सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

संदेश

August 28, 2011 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

क्या आने वाले वर्षो में मनुष्य की आयु १००० वर्ष होगी

आने वाले २० साल बाद मनुष्य की आयु १००० वर्ष हो सकती है , इसका दावा किया है ब्रिटेन के  प्रसिध्य  वैज्ञानिक  डा आबरे  डी ग्रे  ने  इनका पूरा  विश्वास है, की  उनके ही जीवनकाल में  डाक्टरों के पास वे सभी साधन  मौजूद होंगे जिनसे वे बुढ़ापे का इलाज कर सके | बायोमेडिकल जरेन्तोलाजिस्ट तथा दिर्घ्याजीवन  पर पिछले कई वर्षो से  शोध करने वाले संस्थान के  प्रमुख वैज्ञानिक  डा  डी  ग्रे ने कहा है की  ऐसा संभव है , की  जीन थेरेपी , स्टेम सेल थेरेपी तक आम लोगो की  पहुँच  आगामी २५ सालो में हो जायेगी | उस समय लोग डॉक्टरो के पास नियमित मेंटिनेंस के लिए जाया करेंगे  जिससे लोग अपने को  जवान रखेंगे |

इलैक्ट्रानिक स्किन का निर्माण

इलैक्ट्रानिक स्किन का अविष्कार यूनिवर्सिटी ऑफ नेब्रास्का के रवि सराफ ने किया यह वास्तव में कागज़ से भी हजार गुना पतली फिल्म है जिसमे सोने और कैडमियम सैल्फाएद के सूछ्म कणों की परते अवस्थीत हैं विदुत की सुचालक इन परतो के बीच में कुचालक प्लास्टीक स्तर है साइंस पत्रिका में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक जैसे ही फिल्म में विदुत धारा प्रवाहित की जाती है दबाव विन्दुओं पर चालकता  बढ़ने  लगती है ,  जिससे सूछ्म तत्व चमकने लगते हैं| दबाव जितना अधिक होगा चमक उतनी ही अधिक होगी सराफ के मुताबिक़ इलैक्ट्रानिक स्किन  के चलते रोबट की स्प़शानुभूति में कई गुना इजाफा होगा|

दुनिया का पहला सिंथेटिक पेड़

अमेरिकी वैज्ञानिको ने दुनिया का पहला सिंथेटिक पेड़ बनाया है कर्नेल स्थित एक प्रयोगशाला में इस पेड़ को ट्रांसिपिरेसन से बनाया गया ट्रांसिपिरेसन से ही नमी पेड़ो की उची शाखाओ को पहुचती है पत्रिका नेचर के अनुसार  इस खोज से पेड़ पौधे में ट्रांसपिरेसन की उस पुरानी थ्योरी को बल मिलता जिसमे कहा है की यह पूरी तरह भौतिक प्रक्रिया है और इसमे किसी जैविक ऊर्जा की जरूरत नहीं होती इससे कार इमारतों के तापमान के स्थान्तरण और मिट्टी को उपजाऊ बनाने में मदद मिल सकती है इससे आंशिक तौर पर सुखी जमीन से पानी निकालने में मदद मिल सकती है

वार्ता विडियो.कॉम

वार्ता .टीवी की नयी विडियो साईट वार्ताविडियो.कॉम आ गया है कृपा करके सभी लोग नए नए विडियो का लुफ्त ले |

भारतीय वैज्ञानिक ने खोजा आवाज को कम्पुटर से पहिचानने का बेहतरीन तरीका

दैनिक जागरण  में प्रकाशित एक खबर के मुताबिक  डी आर डी ओ  नयी दिल्ली  में कार्यरत  मऊ  यू पी  निवासी  अरविंद कुमार सिंह  ने ऐसी प्रमेय बिकसित के है जो बिना  की बोर्ड से केवल आवाज के संकेत से है कम्पुटर को बेहतर ढंग से संचालित  करने में सहायक होगी |  इस तकनीक से कम्पुटर या मशीन बोले गए शब्दों को पहिचान कर उसके अनुरूप कार्य सम्पादित करेंगे | यह पैटर्न  मैचिंग पद्धित पर आधारित  है ,यह तकनीक शब्द  ध्वनि को पहिचानने की छमता में  अभूतपूर्व  से  बढ़ाती  है | इसके  कई लाभ है , बिना  की- पटल के  के कम  शिछित व अनपढ़  लोग और शारीरिक रूप से विकलांग लोग लोग भी  कम्पूटर चला सकेंगे | वायुयान के पायलट को  यान  संचालन में काफी सुविधा  होगी , वह महत्व पूर्ण स्वीच को संचालित करने में ब्यस्त हो  तब कुछ कमांड बोल कर कर दे सकता है |