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शुक्रवार, 30 दिसंबर 2011

ना अमेरिका, ना चीन, ये है दुनिया की सबसे खूंखार सेना

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दुनिया की सबसे ताकतवर और खतरनाक सेनाओं के बारे में पूछा जाए तो सबके जहन में अमेरिकी के मरीन कमांडोज का नाम आता है। लेकिन एक सेना ऐसी भी है जो अमेरिकी लड़ाकों को भी धूल चटा सकती है। यह विशेष बल है रूस की स्पिट्जनास।


स्पिट्जनास को दुनिया की सबसे खुफिया व खतरनाक सेना कहा जाए तो गलत नहीं होगा। इसके सैनिक किसी भी दुश्मन को चकमा देकर पटखनी देने में सक्षम होते हैं। शीत युद्ध काल में रूस की इस सेना का लोहा दुनिया ने माना था।

हालांकि शीत युद्ध को समाप्त हुए अरसा बीत चुका है, लेकिन स्पिट्जनास आज भी रूसी मिलिट्री का एक अहम हिस्सा है। स्पिट्जनास को खास मिशन के लिए इस्तेमाल किया जाता है। कोल्ड वॉर के समय इनका उपयोग दुश्मन के राजनीतिक और मिलिट्री प्रमुखों को ढूंढकर खत्म करने के लिए किया जाता था।

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फिल्म के लिए करवा डाला हॉट फोटोशूट, देखिए वीडियो

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इस साल एक फिल्म की एक्ट्रेसेज ने एक नई परंपरा की नींव डाल दी। पहले जहां किसी फैशन मैगजीन या कैलेंटर के लिए हॉट फोटोशूट करवाया जाता रहा है वहीं इस साल फिल्म 'लीथल कमीशन' के लिए इसकी एक्ट्रेस मधुरिमा तूली और अलंकृता डोगरा ने सेक्सी पोज देते हुए फोटोशूट करवा डाला।



इस फोटोशूट के बाद उम्मीद की जा रही है कि अब फिल्मों के सेट्स पर भी हॉट फोटोशूट्स होने लगेंगे। आनेवाली फिल्म 'लीथल कमीशन' के सेट पर फिल्म की अदाकारा मधुरिमा तूली ने जहां रेड बिकनी पहनकर जबरदस्त हॉट पोज दिए वहीं दूसरी अदाकारा अलंकृता डोगरा ने सेक्सी पोज देकर माहौल को और हॉट बना दिया।

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वीडियो देखकर अंदाजा लगाइए पर्दे पर किस तरह से आग लगाएंगी ये सेक्सी एक्ट्रेसेज, देखिए वीडियो...
 



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याना ने भी टॉपलेस होकर खूब दिखाए थे जलवे, देखिए तस्वीरें

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याना ने भी टॉपलेस होकर खूब दिखाए थे जलवे, देखिए तस्वीरें

 
Source: dainikbhaskar.com   |   Last Updated 8:23 AM (30/12/2011)
 
 
 
 
 

बॉलीवुड की हॉट बेब और आईटम गर्ल याना गुप्ता ने इस साल सुर्खियां बटोरने का कोई मौका नहीं छोड़ा|



पहले साल की शुरुआत में वह एक पार्टी में बिना अंतः वस्त्र पहने नजर आ गईं और वार्डरोब मॉल फंक्शन का शिकार होने के चलते सुर्ख़ियों में आईं| इसके बाद उन्होंने मई में एफएचएम मैगज़ीन के लिए हॉट फोटोशूट कराया जिसमें उन्होंने टॉपलेस होकर बहुत ही सेक्सी पोज दिए|



इस फोटोशूट के लिए याना को मोटी रकम मिलने की भी बात सामने आई थी| देखिए इस साल याना द्वारा कराए गए इस सेक्सी फोटोशूट की खास तस्वीरें:
 
 
 
 
 
 

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गुरुवार, 29 दिसंबर 2011

गॉड पार्टिकल के बहुत पास पहुंचा मानव

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दशकों की मशक्कत के बाद मानव सभ्यता का दावा है कि वह उस कण के बहुत पास पहुंच गई है, जिसने इस सृष्टि की उत्पत्ति की है. हिग्स बोसोन यानी गॉड पार्टिकल की तलाश लगभग पूरी हो गई और वैज्ञानिकों का दावा है कि इसका अस्तित्व है.

