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गुरुवार, 8 दिसंबर 2011

यह क्या..नौकरी के लिए अमेरिकी भी अपना देश छोड़ रहे हैं

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आंकड़े हैं गवाह 
मौजूदा समय में तकरीबन 63 लाख अमेरिकी विदेश में या तो पढ़ाई कर रहे हैं अथवा वहां नौकरी कर रहे हैं, यह अपने-आप में है एक नया रिकॉर्ड
आर्थिक सुस्ती से पीछा छुड़ाने के लिए खासकर ब्राजील, रूस, चीन व लैटिन अमेरिका जाना पसंद कर रहे हैं अमेरिका के निवासी

इससे क्या मिलता है संकेत 
फिलहाल आर्थिक संकट के साथ-साथ 'ब्रेन ड्रेन' की समस्या से भी जूझ रहा है अमेरिका



अब तक 'ब्रेन गेन' पर निर्भर रहा है अमेरिका ताकि वह दुनिया भर में अपना सिक्का जमाए रखने के सपने को पूरा कर सके

बुरा हाल
अमेरिका में बेरोजगारी लंबे समय से तकरीबन 9 फीसदी के उच्च स्तर पर है विराजमान
अमेरिका में आर्थिक सुस्ती का कहर बदस्तूर जारी रहने के कारण लाखों अमेरिकी परिवारों का बजट गया है बिगड़
इन परिवारों को अपने देश में छाई आर्थिक सुस्ती के जल्द खत्म होने का भरोसा अब नहीं रह गया है

नौकरी पाने के लिए लोग आम तौर पर कुछ भी कर गुजरने को तैयार हो जाते हैं। इसके लिए अगर अपना शहर या राज्य छोडऩा पड़ जाए तो लोग उसके लिए भी तैयार हो जाते हैं। यही हाल अब अमेरिका के निवासियों का भी हो गया है। जी हां, अमेरिकी भी अब अच्छी नौकरी पाने के लिए अपना देश छोडऩे पर विवश हो गए हैं। यही नहीं, किसी और मुल्क में बिजनेस की अच्छी गुंजाइश नजर आने पर भी अमेरिकी अब अपना वतन छोड़ देने से गुरेज नहीं कर रहे हैं।



लंबी आर्थिक सुस्ती से उबरने में अमेरिकी सरकार के बार-बार नाकामयाब साबित होने से ही काफी निराश होकर वहां के वाशिंदे इस तरह का कठोर कदम उठा रहे हैं। इसका मतलब यही हुआ कि जिस तरह से बिहार और उत्तर प्रदेश के लोगों को अच्छी नौकरी पाने के लिए अक्सर महानगरों का रुख करना पड़ता है, उसी तरह से अमेरिका के निवासियों को भी बढिय़ा नौकरी की तलाश में मजबूर होकर विदेश जाना पड़ रहा है।



ताजा आंकड़े इस बात के गवाह हैं। अमेरिका के विदेश मंत्रालय ने हाल ही में यह जानकारी दी है कि मौजूदा समय में तकरीबन 63 लाख अमेरिकी विदेश में या तो पढ़ाई कर रहे हैं अथवा वहां नौकरी कर रहे हैं। यह अपने-आप में एक नया रिकॉर्ड है। ऐसे में अगर यह कहा जाए कि अमेरिका को फिलहाल 'ब्रेन ड्रेन' की समस्या से भी जूझना पड़ रहा है, तो ऐसा कहना शायद गलत नहीं होगा।




यह निश्चित तौर पर अमेरिका के लिए भारी चिंता का विषय है। दरअसल, अमेरिका पिछले कई दशकों से दुनिया भर के अत्यंत प्रतिभाशाली लोगों को आकर्षक सैलरी पैकेज वगैरह का प्रलोभन देकर अपने यहां बुलाता रहा है ताकि इस तरह के 'ब्रेन गेन' की बदौलत वह नए-नए उन्नत उत्पाद तैयार कर दुनिया भर में अपना सिक्का जमाए रखने के अमेरिकी ड्रीम को पूरा कर सके।



भारत समेत कई देशों में रहने वाले लोग भी अमेरिका में ही नौकरी करना और वहां बसना पसंद करते रहे हैं। वहीं, अब नौबत यह आ गई है कि बड़ी संख्या में प्रतिभाशाली एवं महत्वाकांक्षी अमेरिकी बढिय़ा नौकरी की तलाश में विदेश का रुख कर रहे हैं ताकि आर्थिक सुस्ती के निराशाजनक माहौल से उन्हें निजात मिल सके।

यही नहीं, इस माहौल ने अमेरिका के उद्यमियों को भी भारी चिंता में डाल दिया है। आर्थिक सुस्ती से पीछा छुड़ाने के लिए अमेरिका के निवासी खासकर ब्राजील, रूस, चीन और लैटिन अमेरिका जाना पसंद क रहे हैं। जानी-मानी वेबसाइट 'एमएसएनबीसी.कॉम' में डाले गए एक खास लेख में इन बातों का जिक्र किया गया है।




इस लेख में यह भी बताया गया है कि आखिरकार यह नौबत क्यों आई है। एक बात तो यह है कि अमेरिका में बेरोजगारी लंबे समय से तकरीबन 9 फीसदी के उच्च स्तर पर विराजमान है। दूसरी बात यह है कि अमेरिका में आर्थिक सुस्ती का कहर बदस्तूर जारी रहने के कारण लाखों अमेरिकी परिवारों का बजट बिगड़ गया है। तीसरी बात यह है कि इन परिवारों को अपने देश में छाई आर्थिक सुस्ती के जल्द खत्म होने का भरोसा अब नहीं रह गया है।



इस वजह से अमेरिकी इकोनॉमी का आकर्षण अब काफी घट गया है। ऐसे में इस देश के ज्यादातर लोगों को यह समझ में नहीं आ रहा है कि आखिरकार उनके देश की अर्थव्यवस्था किस तरफ जा रही है? विदेश जाने वाले अमेरिकियों को यह पता है कि वहां जाने पर भाषा, संस्कृति, नौकरशाही वगैरह की बाधाएं आएंगी, लेकिन इसके बावजूद वे नौकरी करने के लिए विदेश जाने से बाज नहीं आ रहे हैं। sabhar: bhaskar.com

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