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शुक्रवार, 9 दिसंबर 2011

वीडियो में देखें कैसे खुले पार्क में मना रहे थे रंगरलियां, तभी आ धमके...

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गाजियाबाद।  बात एक हफ्ते पहले की है। इस दिन साहिबाबाद के राम मनोहर लोहिया पार्क में प्रेमी जोड़ों मस्त थे। तभी एक महिला दरोगा पूरे दलबल के साथ अचानक पार्क में पहुंच जाती हैं और वहां मौजूद नौजवानों पर बिजली बनकर गिरती हैं। जोड़ों को पकड़ कर समझाने और दंड देने का काम करती है। साहिबाबाद इलाके के राम मनोहर लोहिया पार्क में इन दिनों ऑपरेशन मजनूं अभियान चला है। यहां गाजियाबाद पुलिस की टीम छापामार दस्ते की तरह कभी भी, कहीं भी अचानक धमक पड़ती है और फिर शुरू हो जाता है खाकी का खौफ दिखाने का सिलसिला। वीडियो में आप देखिए ऑपरेशन मजनूं...
साभार एएनआई   sabhar : bhaskar.com
 

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मौज या 'मानसिक' बीमारी, अमेरिका में युवाओं के बीच न्यूड पार्टी की खुमारी

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न्यूयार्क में कुछ युवा आजकल नग्नता को बढ़ावा दे रहे हैं, उनका सोचना है कि आने वाले समय में नग्नता निंदा का विषय नहीं रहेगा और समाज के हर तबके द्वारा इसे स्वीकार किया जाएगा। 

बीते 19 नवंबर को न्यूयार्क के सोहो क्षेत्र के 18 से 40 वर्ष के कुछ फैशनेबल पुरूषों और महिलाओं द्वारा नग्नता की पहली वर्षगांठ मनाने के लिए एकत्रित हुए, जहां सभी लोग पूरी तरह नग्न थे। 

इस पार्टी में उपस्थित सभी नग्न लोगों ने एक-गूसरे से बात की, शराब पी और खूब एन्जॉय किया। इन लोगों ने आशा जताई कि भविष्य में होने वाली इस तरह की पार्टियों में अधिक से अधिक लोग नग्न होगें और न्यूडिज़्म को बढ़ावा देंगे। sabhar : bhaskar.com

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होटल का गेट खोलते ही दंग रह गई पुलिस, न्यूड हो रंगरेलियां...

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मेरठ। शहर में दिल्ली रोड पर स्थित एक होटल में गुप्त सूचना मिलने पर रेड मारने पहुंची पुलिस ने ज्यों ही कमरे का गेट खोला भौंचक्की रह गई। यहां कमरे के अंदर कई प्रेमी जोड़े न्यूड होकर अश्लील हरकतें करते हुए मिले।

पुलिस के आने की सूचना मिलने पर यहां भगदड़ मच गई। सभी जोड़ों को गिरफ्तार कर लिया गया। कुछ देर बाद इनको बिना कानूनी कार्रवाई किए छोड़ दिया गया।

जानकारी के मुताबिक दिल्ली रोड पर स्थित एक होटल में प्रेमी युगलों द्वारा अश्लील हरकतें करने की सूचना टीपीनगर पुलिस को मिली। पुलिस मौके पर पहुंची और तलाशी के दौरान होटल के कमरों से दो प्रेमी युगल को आपत्तिजनक स्थिति में पकड़ लिया। यहां जमा भीड़ ने बताया कि यहां आए दिन शराब और अय्याशी का धंधा चलता है।

पुलिस होटल से पकड़े गए जोड़ों को साथ ले आई। सभी के परिजनों को सूचित किया। परिजनों से बातचीत के बाद युवतियों को उनके हवाले कर दिया। यहां जब पुलिस से कार्रवाई के संबंध में मीडिया ने पूछा तो पुलिस ने कुछ भी साझा करने से इंकार कर दिया। sabhar: bhaskar.com

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रेलवे कुली था, अब दुनिया के सबसे दौलतमंदों में है

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जी हां, यह दास्तान एक ऐसे व्यक्ति की है जिसका बचपन बेहद कठिन परिस्थितियों में गुजरा और जिसने बहुत तकलीफें उठाईं लेकिन आज वह दुनिया के सबसे अमीर लोगों में है। हम बात कर रहे हैं जॉर्ज सोरोस की जो आज 22 अरब डॉलर की हस्ती हैं।



1930 में जॉर्ज सोरोस का जन्म हंगरी में हुआ था। उनके माता पिता यहूदी थे और एक लेखक थे लेकिन वहां जर्मन नाजियों का कब्जा हो जाने के बाद उन्हें 13 साल की उम्र में उन्हें यहूदी काउंसिल में नौकरी करनी पड़ी। 1947 में वे हंगरी के एक अमीर व्यक्ति के साथ इंग्लैंड भाग गए और अपने चाचा के साथ रहने लगे। चाचा ने दया करके उन्हें लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में दाखिला दिला दिया। लेकिन सोरोस के पास खर्च के लिए पैसे नहीं थे इसलिए उन्होंने रेलवे कुली, वेटर और समुद्र के किनारे सामान बेचना शुरू किय़ा। वह बेहद गरीबी में दिन गुजार रहे थे।



पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्हें नौकरी ढूंढ़ने में बहुत परेशानी हुई। किसी तरह से उन्हें एक बैंक में छोटी सी नौकरी मिली और फिर वे उसमें लग गए। तंग आकर 1956 में वे अमेरिका चले गए जहां उन्होंने एनालिस्ट की नौकरी कर ली। बाद में वे एक और कंपनी में चले गए और वहां वाइस प्रेसीडेंट बन गए। 1967 में उन्होंने अपनी कंपनी को एक निवेश फंड कंपनी बनाने के लिए मना लिया। उनकी कंपनी ने 1969 में उनके लिए डबल ईंगल हेज फंड बनाया। 1970 में उन्होंने सोरोस फंड मैनेजमेंट बनाया और उसके चेयरमैन बन गए। उन्होंने क्वांटम फंड भी शुरू किया। उसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। निवेश की दुनिया उन्हें भा गई और देखते-देखते वह दुनिया के सबसे बड़े निवेशकों में आ गए। उन्हें फाइनेंस की दुनिया का जादूगर माना जाता है।



सोरोस अपना अतीत नहीमं भूले हैं और वे दुनिया भर में दान करते रहते हैं। 2011 तक उन्होंने 8 अरब डॉलर शिक्षा, स्वास्थ्य़ के लिए दान कर दिया था। अभी भी वह जनकल्याण के लिए दान करते रहते हैं। sabhar :bhaskar.com

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मछली खाने से नहीं होता अल्‍जाइमर

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मांसाहारी लोगों के लिए अच्‍छी खबर है। शोधकर्ताओं का कहना है कि जिन लोगों के खान-पान में मछली शामिल होती है, उनका मानसिक स्वास्थ्य अच्छा रहता है और साथ ही वे अल्जाइमर जैसी खतरनाक बीमारी के खतरे से भी दूर रहते हैं।
पिट्सबर्ग विश्वविद्यालय के मेडीकल सेंटर के सायरस राजी का कहना है कि मछली का मांस  मस्तिष्क की संरचना और अल्जाइमर के खतरे के बीच संबंध स्थापित करता है

जो लोग प्रति सप्ताह कम से कम एक बार सिकी हुई या उबली हुई मछली खाते हैं उनके मस्तिष्क की संरचना में ग्रे मैटर क्षेत्र संरक्षित रहता है। अल्जाइमर बीमारी में मस्तिष्क के इस हिस्से की खास भूमिका होती है।

अल्जाइमर बीमारी का कोई इलाज नहीं है। यह बीमारी धीरे-धीरे बढ़ती जाती है। इससे व्यक्ति की याददाश्त और बोध क्षमता धीरे-धीरे कम होती जाती है। sabhar : bhaskar.com

 

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हॉट फिगर के लिए बहुत कुछ खोया है नेहा ने

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नेहा धूपिया बॉलीवुड की उन हॉट एक्‍ट्रेस में से है जो अपनी फिटनेस को लेकर काफी कॉन्शस हैं। उनका कहना है कि ग्‍लैमर वर्ल्‍ड में अपनी जगह बनाए रखने के लिए फिटनेस पर काफी ध्‍यान देना पड़ता है यही नहीं स्‍वाद से भी समझौता करना पड़ता है। मैं हफ्ते में दो से तीन बार वेट ट्रेनिंग और कार्डियो करना नहीं भूलती। कार्डियो करने से स्टेमिना बढ़ता है। जब भी समय मिलता है , तो स्कवैश खेलती हूं। अक्सर स्वीमिंग करने भी जाती हूं। कभी - कभार योगा की प्रैक्टिस भी करती हूं।

मैं अपने दिन की शुरूआत एक गिलास गर्म पानी के साथ करती हूं। उसमें शहद व नीबू मिला लेती हूं। नाश्ते में पांच बादाम और एक बाउल फू्रट्स लेना पसंद है। इसके बाद मिड नाइट या आफ्टरनून में चार उबले अंडे को ब्राउन ब्रेड के साथ लेती हूं। लंच में आमतौर पर चावल , रोटी , सब्जी , दाल और स्प्राउट्स लेती हूं। ग्रीन - टी लेना पसंद है। तकरीबन 7 बजे डिनर से पहले ग्रिल्ड वेजिटेबल और सलाद लेना प्रिफर करती हूं।
लेकिन इन दिनों मैं माइक्रोबाइटिक डाइट पर हूं। यह 80 प्रतिशत ऑर्गेनिक है। मैं ऐसी कोई चीज नहीं खाती , जिसमें न्‍यूट्रिशन न हो। मुझे फ्रेश पकी सब्जियां , फ्रेश फू्रट्स और वेजिटेबल जूस लेना पसंद है। मुझे रेडमीट पसंद है फिर भी मैं बहुत कम खाती हूं। सबसे ज्यादा घर का खाना पसंद है क्योंकि यह ताजा होता है।  sabhar : bhakar.com

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रेयरेस्ट ऑफ द रेयर: लड़की बनी है विज्ञान जगत के लिए पहेली!

