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शुक्रवार, 30 मार्च 2012

क्या है राज ठाकरे का असली रंग, पढ़िए और खुद ही फैसला कीजिए!

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मुंबई. अपनी राजनीति चमकाने, सियासी दुश्मनी निकालने और अपने निर्णय को सही साबित करने के लिए नेता कब कौन सी दलील दे बैंठे कुछ भी नहीं कहा जा सकता है। 

  
मनसे अध्यक्ष राज ठाकरे ने भी गुरुवार को ठाणो मनपा की स्थायी समिति के चुनाव में कुछ ऐसे ही अजीबो-गरीब तर्क के साथ राकांपा का समर्थन करने की घोषणा की। 

  
राज ठाकरे ने ठाणो मनपा की स्थायी समिति के चुनाव में केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार की पार्टी राकांपा का समर्थन करने की घोषणा की है। उन्होंने यह ऐलान राकांपा विधायक जितेंद्र आव्हाड से दादर स्थित अपने निवासस्थान ‘कृष्णकुंज’ पर करीब 40 मिनट तक बंद कमरे में हुई महत्वपूर्ण बैठक के बाद किया। 

  
राज ठाकरे का यूपी विरोध

  
राज ठाकरे ने राकांपा का समर्थन करने की घोषणा करते हुए तर्क दिया कि ठाणो मनपा के स्थायी समिति के चुनाव में शिवसेना-भाजपा ने बसपा को मदद करने का निर्णय लिया हुआ है। उन्होंने बताया कि शिवसेना विधायक एकनाथ शिंदे से फोन पर हुई बातचीत के दौरान उन्हें इसकी जानकारी मिली। 

  
इसलिए वे ठाणो में अब राकांपा का समर्थन करने वाले हैं, क्योंकि शिवसेना-भाजपा ने यूपी की पार्टी बसपा का समर्थन करने का निर्णय लिया है। मनसे अध्यक्ष की दलील है कि कम से कम राकांपा तो महाराष्ट्र के लोगों को तवज्जो देती है उन्हें आगे बढ़ने का मौका देती है। लिहाजा वे ठाणो में राकांपा का साथ देंगे। 

  
क्या है राज ठाकरे का असली रंग

  
ठाणो मनपा के स्थायी समिति के चुनाव में राकांपा का समर्थन देने की घोषणा करने वाले राज ठाकरे ने कुछ दिनों पहले ही ठाणो के महापौर पद के चुनाव में शिवसेना का समर्थन किया था। 

  
कहा जाता है कि तब राज ने शिवसेना को समर्थन सिर्फ इसलिए दिया था क्योंकि उन्हें उम्मीद थी कि नासिक महापौर के चुनाव में इसके बदले मनसे को शिवसेना का समर्थन मिलेगा। 

  
ध्यान रहे कि ठाणो मनपा के महापौर पद के चुनाव में राज ने शिवसेना का समर्थन करते हुए कहा था कि चूंकि ठाणो की जनता ने शिवसेना के पक्ष में जनादेश दिया है। लिहाजा उन्होंने उसका सम्मान करते हुए उसे समर्थन देने का निर्णय लिया है। परंतु अब राज की भूमिका बदल गई है! वे जनादेश किस पार्टी के पक्ष में है। 

  
यब बात भूल कर प्रांतवाद की राजनीति पर उतर आये हैं। सबसे चौकाने वाली बात यह है कि बसपा को वे यूपी की पार्टी बताकर विरोध कर रहे हैं। जबकि जिस राकांपा को उन्होंने प्रांतवाद की इस दुहाई के साथ समर्थन दिया है। उसने कुछ दिनों पहले ही उत्तर भारत के डी.पी. त्रिपाठी को राज्यसभा सदस्य बनाया है। 

  
इतना ही नहीं बिहार से संबंध रखने वाले तारिक अनवर को भी राकांपा ने ही राज्यसभा में भेजा है। यही कारण है कि अब शिवसेना कार्याध्यक्ष उद्धव ठाकरे के समर्थक राज की ठाणो मनपा में दोहरी भूमिका को मुद्दा बनाकर मराठी भाषियों में उनके असली रंग को उजागर करने में जुट गये हैं।
sabhar : bhaskar.com

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