बुधवार, 16 नवंबर 2011

नैनोपार्टिकल्स पहुंचाएंगे दवा






मेडिसिन के क्षेत्र में गंभीर बीमारियों की पहचान और उपचार में नैनो टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल काफी पहले से हो रहा है। लेकिन अब नैनोपार्टिकल्स के जरिए शरीर में दवा पहुंचाने की तैयारी चल रही है।

नैनो टेक्नोलॉजी मेडिसिन जगत की कायाकल्प को तैयार है। खासकर मरीजों को दवा देने की प्रक्रिया तो पूरी तरह से बदल जाएगी। इसके जरिए शरीर के प्रभावित हिस्से को सीधे-सीधे दवा मिल सकेगी, वह भी उस हिस्से के आसपास की कोशिकाओं को बगैर कोई नुकसान पहुंचाए। दवा ले जाने वाले नैनोपार्टिकल्स शरीर में फैलकर ऊतकों में प्रवेश करेंगे। आकार में छोटे होने से वे बारीक से बारीक रक्त वाहिनियों तक में जा सकेंगे।

कैसे होंगे नैनोपार्टिकल्स

दवाओं को पहुंचाने के लिए 100 माइक्रोन (एक माइक्रोन यानी 0.001 मिमी) आकार वाले नैनोपार्टिकल्स की मदद ली जाएगी। इन्हें ऐसे मटेरियल से बनाया जाएगा जिसमें या तो दवा घोली जाएगी या उसमें बांध कर दवा पहुंचाई जाएगी। यह मटेरियल बायो डीग्रेडेबल होगा यानी निश्चित लक्ष्य यानी अंग तक पहुंचने के बाद स्वयं ही घुल कर समाप्त हो जाएगा। इसके किसी तरह के साइड इफैक्ट्स भी सामने नहीं आएंगे।

क्या होगा फायदा

नैनोपार्टिकल्स के जरिए दवा प्रभावित अंग, ऊतक या ट्यूमर तक पहुंचेगी। इस तरह उस हिस्से को सही डोज सीधे तौर पर मिलेगी और दवा की बर्बादी रुकेगी।

फिलहाल क्या है स्थिति

मेडिसिन के क्षेत्र में नैनोपार्टिकल्स का इस्तेमाल कुछ खास कैंसर की उपचार विधियों में किया जा रहा है। इनके जरिए कैंसर कोशिकाओं को खत्म किया जा रहा है। यही नहीं, नैनोपार्टिकल्स के जरिए कैंसर की पहचान भी की जा रही है। इनकी मदद से कैंसर को बिल्कुल शुरुआती स्तर पर ही खत्म करने में मदद मिल रही है।

-पी. घोष एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर, बिड़ला इंस्टीट्यूट ऑफ साइंटिफिक रिसर्च sabhar : bhaskar.com

 

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