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रेयरेस्ट ऑफ द रेयर: लड़की बनी है विज्ञान जगत के लिए पहेली! 

लखनऊ। यूपी की राजधानी लखनऊ के आलमबाग की रहने वाली ट्विंकल द्विवेदी विज्ञान जगत के लिए एक पहेली बनी हुई है। यह जब रोती है तो इसके आंखों से आंसू नहीं खून निकलते हैं।

जुलाई, 2007 से अचानक इस बीमारी से पीड़ित इस लड़की को किसी वक्त भी बिना किसी खरोंच, घाव, चोट के, आंख, नाक, गर्दन, से खून निकलना शुरू हो जाता है। अमेरिकी हीमेटोलॉजिस्ट एक्सपर्ट डॉक्टर जार्ज बुचानन ने मुंबई के एक अस्पताल में ट्विंकल की जांच की, लेकिन वो भी किसी किसी निष्कर्ष पर पहुंचने में नाकाम रहे।

ट्विंकल को दिन में लगभग 50 बार यह रक्तस्त्राव होता है जिसकी वजह से रोजाना उसका कुछ लीटर खून बेकार बह जाता है। इस परेशानी की वजह से ट्विंकल की पढ़ाई भी दो साल से छूट चुकी है। अचानक रक्तस्त्राव के कारण वह जिस भी स्कूल में पढ़ती है उसे वहां से निकाल दिया जाता है।

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गुरुवार, 8 दिसंबर 2011

42 साल पहले बनाई थी भविष्य की कार, अब आई दुनिया के सामने

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नई टेक्नोलॉजी प्रदर्शित करने के लिए कार निर्माता कॉन्सेप्ट कार बनाते हैं। इनमें से कुछ का निर्माण शुरू हो जाता है और कुछ पैक कर रख दी जाती हैं। कुछ भी हो दुनिया को भविष्य की एक झलक देखने को मिल जाती है।



ऐसी ही एक कार है ‘होल्डेन्स हरीकेन’। 42 साल पहले मेलबर्न में इसे प्रदर्शित किया गया था, अब एक बार फिर मेलबर्न मोटर शो में इसे देखा जा सकता है। इसमें जो टेक्नोलॉजी दिखाई गई थीं, वे आज कारों के लिए स्टैंडर्ड मानक बन गई हैं। इसमें डिजिटल डिस्प्ले, मैग्नेटिक जीपीएस सिस्टम, रियर-व्यू सीसीटीवी कैमरा और हाइड्रोलिक दरवाजे लगे हैं। हाइड्रोलिक प्लेट्स के जरिए पूरी छत ऊपर उठ जाती है।



जनरल मोटर्स का एक सब डिवीजन था होल्डेन। उन्होंने इस कार का इंजन भी भविष्य के लिहाज से बनाया था। इसमें 259 एचपी का 4.2 लीटर होल्डेन वी8 इंजन लगाया गया था।



कार में कम्फरट्रॉन एयर कंडीशनिंग सिस्टम और ऑटो-सीक रेडियो लगा था, जिसे बटन घुमाकर ट्यून नहीं करना पड़ता था। पाथफाइंडर जीपीएस सिस्टम में चमकता हुआ तीर ड्राइवर को बताता था कि किस तरफ मुड़ना है और एक बजर आने वाले दोराहे की चेतावनी देता था। sabhar: bhaskar.com
 
 
 
 
 
 

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यह क्या..नौकरी के लिए अमेरिकी भी अपना देश छोड़ रहे हैं

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आंकड़े हैं गवाह 
मौजूदा समय में तकरीबन 63 लाख अमेरिकी विदेश में या तो पढ़ाई कर रहे हैं अथवा वहां नौकरी कर रहे हैं, यह अपने-आप में है एक नया रिकॉर्ड
आर्थिक सुस्ती से पीछा छुड़ाने के लिए खासकर ब्राजील, रूस, चीन व लैटिन अमेरिका जाना पसंद कर रहे हैं अमेरिका के निवासी

इससे क्या मिलता है संकेत 
फिलहाल आर्थिक संकट के साथ-साथ 'ब्रेन ड्रेन' की समस्या से भी जूझ रहा है अमेरिका



अब तक 'ब्रेन गेन' पर निर्भर रहा है अमेरिका ताकि वह दुनिया भर में अपना सिक्का जमाए रखने के सपने को पूरा कर सके

बुरा हाल
अमेरिका में बेरोजगारी लंबे समय से तकरीबन 9 फीसदी के उच्च स्तर पर है विराजमान
अमेरिका में आर्थिक सुस्ती का कहर बदस्तूर जारी रहने के कारण लाखों अमेरिकी परिवारों का बजट गया है बिगड़
इन परिवारों को अपने देश में छाई आर्थिक सुस्ती के जल्द खत्म होने का भरोसा अब नहीं रह गया है

नौकरी पाने के लिए लोग आम तौर पर कुछ भी कर गुजरने को तैयार हो जाते हैं। इसके लिए अगर अपना शहर या राज्य छोडऩा पड़ जाए तो लोग उसके लिए भी तैयार हो जाते हैं। यही हाल अब अमेरिका के निवासियों का भी हो गया है। जी हां, अमेरिकी भी अब अच्छी नौकरी पाने के लिए अपना देश छोडऩे पर विवश हो गए हैं। यही नहीं, किसी और मुल्क में बिजनेस की अच्छी गुंजाइश नजर आने पर भी अमेरिकी अब अपना वतन छोड़ देने से गुरेज नहीं कर रहे हैं।



लंबी आर्थिक सुस्ती से उबरने में अमेरिकी सरकार के बार-बार नाकामयाब साबित होने से ही काफी निराश होकर वहां के वाशिंदे इस तरह का कठोर कदम उठा रहे हैं। इसका मतलब यही हुआ कि जिस तरह से बिहार और उत्तर प्रदेश के लोगों को अच्छी नौकरी पाने के लिए अक्सर महानगरों का रुख करना पड़ता है, उसी तरह से अमेरिका के निवासियों को भी बढिय़ा नौकरी की तलाश में मजबूर होकर विदेश जाना पड़ रहा है।



ताजा आंकड़े इस बात के गवाह हैं। अमेरिका के विदेश मंत्रालय ने हाल ही में यह जानकारी दी है कि मौजूदा समय में तकरीबन 63 लाख अमेरिकी विदेश में या तो पढ़ाई कर रहे हैं अथवा वहां नौकरी कर रहे हैं। यह अपने-आप में एक नया रिकॉर्ड है। ऐसे में अगर यह कहा जाए कि अमेरिका को फिलहाल 'ब्रेन ड्रेन' की समस्या से भी जूझना पड़ रहा है, तो ऐसा कहना शायद गलत नहीं होगा।




यह निश्चित तौर पर अमेरिका के लिए भारी चिंता का विषय है। दरअसल, अमेरिका पिछले कई दशकों से दुनिया भर के अत्यंत प्रतिभाशाली लोगों को आकर्षक सैलरी पैकेज वगैरह का प्रलोभन देकर अपने यहां बुलाता रहा है ताकि इस तरह के 'ब्रेन गेन' की बदौलत वह नए-नए उन्नत उत्पाद तैयार कर दुनिया भर में अपना सिक्का जमाए रखने के अमेरिकी ड्रीम को पूरा कर सके।



भारत समेत कई देशों में रहने वाले लोग भी अमेरिका में ही नौकरी करना और वहां बसना पसंद करते रहे हैं। वहीं, अब नौबत यह आ गई है कि बड़ी संख्या में प्रतिभाशाली एवं महत्वाकांक्षी अमेरिकी बढिय़ा नौकरी की तलाश में विदेश का रुख कर रहे हैं ताकि आर्थिक सुस्ती के निराशाजनक माहौल से उन्हें निजात मिल सके।

यही नहीं, इस माहौल ने अमेरिका के उद्यमियों को भी भारी चिंता में डाल दिया है। आर्थिक सुस्ती से पीछा छुड़ाने के लिए अमेरिका के निवासी खासकर ब्राजील, रूस, चीन और लैटिन अमेरिका जाना पसंद क रहे हैं। जानी-मानी वेबसाइट 'एमएसएनबीसी.कॉम' में डाले गए एक खास लेख में इन बातों का जिक्र किया गया है।




