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September 4, 2011 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

बिना चीरे के होगी मस्तिष्क की सर्जरी

मस्तिष्क की सर्जरी के लिए अब डाक्टरों को चीरा लगाने की जरूरत नहीं होगी वैज्ञानिको ने कहा गामा नाइफ नामक उपकरण से विना चीरा लगाये मस्तिष्क की सर्जरी की जा सकती है वैज्ञानिको का दावा है की वे अब बिना चीर फाड़ किये मस्तिष्क कैंसर से पीड़ित मरीजो के मस्तिष्क की नेयुरोलाजिकल सर्जरी कर सकते है सिडनी स्थित मैक्वायर विश्व विद्यालय अस्पताल ने गामा नाइफ का उपयोग कर पहली बार सर्जरी की यह उपकरण मस्तिष्क कैंसर और मस्तिष्क सम्बंधित कई बीमारियों के इलाज के लिए एक महत्वपूर्ण साधन है न्यूरो सर्जन डा जान फ्यूलर ने कहा गामा नाइफ से सर्जरी अपने आप में पहली सरजरी है और बताया की इलाज के दौरान मरीज होश में था इसमे हेलमेट नुमा उपकरण मरीज के सर पर पहना कर कोबाल्ट -६० स्रोतों के विकिरण पुंज को मस्तिष्क के भीतरी लछ्य पर डाला जाता है इसका अविष्कार स्वीडन के लार्स लेक्सेल ने १९६७ में किया था

९०० वर्ष पहले की अस्पताल के बारे में पता चला

तमिलनाडु के कांचीपुरम जिले में तिरुमुकुदल गाँव के एक प्राचीन मंदिर में मिले एक शिलालेख से पता चलता है की यहाँ करीब ९०० वर्ष पहले १५ bed वाला एक अस्पताल और वैदिक स्कूल था वेंकटेश पेरूमल मंदिर में यह शिलालेख पुरातत्व विद केवी सुब्रमण्यम ने खोजा है शिला लेख में असुरा सलाई का उलेख है जो एक अस्पताल था भारतीय पुरातव सर्वे के अनुसार मंदिर से लगे इस अस्पताल में vaidk स्कूल के छात्रो और मंदिर के कर्मचारियों का उपचार किया जाता था इस मंदिर को संग्रछित इमारत घोषित किया जाचुका है और इसका प्रबंधन ऐ यस आई के जिम्मे है शिला लेख के अनुसार वीरचोला नामक अस्पताल में १५ बिस्तर थे इसमे काम करने वाले करने वाले कर्मचारियों की संख्या पर्याप्त थी जिसमे कोदंद रामन अस्वथामन भट्टन नामक एक सर्जन कई नर्से नौकर और एक नाइ शामिल थे अस्पताल के कर्मचारियों को वेतन दिया जाता था अस्पताल में राखी गयी करीब २० दवाईयों का ब्योरा भी शिलालेख में है इन दवायों से बबासीर पीलिया बुखार पेसाब की नली की बीमारियाँ टीबी रक्तस्राव आदि का इलाज किया जाता था