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शनिवार, 3 दिसंबर 2011

लाल बिकनी में 'प्लेयर्स' के होश उड़ाती हॉट बिपाशा का देखें वीडियो

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सन् 2006 में आई फिल्म 'धूम-2' में बिपाशा ने बिकनी पहनी थी। अब 5 सालों बाद यह ब्लैक ब्यूटी फिर से फिल्म 'प्लेयर्स' में बिकनी में नजर आ रही हैं। इस फिल्म के नए गाने तेरे नशे में झूमता हूँ मैं...का वीडियो इन दिनों इंटरनेट पर धूम मचा रहा है| गाने में बिप्स ने रेड बिकनी पहन खूब जलवे दिखाए हैं| बिपाशा के शब्दों में... 'मैं बीच लवर हूं और मुझे स्वीमिंग पूल बहुत भाता है। इसलिए बिकनी पहनने में मुझे कभी किसी तरह की परेशानी नहीं हुई। मेरी चिंता तो सिर्फ यह रहती है कि बिकनी पहनकर कितनी अच्छी तरह से शूटिंग कर सकती हूं। इस समय मैंने शूटिंग के समय सिनेमेटोग्राफर रवि के चंद्रन की हरेक बात का ख्याल रखा।' बिपाशा ने बिकनी में यह शूटिंग विलिंग्टन (न्यूजीलैंड) में की है और वह भी कंपकंपा देने वाले ठंडे पानी में। इस बारे में बिपाशा कहती हैं कि यह शूटिंग पूरी होते ही चीफ असिस्टेंट डायरेक्टर टीनू ने मुझे मफिंस दी और सिकंदर खैर व ओमी वैद्य मुझे पिज्जा खिलाने ले गए थे। इसलिए हिसाब बराबर हो गया। दरअसल यह दृश्य हमें अभिषेक बच्चन के जन्मदिन की सुबह शूट करना था। इसलिए रात की पार्टी मैंने मिस कर दी थी, क्योंकि सुबह जल्दी उठना था। बंगाली बाला बिप्स ने शूटिंग के दौरान कई बिकनी पहनीं, लेकिन उन्हें ढेरों बिकिनी में से कोई भी पसंद नहीं आई। आखिरकार उन्होंने अपनी बिकनी पहनकर यह शूटिंग पूरी की। बिप्श के अनुसार 'मैं बिकनी में हॉट दिखने के लिए कोई स्पेशल डाइट या कसरत नहीं करती, क्योंकि मैं हमेशा फिट रहती हूं।'देखिए इस गाने की एक झलक इस वीडियो में sabhar ; bhaskar.com


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3 लाख महीने की कमाई वाली कॉलगर्ल के साथ रंगरेलियां मना रहे थे इंजीनियर साहब

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नागपुर.धरमपेठ स्थित होटल लाहोरी डिलक्स बार में शनिवार की रात एक उद्यमी व मायल अभियंता को हाइप्रोफाइल कॉलगर्ल के साथ पकड़ा गया। इस दौरान पुलिस ने दो महिला समेत पाच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। बर्डी थाने में प्रकरण दर्ज किया गया है।


आरोपियों में उद्यमी मुकेश रविशंकर झा (33) रायपुर, मायल का अभियंता विजय हरीदास पाटील (33) मनसर, होटल का कर्मचारी रमाशंकर गोपाल मिश्रा (55), महेश सेवकराम पवार (23) दवलामेटी निवासी का समावेश है। जबकि होटल मालिक मनोज जयनारायण शर्मा थे। तलाश जारी है। शनिवार की रात पुलिस को गुप्त जानकारी मिली थी कि धरमपेठ स्थित लाहोरी डिलक्स बार में देह-व्यवसाय कराया जाता है। इस आधार पर रात करीब 1.30 बजे के दौरान पुलिस ने होटल को घेर लिया व छापा मार कार्रवाई को अंजाम दिया।


इस दौरान होटल के चौथे माले पर अलग-अलग कमरों में उद्यमी मुकेश व अभियंता विजय पुलिस के हाथ लगे। कमरे में आपत्तिजनक सामग्री व शराब की बोतलें भी मिली है, लेकिन लड़कियां वहां पर नहीं थी। जब पुलिस ने उन दोनों को लड़कियों के बारे में पूछा तो वे उलटा पुलिस से ही सवाल-जवाब करने लगे कि किन लड़कियों की बात की जा रही है।


छत पर टंकी के पीछे छुपी थीं लड़कियां


कार्रवाई की भनक लगते ही मुकेश व विजय के कमरे में मौजूद लड़कियां छत पर टंकी के पीछे जा छुपी थीं। खबर पक्की होने से पुलिस ने पूरे होटल की तलाशी ली। इस दौरान छत पर टंकी के पीछे छुपी दोनों लड़कियां नीता व रेखा (दोनों परिवर्तित नाम) पुलिस के हाथ लगी। नीता मध्यप्रदेश की है।


जबकि रेखा दार्जिलिंग की। गत पांच वर्ष से वह मुंबई में रह रही थीं। इसके बाद पुलिस सभी को गिरफ्तार कर थाने ले आई। शनिवार को लड़कियों को अदालत में पेश कर नारी सुधारगृह में भेजा गया है, जबकि अन्य आरोपियों को दो दिन के पुलिस रिमांड में लिया गया है।


रेट 3 लाख, भरती है हवाई उड़ान


दोनों हाईप्रोफाइल कॉल गर्ल महेश पवार के संपर्क में थी। उसके बुलावे पर वह शहर में आती थीं। बताया जा रहा है कि रेखा प्रति महीना 3 लाख रुपए लेती है। वह विमान से आवागमन करती है। इसके पहले भी वह यहां पर कई बार आयी है, लेकिन उसने अपना पता नागपुर के वैशालीनगर का बताया था।


जबकि वैशाली नगर से उसका कोई लेना-देना नहीं है। उसी प्रकार नीता भी मध्यप्रदेश की है। लेकिन उसने भी अपना पता गंगा जमुना का बताया था। दोनों हाइप्रोफाइल कॉलगर्ल में से एक का सौदा 20 हजार रुपए में जबकि दूसरी का 30 हजार रुपए में किया गया था। जबकि पुलिस इसे हजार, पंद्रह सौ रुपए बता रही है।