 
दुनिया की सबसे बड़ी प्रयोगशाला स्विट्जरलैंड के सर्न में चल रहे बरसों के प्रयोग के बाद मंगलवार को दुनिया भर के वैज्ञानिकों ने दावा किया कि हिग्स बोसोन कण अब पहुंच से दूर नहीं रहा. इस कण के बारे में करीब चार दशक पहले चर्चा शुरू हुई और विज्ञान का दावा है कि इसकी वजह से ही बिग बैंग विस्फोट हुआ, जिसके बाद यह पूरी कायनात बनी. हालांकि वैज्ञानिकों ने जोर देकर कहा कि अभी यह खोज पूरी नहीं हुई है.
इंग्लैंड में लीवरपूल यूनिवर्सिटी के थेमिस बोकॉक ने कहा, "अगर हिग्स की बात सही साबित हो जाती है, तो निश्चित तौर पर यह इस सदी की सबसे बड़ी खोजों में होगा. भौतिक विज्ञानियों ने धरती की रचना के बारे में अहम कड़ी को सुलझा लिया है, जिसका असर हमारे रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ता है."सर्न की महाप्रयोगशालासर्न की महाप्रयोगशाला
अद्भुत नजारा
कई मीटर लंबे हाइड्रॉन कोलाइडर में प्रयोग के बाद सर्न ने सनसनीखेज खुलासा किया. उनकी प्रेस कांफ्रेंस खचाखच भरी थी. सर्न के वैज्ञानिक ओलिवर बुखम्यूलर ने बताया कि दो अलग अलग प्रयोग के नतीजे एक ही दिशा में जा रहे हैं. हालांकि यहीं की महिला वैज्ञानिक फाबियोला जियानोटी ने सतर्कता भरे अंदाज में कहा, "मुझे लगता है कि हिग्स बोसोन यहीं है. लेकिन अभी इस बारे में आखिरी बयान देना थोड़ी जल्दबाजी होगी. अभी और ज्यादा रिसर्च की जरूरत है. अगले कुछ महीने बेहद दिलचस्प होने वाले हैं. मुझे नहीं मालूम कि क्या आने वाला है."
विज्ञान की धारणा है कि ब्रिटिश वैज्ञानिक पीटर हिग्स के नाम पर रखा गया बोसोन कण ही 13.7 अरब वर्ष पहले बिग बैंग विस्फोट का कारण था और इसकी वजह से आज ब्रह्मांड में जो कुछ है, उनका अपना द्रव्य है. अगर यह बात साबित हो जाती है कि विश्व को इलेक्ट्रोन और फोटोन की परिभाषाएं बदलनी होंगी. स्कूलों में भौतिकी की पढ़ाई बदल जाएगी. लेकिन अगर यह साबित नहीं हो पाता है तो इस सृष्टि का निर्माण फिर से पहेली बन कर रह जाएगा.
महान कामयाबी
पीटर हिग्सपीटर हिग्सविज्ञान में पिछले 60 सालों में इतनी बड़ी कामयाबी नहीं मिली है. सर्न के अंदर दो अलग अलग प्रयोग किए जा रहे हैं. इनका नाम एटलर और सीएमस है. दोनों का लक्ष्य हिग्स कण का पता लगाना है. मौजूदा वैज्ञानिक उपकरणों से इस कण के द्रव्यमान का पता नहीं लग सकता. इसलिए कई किलोमीटर लंबी सुरंगनुमा प्रयोगशाला तैयार की गई है, जिसमें तीन साल से भी ज्यादा समय से प्रयोग चल रहा है. यहां बिग बैंग विस्फोट जैसा माहौल तैयार किया गया है, ताकि इसके रहस्यों को समझा जा सके. इसे महाप्रयोग भी कहा जा रहा है.
अद्भुत बात है कि दोनों ही खोज के प्रमुखों ने दावा किया है कि उनके प्रयोग से एक जैसे नतीजे आ रहे हैं. दोनों इसे 124-125 गीगा इलेक्ट्रोनवोल्ट का बता रहे हैं. लेकिन अभी पूरी तरह बात नहीं बनी है. प्रयोग के दौरान जो कुछ भी निकल कर आया है, वैज्ञानिक भाषा में वह दूसरे स्तर तक को ही पार करता है, जबकि किसी खोज के लिए इसे पांच स्तरों तक पहुंचना जरूरी है. वैज्ञानिक अभी और आंकड़ों की मांग कर रहे हैं. उनका यह भी कहना है कि अगर गॉड पार्टिकल होता भी है, तो यह बहुत जल्दी क्षय हो जाने वाला या दूसरा रूप ले लेने वाला पदार्थ है.
रिपोर्टः रॉयटर्स, एपी/ए जमाल
संपादनः ओ सिंह
sabhar : DW-WORLD.DE

