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शनिवार, 26 नवंबर 2011

ऐसे ही रहे हाल, तो चीन और अमेरिका के बीच होगा तीसरा विश्व युद्ध!

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लंदन. चीन की बढ़ती सैन्य शक्ति ने अमेरिका को परेशानी में डाल दिया है। एक ओर जहां चीन अपनी ताकत को सबके सामने दिखाकर इठला रहा है, वहीं दूसरी ओर अमेरिका अपनी पॉवर बढ़ाने के लिए ऑस्ट्रेलिया में अपनी सैन्य टुकड़ी जमा रहा है। इन दोनो महाशक्तियों के बीच बढ़ते तनाव ने विश्व शांति को खतरे में डाल दिया है।

चीन और अमेरिका के बीच खुद को ताकतवर साबित करने की होड़ कोई नई नहीं है। इससे पहले कोरिया विभाजन के समय भी ये दोनों आपस में टकराए थे, लेकिन तब अमेरिका ने खुद को रोक लिया था।

क्या हुआ था कोरिया युद्ध में?

1950 में जब दक्षिण कोरिया की मदद करने अमेरिका और ब्रिटिश सैन्य बलों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी, तब युद्ध में कमजोर पड़ रहे अपने दोस्त उत्तर कोरिया की मदद के लिए चीन ने अपनी सेना भेजी थी।

उत्तर और दक्षिण कोरिया के बीच हुआ यह युद्ध चीन और अमेरिका के बीच द्वंद में परिवर्तित हो गया था। हालांकि तब अमेरिका ने चतुराई दिखाते हुए खुद को रोक लिया और दोनों पक्षों के बीच शांति स्थापित हो गई।

इस युद्ध का अंत उत्तर और दक्षिण कोरिया के बीच खिंची संधि सीमा के साथ हुआ था।

इस युद्ध के बाद चीन और अमेरिका के बीच शब्दों का युद्ध जारी रहा। एक साल पहले जब नोर्थ कोरिया द्वारा दक्षिण कोरियाई युद्धपोत चियोनान को डुबोया गया, तो इस पर चीन ने नोर्थ कोरिया की तरफदारी की थी। चीन के इस रवैये पर वाशिंगटन आगबबूला हुआ था।

इसी के तुरंत बाद नोर्थ कोरिया ने साउथ कोरियाई द्वीप येऑनप्योंग पर सैन्य हमला बोल दिया था। तब भी चीन और अमेरिका ऐसे ही आमने सामने हुए थे।

अमेरिकी रणनीतिज्ञ पॉल स्टारेस का कहना है, "यदि इतिहास को आधार माना जाए, तो भविष्य में चीन और अमेरिका के बीच युद्ध की आशंका को नकारा नहीं जा सकता।"

कैसे बढ़ रहा है चीन?

चीन बार-बार साउथ चाइना सी पर अपना अधिकार जता रहा है। इस समुद्र में तेल का बड़ा भंडार है, जिसे चीन अपने कब्जे में रखना चाहता है। और चीन हर अवसर पर अपने इस इरादे को जताता रहता है।

चीन अपने सेना को भी लगातार मजबूत कर रहा है। चीनी नौसेना के पास अब विमान वाहक और अत्याधुनिक मिसाइल प्रणाली हैं। इसी साल जनवरी में अमेरिकी रक्षा सचिव के बीजिंग दौरे पर चीन ने अपना अत्याधुनिक जे-20 स्टील्थ लड़ाकू विमान का प्रदर्शन किया।

चीन इस बात से भी बहुत खुश है कि पश्चिमी देश आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। हालांकि पश्चिमी आर्थिक संकट से चीन के आर्थिक प्रमुखों को चिंता हो रही है, लेकिन चीनी मिलिट्री प्रमुख तो इस बात से बहुत खुश हैं।

अमेरिका भी मार रहा है हाथ-पांव

चीन की बढ़ती ताकत पर नजर रखने के साथ-साथ अमेरिका अपनी ताक बढ़ाने में भी जुटा है। हाल ही में अमेरिका ने ऑस्ट्रेलिया के साथ एक संधि की है। इस संधि के अंतरगत अमेरिका अपने 2,500 पोत ऑस्ट्रेलिया के उत्तरी तट पर तैनात कर सकता है।

चीन ने अमेरिका के इस कदम की कड़े शब्दों में आलोचना की है। हालांकि अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया के बीच हुए इस समझौते पर ऑस्ट्रेलिया के अंदर भी विवाद चल रहा है।

ताजा हैं ताइवान के जख्म

साल 1949 में अमेरिका ने अपना संरक्षण देकर ताइवान को आजाद करने में अहम भूमिका निभायी थी। चीन का तर्क है कि पूंजिवाद देशों ने ताइवान को उनसे चुरा लिया।

हाल ही में अमेरिका ने ताइवान के साथ 4 बिलियन पाउंड का हथियार सौदा किया था। इसके अंतरगत अमेरिका ने ताइवान को 114 पैट्रियट एंटी-बैलिस्टिक मिसाइलें, 60 ब्लैकहॉक हैलिकॉप्टर और दो माइनस्वीपर बेचे थे। चीन ने इस सौदे की आलोचना की थी।

जोश में हैं चीनी

अमेरिका के खिलाफ अब चीनी नागरिक भी जागरुक हो गए हैं। ताइवान के मुद्दे पर आम चीनी नागरिकों का कहना है, "अमेरिका को अब अपना अभिमान छोड़ देना चाहिए और हमें बराबरी का दर्जा देना चाहिए।" sabhar : bhaskar.com

 

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