पहले भी चर्चित रहा होटल


जब डॉन्स शुरू थे। उस वक्त भी यह होटल चर्चा में रहा है। कहा जाता है कि यहां पर डांसिंग फ्लोर से लेकर सब कुछ चलता था। इस कार्रवाई से इसकी पुष्टि भी होती है। बताया जा रहा है कि इस सब की जानकारी के बावजूद पुलिस कार्रवाई करने से बच रही थी। जोन क्र. 4 के पुलिस आयुक्त निशीथ मिश्रा के मार्गदर्शन में यह कार्रवाई की गई। sabhar : bhaskar.com

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जीनत अमान से एकतरफा प्यार करते थे देवानंद, लेकिन टूट गया था उनका दिल

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नई दिल्ली. सदाबहार अभिनेता देवानंद ने अपनी आत्मकथा रोमांसिंग विद लाइफ में यह माना है कि किसी समय वे अभिनेत्री जीनत अमान से बेहद प्यार किया करते थे, लेकिन ‘शो मैन’ राजकपूर के प्रति जीनत के लगाव को देखकर उनका दिल टूट गया।

2007 में रिलीज हुई उनकी आत्मकथा में उन्होंने लिखा कि वे जीनत अमान से बेहद प्यार करते थे और इसीलिए उन्हें अपनी फिल्म ‘हरे रामा हरे कृष्णा’ में अभिनेत्री बनाया था। लेकिन देवानंद का यह प्यार परवान चढ़ने से पहले ही टूट गया, क्योंकि उन्होंने जीनत अमान को एक पार्टी में राजकपूर की बाहों में देख लिया था। देवानंद लिखते हैं, “एक पार्टी में राजकपूर ने जीनत को पुकारा...राजकपूर ने अपनी बांहें फैला दी और जीनत अमान उनकी बांहों में समा गई। यह देखकर मेरा दिल टूट गया। मैं पार्टी से बाहर जाना और अकेले में रहने चाहता था”।

गौरतलब है कि देवानंद ने 438 पृष्ठों की इस पुस्तक में अपनी ज़िंदगी के तमाम पहलुओं का जिक्र किया है। पुस्तक में देवानंद ने अपनी युवावस्था, लाहौर, गुरदासपुर, फिल्मी दुनिया के संघर्ष, गुरुदत्त के साथ मित्रवत रिश्तों और सुरैया के साथ अपने संबंधों का उल्लेख किया है। इसके अलावा देवानंद ने अपने भाई विजय आनंद और चेतन आनंद के संबंध में भी इस किताब में लिखा है। किताब में देवानंद ने राजकपूर और दिलीप कुमार के साथ अपने संबंधों का भी जिक्र बड़ी बेबाकी से किया है। अपनी फिल्मों की अभिनेत्रियों गीताबाली, मधुबाला, मीना कुमारी, नूतन, वैजयंती माला, मुमताज, हेमा मालिनी, वहीदा रहमान, जीनत अमान और टीना मुनीम के बारे में भी उन्होंने इस किताब में लिखा है। sabhar : bhaskar.com

 

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इंसान के प्यार में पागल हुई 'नागिन', अद्भुत कहानी सुन दंग रह जाएंगे!

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मथुरा। 21वीं सदी में हम पूर्वजन्म में यकीन करें या ना करें, लेकिन यह खबर हमें सोचने पर मजबूर जरूर कर देती है। मथुरा के पास अगरयाला गांव है। यहां हर साल नागपंचमी का दिन कुछ खास होता है।

यहां रहने वाले एक शख्स के पास एक नागिन आती है। उसके गले से लिपट जाती है। उसके साथ काफी देर तक रहती है। फिर गायब हो जाती है। यहां लोगों के बीच ऐसी मान्यता है कि गांव में रहने वाला लक्ष्मण इस नागिन का पूर्व जन्म में पति था।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, नागिन युवक के घर आकर लिपट जाती है। इस अजूबे चमत्कार को देखने के लिए गांव में न केवल आसपास के लोगों का मेला लग जाता है, बल्कि दूर दराज से लोग अपनी मनोकामना पूरी करने के लिए गांव आते हैं।

लक्ष्मण का जन्म अगरयाला गांव में शंकर महाशय के यहां हुआ था। यह जब सात माह का था तो नागिन उसके सीने पर आकर बैठी थी। पर उसने काटा नहीं। बाद में उसका विवाह जब मथुरा के ही गांव मौरा में सूरजमल की पुत्री गंगा से हुआ तो नागिन उसे डसने लगी। नागिन ने उसे सात बार डसा पर वैद्य ने उसे ठीक कर दिया। तांत्रिकों से ढाक बजवाने पर पता चला कि नागिन पूर्व जन्म में लक्ष्मण की पत्नी थी।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, नागिन ने कहा कि वह लक्ष्मण के पास हमेशा रहना चाहती है, इसलिए गांव में एक मंदिर बनावाया जाए। यहां प्रत्येक नागपंचमी को नागिन लक्ष्मण से मिलने आया करेगी। पिछले आठ साल से वह नागपंचमी के एक दिन पहले आती है। अगले दिन वह चली जाती है।
 
 sabhar: bhaskar.com
'खूब पर्दा है कि चिलमन से लगे बैठे हैं, छुपते भी नहीं, सामने आते भी नहीं'

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क्या यशवंत 'चोर' है?

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जगमोहन फुटेला- 

'भड़ास' पे खुद उसके मालिक ने अपने बारे में एक लेख छापा है सुशील गंगवार का...शीर्षक है, " भड़ास4मीडिया का पेड न्‍यूज का काला कारोबार". इस लेख में गंगवार ने एक सवाल उठाया है. कहा है कि विज्ञापन जब नहीं है तो वेबसाईट चलती कैसे है? वे लिखते हैं कि यशवंत पेड़ न्यूज़ और दलाली का धंधा करते हैं.

मैं न यशवंत के साथ हूँ, न खिलाफ़. इस लिए भी कि मैं उन्हें आज तक कभी नहीं मिला. हाँ, एक बार उन्हें वायस आफ इंडिया के दफ्तर में देखा ज़रूर है. उन के बारे में बातें बहुत सुनी हैं. सो, सुशील जो भी कह रहे हैं मैं उसकी तस्दीक कर पाने की हालत में नहीं हूँ. मुझे ये भी नहीं पता कि दोनों में अब बिगड़ी क्यों है. लेकिन एक बात सच है और वो ये कि वेबसाईट चलाना कोई आसान काम नहीं है. खासकर तब कि जब आप पर अदालतों में कुछ केस भी चल रहे हों.

