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शुक्रवार, 18 नवंबर 2011

चीन की धमकी- अमेरिकी दखल बर्दाश्‍त नहीं, मनमोहन बोले- जारी रहेगी तेल की खोज

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बाली (इंडोनेशिया). दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के संगठन आसियान के सम्‍मेलन में माहौल गरमा रहा है।चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लियू वीमिन ने अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा है कि बीजिंग अपने हितों और संप्रभुता पर किसी भी देश का हमला बर्दाश्त नहीं करेगा। चीन की यह चेतावनी अमेरिकी राष्‍ट्रपति बराक ओबामा के उस बयान के बाद आई है कि अमेरिका एशिया प्रशांत क्षेत्र में अपनी स्थिति और मजबूत करेगा। चीनी प्रवक्‍ता ने यह भी कहा कि दक्षिण चीन सागर मामले में दूसरे देशों के दखल से स्थितियां और ज्यादा विषम हो जाएंगी। इस सागर पर चीन अपना दावा जताता रहा है। संभव है यह मुद्दा शुक्रवार को मनमोहन-वेन मुलाकात के दौरान भी उठे।

फुडान विश्वविद्यालय के सेंटर फॉर अमेरिकन स्टडीज के सह-निदेशक वू झिनवो ने कहा कि अमेरिका की स्थिति और मजबूत होने से दक्षिण चीन सागर मुद्दा और ज्यादा गर्मा जाएगा। एक वक्त ऐसा आ जाएगा जब इस मामले में कई देश शामिल होंगे, यदि क्षेत्रीय देश आपस में सीधे संवाद बनाकर इस मुद्दे पर बात करें तो समाधान निकल सकता है लेकिन किसी भी बाहरी ताकत का दखल मुद्दे को और भड़काएगा। 

चीन के इस रुख के बीच यहां परमाणु करार को लागू करने में सामने आ रही अड़चनों को दूर करने के लिए भारतीय प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा से मुलाकात की।  भेंट के बाद मनमोहन सिंह ने कहा, 'मैंने राष्ट्रपति ओबामा से कहा है कि इस बारे में (परमाणु करार) हमारे यहां पहले से कानून हैं और नियम बनाए गए हैं। यह 30 दिनों तक संसद में रहेगा। इसलिए कानून के दायरे में हम अमेरिकी कंपनियों की चिंताओं को दूर करने के लिए तैयार हैं।' भारत ने अमेरिका के सामने साफ कर दिया है कि अमेरिका भारत में निवेश बढ़ाए।    

दूसरी तरफ, प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने चीन के प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ से मुलाकात के दौरान यह साफ कर दिया है कि भारत दक्षिण चीन सागर में तेल की खोज जारी रखेगा। प्रधानमंत्री ने जियाबाओ से साफतौर पर कहा है कि दक्षिण चीन सागर में भारत की तेल खोजने की गतिविधि सिर्फ कारोबारी नजरिए से की जा रही है। गौरतलब है कि हाल के महीनों में दक्षिण चीन सागर में वियतनाम के साथ तेल की खोज करने पर चीन ऐतराज जताता रहा है।

इससे पहले डॉ.सिंह ने जियाबाओ से कहा कि भारत चीन के साथ बेहतरीन रिश्ता चाहता है। प्रधानमंत्री ने कहा है कि क्षेत्रीय, द्विपक्षीय और वैश्विक स्तर पर चीन के साथ संबंध विकसित किए जाएंगे। वहीं, वेन जियाबाओ ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से कहा है कि भारत और चीन को कंधे से कंधा मिलाकर विकास की तरफ बढ़ना चाहिए ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि 21 वीं सदी एशिया की सदी बने।

ये मुलाकातें ऐसे समय पर हो रही हैं जब अमेरिका ने भारत को अहम ताकत बताया है और चीन को चेताया है। चीन ने भी सरकारी अखबार 'पीपुल्‍स डेली' के जरिए धमकी दी है कि आस्टे्रलिया निश्चित रूप से चीन को मूर्ख नहीं बना सकता। चीन के लिए इससे अलग रहना असंभव है। फिर चाहे आस्ट्रेलिया चीन की सुरक्षा के महत्व को कम करने के लिये कुछ भी करे।

अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने एशिया प्रशांत क्षेत्र में भारत को बड़ी शक्ति बताते हुए गुरुवार को उसकी पूर्वोन्मुखी नीति की प्रशंसा की तथा क्षेत्र की सुरक्षा में उसकी भूमिका को स्वीकार किया।

आस्ट्रेलियाई संसद को संबोधित करते हुए ओबामा ने एशिया प्रशांत क्षेत्र में अपनी सैन्य तैनाती बढ़ाने की महत्वाकांक्षी योजना में भारत का स्वागत किया तथा क्षेत्रीय सुरक्षा में भारत की भूमिका को स्वीकार करते हुए उसकी पूर्वोन्मुखी नीति की प्रशंसा की। अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस क्षेत्र में अमेरिकी नौसैनिक जहाजों की बढ़ती मौजूदगी तथा फिलिपींस और सिंगापुर में प्रशिक्षण अभ्यास, समुद्री डकैतों से निबटने में इंडोनेशिया के साथ सहयोग तथा आपदा राहत के लिए थाईलैंड के साथ भागीदारी का जिक्र करते हुए कहा कि इस क्षेत्र की सुरक्षा में भारत की भूमिका महत्वपूर्ण है।
विशेषज्ञ की राय
'चीन भारत को घेरता रहेगा। भारत को दक्षिण चीन समुद्र में अपनी दखल बढ़ानी होगी और चीन के दबाव के आगे झुकना नहीं चाहिए। इसके लिए भारत को जापान, दक्षिण कोरिया, वियतनाम से दोस्ती बढ़ानी होगी। भारत को चीन के साथ बराबरी के स्तर पर बातचीत करनी चाहिए। वहीं, भारत को अमेरिका का सहयोगी नहीं बल्कि साझेदार बनना चाहिए।' 
जी. पार्थसारथी, पाकिस्तान में भारत के पूर्व उच्चायुक्त
ओबामा ने चेताया- चीन से डरता नहीं है अमेरिका, ड्रैगन का पलटवार sabhar: www.bhaskar.com

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