इस लेख में यह भी बताया गया है कि आखिरकार यह नौबत क्यों आई है। एक बात तो यह है कि अमेरिका में बेरोजगारी लंबे समय से तकरीबन 9 फीसदी के उच्च स्तर पर विराजमान है। दूसरी बात यह है कि अमेरिका में आर्थिक सुस्ती का कहर बदस्तूर जारी रहने के कारण लाखों अमेरिकी परिवारों का बजट बिगड़ गया है। तीसरी बात यह है कि इन परिवारों को अपने देश में छाई आर्थिक सुस्ती के जल्द खत्म होने का भरोसा अब नहीं रह गया है।



इस वजह से अमेरिकी इकोनॉमी का आकर्षण अब काफी घट गया है। ऐसे में इस देश के ज्यादातर लोगों को यह समझ में नहीं आ रहा है कि आखिरकार उनके देश की अर्थव्यवस्था किस तरफ जा रही है? विदेश जाने वाले अमेरिकियों को यह पता है कि वहां जाने पर भाषा, संस्कृति, नौकरशाही वगैरह की बाधाएं आएंगी, लेकिन इसके बावजूद वे नौकरी करने के लिए विदेश जाने से बाज नहीं आ रहे हैं। sabhar: bhaskar.com

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पोर्न को मिले कानूनी अधिकार : पूनम पांडे

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केंद्रीय दूरसंचार और मानव संसाधन एवं विकास मंत्री कपिल सिब्बल ने गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, फेसबुक और याहू के अधिकारियों की एक बैठक बुलाकर कहा है कि धर्म से जुड़े लोगों, प्रतीकों के अलावा भारत के प्रधानमंत्री और कांग्रेस अध्यक्ष जैसी राजनीतिक हस्तियों के खिलाफ अपमानजनक सामग्री की निगरानी करें।
सिब्बल ने यह भी कहा कि निगरानी के लिए सिर्फ तकनीक पर निर्भर न रहें बल्कि इसके लिए लोगों को लगाएं। कपिल सिब्‍बल के इस बयान के बाद लोगों ने आपत्ति जताई है लोगों का कहना है कि यह उनके स्‍वतंत्रता का हनन है।
वहीं इन दिनों इंटरनेट पर लोगों की पहली पंसद बनी पूनम पांडे ने कहा है कि कपिल सिब्‍बल इतना कोलावरी डी क्‍यों ?हमलोग नए जमाने के लड़के लड़कियां हैं। यह जेनरेशन काफी मैच्‍योर हो गया है।
सच तो यह है कि भारत तेजी से विकास कर रहा है। ऐसे में पोर्न को भारत में कानूनी मान्‍यता मिलनी चाहिए।
पूनम के इस टिवट पर लोगों ने आपत्ति जताई तो पूनम ने कहा कि मेरे कहने का मतलब पोर्न ब्रॉडकास्टिंग से था। sabhar : bhaskar.com

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पति की दरिंदगी कर देती है आत्मा तार-तार, कैसे करें औलाद को दुलार?

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हांगकांग. ऑस्ट्रेलिया के शोधकर्ताओं ने खुलासा किया कि 40 प्रतिशत महिलाएं जो बच्चे को जन्म देने के बाद अवसादग्रस्त हो जाती हैं इसके पीछे उनके पतियों द्वारा उनको दी जाने वाली शारीरिक और मानसिक प्रताडना जिम्मेदार होती है।

ऑस्ट्रेलिया के विक्टोरिया में मडरेक बच्चों के अनुसंधान संस्थान की हन्ना वूलहाउस ने कहा, बच्चों को जन्म देने के बाद अवसादग्रस्त होने वाली महिलाओं का इलाज करने वाले स्वास्थ्य विशेषग्यों को ध्यान रखना चाहिए कि ऐसी महिलाओं के अवसादग्रस्त होने के पीछे उनके पतियों द्वारा उनके साथ की जाने वाली मानसिक और शारीरिक हिंसा भी जिम्मेदार हो सकती है।

वूलहाउस ने कहा कि ऐसी समस्याओं से जूझ रहे दम्पतियों को सलाह देकर या प्रताड़ित महिला को शरण देकर उनका इलाज किया जा सकता है।

इस खुलासे से पहले वूलहाउस ने पहली बार मां बनी 1,305 महिलाओं पर अपने साथियों के साथ अध्ययन किया और पाया कि बच्चे को जन्म देने के बारह महीने बाद लगभग 16 प्रतिशत महिलाओं में अवसाद की शिकायत पायी गयी।

अनुसंधान से यह भी स्पष्ट हुआ कि जिन लगभग 40 प्रतिशत महिलाओं में अवसाद के लक्षण दिखायी दिये उनके साथ उनके पतियों ने हिंसा की थी।

अध्ययन से यह भी पता चला कि अधिकतर महिलाओं में बच्चे को जन्म देने के छह माह बीत जाने के बाद अवसाद के लक्षण नजर आये। sabhar : bhaskar.com

 
 

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आखिरकार कैटरीना ने माना, 'हां सलमान के साथ थे मेरे संबंध, वो मेरे...'

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बॉलीवुड एक्ट्रेस कैटरीना कैफ ने आखिरकार कई बार खंडन करने के बाद स्वीकार कर ही लिया है कि वे और सलमान खान डेटिंग कर रहे थे।

एक मैगजीन को अपनी सफलता व रिश्तों के बारे में बताते हुए कैटरीना ने कहा कि सलमान खान के साथ उनके रिश्ते को लेकर वे बहुत सीरियस थीं। कपूर फैमिली के चश्मोचिराग रणबीर कपूर के साथ दो फिल्में करने के बाद उनका नाम जोड़ा जाने लगा। हालांकि रणबीर और कैट दोनों ने ही इससे इंकार कर दिया था।



इस बारे में कैटरीना ने कहा, "रणबीर के साथ डेटिंग की बातें महज अफवाहें थीं। हमने साथ में दो फिल्मों में काम किया जो हमारे लिए फायदेमंद रहीं। मैंने रिश्तों से अभी तक यही सिखा है कि यह बहुत अप्रत्याशित होते हैं।"

अभिनेताओं के बाद सबसे ज्यादा मांग वाली एक्ट्रेस कैटरीना ने यह भी स्पष्ट किया कि वह अभी सिंगल हैं। कैटरीना कहती हैं, "अभी, मैं सिंगल हूं और मेरा मानना है कि इन बातों पर न तो आपका नियंत्रण होता है और न इनकी भविष्यवाणी कर सकते हैं। मैं एक होपलेस रोमांटिक पर्सन हूं। प्यार देने और विश्वास करने का नाम होता है।"

ऐसा लगता है कि कैटरीना एकबार फिर से सलमान खान कैम्प में वापसी करना चाहती हैं। अब इस बात में कितनी सच्चाई है यह तो कैटरीना ही बेहतर बता सकती हैं।

वैसे फिलहाल कैट और सलमान फिल्म एक था टाइगर में साथ काम कर रहे हैं। इसके साथ ही उनकी आमिर और शाहरूख खान के साथ फिल्में पाइपलाइन में हैं। sabhar : bhaskar.com

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बुधवार, 7 दिसंबर 2011

एक प्यार की कीमत छह अबॉर्शन, लंगर पर गुजारा और...

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नई दिल्ली।। 20 साल की पूजा और 23 साल के राहुल के बीच 3 साल पहले प्यार हुआ। पूजा-राहुल के बीच रिश्ता दोनों के घरवालों को मंजूर नहीं था। घरवालों के खिलाफ जाकर 8 महीने पहले उन्होंने शादी की। लेकिन, इस सारे वाकये का खामियाजा पूजा को उठाना पड़ रहा है क्योंकि पूजा अब मां नहीं बन सकतीं।

3 साल में पूजा 6 बार प्रेगनेंट हुईं। लेकिन, घरवालों के विरोध के चलते वह इस हालत में नहीं थीं कि बच्चों को जन्म दे सकतीं। पूजा को 6 बार अबॉर्शन करवाना पड़ा। पूजा बताती हैं, ‘ हर बार मुझे जुड़वां बच्चे होने थे, लेकिन मुझे दुख है कि मैं उन्हें जन्म नहीं दे पाई क्योंकि हम इस हालत में नहीं थे। और अब मैं मां नहीं बन सकती। मुझे लगता है जैसे भगवान ने मुझे सजा दी है। ’ 

एक अंग्रेजी दैनिक में छपी खबर के मुताबिक पूजा-राहुल के बीच पहली नजर में ही प्यार हो गया था। पूजा कहती हैं, भगवान हमें मिलाना चाहते थे। ’ पूजा-राहुल के प्यार के बारे में जब दोनों के घरवालों को पता चला तो उन्होंने फटकारते हुए दोनों को अलग रहने को कहा।

