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गुरुवार, 24 नवंबर 2011

ऐसे पागल आदमी को खुला छोड़ना खतरनाक, कैबिनेट में उठाऊंगा मुद्दा: फारूक अब्‍दुल्‍ला

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नई दिल्‍ली. केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार को थप्‍पड़ मारे जाने की घटना पर उनके सहयोगी मंत्री फारूक अब्‍दुल्‍ला बिफर गए हैं। उन्‍होंने कहा कि नेताओं की सुरक्षा बढ़नी चाहिए और वह कैबिनेट में भी यह मुद्दा उठाएंगे।
  
अब्‍दुल्‍ला ने पवार पर हमला करने वाले शख्‍स के बारे में कहा कि उसने सबसे पहले सुरेश कलमाड़ी पर हमला किया, फिर सुखराम को निशाना बनाया और अब शरद पवार पर हमला बोला है। उसने छुरी तक निकाल ली, कत्‍ल करने के लिए। मीडिया वाले नहीं होते तो वह बड़ी घटना अंजाम दे सकता था।
  
अब्‍दुल्‍ला ने पत्रकारों से कहा कि आप लोग हमसे बात करने आते हैं तो आप लोगों को भी ध्‍यान रखना चाहिए कि आपके बीच कौन लोग हैं। हमारे सुरक्षाकर्मी आपको रोक नहीं सकते। अगर इस बारे में जल्‍द ही कुछ नहीं किया गया तो हम लोगों का आप लोगों से बात करना भी मुश्किल हो जाएगा।  

अब्‍दुल्‍ला ने हरविंदर को बेहद खतरनाक आदमी बताया। उन्‍होंने कहा कि सरकार को तुरंत कोई रास्‍ता निकालना होगा।

बीजेपी नेता स्‍मृति ईरानी ने कहा, ‘लोकतंत्र में हिंसा का कोई स्‍थान नहीं है। मैं इस घटना की निंदा करती हूं लेकिन महंगाई को लेकर हम संसद में आवाज उठा रहे हैं और सड़क पर भी उठाएंगे।’  

शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले से जब पत्रकारों ने इस घटना के बारे में पूछा तो उन्‍होंने कहा, ‘चिंता का विषय है। यह ठीक नहीं है। मामले को तूल नहीं देना चाहते हैं।’  हालांकि शरद पवार का कहना है कि इस घटना को गंभीरता से लेने की जरूरत नहीं है।
 
सीपीआई नेता गुरुदास दासगुप्‍ता ने कहा है कि इस घटना को महंगाई से जोड़कर देखना ठीक नहीं है। इस तरह की घटना निंदनीय है।  शिव सेना के प्रवक्‍ता संजय राउत ने कहा, 'इस तरह की घटना पहले भी हो चुकी है। शरद पवार की सुरक्षा की जिम्‍मेदारी गृह मंत्रालय की है।'


सुषमा स्‍वराज ने इस घटना की निंदा करते हुए कहा कि भाजपा कभी भी हिंसा की समर्थक नहीं रही है। वित्‍त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने कहा, ‘पता नहीं देश किस दिशा में जा रहा है।’  

योग गुरु बाबा रामदेव ने कहा, ‘विरोध करने का यह अलोकतांत्रिक तरीका है। यह ठीक है कि लोगों का गुस्‍सा बढ़ रहा है। लेकिन सरकार को सीख लेना चाहिए। सरकार हजारों निर्दोष लोगों पर हमला कर देती है।’

अन्‍ना हजारे ने कहा, 'सरकार को यह सोचना है कि जनता का गुस्सा ज्यादा नहीं बढ़ना चाहिए, जनतंत्र में यह गुस्सा ठीक नहीं है लेकिन सरकार को भी यह सोचना चाहिए की जनता का गुस्सा ज्यादा नहीं बढ़ना चाहिए। भ्रष्टाचार, महंगाई से जनता का गुस्सा लगातार बढ़ता जा रहा है लेकिन फिर भी जनता को सोचना चाहिए। ऐसे हाथापाई करना ठीक नहीं है।'  sabhar : bhaskar.com

 

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