'भड़ास' बेशक मीडिया जगत में काफी चर्चित साईट है. लेकिन उस के नाम का पहला शब्द कुछ ऐसा है जो आम तौर पर अंग्रेजी या हिंदी में किसी सर्च इंजन पर टाइप होता नहीं है. फिर भी इसे इतने लोग देखते हैं तो ये इस साईट के कंटेंट का कारण है. कंटेंट सही भी हो सकता है. गलत भी. विवादास्पद भी. बहुत सारे प्रतिष्ठित प्रकाशन और मीडिया संस्थानों ने अपने उत्पाद बेचने के लिए नंगई का सहारा लिया है. भड़ास अगर विवादास्पद लेख ही छाप रही है तो बुरा क्या है, जब तक वे असत्य न हों. रही पैसे लेकर खबर छापने की बात तो वो आसानी से मेरे गले उतरती नहीं है. कोई अगर अपने उत्पाद (या अपनी साईट) को पापुलर करने के लिए किसी भी पापुलर साईट का इस्तेमाल कर रहा है तो उसे प्रचार की कीमत चुकानी ही चाहिए. मैंने भी चुकाई. 'बुद्धिजीवी.कॉम' 
की मेरी एड स्क्रिप्ट चली' भड़ास' पर. मैंने पैसे दिये. ये बिजनेस है. इस में बुरा क्या? रही एडमिशन वगैरह में पैसे खाने वाली बात तो वो व्यक्ति व्यक्ति पर निर्भर करता है. मैंने अपने पूरे पत्रकारीय जीवन में कभी किसी भी काम के लिए किसी का एहसान माँगा ही नहीं. कुछ मांगते हैं, पैसे नहीं लेते. कुछ ऐसे भी हैं जो काम के न धाम के मगर मालपानी फिर भी रगड़ जाते हैं. अपन तब तक नहीं मानेंगे जब तक कोई आ के न कहे कि हाँ मैंने दिए यशवंत को पैसे.

हाँ, वेबसाईट चलाना मुश्किल काम है. विज्ञापन मेरे पास भी नहीं है. जर्नलिस्टकम्युनिटी, श्रद्धांजलि और बुद्धिजीवी डाट काम मैं फिर भी चला रहा हूँ बौहुत बड़े सर्वर, डाटा स्टोरेज और स्पीड के साथ. विज्ञापन नहीं है. मैं मांगता भी नहीं. अब कोई कहे मैं ब्लैकमेल करता हूँ तो कहे लेकिन बताये तो कि किसको किया और क्यों?

बहरहाल एक बहस छिड़ ही जानी चाहिए. तय हो ही जाना चहिये कि 'भड़ास' का सच और यशवंत की असलियत क्या है? कोई और छापे न छापे, मैं छापूंगा. लिखो, भेजो journalistcommunity@rediiffmail.com पर.

Sabhar:- Journalistcommunity.com

सुशील गंगवार का लेख भी हम यहाँ दे रहे  हैं...

मीडिया की खबर छापने का सिलसिला  Exchange4Media.com  और समाचार4मीडिया डाट कॉम  ने शुरू किया फिर इसी की धुन में अपनी धुन सुनाने की जुगत और मीडिया  को उजागर करने का मकसद लेकर मीडिया खबर डाट कॉम और भडास4मीडिया डाट कॉम शुरू हुए। जो लोग मीडिया के खिलाफ जम कर छापते है वह कितने दूध के धुले हैं? ये सबसे बड़ा सवाल है। कैसे चलता है इनके मीडिया की खबरों का काला कारोबार?
क्या ये लोग बड़े मीडिया घरानों के स्टिंग और वसूली करते हैं। यशवंत सिंह भड़ास नाम से ब्लॉग लिखते थे जो अब भी चल रहा है भडास ब्लॉग में काफी फेमस हुआ। उसके बाद भड़ास4मीडिया डाट कॉम का जन्म हुआ। हम ये कह सकते है यह यशवंत की जिन्दगी का नया चेहरा था जो भडास4मीडिया डाट कॉम बन के उभरा था।
मीडिया जगत के लोगों ने Exchange4media.com को छोड़ कर भड़ास4मीडिया डाट काम पढ़ना शुरू कर दिया। भड़ास4मीडिया खबरों में दम था चाहे वह शुरुआती दौर में कट एंड पेस्ट के जरिये लिखी जाती थी। धीरे-धीरे मीडिया की खबरें पत्रकार दोस्तों और मेल से आना शुरू हो चुकी थी। यशवंत की नजर हर मीडिया हाउस, न्यूज़ पेपर पर जमने लगी। दैनिक जागरण, अमर उजाला अखबारों का अनुभव रखने वाले यशवंत सिंह सफलता के नए आयाम स्थापित कर रहे थे परन्तु पैसे का जरिया नजर नहीं आ रहा था।
आखिर करे तो क्या करें? ये बड़ा सवाल था। न्यूज़ वेबसाइट खोलना आसान था मगर चलाना उतना ही कठिन था। इसी दौर में शुरू हुआ पेड न्यूज़ और वसूली का गरमा गरम धंधा। जिससे खर्चे निकलने लगे। किस्मत ने साथ दिया तो भड़ास4मीडिया डाट कॉम चल निकली और फिर यशवंत सिंह दौड़ने लगे। एक दिन मैंने भड़ास4मीडिया डाट कॉम के मालिक यशवंत सिंह को फ़ोन करके बोला, भाई मैंने एक नयी साइट बॉलीवुड खबर.कॉम शुरुआत की है, जरा भड़ास4मीडिया डाट कॉम पर न्यूज़ लगा दो, तो यशवंत सिंह बोले यार हम क्या चूतिया हैं जो तुम्हारी खबर लगा दें तुम माल छापो? पहले तुम मुझे पैसा दो फिर मैं न्यूज़ लगा सकता हूं। मैं बोला भाई ये बताओ कितना पैसा दिया जाये। इस पर यशवंत सिंह बोले कि तुम कम से कम 5000/- दान करो।
मेरी यशवंत से यदा कदा बातचीत फ़ोन पर हुई थी। मैं यशवंत को मीडिया गुरु मानने लगा था। एक दिन मेरा भ्रम टूट गया। गुरु घंटाल यशवंत मुझसे ही न्यूज़ डालने के पैसे मांग रहा था  और वह हड़काने वाली आवाज साफ़ सुनाई दे रही थी ये बात पिछले साल मार्च की है। यार एक पत्रकार दूसरे पत्रकार से पैसे मांग रहा है, मैं सोचने लगा ये आदमी इतना गिर सकता है। जब मैंने अपने मीडिया मित्र से पूछा यार ये यशवंत का असली काम क्या है, वह तपाक से बोला कुछ नहीं यार बहुत सारे काम हैं, दलाली कर लेता है, लोगों को नौकरी पर लगवा देता है और उसके बदले में पैसा खा लेता है। जो लोग टीवी चैनल, न्यूज़ पेपर स्ट्रिंगर, रिपोर्टर, एडिटर हैं और कंपनी उनको पगार देने में आनाकानी करती है तो यशवंत पैसा निकलवाता है और उसके बदले कमीशन उसके खा लेता है।
मैं समझ चुका था भड़ास4मीडिया डाट कॉम पेड न्यूज़ का धंधा कर रहा है। दूसरी बार जब फेसबुक पर मेरी मुलाकात यशवंत से हुई तो यशवंत सिंह को मजाक में बोला भाई मुझे काम दे दो? तो यशवंत ने जवाब दिया, आप नौकरी के लायक नहीं है हम लोग मिल के किसी विषय पर काम करते हैं। मीडिया में 11 साल काम करते हुए हो गए हैं तो ये समझते देर नहीं लगी आखिर ये यशवंत सिंह क्या काम करवाना चाहता है। अगर भडास 4मीडिया.कॉम को देखेंगे तो साइट विज्ञापन के नाम पर जीरो है, फिर कैसे चलती है खबरों की कालाबाजारी की दुकान।  आखिर कौन मसीहा है, जो इनके खर्चों को देता है और क्यों देता है।
मैं पिछले 11 साल से मीडिया में हूं। अभी तक साक्षात्कार डाट कॉम ब्लॉगर पर चला रहा हूं। मुझे अभी तक मसीहा नहीं मिला है अगर मिलता है तो तुरंत इतला कर दूंगा। मीडिया के  कालाबाजारियों पर रौशनी  डालने जरुरत है। अभी बहुत कुछ उजागर होना बाकी है जरा रखो तसल्ली। पिक्चर तो अभी बाकी है मेरे दोस्त।

