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गुरुवार, 22 दिसंबर 2011

आर्केमेडीज ने बर्निंग मिरर से पल भर में भस्म कर डाला था रोमन जहाज !

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तीसरी सदी ईसापूर्व के ग्रीक गणितज्ञ आर्केमेडीज ने उस समय जो सिद्धांत बनाए थे, वे आज भी इंजीनिरिंग साइंस का मार्गदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने कई एडवांस सैन्य तकनीकें भी विकसित की थीं। आर्केमेडीज से संबंधित मशहूर कहानियों में उनके बनाए बर्निग मिरर के किस्से भी पढ़े जा सकते हैं। यह एक विशाल कांच था, जिससे किसी भी चीज़ में आग लगाई जा सकती थी। वक्त के आगोश में ये मिरर भी कहीं खो गया और बाद में इस बात पर बहस होने लगी कि क्या वाकई कोई ऐसा आईना था?



कहा जाता है कि 212 ईसापूर्व में रोमन्स ने ग्रीक के सायराकूसे पर हमला किया था। ऐसे में आर्केमेडीज ने बर्निग मिरर से रोमन जहाजों पर सूर्य की रोशनी का प्रतिबिंब डालकर उन्हें जला दिया था। इस तरह उन्होंने ग्रीक को एक बड़ी नौसैनिक जीत दिलाई थी और रोमन्स को वहां से भागना पड़ा था। बाद में एक ग्रीक उत्सव के दौरान मौके का फायदा उठाकर मारकस क्लाउडिअस मार्सेलस ने सायराकूसे पर कब्जा कर लिया था।



12वीं सदी के बायजैंटीन इतिहासकार जॉन ट्ज़ीट्ज़ेस ने रोमन इतिहासकार डिओ कैसिअस (155 से 235 ईस्वी) की लिखित जानकारी के अनुसार बताया था कि यह मिरर षटकोण आकार का था। इस पर तांबे की पॉलिश थी और बहुत से छोटे आईने इसके आसपास लगे थे। एक फ्रेम में ये सभी फिट किए गए थे। मिरर सूर्य की रोशनी जमा कर उसे एक लेजर जैसी बीम बना देते थे।



17वीं सदी में डेस्क्रेट्स ने बर्निग मिरर को काल्पनिक बताया। फिर भी 1747 में जॉर्ज लुइस लेक्लेर्क और कॉम्टे डे बफॉन ने दावा किया कि उन्होंने इसी तरह 150 फीट दूर से एक खजूर का पेड़ जलाया है। तब से लेकर आज तक ऐसे कई प्रयोग किए गए हैं। इन्हें देखते हुए आर्केमेडीज के बर्निग मिरर के किस्सों को खारिज नहीं किया जा सकता। sabhar : bhaskar.com

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कैबिनेट ने मुस्लिम आरक्षण को मंजूरी दी

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नई दिल्ली. केंद्रीय कैबिनेट ने गुरुवार शाम को मुस्लिमों को आरक्षण को मंजूरी दे दी। ओबीसी के 27 प्रतिशत कोटे के अंदर 4.5 फीसदी कोटा अब मुस्लिमों का होगा।  
लोकपाल में भी अल्पसंख्यकों को आरक्षण, कमजोर लोकपाल से अन्ना नाराज
केंद्रीय कानून मंत्री सलमान खुर्शीद ने कहा है कि सरकार लोकपाल में बदलाव के लिए तैयार हैं। वहीं संसद में लोकपाल बिल पेश किए जाने के बाद प्रतिक्रिया देते हुए अन्ना हजारे ने कहा कि सरकार का लोकपाल भ्रष्टाचार को मिटा पाने में नाकाम साबित होगा। बिल को नकारते हुए अन्ना ने कहा कि जब तक बिल गरीबों को भ्रष्टाचार से मुक्ति नहीं दिलाता तब तक यह बेकार है।

इससे पहले सरकार ने इस साल सदन के पटल पर रखे गए पुराने लोकपाल बिल को वापस लेने का ऐलान किया और नया बिल सदन के पटल पर रखा। लोकपाल के मौजूदा प्रारूप को सदन ने मंजूरी भी दे दी है। अब 27 दिसंबर को इस बिल पर चर्चा होगी। लेकिन लोकपाल के पैनल में अल्‍पसंख्‍यकों को आरक्षण देने पर विपक्ष ने भारी एतराज जताया। लोकसभा की कार्यवाही दोपहर बाद साढ़े तीन बजे फिर शुरू हुई तो नेता प्रतिपक्ष सुषमा स्‍वराज ने लोकपाल बिल के मौजूदा प्रारूप पर आपत्ति जताई और इसमें संशोधन कर सदन में वापस लाने की मांग की।