इसके बाद पूजा-राहुल घर से भाग गए। घरवाले उन्हें किसी तरह वापस लाते और वे फिर भाग जाते। लव कमांडोज़ नाम के एक एनजीओ में शरण लिए पूजा बताती हैं, मेरी मां हार्ट अटैक की वजह से 3 साल पहले चल बसीं। इसके बाद मेरे पिता मेरी शादी जल्द से जल्द करवाना चाहते थे। लेकिन तभी मैं राहुल से मिली और मेरे लिए सब कुछ बदल गया। मैंने अपने पिता को राहुल के बारे में बताया, लेकिन वह नहीं माने। 17 जुलाई 2009 को मैंने पहली बार घर छोड़ा और उसके बाद मैं बार-बार राहुल के पास वापस जाती रही। ’ 

पूजा को इन मुश्किल हालात में भीख तक मांगनी पड़ी। पूजा बताती हैं, ‘ मुझे वह दिन याद है। जब मैंने पहली बार घर छोड़ा था तो मेरे पास एक पैसा तक नहीं था, लेकिन मेरा राहुल से बात करना बहुत जरूरी था। तब मैंने 15 रुपए मांगे थे जिससे कि मैं उसे फोन कर सकूं। ’ 

पूजा और राहुल को वे दिन भी अच्छे से याद हैं जो उन्होंने रेलवे स्टेशंस पर गुजारे थे। पूजा कहती हैं, ‘ करीब 2 महीने हम नई दिल्ली और पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन पर सोए लेकिन हम कमजोर नहीं पड़े। ’ 

उन्होंने 8 महीने पहले शादी की। लेकिन, राहुल की मां ने पूजा को घर में नहीं घुसने दिया। पूजा राहुल की मां के बारे में बताती हैं, ‘ वह बहुत लालची हैं। वह चाहती थीं कि मैं अपने पिता के घर वापस जाऊं और शादी की रस्म पूरी करूं, जिससे वह दहेज की मांग कर सकें। मेरे पिता इस बात से संतुष्ट थे कि मैं राहुल के साथ खुश हूं लेकिन मेरी सास ने मुझे नहीं अपनाया। ’ 

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कुछ दिन पहले दोनों शीशगंज गुरुद्वारे में लंगर पर गुजारा कर रहे थे। उसी बीच उन्होंने लव कमांडोज़ के बारे में पढ़ा और तुरंत उनसे संपर्क किया। लव कमांडोज़ के संस्थापक संजय सचदेवा ने बताया, ‘ उन्होंने कुछ दिन पहले हमसे संपर्क किया और हम उन्हें तब तक सपोर्ट करेंगे जब तक वे अपने पैरों पर खड़े नहीं हो जाते। हम चाहते हैं कि वे दोनों अपना ग्रैजुएशन पूरा करें और दुनिया के सामने खुद को साबित करें। हमने उनके लिए सब कुछ कपड़ा, खाना और रहने की जगह का इंतजाम किया है। ’ 

अब राहुल काम पर जाते हैं और पूजा अपना ग्रैजुएशन पूरा करने की सोच रही हैं, जिससे वह भी काम कर सकें। पूजा-राहुल अपने परिवार-रिश्तेदारों के पास वापस नहीं जाना चाहते।

लव कमांडोज से आप 9313784375 नंबर पर संपर्क कर सकते हैं।

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सेक्स के अनुभव में लड़कों को पीछे छोड़ा:सर्वे

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 में सेक्स शिक्षा हो या न हो, इस पर एक लंबी बहस लंबे समय से छिड़ी है.पश्चिमी सभ्यता और संस्कृति का तो प्राय: हर घर में समावेश हो ही गया है,पर जहाँ स्कूलों में सेक्स शिक्षा की बात उठती है, वहां आज भी देश के अधिकाँश लोग इसका विरोध करने लगते हैं.पर ये रिपोर्ट स्कूलों में सेक्स शिक्षा का विरोध करने वालों को एक बड़ा झटका दे सकती है.और ये रिपोर्ट  है भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा युवाओं के सेक्स रुझान पर कराये गए सर्वे पर आधारित जिसे स्वास्थ्य मंत्री गुलाम नबी आजाद ने जारी किया है.
 भारत के छ: राज्यों, आंध्र प्रदेश, बिहार,झारखंड, महाराष्ट्र, राजस्थान और तमिलनाडु में कराये गए इस सर्वे में बहुत सी ऐसी बातें सामने आयी है जो भारतीय संस्कृति के बहुत ही तेजी से बदलने का संकेत देती हैं.मसलन शादी से पहले सेक्स तो भारतीय लड़कों में आम है ही,पर सर्वे की सबसे चौंकाने वाली बात तो ये है कि १५ साल की उम्र तक विवाह से पूर्व सेक्स सम्बन्ध बनाने में लड़कियों ने लड़कों को पीछे छोड़ दिया है.सर्वे के मुताबिक़ सेक्स के मामले में लड़कियां लड़कों से आगे निकल गयी है.
 सर्वे के अनुसार १५%  लड़कों और ४%  लड़कियों ने कबूल किया कि उन्होंने शादी से पहले सेक्स का अनुभव ले लिया है. फिर यहाँ भी चौंकाने वाली बात ये रही कि इनमें से २४% लड़कियों ने माना कि उन्होंने १५ साल की उम्र से पहले ही सेक्स का अनुभव ले लिया है, जबकि लड़कों का प्रतिशत सिर्फ ९ रहा, जिन्होंने यह माना कि उन्होंने सेक्स का अनुभव १५  साल से पहले लिया. निष्कर्ष के तौर पर भारत की संस्कृति में आमूलचूल परिवर्तन आ चुके हैं, और कच्ची उम्र के प्रेम व यौन सम्बन्ध को भले ही बहुत से लोग नकार दें पर सर्वे का नतीजा यह बता रहा है कि भारत में भी नाबालिग लड़कियां अपनी मर्जी से सेक्स के अनुभव ले रही हैं.  (मधेपुरा टाइम्स )

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ये है शिर्डी के सांई बाबा का असली दुर्लभ फोटो, देखिए...

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शिर्डी के सांई बाबा के भक्त दुनियाभर में फैले हैं। उनके फकीर स्वभाव और चमत्कारों की कई कथाएं है। सांई बाबा के भक्तों की संख्या काफी अधिक है। सभी भक्त बाबा के चित्र या मूर्ति अपने घरों में अवश्य ही रखते हैं। यहां देखिए शिर्डी के सांई बाबा का दुर्लभ और असली फोटो। ऐसा माना जाता है कि यह फोटो सांई का ही है।

सांई ने अपना पूरा जीवन जनसेवा में ही व्यतीत किया। वे हर पल दूसरों के दुख दर्द दूर करते रहे। बाबा के जन्म के संबंध में कोई सटीक उल्लेख नहीं मिलता है।  सांई के सारे चमत्कारों का रहस्य उनके सिद्धांतों में मिलता है, उन्होंने कुछ ऐसे सूत्र दिए हैं जिन्हें जीवन में उतारकर सफल हुआ जा सकता है। हमें उन सूत्रों को केवल गहराई से समझना होगा।

सांई बाबा के जीवन पर एक नजर डाली जाए तो समझ में आता है कि उनका पूरा जीवन लोककल्याण के लिए समर्पित था। खुद शक्ति सम्पन्न होते हुए भी उन्होंने कभी अपने लिए शक्ति का उपयोग नहीं किया। सभी साधनों को जुटाने की क्षमता होते हुए भी वे हमेशा सादा जीवन जीते रहे और यही शिक्षा उन्होंने संसार को भी दी। सांई बाबा शिर्डी में एक सामान्य इंसान की भांति रहते थे। उनका पूरा जीवन ही हमें हमारे लिए आदर्श है, उनकी शिक्षाएं हमें एक ऐसा जीवन जीने की प्रेरणा देती है जिससे समाज में एकरूपता और शांति प्राप्त हो सकती है। 
 
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भारत से जंग लड़ेगा चीन? राष्‍ट्रपति ने कहा- तैयार रहे नौसेना

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बीजिंग. दक्षिण चीन सागर में वर्चस्‍व को लेकर जारी विवाद के बीच चीन ने अपनी नौसेना को किसी भी जंग के लिए पूरी तरह तैयार रहने को कहा है। राष्‍ट्रपति हू जिंताओ ने कहा है कि चीन की नौसेना को जंग के लिए तैयारी शुरू कर देनी चाहिए। जिंताओ के इस बयान पर अमेरिकी रक्षा मुख्‍यालय पेंटागन ने कहा है कि चीन को अपनी सुरक्षा करने का हक है।

बीजिंग में बुधवार को अमेरिका और चीन के वरिष्‍ठ सैन्‍य अधिकारियों की सालाना बैठक भी हो रही है। हालांकि इस बैठक का मकसद यह सुनिश्चित करना होता है कि दोनों देशों के बीच किसी तरह की गलतफहमी नहीं है लेकिन इस बैठक से ऐन पहले जिंताओ ने सेना से कहा है कि उन्‍हें जंग के लिए पूरी तरह तैयार रहना होगा।