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मीडिया के सवालों से कन्‍नी क्‍यों काट रही हैं साध्‍वी

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सूत्रों की माने तो मुमुक्षु आश्रम में साध्वी के आने के बाद स्वामी से ज्यादा वहां साध्वी का ही डंका बजता था। मुमुक्षु आश्रम शाहजहांपुर में स्वामी से यदि किसी को मिलाना होता था तो साध्वी की बिना अनुमति के वह स्वामी से मिल भी नहीं सकता था। यह तो एक बानगी है, हकीकत में स्वामी पर साध्वी का एक पत्नी की तरह पूरा कमांड था। स्वामी जी वही करते थे जो साध्वी चाहती थीं। अब इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि अगर स्वामी ने साध्वी के साथ कुछ गलत किया है तो इसमें साध्वी की पूरी स्वीकृति थी। चूंकि साध्वी ने अपने ब्लॉग पर कहा था कि वह मन ही मन में स्वामी को अपना पति मान चुकी थी। भारतीय नारी यदि किसी को एक वार मन से पति स्वीकार कर लेती है तो वह उस का साथ जीवन भर निभाती है फिर चाहे पति कितना भी अत्याचारी क्यों न हो, पर पत्नी उस का विरोध कभी भी नहीं करती है। इसी कारण साध्वी ने अपने पत्नी का फर्ज निभाते हुये दोनों की बातों को कभी भी जग जाहिर नहीं किया था। पर न जाने पत्रकार बंधु ने चिदर्पिता को कौन सी बूटी सुंघा दी जिस से वह स्वामी से बगावत करने की हिम्मत जुटा पाईं और स्वामी के साम्राजय को चुनौती देने की ठान ली हैं।
जब साध्वी स्वामी को अपना पति मान कर उनकी लंका में राज करने लगी थी और अपनी इच्छा से स्वामी के साथ शारीरिक शुख भोगा तो फिर अब वही सम्बंध दैहिक शौषण कैसे हो सकते हैं? साध्वी के दूसरे पति पत्रकार हैं फिर वह पत्रकारों से दूरी क्यों बढ़ा रही हैं। साध्वी रिपोर्ट दर्ज कराने के लिये जब पुलिस कार्यालय शाहजहंपुर में आई थीं तो पत्रकारों ने उनसे उनके द्वारा स्वामी पर लगाये जा रहे आरोपों के बारे में जानने का प्रयास किया तो वह बस इतना कहते हुये चली गईं कि मुझे कानून पर भरोसा है। उन्हें क्या पत्रकारों के सवालों का सामना करने में भय लग रहा है? या उन्हें इस बात का डर कि उन की कहानी की पोल खुल जायेगी। सूत्रों की माने तो साध्वी की हिटलरी से मुमुक्षु आश्रम का स्टाफ आजिज आ चुका था। उनके जाने से सभी स्टाफ के चेहरे पर भी चमक लौट आई है।
झूठा कौन- कालेज का रिर्काड या साध्वी? : साध्वी ने एसएस ला कालेज से 2003 में एलएलबी प्रथम वर्ष में प्रवेश लिया था, 2004 में द्वितीय वर्ष किया, 2005 में एलएलबी की पढ़ाई पूरी की। साध्वी ने तहरीर में कहा है कि 2005 में स्वामी के बंदूकधारी उनहे हरिद्वार से मुमुक्षु आश्रम शाहजहांपुर में लाये और वर्षों तक बंधक बनाकर रखा गया। पर जब वह 2003 में एसएस कालेज शाहजहांपुर से एलएलबी की संस्थागत छात्रा थीं तो उनकी यह बात किसी के भी गले नहीं उतर रही है। मतलब झूठा कौन? कालेज का रिर्काड या साध्वी?
लेखक सौरभ दीक्षित शाहजहांपुर में आईबीएन7 से जुड़े हुए हैं.
Sabhar:- Bhdas4media.com 

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भडास ४ मीडिया डाट .कॉम का पेड़ न्यूज़ का काला कारोबार

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मीडिया की खबर छापने का सिलसिला  Exchange  ४ Media   .com  और समाचार ४ मीडिया डाट कॉम  ने शुरू किया फिर  इसी की धुन में अपनी  धुन सुनाने  की जुगत और  मीडिया  को  उजागर  करने का मकसद लेकर  मीडिया खबर.डाट .कॉम और  भडास ४ मीडिया डाट .कॉम शुरू हुए |  

