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रविवार, 4 दिसंबर 2011

गर तस्वीर बनानी है तो कागज पर मत बनाओ दिल में तस्वीर बना लो

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गर तस्वीर बनानी है तो कागज पर मत बनाओ दिल में तस्वीर बना लो



मेरा कहानी आईडिया लिखना   फिर डिरेक्टर  और प्रोडूसर , एक्टर को बैठ कर उसे विस्तार से  बताना शौक नहीं है पेशा है . चाहे उस पर काम करे या  नहीं करे | अभी  भी जब खाली समय होता है तो ये काम करने मै डिरेक्टर  और प्रोडूसर  के पास पहुच जाता हु | 

देव साब को से  २००३ में मिला था वह भी फिल्म के आईडिया की सिलसिले में ? मेरे दिमाग में काफी दिनों से एक आईडिया कुलबुला रहा था | वह बोले तुम घर चले आओ |

 पहली बार जिन्दा दिल  इन्सान से मिल रहा था | देव बोले अभी तो मैंने सफ़र शुरू किया है | मंजिल दूर है | कभी भी न थकने वाले इन्सान दूर चला गया | मन को चोट लगी | दिल में दर्द हुआ | 

मैंने जब आईडिया सुनाना शुरू किया तो बीच में रोकते हुए बोले  , गर तस्वीर बनानी है तो कागज पर मत बनाओ दिल में तस्वीर बना लो जो कभी ख़राब नहीं होती है | वह अपनी यादे छोड़ जाती है |

बॉलीवुड में रहकर दूसरे कलाकारों प्रेरित करना देव की साब की अपनी पहचान थी |  देव ने मेरी आखो में झुकर देखा और कहा , तुम लिखते रहो , अच्छा लिखते हो | तुम कहानीकार बन सकते हो | तुम्हारी आखो  में सच्चाई नजर आती है | वह मुलाकात मेरे जीवन की यादगार मुलाकात थी | जिसे मै पूरी उम्र नहीं भुला सकता हु |

सुशील गंगवार पिछले ११ बर्षो से प्रिंट , इलेक्ट्रोनिक , वेब मीडिया के लिए काम कर रहे है | वह साक्षात्कार.कॉम , साक्षात्कार टीवी. कॉम और साक्षात्कार. ओर्ग के संपादक है | 

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