रविवार, 11 दिसंबर 2011

अमेरिकी सेना में सुरक्षित नहीं है महिलाओं की आबरू




वॉशिंगटन. दुनिया की चोटी की सेनाओं में शुमार अमेरिकी सेना का एक स्याह सच सामने आया है। अमेरिकी सेना में यौन अपराधों की लंबी चौड़ी फेहरिस्त है, जिनमें कई रोंगटे खड़े कर देने वाली सच्चाई छुपी हुई है। अमेरिकी सेना में तैनात महिला सैनिकों के लिए हालात इतने बिगड़ गए हैं कि अमेरिका में यह कहा जाने लगा है कि कोई दुश्मन अमेरिकी महिला सैनिक को मारे इससे कहीं ज़्यादा आशंका इस बात की रहती है कि इराक में तैनात अमेरिकी महिला सैनिक को उसका साथी ही 'शिकार' बना ले।

 
यह मामला इतना गंभीर है कि अमेरिकी फौज से रिटायर हो चुके कई पुरुष और महिलाओं ने अमेरिकी रक्षा मुख्यालय पेंटागन के खिलाफ मुकदमा किया है। मुकदमा करने वालों में 25 महिलाएं और तीन पुरुष शामिल हैं (मुकदमा कायम करते समय कुल लोगों की तादाद महज 17 थी)। इन लोगों का दावा है कि सशस्त्र सेनाओं में ड्यूटी के दौरान यौन उत्पीड़न का सामना करना पड़ा है।

इन लोगों ने पूर्व रक्षा मंत्रियों डोनाल्ड रम्सफील्ड और रॉबर्ट गेट्स पर ऐसी संस्कृति को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है, जिसमें उन महिलाओं और पुरुषों को सज़ा दी जाती है जो यौन उत्पीड़न की शिकायत करते हैं।


यह मुकदमा फरवरी में सामने आया था। तब से और ऐसे 400 लोग सामने आए हैं, जिन्होंने सेना में यौन उत्पीड़न की शिकायत की है। इस मुकदमे को सुजैन बर्क लड़ रही हैं। ये सभी लोग इस समय अदालत के उस फैसले का इंतजार कर रहे हैं, जिसमें उसे यह तय करना है कि इस मामले में ट्रायल शुरू होगा या नहीं।

रक्षा मंत्रालय के वकील ने 1950 के एक अदालती फैसले के हवाले से इस मुकदमे को खारिज करने की अपील की है। 1950 में कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि सेना में ड्यूटी के दौरान चोट लगने पर सरकार उसके लिए जिम्मेदार नहीं होगी।


लेकिन जानकार मानते हैं कि यह मुकदमा आगे चले या नहीं, लेकिन इस पूरी कोशिश ने अमेरिकी सेना के काले सच से पर्दा उठा दिया है। अमेरिकी रक्षा विभाग के डिपार्टमेंट एसएपीआरओ की 2010 की रिपोर्ट के मुताबिक  पिछले साल अमेरिकी सेना में यौन अपराधोंके 3,158 मामले दर्ज किए गए। लेकिन इनमें से महज 529 ही कोर्ट तक पहुंच सके और इनमें भी 104  में ही सज़ा मिल पाई।

लेकिन ये आंकड़े सच का सिर्फ एक छोटा हिस्सा भर हैं। यौन अपराधों के ज़्यादातर मामले तो दर्ज ही नहीं हो पाते हैं। एसएपीआरओ का ही आकलन है कि पिछले साल ही सेना के भीतर यौन अपराधों के 19,000 ऐसे मामले हुए, जिन्हें दर्ज नहीं किया गया।

अमेरिका में बुजुर्गों से जुड़े विभाग ने एक स्टडी की है, जिसके मुताबिक सेना में तैनात हर तीन महिला सैनिकों में से एक ड्यूटी के दौरान यौन हिंसा का सामना करती है। जबकि सिविल सोसाइटी में यह आंकड़ा हर छह महिलाओं में से एक का है। sabhar : bhaskar.com



 
 
 

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