हू ने सैन्‍य अधिकारियों की बैठक में कहा कि नौसेना को अपनी क्षमताओं में तेजी से विकास करना होगा और राष्‍ट्रीय सुरक्षा में और योगदान के मद्देनजर जंग के लिए तैयारियां बढ़ानी होंगी। हालांकि राष्ट्रपति की टिप्पणी के आधिकारिक अनुवाद में 'युद्ध' शब्द का इस्तेमाल हुआ था लेकिन और जगह अनुवादों में 'सैन्य लड़ाई' और 'सैन्य संघर्ष' शब्द इस्तेमाल किए गए हैं। चीनी राष्‍ट्रपति के इस बयान को जानकार बेवजूद का मान रहे हैं और संभव है कि यह टिप्‍पणी दक्षिण चीन सागर को लेकर अमेरिका और चीन के बीच जारी तनाव को देखते हुए की गई हो।

चीन ने हाल में अपने लिए पहला एयरक्राफ्ट कॅरियर खरीदा है और अपनी नौसेना की महत्‍वाकांक्षाओं को लेकर हमेशा मुखर रहा है। हालांकि इसकी असली ताकत थल सेना ही है और नौसेना के मामले में अमेरिका की तुलना में यह कमजोर है। चीन की थल सेना दुनिया में सबसे बड़ी है और इसमें 30 लाख लोग शामिल हैं। चीन ने बीते महीने के आखिर में ऐलान किया कि वो दक्षिण चीन सागर में जल्‍द ही बड़ा युद्धाभ्‍यास करेगा। हाल में चीन की सेना ने एक युद्धाभ्‍यास भी किया। इस युद्धाभ्‍यास में चेंगदू मिलिट्री एरिया कमांड और चीन की पीपल्‍स लिबरेशन आर्मी ने हिस्‍सा लिया ।

गौरतलब है कि चीनी राष्‍ट्रपति का बयान ऐसे समय आया है जब दक्षिण चीन सागर में वर्चस्‍व को लेकर पड़ोसी देशों के साथ तनाव बढ़ रहा है। इस मसले पर हाल में अमेरिकी राष्‍ट्रपति बराक ओबामा की टिप्‍पणी के बाद चीन और अमेरिका के बीच तनाव बढ़े हैं। चीन के प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ ने दक्षिण चीन सागर में ‘बाहरी देशों’ की दखल का कड़ा विरोध किया है।

खनिज संसाधनों से भरपूर इस इलाके पर चीन अपनी संप्रभुता का दावा करता रहा है जबकि चीन के पड़ोसी वियतनाम, फि‍लिपींस, ताईवान, मलेशिया और ब्रुनेई अपने आसपास के समुद्री क्षेत्र में अपनी संप्रभुता का दावा करते हैं। फिलिपींस और वियतनाम इस इलाके में चीन की जरूरत से ज्‍यादा दखल का कई बार विरोध कर चुके हैं। भारत इस सागर में वियतनाम के साथ तेल की खोज में जुटा है जिसे लेकर चीन सख्‍त ऐतराज जताता रहा है। दक्षिणी चीन सागर में लगातार बढ़ रहे चीनी प्रभाव के बीच 19 दिसंबर को वॉशिंगटन में भारत, अमेरिका और जापान की त्रिपक्षीय वार्ता होने जा रही है। 
(फोटो कैप्शनःचीन की पिपुल्स लिब्रेशन आर्मी की नौसेना की पनडुब्बियों ने दिसंबर की शुरुआत में साल भर की अपनी ट्रैनिंग का परीक्षण किया जिसके नतीजे संतोषजनक रहे। समुद्र में ट्रैनिंग करती इस चीनी पनडुब्बी की तस्वीर चीन की सेना की अधिकारिक वेबसाइट पर प्रकाशित की गई है।)
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दोस्तों के साथ मिल कर इंजीनियर पति ने बनाया पत्‍नी का सेक्‍स वीडियो

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बैंगलुरु. पैसे
 के लिए कोई व्यक्ति कितना गिर सकता है इसका अंदाजा बैंगलुरु में मजिस्ट्रेट कोर्ट के समक्ष आई एक महिला डेंटिस्ट की शिकायत से लगता है। महिला ने आरोप लगाया है कि उसका इंजीनियर पति अपने दोस्तों के साथ मिलकर उसके सेक्स वीडियो इंटरनेट पर अपलोड करके पैसे कमाने की साजिश रच रहा है। एक नामी अंतरराष्ट्रीय सॉफ्टवेयर कंपनी में तैनात इंजीनियर की पत्नी ने उस पर अपने दोस्तों के साथ जबरदस्ती सेक्स करने के लिए मजबूर करने का आरोप लगाया है। महिला ने पिछले हफ्ते मजिस्ट्रेट कोर्ट के समक्ष पेश की गई इस शिकायत में अपने पति के 11 दोस्तों का नाम भी लिया है। सोमवार को इस शिकायत पर सुनवाई के बाद कोर्ट ने जननभारती पुलिस स्टेशन को मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं।

पीड़ित महिला की शादी आरोपी पति से पिछले साल 19 सितंबर को हुई थी। पेशे से डेंटिस्ट इस 29 वर्षीय महिला का आरोप है कि उसके पति ने सेक्स क्रिया के पोर्न वीडियो बनाए और अब वो उन्हें इंटरनेट पर अपलोड करके पैसा कमाने की साजिश रच रहा है। शिकायत में पीड़ित महिला ने कहा है कि शादी के कुछ दिन बाद ही उसे पता चला कि उसके पति के एक अन्य महिला से शारिरिक संबंध है। पीड़िता को सावित्रि नाम की महिला के साथ उसके पति की एक अर्धनग्न तस्वीर भी दिखाई गई। महिला ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि उसके पति के कई अन्य महिलाओं से भी रिश्ते थे जिनके साथ अपने पति का आपत्तिजनक तस्वीरें उसने देखी हैं। शादी के कुछ दिन बाद ही आरोपी पति ने पीड़िता को अपने दोस्तों के साथ पोर्न फिल्में देखने के लिए मजबूर किया। मना करने पर उसे प्रताड़ित किया जाता था। यही नहीं आरोपी पति अपने दोस्तों और महिला मित्रों को घर पर लाकर समूह सेक्स करने के लिए पीड़िता को मजबूर करता था। यही नहीं आरोपी अपनी पत्नी की न्यूड तस्वीरें अपने मित्रों को ईमेल भी करता था। पीड़िता ने अपनी शिकायत में ईमेल की प्रति भी लगाई है। शिकायत में पीड़िता ने यह भी कहा है कि उसका पति अपने मित्रों के साथ मिलकर उसके पोर्न वीडियो इंटरनेट पर अपलोड करके पैसा कमाने का प्लान बना रहा है। फिलहाल कोर्ट ने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं और बैंगलुरु पुलिस पड़ताल कर रही है।  sabhaar : bhaskar.com
 
 

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मंगलवार, 6 दिसंबर 2011

जुए की बाजी पर पूनम उतारेगी कपड़े

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अब तक पूनम पांडे सिर्फ अपने वेबसाइट के माध्‍यम से स्ट्रिप करती थी लेकिन अब जुए की बाजी पर स्टिप करने को तैयार हैं।
दसअसल एक अमेरिकी मोबाइल गेमिंग कंपनी पूनम पांडे के साथ मिल कर एक स्ट्रिप पोकर गेम बनाने वाली है। इसकी पुष्टि करते हुए पूनम पांडे ने कहा , ‘ हां , मैंने एक अमेरिकी कंपनी के साथ कॉन्ट्रैक्ट किया है।
यह तीन पत्ती जैसा गेम है। इस खेल में पहले मेरा विडियो दिखेगा। फिर जैसे - जैसे प्लेयर एक - एक लेवल पार करते जाएंगे , मैं अपने कपड़े उतारती जाऊंगी।
मुझे इससे कोई एतराज नहीं लेकिन मैं ऐसा किस हद तक करूंगी , यह मैं आपको अभी नहीं बता सकती। ’ लेकिन वह लेवल सच में बहुत कठिन होगा जहां मैं अपने पूरे कपड़े उतारूंगी।
मैं बहुत उत्साहित हूं क्योंकि इतने हाई प्रोफाइल इंटरनैशनल गेमिंग के लिए यह मेरा पहला मौका है और इससे मैं पूरी दुनिया में अपने फैन्स तक आसानी से पहुंच सकूंगी। ’
पूनम के असिस्टेंट का कहना है कि यह जुए की तरह है। हालांकि इसमें पैसे नहीं लगाना होगा लेकिन इसमें पूनम को देखने की लालच बढ़ती जाएगी। sabhar : bhaskar.com

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अन्ना के खिलाफ जंतर मंतर पर ही प्रदर्शन करेंगे राजू परुलेकर

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नई दिल्ली. 11 दिसम्बर को जंतर मंतर पर एक दिन के लिए अनशन पर बैठ रहे अन्ना हजारे को उनके पूर्व ब्लॉगर राजू परुलेकर और अन्य विरोधियों का सामना करना पड़ सकता है। अन्ना के पूर्व ब्लॉगर राजू परुलेकर और अन्य विरोधी अन्ना द्वारा अपनाए जा रहे तरीकों के खिलाफ वहीं पर तीन दिन का विरोध प्रदर्शन करेंगे।

गौरतलब है कि अन्ना मजबूत लोकपाल बिल के लिए 11 दिसम्बर को एक दिन के लिए अनशन पर बैठने वाले हैं। अन्ना का यह अनशन लोकपाल बिल को कथित तौर को कमजोर करने के विरोध में होगा।