उन्‍होंने लोकपाल की बेंच के सदस्‍यों में आरक्षण की सीमा पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस प्रावधान की भाषा ही असंवैधानिक है क्‍योंकि इसमें कहा गया है 50 फीसदी से कम आरक्षण नहीं होगा। जबकि सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में आरक्षण की अधिकतम सीमा 50 फीसदी तय की है। 9 में से 5 सदस्‍यों के लिए आरक्षण का प्रावधान संविधान का उल्‍लंघन है। इसके अलावा इसमें धार्मिक आधार पर आरक्षण दिए जाने का संशोधन लाया जा रहा है जो बिल्‍कुल असंवैधानिक है। नियमों के तहत अन्‍य पिछड़ा, अनुसूचित जाति/जनजाति वर्ग के लिए आरक्षण का प्रावधान है, मजहब के आधार पर आरक्षण देना संवैधानिक नहीं है।

सुषमा स्‍वराज की आपत्तियों का सदन नेता प्रणब मुखर्जी तो मुंहतोड़ जवाब नहीं दे पाए लेकिन राजद प्रमुख लालू प्रसाद को मौका मिला तो उन्‍होंने कहा कि यह कोई सरकारी नौकरी नहीं है जहां 50 फीसदी से अधिक आरक्षण की अनुमति नहीं दी जा सकती है। लालू की इस टिप्‍पणी पर कांग्रेस सहित यूपीए के सहयोगी सांसदों ने जोरदार ठहाका लगाया। संसदीय कार्यमंत्री पवन बंसल ने तो मेज थपथपाकर लालू की टिप्‍पणी का समर्थन किया। राजद प्रमुख ने कहा कि अल्‍पसंख्‍यक का मतलब केवल मुसलमान ही नहीं बल्कि सिख, ईसाई, बौद्ध भी इसी श्रेणी में आते हैं।

लालू ने टीम अन्‍ना पर निशाना साधते हुए कहा कि विरोध प्रदर्शन से देश नहीं चलता है। उन्‍होंने कहा, ‘कल कोई कहेगा कि ये करो नहीं तो सोनिया, राहुल के घरों पर प्रदर्शन कराएंगे। यह कोई तरीका है। आंदोलन के डर से गलत काम नहीं होना चाहिए। मीडिया को लोकपाल के दायरे में क्‍यों डाला गया? यह बिल आनन-फानन में आया है इसलिए गंभीरता से विचार करने के बाद ही इसे सदन में पेश किया जाना चाहिए।’ लालू ने अन्‍ना हजारे को सेहत पर ध्‍यान देने की सलाह दी।

पीएम को लोकपाल के दायरे से बिल्‍कुल बाहर रखे जाने की वकालत करते हुए लालू ने कहा कि पूर्व सांसद की शिकायत को सात साल तक लोकपाल के दायरे में लाने की बात तो टीम अन्‍ना ने भी नहीं की थी। लेकिन ऐसा प्रावधान किया जाना चाहिए। उन्‍होंने कहा कि सीबीआई को बिल्‍कुल भी लोकपाल के दायरे में नहीं लाया जाना चाहिए। लालू जिस वक्‍त अपना भाषण दे रहे थे, उस वक्‍त सोनिया गांधी भी मुस्‍कुराती दिखाई दीं। लालू अपनी बात खत्‍म करने में अधिक वक्‍त लेने लगे तो स्‍पीकर की कुर्सी पर बैठे फ्रांसिस्‍को सरडिन्‍हा को कहना पड़ा कि आप सदन की कार्यवाही को ‘हाइजैक’ मत कीजिए।

लालू प्रसाद को 15 मिनट और बाकी सांसदों को दो-तीन मिनट दिए जाने पर भाजपा नेता यशवंत सिन्‍हा ने सरदिन्हा पक्षपात करने का आरोप लगाते हुए कहा कि ये तो मनमानी है। सिन्‍हा ने कहा, ‘हम सुबह से बिल को पेश किए जाने का इंतजार कर रहे हैं। लेकिन सरकार ने तो बिल्‍कुल नौसिखुए की तरह जल्‍दबाजी में बिल तैयार किया है। हम इसका विरोध करते हैं।’


गुरुदास दासगुप्‍ता ने कहा कि लो‍कपाल बिल जल्‍दबाजी और किसी दबाव में पास नहीं होना चाहिए। इस पर प्रणब मुखर्जी ने कहा कि लोकपाल के लिए सभी सरकारों ने कोशिश की। लोकपाल जल्‍दबाजी का नतीजा नहीं है। इस पर मौजूदा सरकार ने अप्रैल से ही सभी दलों की सहमति लेने की कोशिश की। कानून की वैधता तय करना कोर्ट का काम है।

उन्‍होंने माकपा नेता के बयान पर टिप्‍पणी करते हुए कहा कि लोग सलाह देने से पहले ये बताएं कि वो अन्‍ना के पास क्‍यों गए?