जो लोग मीडिया  के खिलाफ जम कर छापते है वह कितने दूध के धुले   है ? ये सबसे बड़ा सवाल है | कैसे चलता है इनके मीडिया की खबरों का काला  कारोबार ? क्या ये लोग बड़े मीडिया घरानों के स्टिंग  और बसूली  करते है | यशवंत सिंह भड़ास नाम से ब्लॉग लिखते  थे जो अब भी चल रहा है भडास ब्लॉग  में काफी फेमस हुआ | उसके बाद भड़ास ४ मीडिया डाट .कॉम  का जन्म हुआ |  हम ये कह सकते है यह यशवंत  की जिन्दगी का  नया चेहरा था जो भडास ४ मीडिया डाट .कॉम बनके उभरा था |

मीडिया जगत के लोगो ने Exchange  ४ media  .com   को छोड़ कर भड़ास ४ मीडिया डाट काम पढना शुरू कर दिया | भड़ास ४ मीडिया खबरों में दम था चाहे वह शुरूआती दौर में कट एंड पेस्ट के जरिये लिखी जाती थी | धीरे धीरे मीडिया की खबरे पत्रकार दोस्तों और मेल से आना शुरू हो चुकी थी |  यशवंत की नजर हर मीडिया हाउस  , न्यूज़ पेपर पर  जमने लगी | दैनिक जागरण  , अमर उजाला अखबारों का  अनुभव  रखने वाले यशवंत सिंह  सफलता के नए आयाम स्थापित कर रहे थे परन्तु  पैसे का जरिया नजर नहीं आ रहा था |

आखिर करे तो क्या करे ? ये बड़ा सवाल था . न्यूज़ वेबसाइट खोलना आसान था मगर चलाना उतना ही कठिन था | इसी दौर में शुरू हुआ पेड़ न्यूज़ और वसूली  का  गरमा गरम  धंधा | जिससे खर्चे निकलने लगे |  किस्मत ने साथ दिया तो भड़ास ४ मीडिया डाट .कॉम चल निकली  और फिर  यशवंत सिंह  दौड़ने लगे |
एक दिन  मैंने  भड़ास ४ मीडिया डाट .कॉम के  मालिक यशवंत सिंह को फ़ोन करके बोला, भाई मैंने एक नयी साईट  बॉलीवुड खबर.कॉम शुरुआत की है जरा भडास ४ मीडिया डाट .कॉम पर न्यूज़ लगा दो, तो यशवंत सिंह बोले यार हम क्या  चूतिया है जो तुम्हारी खबर लगा दे तुम माल छापो  ? पहले तुम मुझे पैसा दो फिर मै न्यूज़ लगा सकता हु |  मै बोला भाई ये  बताओ कितना पैसा दिया जाये | इस पर यशवंत सिंह बोले की तुम कम से कम ५०००/- दान करो | 

मेरी यशवंत   से यदा कदा बातचीत फ़ोन पर हुई थी | मै यशवंत  को मीडिया गुरु माने लगा था |  एक दिन मेरा भ्रम टूट गया | गुरु घंटाल  यशवंत मुझसे ही न्यूज़ डालने के पैसे माग रहा था  और  वह  हड्काने वाली आवाज साफ़ सुनाई दे रही थी ये बात पिछले साल  मार्च की है |  यार एक पत्रकार  दूसरे पत्रकार से पैसे माग रहा है मै सोचने लगा ये आदमी इंतना गिर सकता है |

जब मैंने अपने मीडिया मित्र से पूछा यार ये यशवंत का असली काम क्या है वह तपाक से बोला कुछ नहीं यार बहुत सारे काम है  दलाली कर लेता है ,लोगो को नौकरी पर लगवा  देता है और उसके बदले में पैसा  खा लेता है | जो लोग  टीवी चेंनेल न्यूज़ पेपर स्ट्रिन्गेर , रिपोर्टर , एडिटर है और कंपनी उनको पगार देने  में आनाकानी करती है तो यशवंत  पैसा निकलवाता है और उसके बदले कमीशन उसके खा लेता है | 

मै  समझ चुका था  भड़ास ४ मीडिया डाट .कॉम पेड़ न्यूज़ का धंधा कर रहा है | दूसरी बार जब फेसबुक पर मेरी मुलाकात यशवंत से हुई तो यशवंत सिंह को मजाक में बोला भाई मुझे काम दे दो ? तो यशवंत ने जवाब दिया |आप नौकरी के लायक नहीं है हम लोग मिलके किसी विषय पर काम करते है | मीडिया में ११ साल काम करते हुए हो गए है तो  ये समझते देर नहीं लगी आखिर ये यशवंत सिंह क्या काम करवाना  चाहता है | 

अगर भडास ४ मीडिया .कॉम  को देखेगे तो  साईट विज्ञापन के नाम पर जीरो है फिर कैसे चलती  है खबरों की कालाबाजारी की दुकान |  आखिर कौन मसीहा है |  जो इनके खर्चो को देता है और क्यों देता है  |  मै पिछले ११ साल से मीडिया में हु |  

अभी तक साक्षात्कार डाट .कॉम  ब्लॉगर पर चला रहा हु | मुझे अभी तक मसीहा नहीं मिला है अगर मिलता है  तो तुरंत इतला कर दूगा | मीडिया के  कालाबाजारियो  पर रौशनी  डालने जरुरत है | अभी बहुत कुछ उजागर होना बाकी है  जरा रखो तसल्ली | पिक्चर तो अभी बाकी है मेरे दोस्त | 


यह लेख सुशील गंगवार ने लिखा है जो पिछले ११ वर्षो से प्रिंट , वेब , इलेक्ट्रोनिक  मीडिया के लिए  काम कर रहे है वह  साक्षात्कार डाट.कॉम , साक्षात्कार टीवी .कॉम , साक्षात्कार .ओर्ग के संपादक है इनसे संपर्क  ०९१६७६१८८६६ पर किया जा सकता है | 


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शुक्रवार, 2 दिसंबर 2011

ISI की एजेंट है वीना? न्यूड तस्वीर छापने पर करेंगी मुकद्दमा, FHM ने कहा असली है फोटो