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स्किन फैक्टरी में बनेगी नकली त्वचा

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चार साल से छोटे लड़कों के जननांग से निकाली गई त्वचा से बिलकुल नई स्किन बन सकती है. जर्मनी की फ्राउनहोफर यूनिवर्सिटी ने रिसर्च पूरी कर ली है. इससे नई दवाइयों और कॉस्मेटिक उद्योग में बड़े बदलाव आ सकते हैं.

 
स्किन फैक्टरी, यह नाम किसी साइंस फिक्शन फिल्म का लगता है. लेकिन फ्राउनहोफर इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों ने सचमुच ऐसी मशीन बनाई है, जो त्वचा बनाती है. यह त्वचा दवाओं, रसायनों और कॉस्मेटिक के परीक्षण को आसान और सस्ता बना सकती है. साथ ही जानवरों पर इनके परीक्षण की जरूरत नहीं रह जाएगी.
त्वचा बनाने की यह मशीन सात मीटर लंबी, तीन मीटर चौड़ी और तीन मीटर ऊंची है. कांच की दीवार के पीछे रोबोट की छोटी बाहें काम कर रही हैं, पेट्री डिश को इधर उधर ले जा रहे हैं, खाल को खरोंच रहे हैं, एंजायम की मदद से ऊपरी त्वचा को सेल से अलग कर रहे हैं. संयोजी ऊतक और रंग वाली कोशिकाएं भी इस तरह पैदा की जाती हैं.
अहम रिसर्च
इस समय कोशिकाओं की आपूर्ति का काम चार साल तक के लड़कों के जननांग से निकाले गए अग्रभाग से किया जा रहा है. जर्मनी में श्टुटगार्ट शहर के फ्राउनहोफर इंस्टीट्यूट के प्रोडक्शन इंजीनियर आंद्रेयास टाउबे कहते हैं, "आदमी की उम्र जितनी बढ़ती जाती है, उसकी कोशिकाएं उतनी ही खराब काम करती हैं." कोशिकाएं विकसित करने के लिए स्टेमसेल पर भी शोध किया जा रहा है. टाउबे का कहना है, "महत्वपूर्ण बात यह है कि शुरुआती सेल एक जैसे स्रोत से आएं ताकि त्वचा के उत्पादन में अंतर से बचा जा सके."
डोनरों के हिसाब से हर नमूने से तीस लाख से एक करोड़ कोशिकाएं निकलती हैं जिनकी संख्या इंक्यूबेटर में सौ गुनी हो जाती है. एक सेंटीमीटर व्यास के 24 ट्यूबों वाले टिश्यू कल्चर प्लेट पर उनसे नई त्वचा का विकास होता है. नया एपीडर्मिस एक मिलीमीटर से भी पतला होता है. जब उन्हें शोधकर्ता जोड़ने वाली कोशिकाओं से जोड़ते हैं तो पूर्ण त्वचा बनती है जो पांच मिलीमीटर तक मोटी होती है. इस पूरी प्रक्रिया में छह हफ्ते तक लग सकते हैं. टाउबे कहते हैं, "इसे मशीन की मदद से भी तेज नहीं किया जा सकता, बल्कि जीव विज्ञान द्वारा निर्धारित होता है."