मंगलवार को अन्ना के पूर्व ब्लॉगर राजू परुलेकर ने बताया कि देश के विभिन्न भागों के युवक 10 दिसम्बर से जंतर मंतर पर अन्ना और उनके समर्थकों के खिलाफ तीन दिनों का विरोध प्रदर्शन आयोजित करेंगे।

परुलेकर ने कहा "कार्यकर्ता हजारे का सामना करेंगे। वे टीम अन्ना में गुंडा प्रकृति के प्रचलन के बारे में सवाल करेंगे। वे हजारे से जानना चाहेंगे कि किरण बेदी के खिलाफ मामला दर्ज हो जाने के बाद भी वह टीम में कैसे बनी हुईं हैं। वे उनसे पूछेंगे कि क्या वे यही पैमाना मंत्रियों के बारे में भी अपनाएंगे। वे अरविन्द केजरीवाल के वित्तीय लेनदेनों के बारे में भी सवाल करेंगे।"

हालांकि उन्होंने कहा कि वह खुद इस तीन दिवसीय विरोध प्रदर्शन में हिस्सा नहीं लेंगे,लेकिन 23 दिसम्बर से टीम अन्ना के सदस्यों अरविन्द केजरीवाल और प्रशांत भूषण के खिलाफ शुरू होने वाले विरोध प्रदर्शन,जिनमें उनके आवासों का घेराव किया जाएगा,उसमें वह शामिल होंगे।

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दूसरे विश्व युद्ध में हुआ था चमत्कार, 'मरने' के 2 साल बाद जिंदा लौटा योद्धा

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लंदन. द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान हर ओर कोहराम मचा हुआ था। जमीन से लेकर पानी तक हर ओर मौत का मंजर छाया था। कुछ योद्धा ऐसे भी थे जो इन सब के बीच से जिंदा वापस लौट आए थे। कुछ ऐसी ही रोचक कहानी है ब्रिटेन के नाविक जॉन केप्स की।

70 साल पहले ब्रितानी पनडुब्बी एचएमएस परसियल समुद्र में डूब गई थी। जॉन इस हादसे में जिंदा बचने वाले एकमात्र नाविक थे।

ग्रीस के टापू केफा़लोनिया में 70 साल पहले एक ब्रितानी पनडुब्बी समुद्र के भीतर एक खदान से जा टकराई थी, जिस पर सवार लोगों के बचने की दास्तान द्वितीय विश्वयुद्ध की सबसे विवादास्पद कहानियों में से एक रही है।

द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान भूमध्यसागर का साफ़ पानी ब्रितानी पनडुब्बियों के लिए मौत के जाल से कम नहीं था। इन पनडुब्बियों पर कभी हवाई हमले होते थे तो कभी सागर की गहराईयों के भीतर से उनपर वार किया जाता था। लेकिन ये पनडुब्बियां सबसे अधिक शिकार होती थीं समुद्री खदानों की।

भूमध्यसागर से गुज़रने वाली हर पांच में से दो पनडुब्बियां पानी में समा जाती थीं और ज़ाहिर था उस पर सवार हर यात्री के लिए ये पनडुब्बी एक सामुहिक कब्र बन जाया करती थी। दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान सिर्फ़ चार ब्रितानी पनडुब्बियां इस मौत के जाल से बचकर निकलने में सफल रहीं, जिसमें सबसे अनूठा रहा छह दिसंबर 1941 को एचएमएस परसियस का समुद्र की गहराईयों में गोता लगाना।

पहेली

1941 के नवंबर महीने के अंत में ब्रितानी पनडुब्बी परसियस ने जब माल्टा से अपनी यात्रा शुरू की तब उसमें 59 नाविकों के एक दल के अलावा, दो यात्री सवार थे जिनमें से एक 31 वर्षीय जॉन केप्स थे।

केप्स उस दौरान नौसेना में कार्यरत थे और एलेक्ज़ेंड्रिया जा रहे थे। लंबी कद-काठी और खूबसूरत मिजाज़ के जॉन केप्स को एक राजनयिक के बेटे होने के कारण यूं तो नौसेना का कोई बड़ा अधिकारी होना चाहिए था लेकिन वो एक जहाज़ में मशीनों की देखभाल करने वाले एक मामूली कर्मचारी थे।

छह दिसंबर को कड़कड़ाती ठंड की रात में उनकी पनडुब्बी समुद्र तट से लगभग तीन मील की दूरी पर समंदर के बीचोबीच थी। जॉन केप्स के अनुसार जब वो इंजन रूम में बिछे ट्यूब के एक बिस्तर पर आराम कर रहे थे तभी अचानक उन्हें एक भयंकर धमाके की आवाज़ सुनाई दी।

अचानक हुए इस दिल दहलाने वाले धमाके से नाव पहले डगमगाई, फिर अचानक किसी चीज़ से बुरी तरह टकरा गई। ये टकराव इतना तेज़ था कि केप्स के शरीर की नसें तक हिल गईं। अचानक गुल हुई बिजली के बीच वो अपने बिस्तर से उछल गए और कमरे में चारों तरफ लुढ़कते रहे।

केप्स समझ गए कि उनका जहाज़ किसी खदान या सुरंग से जा टकराया है। खतरे को भांपने के बावजूद वो अपने आसपास टॉर्च ढूंढने की कोशिश करते रहे। लगातार बढ़ती गंध और इंजन रूम में दाखिल होते पानी के बीच उन्होंने देखा कि उनके आसपास दर्जनों लोगों की क्षतविक्षत लाशें बिछ गई हैं।

इसके बाद केप्स ने अपने बचाव की कोशिशें शुरु कीं और इस दौरान उन्हें जिस किसी के भी शरीर में ज़रा भी जान नज़र आई वो उसे लेकर बचाव यंत्रों की तरफ भागे। इस यंत्र में रबर का एक फेफड़ा, ऑक्सिजन की बोतल, माउथपीस और काला चश्मा शामिल था।

ये बचाव यंत्र सिर्फ 100 फ़ीट की गहराई तक ही परखा हुआ था, लेकिन केप्स उस वक्त 270 फ़ीट की गहराई पर थे, जहां से इससे पहले कोई जीवित बचकर नहीं लौटा था।

जान बचाने जमकर पी शराब

एचएमएस पेरसियस के मलबे से वही रम की वो बोतल मिली, जिससे जॉन ने आखिरी घूंट पिया था।

अपने घायल साथियों को एक सुरक्षित जगह पर रखने के बाद उन्होंने अपनी बोतल में बचे रम को गटागट पिया। इस क्षण को बयां करते हुए केप्स कहते हैं, "मैंने खुद को बिलकुल खुला छोड़ दिया और थोड़ी ही देर में ऑक्सिजन की मदद से मध्यसागर के बीचोबीच पहुंच गया। मेरा शरीर दर्द से टूट रहा था। ऐसा लग रहा था कि मेरा फेफड़ा और शरीर किसी भी वक्त अलग हो सकता है, मैं तड़प उठा और सोचने लगा कि ऐसी हालत में भला मैं कब तक ज़िंदा रह सकता हूं?"

फिर अचानक एक झटके के साथ केप्स समुद्र की सतह पर पहुंच गए और खुद को लहरों के बीच पाया। लेकिन जॉन की कठिन परिक्षा अभी खत्म नहीं हुई थी। जॉन के साथी कर्मचारी उनकी तरह खुशकिस्मत नहीं थे, और दिसंबर के सर्द महीने में समुद्री लहरों के बीचोबीच जॉन केप्स बिल्कुल अकेले थे। अंधेरे में उन्हें कुछ सफेद चट्टानें दिखीं और ये तय हो गया यही उनका सहारा हैं।

संदेहास्पद कहानी

अगली सुबह केफालोनिया के दो मछुआरों ने बेहोशी की हालत में केप्स को बचाया। अगले 18 महीनों तक वो एक घर से दर इन लोगों के बीच शरण लिए रहे, ताकि इटली में शासक करने वालों के हाथ ना लग जाएं।

अपनी पहचान छुपाने और स्थानीय लोगों जैसा दिखने के लिए उन्होंने न सिर्फ 32 किलो तक अपना वज़न घटाया बल्कि बालों को भी काला रंग दिया। वो याद करते हैं, "ऐसा भी हुआ है कि नाउम्मीदी के हालातों में कुछ स्थानीय बेहद ग़रीब लेकिन मित्रवत परिवारों ने उन्हें बचाने के लिए अपने पूरे परिवार की जान जोख़िम में डाला था।"

आखिरकार मई 1943 में ब्रिटेन की रॉयल नेवी द्वारा चलाए जा रहे एक गुप्त बचाव ऑपरेशन में उन्हें वापस ले जाया गया। इस कठिन परिक्षा से गुज़रने और ज़िंदा वापस लौटने के लिए जॉन केप्स को सम्मानित भी किया गया था, लेकिन उनकी कहानी इतनी अदभुत थी कि कई लोगों को इसपर विश्वास नहीं था।