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बिग बॉस सीजन-4 से भारत में अपनी पहचान बनाने वाली पाकिस्तानी अभिनेत्री वीना मलिक एक बार फिर चर्चा में हैं। इस बार वह सिर्फ रियलिटी शो स्वयंवर में भागीदारी के लिए नहीं ‘एफएचएम इंडिया’ पत्रिका के कवर पेज पर अपनी नग्न तस्वीर छपने के कारण भी चर्चा में हैं।
वीना की तस्वीर में उनके हाथ पर एक टैटू बना हुआ है जिसमें ‘आईएसआई’ लिखा हुआ है। वीना मलिक ने पत्रिका के लिए नग्न तस्वीरे खिंचवाने की बात को खारिज करते हुए कहा है कि तस्वीर के साथ छेड़छाड़ की गई है।
दूसरी ओर पत्रिका के संपादक कबीर शर्मा ने कहा कि उनके पास वीना के शूट का वीडियो है और अभिनेत्री की ओर से एक ई-मेल भी जो यह साबित करता है कि तस्वीरें असली हैं। सूत्रों का कहना है कि यह फोटो शूट वीना के पसंदीदा फोटोग्राफर विशाल सक्‍सेना ने किया है। इस फोटो को काफी पसंद किया जा रहा है।
वीना ने मुंबई में कहा, ‘‘मैंने कभी नग्न तस्वीरें नहीं खिंचवाई हैं। मैंने इससे पहले कभी ऐसा नहीं किया है। मेरे मैनेजर और लीगल टीम इस मामले पर नजर रख रहे हैं। हम उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेंगे।’’ मुंबई में रियलिटी शो ‘स्वयंवर’ की शूटिंग कर रही 33 वर्षीय वीना का कहना है, ‘‘तस्वीरों से छेड़छाड़ की गई है। यह मैं नहीं हूं। पक्का नहीं हूं।’’
पत्रिका के संपादक कबीर शर्मा अलग ही दास्तान बयां कर रहे हैं। कबीर का कहना है, ‘‘फोटो शूट 22 नवंबर को मुंबई में हुआ है। हमारे पास शूट का वीडियो भी है। मेरे पास वीना का एक ई-मेल भी जिसमें लिखा है कि उन्होंने तस्वीरें देख ली हैं और उससे काफी खुश हैं और वह कवर पेज देखने का इंतजार कर रही हैं।’’
पत्रिका का कवर पेज भारत के साथ-साथ पाकिस्तान में भी चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग इसके लिंक को जम कर पोस्ट कर रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि एफएचएम पत्रिका के संपादक और वीना मलिक दोनों ही पर अक्सर पब्लिसिटी हासिल करने के लिए झूठ बोलने के आरोप लगते रहे हैं।
पाकिस्तान की राखी सावंत कही जाने वाली वीना मलिक जल्द ही इमेजिन टीवी के रियलिटी शो ‘स्वयंवर’ में अपना स्वयंवर रचाने जा रही हैं। चैनल की तरफ से इसके लिए वीना को तीन करोड़ रुपए दिए जा रहे हैं। इसके साथ ही अगर वीना ने इस शो में शादी भी कर ली तो पूरे साढ़े 4 करोड़ रुपए मिलेंगे।
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‘एअरहोस्टेस’ ने शराब पी तो मीडिया को मजा आया, लेकिन क्या पुलिस अधिकारी की थी शरारत?

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मुंबई में एक एयरलाइंस कर्मी शराब पीकर गाड़ी चलाती पकड़ी गई। जेट एअरवेज की इस कर्मचारी का नाम नीमा लूला है जो पकड़े जाने के बाद पुलिस से उलझने लगी, जैसा कि अमूमन आधुनिक महिलाएं करती हैं, लेकिन एक पुलिस अधिकारी ने मीडिया के जरिए उसे ऐसा बदनाम करवा दिया कि अब उसकी नौकरी पर बन आई है। बताया जा रहा है कि उस पुलिस अधिकारी से अब उसके सहकर्मी भीनाराज़ हैं कि उसने सभी की ‘कमाई’ पर पानी डलवा दिया।
 

नौकरी करने वाली रईसज़ादी?
दरअसल 4 तारीख को मलाड इलाके में ट्रैफिक पुलिस ने ड्रंकन ड्राइव अभियान के दौरान एक गाड़ी को रुकवाया। गाड़ी चला रही लड़की ने शराब पी रखी थी जो किसी पार्टी से आ रही थी। पुलिस ने उसके आते ही उस पर एक ऑटोरिक्शा को टक्कर मार कर भागने का आरोप मढ़ दिया। यह अलग बात रही कि कोई ऑटोवाला पुलिस की गवाही देने नहीं आया।
महिला ने पहले तो पुलिस को नशे में उलटा-सीधा कहा, फिर उसके साथी ने कुछ ले-दे कर मामले को रफा-दफा करने की कोशिश की। अक्सर ऐसे मामले मौके पर ही निपटा लिए जाते हैं, लेकिन यहां एक अधिकारी ने गड़बड़ कर दी। बताते हं कि वास्तव में पुलिसवाले  दोनों को मोटी आसामी समझ कर थाने ले आए थे और वहां अच्छी सौदेबाजी होने की उम्मीद थी, लेकिन एक पुलिस अधिकारी ने  फोन कर कुछ मीडियावालों को बुला लिया।


पुलिसकर्मियों ने खींचे कपड़े
अब कैमरे आने के बाद सारा मामला ही पलट गया। पुलिस बिल्कुल राजा हरिशचंद्र की तरह ईमानदार बन गई और दोनों पर आरोपों की बरसात कर दी। बकौल पुलिस, नशे में धुत्त महिला ने थाने में हंगामा बरपा दिया। हालांकि ऐसा कुछ होता दिख नहीं रहा था। जब टीवी वालों ने नीता को घेर कर सवालों की झड़ी लगा दी तो बौखलाई एअरलाइंस कर्मी ने कैमरे पर हाथ दे मारा। लगभग सभी चैनलों और अखबारों ने इस मामले वही लिखा और प्रसारित किया जो पुलिस ने कहा। पुलिस ने यह भी कहा कि नीमा को जब गिरफ्तार कर बांगुर नगर पुलिस स्टेशन ले जाया जा रहा था तो उस दौरान भी उसने महिला पुलिसकर्मियों से हाथापाई की और उन्हें अंजाम भुगतने के लिए धमकाया भी।