लालू की जिद पर झुकी कांग्रेस!
इससे पहले लालू प्रसाद की लोकपाल में अल्‍पसंख्‍यकों के लिए आरक्षण की मांग पर कांग्रेस आखिरकार झुक गई। कांग्रेस कोर कमेटी ने बिल में संशोधन के जरिये अल्‍पसंख्‍यकों को लोकपाल में आरक्षण दिए जाने का फैसला कर लिया है। ऐसी खबर है कि ओबीसी कोटे के तहत ही यह आरक्षण दिया जा सकता है। इस मुद्दे पर पहले लालू ने सदन में हंगामा किया फिर सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव ने अल्‍पसंख्‍यकों के आरक्षण का मुद्दा उठाया। हंगामा बढ़ने के चलते लोकसभा की कार्यवाही पहले दो बजे और फिर साढ़े तीन बजे तक के लिए स्‍थगित करनी पड़ी। 
इस बीच, सरकार ने लालू को मनाने तथा लालू और शरद यादव को साथ लाने की कोशिश की। वित्‍त मंत्री मंत्री प्रणब मुखर्जी की शरद यादव और लालू के साथ बैठक हुई। इसके बाद लालू, प्रणब और असदुद्दीन सिद्दिकी प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मिलने पहुंचे। पीएम ने शरद यादव से फोन पर बात की। शरद यादव ने ओबीसी कोटे के तहत अल्‍पसंख्‍यकों को आरक्षण दिए जाने का सुझाव दिया है। प्रणब, बंसल और नारायणसामी की पीएम से बैठक हुई। कांग्रेस कोर ग्रुप की इस बैठक में सोनिया गांधी और सलमान खुर्शीद भी शामिल हुए।

गुरुवार को लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही लालू की अगुवाई में विपक्षी दलों के सांसद हंगामा और शोर-गुल करने लगे। लालू लोकपाल में अल्‍पसंख्‍यकों को आरक्षण की मांग कर रहे हैं कुछ सांसदों ने लोकपाल बिल की कॉपी नहीं मिलने पर हंगामा किया, वहीं कई सांसद कॉपी देर से मिलने से नाराज हैं। लालू की अगुवाई में विपक्षी दल के सांसद 'वेल' में पहुंच गए और लोकपाल बिल का विरोध करना शुरू कर दिया। लालू का कहना था कि अगर अल्‍पसंख्‍यकों के लिए आरक्षण की व्‍यवस्‍था नहीं की गई तो बिल पेश नहीं होने दिया जाएगा।

लालू ने बिल की कॉपी देर से मिलने की वजह बताते हुए कहा, ‘आरएसएस और बीजेपी ने अल्‍पसंख्‍यकों को इससे बाहर करने के लिए कांग्रेस पर दबाव डाला। इस वजह से संशोधन कर बिल की कॉपी बांटने में देर हो गई। सरकार को इस बिल को सुधार कर लाना चाहिए तब इसे पेश करना चाहिए।’  लालू ने कहा, 'आरएसएस और बीजेपी के दबाव से लोकपाल बिल से अल्‍पसंख्‍यकों को छांटा गया। ये साजिश है। सबसे खतरनाक बात ये है कि बीजेपी और आरएसएस के दबाव में बिल से मुस्लिम समुदाय के लिए 50 फीसदी आरक्षण उड़ा दिया गया।'

लोकसभा स्‍पीकर मीरा कुमार के बार-बार अनुरोध के बावजूद लालू सहित विपक्षी सांसद शांत नहीं हुए। स्‍पीकर ने कहा, 'लालू जी जो बिल अभी पेश ही नहीं हुआ है उस पर बात नहीं कीजिए।' आखिरकार स्‍पीकर को सदन की कार्यवाही दोपहर दो बजे तक स्‍थगित करनी पड़ी। कार्यवाही दोबारा शुरू हुई तो अल्‍पसंख्‍यकों के आरक्षण का मसला छाया रहा। मुलायम सिंह ने कहा, ' लोकपाल से अल्‍पसंख्‍यकों को क्‍यों निकाला गया? सच्‍चर कमेटी की रिपोर्ट को अभी तक लागू क्‍यों नहीं किया?'

हालांकि खाद्य सुरक्षा विधेयक लोकसभा में पेश कर दिया गया है। संविधान में 111वें संशोधन विधेयक को सदन ने पारित कर दिया है। sabhar : bhaskar.com

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