इस घटना का कोई गवाह भी नहीं था और केप्स को एक अच्छा कथावाचक माना जाता था, जिसकी खुद की लिखी कहानियों में कई बार भिन्नताएं पायी गईं थी। 1985 में जॉन केप्स की मृत्यु हो गई, लेकिन 1997 में उनकी ओर से सुनाई गई कहानी आखिरकार सच साबित हुई।

ब्रितानी पनडुब्बी एचएमएस परसियस के मलबे की खोज में लगे एक दल को खाली पड़ा तिरपाल का संदूक, बचाव यंत्र और पनडुब्बी का वही कमरा हाथ लगा। उसकी हालत हुबहू वैसी थी जैसा जॉन केप्स ने बताया था, और साथ ही रम की वो बोतल भी हाथ आई जिससे जॉन केप्स ने अपना आखिरी लेकिन विजयी घूंट हलक में उतारा था।

('सी वुल्व्स' के लेखक टिम क्लेटन द्वारा बीबीसी को दी गई जानकारी पर आधारित) साभार बीबीसी हिंदी

 
 
sabhar :लंदन. द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान हर ओर कोहराम मचा हुआ था। जमीन से लेकर पानी तक हर ओर मौत का मंजर छाया था। कुछ योद्धा ऐसे भी थे जो इन सब के बीच से जिंदा वापस लौट आए थे। कुछ ऐसी ही रोचक कहानी है ब्रिटेन के नाविक जॉन केप्स की।

70 साल पहले ब्रितानी पनडुब्बी एचएमएस परसियल समुद्र में डूब गई थी। जॉन इस हादसे में जिंदा बचने वाले एकमात्र नाविक थे।

ग्रीस के टापू केफा़लोनिया में 70 साल पहले एक ब्रितानी पनडुब्बी समुद्र के भीतर एक खदान से जा टकराई थी, जिस पर सवार लोगों के बचने की दास्तान द्वितीय विश्वयुद्ध की सबसे विवादास्पद कहानियों में से एक रही है।

द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान भूमध्यसागर का साफ़ पानी ब्रितानी पनडुब्बियों के लिए मौत के जाल से कम नहीं था। इन पनडुब्बियों पर कभी हवाई हमले होते थे तो कभी सागर की गहराईयों के भीतर से उनपर वार किया जाता था। लेकिन ये पनडुब्बियां सबसे अधिक शिकार होती थीं समुद्री खदानों की।

भूमध्यसागर से गुज़रने वाली हर पांच में से दो पनडुब्बियां पानी में समा जाती थीं और ज़ाहिर था उस पर सवार हर यात्री के लिए ये पनडुब्बी एक सामुहिक कब्र बन जाया करती थी। दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान सिर्फ़ चार ब्रितानी पनडुब्बियां इस मौत के जाल से बचकर निकलने में सफल रहीं, जिसमें सबसे अनूठा रहा छह दिसंबर 1941 को एचएमएस परसियस का समुद्र की गहराईयों में गोता लगाना।

पहेली

1941 के नवंबर महीने के अंत में ब्रितानी पनडुब्बी परसियस ने जब माल्टा से अपनी यात्रा शुरू की तब उसमें 59 नाविकों के एक दल के अलावा, दो यात्री सवार थे जिनमें से एक 31 वर्षीय जॉन केप्स थे।

केप्स उस दौरान नौसेना में कार्यरत थे और एलेक्ज़ेंड्रिया जा रहे थे। लंबी कद-काठी और खूबसूरत मिजाज़ के जॉन केप्स को एक राजनयिक के बेटे होने के कारण यूं तो नौसेना का कोई बड़ा अधिकारी होना चाहिए था लेकिन वो एक जहाज़ में मशीनों की देखभाल करने वाले एक मामूली कर्मचारी थे।

छह दिसंबर को कड़कड़ाती ठंड की रात में उनकी पनडुब्बी समुद्र तट से लगभग तीन मील की दूरी पर समंदर के बीचोबीच थी। जॉन केप्स के अनुसार जब वो इंजन रूम में बिछे ट्यूब के एक बिस्तर पर आराम कर रहे थे तभी अचानक उन्हें एक भयंकर धमाके की आवाज़ सुनाई दी।

अचानक हुए इस दिल दहलाने वाले धमाके से नाव पहले डगमगाई, फिर अचानक किसी चीज़ से बुरी तरह टकरा गई। ये टकराव इतना तेज़ था कि केप्स के शरीर की नसें तक हिल गईं। अचानक गुल हुई बिजली के बीच वो अपने बिस्तर से उछल गए और कमरे में चारों तरफ लुढ़कते रहे।

केप्स समझ गए कि उनका जहाज़ किसी खदान या सुरंग से जा टकराया है। खतरे को भांपने के बावजूद वो अपने आसपास टॉर्च ढूंढने की कोशिश करते रहे। लगातार बढ़ती गंध और इंजन रूम में दाखिल होते पानी के बीच उन्होंने देखा कि उनके आसपास दर्जनों लोगों की क्षतविक्षत लाशें बिछ गई हैं।

इसके बाद केप्स ने अपने बचाव की कोशिशें शुरु कीं और इस दौरान उन्हें जिस किसी के भी शरीर में ज़रा भी जान नज़र आई वो उसे लेकर बचाव यंत्रों की तरफ भागे। इस यंत्र में रबर का एक फेफड़ा, ऑक्सिजन की बोतल, माउथपीस और काला चश्मा शामिल था।

ये बचाव यंत्र सिर्फ 100 फ़ीट की गहराई तक ही परखा हुआ था, लेकिन केप्स उस वक्त 270 फ़ीट की गहराई पर थे, जहां से इससे पहले कोई जीवित बचकर नहीं लौटा था।

जान बचाने जमकर पी शराब

एचएमएस पेरसियस के मलबे से वही रम की वो बोतल मिली, जिससे जॉन ने आखिरी घूंट पिया था।

अपने घायल साथियों को एक सुरक्षित जगह पर रखने के बाद उन्होंने अपनी बोतल में बचे रम को गटागट पिया। इस क्षण को बयां करते हुए केप्स कहते हैं, "मैंने खुद को बिलकुल खुला छोड़ दिया और थोड़ी ही देर में ऑक्सिजन की मदद से मध्यसागर के बीचोबीच पहुंच गया। मेरा शरीर दर्द से टूट रहा था। ऐसा लग रहा था कि मेरा फेफड़ा और शरीर किसी भी वक्त अलग हो सकता है, मैं तड़प उठा और सोचने लगा कि ऐसी हालत में भला मैं कब तक ज़िंदा रह सकता हूं?"

फिर अचानक एक झटके के साथ केप्स समुद्र की सतह पर पहुंच गए और खुद को लहरों के बीच पाया। लेकिन जॉन की कठिन परिक्षा अभी खत्म नहीं हुई थी। जॉन के साथी कर्मचारी उनकी तरह खुशकिस्मत नहीं थे, और दिसंबर के सर्द महीने में समुद्री लहरों के बीचोबीच जॉन केप्स बिल्कुल अकेले थे। अंधेरे में उन्हें कुछ सफेद चट्टानें दिखीं और ये तय हो गया यही उनका सहारा हैं।

संदेहास्पद कहानी

अगली सुबह केफालोनिया के दो मछुआरों ने बेहोशी की हालत में केप्स को बचाया। अगले 18 महीनों तक वो एक घर से दर इन लोगों के बीच शरण लिए रहे, ताकि इटली में शासक करने वालों के हाथ ना लग जाएं।

अपनी पहचान छुपाने और स्थानीय लोगों जैसा दिखने के लिए उन्होंने न सिर्फ 32 किलो तक अपना वज़न घटाया बल्कि बालों को भी काला रंग दिया। वो याद करते हैं, "ऐसा भी हुआ है कि नाउम्मीदी के हालातों में कुछ स्थानीय बेहद ग़रीब लेकिन मित्रवत परिवारों ने उन्हें बचाने के लिए अपने पूरे परिवार की जान जोख़िम में डाला था।"

आखिरकार मई 1943 में ब्रिटेन की रॉयल नेवी द्वारा चलाए जा रहे एक गुप्त बचाव ऑपरेशन में उन्हें वापस ले जाया गया। इस कठिन परिक्षा से गुज़रने और ज़िंदा वापस लौटने के लिए जॉन केप्स को सम्मानित भी किया गया था, लेकिन उनकी कहानी इतनी अदभुत थी कि कई लोगों को इसपर विश्वास नहीं था।

इस घटना का कोई गवाह भी नहीं था और केप्स को एक अच्छा कथावाचक माना जाता था, जिसकी खुद की लिखी कहानियों में कई बार भिन्नताएं पायी गईं थी। 1985 में जॉन केप्स की मृत्यु हो गई, लेकिन 1997 में उनकी ओर से सुनाई गई कहानी आखिरकार सच साबित हुई।

ब्रितानी पनडुब्बी एचएमएस परसियस के मलबे की खोज में लगे एक दल को खाली पड़ा तिरपाल का संदूक, बचाव यंत्र और पनडुब्बी का वही कमरा हाथ लगा। उसकी हालत हुबहू वैसी थी जैसा जॉन केप्स ने बताया था, और साथ ही रम की वो बोतल भी हाथ आई जिससे जॉन केप्स ने अपना आखिरी लेकिन विजयी घूंट हलक में उतारा था।
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इस डिवाइस के आते ही बदल जाएगा सेक्स लाइफ