मुश्किल है रिसर्च
संयंत्र के अंदर सब कुछ पूरी तरह असंक्रमित होता है. इंक्यूबेटर के अंदर तापमान 37 डिग्री होता है. एक तापमान जिसमें बैक्टीरिया भी तेजी से बढ़ सकते हैं. त्वचा फैक्टरी में 24 टिश्यू कल्चर वाले 500 से अधिकों प्लेटों पर एक साथ काम होता है. फ्राउनहोफर इंस्टीट्यूट में इस तरह शोधकर्ता हर महीने त्वचा के 5000 नमूने तैयार करते हैं. लेकिन अब तक उन्हें कोई खरीदार नहीं मिला है क्योंकि अभी तक इस प्रक्रिया को यूरोपीय अधिकारियों से मान्यता नहीं मिली है. इसके लिए तुलनात्मक परीक्षणों की जरूरत होगी जो यह साबित कर सकें कि कृत्रिम त्वचा भी जानवरों की त्वचा जैसे नतीजे देते हैं. टाउबे कहते हैं, "मैं सोचता हूं कि नौ महीनों में हम शुरुआत कर सकते हैं." कृत्रिम त्वचा को खरीदने वाला उद्योग जगत होगा.
दवा उद्योग में बदलाव
जर्मनी में दवाइयां बनाने वाली कंपनियों के संघ के रॉल्फ होएम्के का कहना है कि नए तत्वों के विकास के लिए त्वचा के नमूनों का इस्तेमाल हो सकता है. वे कहते हैं, "हमारा विश्वास है कि कृत्रिम त्वचा की कोशिकाएं असली त्वचा जैसी हैं." अब तक त्वचा के नमूने छोटे पैमाने पर तैयार किए जाते थे, लेकिन होएम्के को उम्मीद है कि अब ऐसा बड़े पैमाने पर हो सकेगा. इसका इस्तेमाल कैंसर के शोध के अलावा पिगमेंट में गड़बड़ी, एलर्जी या फंगस की बीमारी के सिलसिले में किया जा सकेगा. श्टुटगार्ट में बनने वाली कृत्रिम त्वचा के नमूनों को सुरक्षा टेस्ट पास करने में सालों लग जाएंगे.इस तरह का परीक्षण दवाओं की मंजूरी के लिए भी जरूरी होता है. होएम्के कहते हैं, "इसमें अंतरराष्ट्रीय मानक बना हुआ है, उसकी प्रक्रिया को आप यूं ही बदल नहीं सकते."
चिकित्सा के क्षेत्र में भी कृत्रिम त्वचा की मांग है. 8 से 10 सेंटीमीटर चौड़े त्वचा के बैंडेज बाजार में उपलब्ध हैं और उन पर दो कंपनियों का कब्जा है. रिजेनरेटिव मेडिसीन सोसायटी की अध्यक्ष उलरिके श्वेमर कहती हैं कि और चौड़े बैंडेज के क्षेत्र में मांग बनी हुई है. टाउबे इसे भविष्य का सपना बता रहे हैं कि त्वचा फैक्टरी कभी न कभी इन्हें बनाना शुरू कर देंगी जिनका इस्तेमाल आग से जलने के कारण हुई घावों को भरने के लिए किया जा सकेगा. अभी तो आंख की त्वचा कोर्निया को बनाने पर काम चल रहा है.
रिपोर्ट: डीपीए/महेश झा
संपादन: ए जमाल  sabhar : DE-WORLD.DE