बात का बतंगड़
पुलिस ने नीमा के साथ-साथ उसके दोस्त पर भी मुकद्दमा बना दिया। पुलिस का आरोप है कि उसने पुलिसवालों को पैसों का लालच देकर मामले को रफा दफा करने की कोशिश की। पुलिस ने मीडिया को बताया कि हंगामे के दौरान इन लोगों ने पुलिसवालों के सामने अपनी हेंकड़ी दिखाने की कोशिश की।

पुलिस ने नीमा की मामूली स्विफ्ट को ‘लक्ज़री कार’ बताया और साधारण शराब को महंगी वाइन की बरामदगी बताया। सबसे मज़ेदार बात यह रही कि नीमा जेट एअरवेज में सुपरवाइजर है लेकिन पुलिस ने उसे एअरहोस्टेस बता दिया। शायद अधिकारियों को भी पता था कि मामला जितना हाई-प्रोफाइल होगा, मीडिया उतना ही मजे लेकर उछालेगा। बांगुर नगर पुलिस ने इनके खिलाफ 110, 185 , 353 के तहत मामला दर्ज कर लिया। यह अलग बात रही कि बोरिवली कोर्ट से दोनों को आसानी से जमानत मिल गई।
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कुत्ते से हुआ प्यार, साइंस की छात्रा ने कर दी सारी हदें पार!

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अहमदाबाद।शहर के पॉश इलाके में रहने वाली और साइंस (कक्षा 12वीं) की एक छात्रा का एक अजीबो-गरीब मामला सामने आया है। छात्रा को अपने घर पर पले कुत्ते से इस कदर प्यार हो गया कि अब वह उसे अपना ब्वॉयफ्रेंड मानने लगी है।  छात्रा कुत्ते को लेकर सारी हदें पार कर चुकी है। बताया जाता है कि छात्रा के कमरे से उसके परिजनों को अश्लील साहित्य भी मिले हैं। मजबूरीवश अब परिजनों को मनोचिकित्सक की मदद लेनी पड़ी है। लगभग 5 वर्ष पहले छात्रा के पिता जर्मन शैफर्ड ब्रीड के एक कुत्ते को घर लाए थे। जैसे-जैसे कुत्ता बड़ा होता गया, छात्रा का उससे प्रेम उतना ही बढ़ता गया। अब तो स्थिति यहां तक पहुंच चुकी है कि छात्रा रात-दिन कुत्ते के साथ ही रहती थी और उसे कुत्ते से एक पल के लिए भी दूर रहना पसंद नहीं। कुत्ते को लेकर छात्रा का पागलपन इस कदर बढ़ चुका था कि यह बात उसकी सहेलियों तक को पता थी। इन्हीं में से एक सहेली ने यह बात परिजनों बता दी, तब जाकर इस मामले का खुलासा हुआ। पिता ने यह बात सुनते ही कुत्ते को एक स्वैच्छिक संस्था को सौंप दिया। लेकिन छात्रा कुत्ते के प्यार में इस कदर पागल थी कि उसने परिजनों को धमकी दे दी कि अगर कुत्ते को वापस नहीं लाया गया तो वह आत्महत्या कर लेगी। इकलौती बेटी की इस हरकत से परिजन भी घबरा गए और कुत्ते को घर वापस ले आए। परिजन कुत्ते को वापस तो ले आए लेकिन अब उन्होंने कुत्ते को एक पिंजरे में रखना शुरू कर दिया है और उसकी देखभाल के लिए एक वॉचमैन भी रखना पड़ा है।इधर, कुत्ते से अलग रहने पर छात्रा की मानसिक हालत बिगड़ गई और वह डिप्रेशन में चली गई। अन्य चिकित्सकों की सलाह पर पिता ने उसे शहर के जाने-माने मनोचिकित्सक को दिखाया है।
छात्रा के कमरे से मिले अश्लील साहित्य:   पुत्री के कुत्ते से इस कदर प्रेम के चलते परिजनों ने जब उसके कमरे और सामानों की तलाशी ली तो काफी मात्रा में अश्लील साहित्य भी बरामद हुआ है।
यह बीमारी ‘जूफिलिया’ कहलाती है:   चिकित्सीय भाषा में इस बीमारी को जूफिलिया (जानवरों से अत्यधिक प्रेम व संभोग की स्थिति) कहा जाता है। इसकी शुरुआत ‘अनकंडिशन लव’ के रूप में होती है जो धीरे-धीरे बढ़ते हुए अंत तक ‘अनकंडिशनल फिजिकलिटी’ में बदल जाती है। पशु के प्रति बढ़ता प्रेम, संभोग तक पहुंच जाता है, जिसे ‘सैक्सुअल परवरजन’ भी कहा जाता है। विज्ञान में इस समस्या का निदान सिर्फ मनोवैज्ञानिक तरीके से ही संभव है।

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ओबामा से भी ज्यादा तनख्वाह पाएंगी जूलिया गिलार्ड

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मेलबॉर्न. ऑस्ट्रेलिया की पारिश्रमिक ट्रिब्यूनल ने अपने सांसदों का वेतन बढ़ाकर अपनी प्रधानमंत्री जूलिया गिलार्ड का रुतबा विश्व पटल पर बढ़ा दिया है। अब गिलार्ड की तनख्वाह अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरन से ज्यादा हो गई है।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक गिलार्ड की सैलेरी 90 हजार डॉलर से बढ़ेगी। इससे उनका कुल वेतन ओबामा और कैमरन की तन्ख्वाह से ज्यादा हो जाएगा।

स्वतंत्र पारिश्रमिक ट्रिब्यूनल ने एक समीक्षा के बाद फेडरल सांसदों का वेतन बढ़ाने का निर्णय लिया। राजनेताओं का मूल वेतन तेजी से बढ़ेगा। इसका मतलब सबसे निचले पद पर नियुक्त सांसद का वेतन भी 1 लाख 40 हजार से 1 लाख 80 हजार डॉलर तक बढ़ जाएगा।

सूत्रों के मुताबिक ट्रिब्यूनल के इस फैसले के बाद सांसदों का मूल वेतन वर्तमान के 140,910 डॉलर से बढ़कर कम से कम 180,000 डॉलर हो जाएगा। sabhar : bhaskar.com

 

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कयानी ने कहा- हमला करो नाटो पर

