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रविवार, 22 जनवरी 2012

जुए के बल पर जीता है शहर...

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मकाऊ (हांगकांग/चीन)। एक तरह से दुनिया की कसीनो कैपिटल है मकाऊ....इस शहर की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है शहर के जुआघर। शहर की आमदनी का जरिया यही जुआघर हैं। लगभग 75 फीसदी आमदनी इन्हीं जुआघरों से होती है। कभी लास वेगास इसी बात के लिए संसार में अपनी पहचान रखता था लेकिन वेगास के कसीनो मालिकों के लिए मकाऊ के दरवाजे खोलने के साथ ये शहर दुनिया के नक्शे पर छा गया। दर्जनों कैसिनो, सैकड़ों टेबलें। पैसा। पल में किस्मत राजा या रंक बनाती दिखती है यहां। दुनियाभर से माने हुए जुआरी यहां अपनी किस्मत आजमाने के लिए आते हैं। चारों ओर पैसा ही पैसा। पैसे की रहस्यमयी दुनिया। अपने जुआघरों के अलावा अपनी भव्य इमारतों, आधुनिकतम जुआघरों, लक्जरी होटलों और पुर्तगीज-चाइनीज संस्कृति के अनोखे कॉकटेल के साथ शहर आपको चकित करता है, रोमांचित करता है। एक ऐसी दुनिया में ले जाता है जिसका अनुभव नेवर बिफोर है। मीलों तक नीला साफ पानी औऱ शहर में गंगा-जमुनी संस्कृति के लोग। तहजीब और विरासत। एक शहर कितने रंग दिखा सकता है। मकाऊ को देखकर जाना जा सकता है। लोगों से मिलिए तो यकीन करना मुश्किल होता है कि इस शहर को संसार में जुआघरों के लिए पहचाना जाता है। सीधे सच्चे लोग। अपने काम से काम। सादगी। औऱ हर बात में आभार।
sabhar : bhaskar.com

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