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रविवार, 25 दिसंबर 2011

धर्म और आस्था के नाम पर बलात्कार

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 धर्म और आस्था को ताक पर रख कर  कब तक धूर्त गुरु  लोगो से खिलवाड़  करते रहेगे | धर्म के नाम पर लोगों को मूर्ख बनाने की घटनायें भारत में  प्राचीन काल से सुनी और देखि जा सकती है | जहा एक तरफ प्रवचन  कहते है वही  दूसरे लोग  ढोग कहते है |

बड़े बड़े आश्रम में लडकिया लाई जाती जहा से वह वापस जाना नहीं चाहती है आखरी क्यों ? क्या इनके मन मंदिर को किसी चीज से बांध  दिया जाता है या इनके दिमाग को ब्रेन बॉस कर दिया जाता है | हम सब जानते है मनुष्य सामाजिक प्राणी है , तभी मनुष्य की मानसिक स्थिति वातावरण से परिवर्तित हो जाती है और धर्म गुरु जमकर उपभोग करते है| 

धर्म पर आस्था रखना बुरी बात नहीं है परन्तु अंधी आस्था अपने गुरु पर रखना पूरा जीवन बर्बाद कर सकती  है आज भारत के अलग अलग प्रान्त के  आश्रमों में लडकिया - महिलाये  धर्म गुरूओ का पाप झेलने के लिए मजबूर - लाचार है |   वशीकरण , तंत्र मंत्र , काला जादू , पूजा अर्चना , प्रवचन सभी का प्रयोग लड़के लडकियों के दिमाग को फेरने  के लिए  किया जाता है   ताकि आश्रम में रहने वाली लडकिया  और महिलाये घर का रुख न कर सके | जिदंगी भर गुलाम की जिदंगी काटते  रहे | 

 आज भी आश्रम में छोटी नादान बच्चियो के साथ हर रोज बलात्कार का नया पाठ रात होते ही  सिखाया जाता है | अगर स्त्री भूल से गर्भ वती हो गयी तो उसका  गर्भ पात करवा दिया जाता है नहीं तो किसी  चेले के साथ बाँध  विदा दिया जाता है | अगर जो  चेला चेली नहीं मानते  है तो उसे आश्रम के तहखाने में दफ़न कर दिया जाता है | 

बेचारा चेला अपने गुरु को हामी भरने के अलावा  नहीं कर पाता है वह भी गुरु मोह का शिकार है |  आश्रम  में रहने वाले लोग अपना मुह नहीं खोलते है मगर पीठ पीछे ही धर्म गुरु की पोल खोलने लगते है |   मेरे मित्र ने बताया था  हरिद्वार में ऐसा आश्रम जहा लड़के - लडकियों  को गंजा   करके पहले गेरूआ वस्त्र धारण करवाए जाते है फिर पूजा पाठ का ढोग करके   मन को परिवर्तित कर देते है फिर रात होते ही जोर जोर की आवाजो से आश्रम गुजने लगता है | 


उनके साथ आश्रम के लोग ही बलात्कार करते है | जिससे वह अपने घर नहीं  भाग सके | किसी से कुछ कह न सके |  दिन  के उजाले में पूजा  पाठ  - कथा कीर्तन - प्रवचन का शोर चलता है मगर सूरज अस्त होते ही सभी भोग वासना में  खो जाते है | यहाँ पर लडको को भी नहीं बक्शा जाता है कुछ बाबा और गुरु तो  लडकियों के बजाये लडको के बहुत शौकीन है |

हमारे शहर में गुरु जी आये तो काफी  लोग मोह में बह गए उसके साथ ही मेरी जाती बिरादरी की कन्या मोह में फस गयी, उसके बाद वह  सपरिवार गुरु जी के आश्रम में पहुचे तो कन्या घर आने को तैयार नहीं थी  | घर वाले परेशान आखिर क्या हो गया है फिर वह लड़की आश्रम में रहने लगी  थी  | न जाने उस लड़की पर कौन सा तंत्र  किया था |


 वह रिश्तेदारों के घर जाती तो अपनी आश्रम की कहानी सुनाती और लडकियो  को बहलाना फुसलाना शुरू कर दिया | मुझे याद है  वह अपनी मुफ्त की बाते  हमारी अम्मा को सुना रही थी तो पापा बरस पड़े |  बोले तुम चुप रखो हम सब जानते है आखिर तुम्हारे साथ क्या हुआ है  जो तुम्हारे साथ हुआ वही दूसरे  के साथ दोहराना चाहती हो | यह  बात करीव १५ साल पुरानी है तब से लेकर आज तक वह घर नहीं आयी है |

उसके बाद में उसकी  ही दो और बहने उसके नक़्शे कदम पर चलकर अपने घर को तिलांजलि देकर  चली गयी | आज भी तीनो बहने आश्रम में रह रही है | हमारे घर वाले बताते है तीनो बहनों के साथ बलात्कार करके ब्लैकमेल  करके फोटो बना ली थी | वह आज भी ब्लैक मेल की जिन्दगी बसर कर रही है |

आखिर यह क्या  है मुझे समझ में नहीं आता है   कृपा करके  मानव गुरुओ से बचकर  रहे नहीं तो किसी का  भी जीवन नरक हो सकता है |


यह लेख  साक्षात्कार.कॉम - साक्षात्कार.ओर्ग , साक्षात्कार टीवी.कॉम   संपादक सुशील गंगवार   ने लिखा है जो पिछले ११ साल से प्रिंट मीडिया , वेब मीडिया , इलेक्ट्रोनिक मीडिया के लिए काम कर रहे है उनसे संपर्क  ०९१६७६१८८६६  पर करे |
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