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वायग्रा और सेक्‍स पिल्‍स के साइड इफेक्‍ट को देखते हुए वैज्ञानिकों ने इन दिनों एक ऐसा डिवाइस बनाया है जो सेक्‍स लाइफ को लंबे समय तक स्‍पाइसी बनाए रखता है।  
वैज्ञानिक इन दिनों एक ऐसे डिवाइस पर काम कर रहे हैं जिसे दिमाग में फिट किया जा सकेगा और इससे सेक्स का आनंद कई गुना बढ़ जाएगा। वैज्ञानिकों ने इसका नाम सेक्‍स चिप रखा है।  
प्रयोग के तौर पर वैज्ञानिकों ने इस चिप को एक ऐसे महिला के दिमाग में इंप्‍लांट कर दिया जिसे सेक्‍स में कोई इंटरेस्‍ट नही था। मगर इस चिप के इंप्लांट के बाद उसकी सेक्स रिलेटेड इच्छाएं तेजी से बढ़ गईं। बाद में इस चिप को निकाल दिया गया, क्योंकि वह सामान्‍य लाइफ और सेक्‍स लाइफ के साथ सामंजस्य नहीं बिठा पा रही थीं।  
ऑक्सफर्ड में जॉन रेडक्लिफ हॉस्पिटल के प्रोफेसर टीपू अजीज का कहना है कि सेक्स चिप 10 सालों के भीतर एक सचाई बन सकती है। उनका कहना है कि इस चिप की सफलता के सबूत भी हैं। उनका कहना है कि यह तकनीक वायरलेस होगी और सेल्फ पावर्ड ब्रेन चिप्स के सहारे चलेगी।
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अधेड़ों पर क्यों आता है युवतियों का दिल, जानना है तो पढ़ें खबर!

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जमशेदपुर। इसे पश्चिमी सभ्यता का प्रभाव कहें या शहर के बदलते परिवेश का परिणाम। शहर में इन दिनों अधेड़ द्वारा अपनी से आधी उम्र की लड़कियों से प्यार और फिर शादी की प्रवृत्ति बढ़ी है। इस मामले में शहर के बुद्धिजीवियों की राय है कि यह पाश्चात्य प्रथा का परिणाम है। आजकल की लड़कियों के मन में यह बात जन्म ले रही है बिना मेहनत के कोई चीज कैसे मिल सकती है।


स्टेबिलिटी की वजह से वे इस आकर्षण को रिश्ते में तब्दील कर रही हैं। दूसरी ओर, मनोचिकित्सक निधि श्रीवास्तव का मानना है कि इसका कारण इलेक्ट्रा कॉम्प्लेक्स नामक बीमारी है, जो लड़कियों में 20 से 26 वर्ष के बीच होती है। इस दौरान वे अधिक उम्र के लोगों में अपने पिता की छवि तलाश करती हैं।


क्या है इलेक्ट्रा कॉम्प्लेक्स


मनोचिकित्सक के अनुसार, इलेक्ट्रा कॉम्प्लेक्स युवतियों में पलने वाली एक अजीब किस्म की बीमारी है। इस बीमारी के कारण लड़कियां अपने पिता को सबसे करीब समझती हैं। वे समझतीं हैं कि उनके पिता से ज्यादा करीब दूसरा कोई नहीं हो सकता। साथ ही वे खुद को सुरक्षित महसूस करतीं हैं। आजकल की लड़कियों में अपने से अधिक उम्र के लोगों से प्यार होना, उनसे शादी करना आदि इसी के कारण हैं।


क्या हैं कारण


1. पाश्चात्य सोच
2. बिना मेहनत किए स्थायित्व मिलना
3. मानसिक और आर्थिक रूप से सुरक्षित जिंदगी की तलाश
4. लिव इन रिलेशन की प्रथा का जन्म लेना
5. अपने पिता की छवि को अधिक उम्र के लोग में तलाश करना


कैसे बचा जा सकता है


1. लड़कियों को इस फास्ट लाइफ से बाहर निकलना होगा
2. संघर्ष करने की आदत डालनी होगी
3. स्वस्थ जीवनसाथी की तलाश करनी होगी
4. बराबर और थोड़े बड़े उम्र वालों के साथ शादी होने से दोनों में आपसी समझदारी ज्यादा होती है
5. अपने जीवनसाथी को अपना दोस्त समझना होगा sabhar :
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कैसे उतारते है कपडे बॉलीवुड में लड़के और लडकियों के ?

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बॉलीवुड  जहा एक तरफ कुआ है दूसरी तरफ खाई | जो  इस खेल को पार कर  गया, वह बन जाता है फिल्म स्टार या बेकार | बॉलीवुड में काम करने  का सपना लेकर आने वाले हजारो लाखो लोग  यह सोचते है वह बॉलीवुड में अपनी जगह बना लेगे परन्तु कुछ  की किस्मत साथ  दे देती , कुछ की  नहीं |  बॉलीवुड में चढ़ते सूरज को सलाम किया जाता है यह कहाबत सर चढके बोलती है | 

 हम आपको बताते है आखिर बॉलीवुड में शोषण होता कैसे है ?क्यों करवाते है लड़के लडकिया अपने  तन बदन का शोषण | आखिर क्या मज़बूरी है जो ये सब करने में हामी बार देते है | बॉलीवुड में अपना मुकाम बनाने वाले के लिए लडकिया -लडके घर वालो की मर्जी से कुछ घर  से भाग कर आते है | बॉलीवुड की दुनिया से अनजान  और आखो में ढेरो सपने ही  दूसरो के लिए हर  कपडे उतरने  काम पर बेबस और लाचार बना देते है |

कपडे उतरने का सिलसिला पेईंग गेस्ट हाउस  से ही शुरू हो जाता है , जिसमे जायदातर कपडे लडकियों के कपडे उतर जाते है | पेईंग गेस्ट में  रहकर  भाडा न देने की सूरत में शुरू होता है  लड़के लडकियों का शारीरिक मानसिक शोषण ,फिर ये सिलसिला शुरू हो जाता है |

पोर्टफोलियो ,  फिल्म कुर्दिनाटर , फिल्म डिरेक्टर, प्रोडूसर , रायटर ,  गायक , म्यूजिक कंपोजर, एक्टर , एक्ट्रेस   लोग मौका  मिलते ही बुरी तरीके से काम दिलवाने के नाम पर इस्तेमाल करते है | यह लोग शुरू में खुद इस्तेमाल करते है फिर अपने दोस्तों के पास भेजने लगते है | 

बॉलीवुड के दलालों का काम भी अच्छा चलता है वह नए लड़के लडकियों को काम के नाम पर जमकर जिस्म फरोसी का धंधा करवाते है और उसके बदले वसूलते है  मोटा पैसा |  बॉलीवुड में जहा लडकियों की डिमांड जायदा है वह लडको की डिमांड कम नहीं है | 

ज्यादातर नए लड़के लडकिया डिस्को - पब में जाकर  नए दोस्त बनाते है फिर  नए लिंक भी बनते  चले जाते है | अधेरी रात में चलता है जिस्म का काला कारोबार और दिन  के उजाले में स्टूडियो  के चक्कर लगाते है | उनके खुद के खर्चे धीरे धीरे निकलने लगते है | जिसकी योग्यता - तकदीर अच्छी होती है उसे काम मिलने लगता है नहीं ये लोग छोटा मोटा रोल करके अपना गुजरा  करने लगते है | वर्ना जिस्म की मंदी में पूरी तरह उतर जाते है | 

मुंबई के जिस्म के दलाल बड़े माहिर है इनके काम करने का ढंग बेहद शातिर है  इनके पास होती है फोटो एल्बम जिसमे लगे होते है मॉडल , एक्टर , एक्ट्रेस की फोटो   और उन फोटो के पीछे होते उनके फ़ोन नंबर| अगर किसी को लड़के और लड़की की जरुरत है तो वह तुरंत फ़ोन करके हाजिर करवा देते है | आपको केवल फोटो पर अपनी ऊँगली रखना है |  दलाल हर रेट का लड़का और लड़की रखते है ताकि ग्राहक खाली न जाये | गर आप बॉलीवुड में अपना मुकाम बनाना चाहते है तो ऐसे दलालों से बचके रहे कही आप भी जिस्म की मंडी  के  सौदागर न बन जाये |

अगली बार होगा बड़ा खुलासा बॉलीवुड  फिल्म स्टार का  जो करते है करवाते है काम के नाम पर  मासूम लड़के लडकियों का जिस्म का  सौदा | अभी तो पिक्चर बाकी है मेरे दोस्त | 



लेखक सुशील गंगवार साक्षात्कार.कॉम , साक्षात्कार टीवी .कॉम , साक्षात्कार .ओर्ग के संपादक है पिछले ११ वर्षो से प्रिंट मीडिया , वेब मीडिया , इलेक्ट्रोनिक मीडिया के काम कर रहे है अगर आपके पास खबर  है तो हमें भेजे या  फ़ोन करे -  09167618866



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