे इसी का भाग बन जाते हैं। किसी अंग को मरीज को सीधे नहीं लगाया जाएगा बल्कि यह उस अंग के स्थान के बगल में त्वचा के नीचे बैलून के रूप में लगाया जाएगा। चार हफ्ते बाद जैसे-जैसे त्वचा और रक्तवाहिनियों में वृद्धि होगी, वह बैलून अंग की तरह आकार लेने लगेगा। इसके बाद उसका ट्रांसप्लांट किया जा सकेगा।
sabhar   :bhaskar.com

 

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