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इस्‍लामाबाद. पाकिस्‍तानी सेना के प्रमुख जनरल अशफाक परवेज कयानी ने अफगानिस्‍तान में नाटो सैनिकों की ओर से अब आगे सीमा पार की जाने वाली कार्रवाई का जवाब देने के लिए ‘पूरी आजादी’ दे दी है। पाकिस्‍तान में बेहद ताकतवर माने जाने वाले सेना प्रमुख ने अफगानिस्‍तान की सरहद पर तैनात यूनिटों के कमांडरों से कहा है कि वो आगे सीमा पार से होने वाली किसी भी कार्रवाई का अपनी पूरी क्षमता से जवाब दें। आधिकारिक सूत्रों ने जनरल कयानी के हवाले से यह बात कही है। गौरतलब है कि बीते 26 नवंबर को पाकिस्‍तान की एक सैन्‍य चौकी पर नाटो के हवाई हमले में 24 सैनिक मारे गए।
  
आधिकारिक सूत्रों ने कयानी के हवाले से कहा है कि सेना प्रमुख ने 'चेन और कमांड सिस्‍टम' को फिलहाल खत्‍म कर दिया है इसके तहत जवाबी कार्रवाई के लिए सेना के सीनियर अधिकारियों को अपने ऊपर से किसी स्‍तर पर हरी झंडी का इंतजार नहीं करना होगा। यदि नाटो सैनिकों की ओर से कोई हमला होता है तो इसका मुंहतोड़ जवाब दिया जाना चाहिए और इस बारे में नियम कानूनों के पचड़े में पड़ने की जरूरत नहीं है। कयानी ने कहा है कि जवाबी हमला करते वक्‍त इस बात की तनिक भी चिंता करने की जरूरत नहीं है कि इसके क्‍या परिणाम होंगे और कितना खर्च आएगा। सेना को जरूरत के मुताबिक संसाधनों की भरपूर मदद की जाएगी।
कयानी ने नाटो के हमले को ‘आक्रामक कार्रवाई’ करार दिया है जिसे बर्दाश्‍त नहीं किया जा सकता है। सेना प्रमुख ने कहा है कि अब आगे से कोई भी हमलावर बच कर वापस नहीं जाना चाहिए। सेना में जोश भरने के लिए दिए गए इस बयान में जनरल कयानी ने सैनिकों की तारीफ की और कहा कि यदि पाकिस्‍तानी वायु सेना इसमें शामिल होती तो कार्रवाई और भी प्रभावी होती। हालांकि इसमें वायु सेना की तरफ से कोई चूक नहीं हुई है क्‍योंकि उसने इस कार्रवाई में हिस्‍सा नहीं लिया। उन्‍होंने कहा कि संचार तंत्र में गड़बड़ी और मौजूदा स्थिति की सही जानकारी नहीं होने की वजह से इस बारे में समय रहते फैसला नहीं लिया जा सका। 

बीते शनिवार को हुए हमले के बाद पाकिस्‍तान ने नाटो सैनिकों के सप्‍लाई रूट को पूरी तरह बंद कर दिया है और अमेरिका को शम्‍सी एयरपोर्ट खाली करने का कहा गया है। पाकिस्‍तान की सरकार ने अफगानिस्‍तान के भविष्‍य को लेकर जर्मनी के बॉन में होने वाले सम्‍मेलन का बहिष्‍कार करने का भी फैसला किया है।
 
इसके अलावा पाकिस्‍तानी सेना के एक प्रतिनिधिमंडल ने अपना प्रस्‍तावित अमेरिका दौरा रद्द करने का फैसला किया है। प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी ने देश में न्‍यायपालिका को किसी खतरे या सैन्‍य तख्‍तापलट की आशंका से साफ इनकार किया है। उनका कहना है कि ये दोनों ही संस्‍थान लोकतंत्र समर्थक हैं। राष्‍ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने देश के मौजूदा राजनीतिक हालात और सुरक्षा की स्थिति को लेकर भरोसे में लेने के लिए सभी राजनीतिक दलों के नेताओं से संपर्क किया है। शुक्रवार को शुरू हुए पाकिस्‍तानी संसद के सत्र के दौरान सर्वसम्‍मति से नाटो हमले की निंदा का प्रस्‍ताव पारित किया गया। 
काबुल में भी विरोध
 
बॉन सम्‍मेलन का न सिर्फ पाकिस्‍तान ने ही बहिष्‍कार किया है बल्कि अफगानिस्‍तान में भी इस बैठक का विरोध हो रहा है। काबुल में शुक्रवार को सैकड़ों लोगों ने मार्च निकाला और अफगानिस्‍तान में विदेशी सैनिकों की मौजूदगी का विरोध किया। बॉन सम्‍मेलन में अफगानिस्‍तान और अमेरिकी सरकार के बीच एक करार पर दस्‍तखत होना प्रस्‍तावित है जिसके तहत अफगानिस्‍तान में विदेशी सैनिकों को मौजूद रहने की इजाजत मिलेगी।  
पाक को मदद रोकने पर प्रस्‍ताव पारित
अमेरिकी सीनेट ने आतंकवाद के खिलाफ जंग के लिए पाकिस्‍तान को दी जाने वाली मदद रोकने से जुड़े बिल को सर्वसम्‍मति से पारित कर दिया। डेमोक्रेटिक पार्टी के सीनेटर बॉब कैसी की ओर से संशोधित इस बिल के तहत पाकिस्‍तान को आर्थिक मदद तब तक रोकने का प्रावधान है जब तक वह सड़कों के किनारे लगे बमों के इस्‍तेमाल पर काबू नहीं पा लेता। अफगानिस्‍तान में ऐसे बमों के विस्‍फोट से कई अमेरिकी सैनिक मारे गए हैं।  
इससे पहले एक अमेरिकी सीनेटर ने पेंटागन से पाकिस्तान को दी जाने वाली सहायता और भविष्य में उसकी स्थिति पर रिपोर्ट पेश करने के लिये संशोधन प्रस्ताव पेश किया है। रिपब्लिकन सीनेटर बॉब कॉर्कर ने कहा कि लंबे समय से पाक का रवैया अस्थिर सा है। अब इसमें परिर्वतन लाने की आवश्यकता है। यदि यह संशोधन प्रस्ताव पारित हो जाता है तो पेंटागन को पाक को दी जाने वाली निधि के बारे में कांग्रेस के सामने रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। इस रिपोर्ट से पता चलेगा कि पाक तालिबान के खिलाफ लड़ाई के लिए दी जाने वाली निधि का प्रभावशाली ढंग से इस्तेमाल करता है या नहीं।
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