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मंगलवार, 29 नवंबर 2011

वफादार और खूंखार कुत्तों की यहां बसी है शानदार दुनिया

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लुधियाना.
वफादार होने के साथ बेहद खतरनाक भी। हमला बोल दें तो अच्छे -अच्छे बहादुर भी मैदान छोड़ जाएं। एक-दो नहीं कुत्तों की पूरी फौज। एक ही घर में 33। जी हां, अपने शहर में ही एक घर ऐसा भी है, जहां बसी है इन जानदार कुत्तों की शानदार दुनिया। रॉट वेलर, डैशंड और शारपेई जैसी प्रजाति के 33 कुत्तों का यह रोमांचक संसार बसाया है शहर के एनआरआई अमनिंदर सिंह ग्रेवाल ने।


कनाडा में एक निजी कंपनी के साथ जुड़े अमनिंदर साल के छह महीने अपनी इस खतरनाक फौज के साथ लुधियाना में बिताते हैं। रॉट वेलर प्रजाति के 28 कुत्तों की ग्रेवाल से मोहब्बत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि कैनन लॉन में घुसते ही उन्हें गले लगाने को यह फौज यूं टूट पड़ती है कि कोई अंजान देखे तो सहम जाए।


फिरोजपुर रोड पर शमशेर एवेन्यू में रह रहे इन डॉग्स के ठाठ भी निराले हैं। इनके पालन-पोषण का मासिक खर्च एक लाख रुपये से भी ऊपर है।ग्रेवाल देश में हो या विदेश में,पैट्स की शान ओ शौकत में कोई फर्क नहीं पड़ता। देखभाल और प्रशिक्षण के लिए चार मास्टर हैं। लुधियाना में कनाडा जैसी मौज तो नहीं है, लेकिन अपने इन वफादारों से मिलने की खुशी उससे कहीं ज्यादा है। रॉट वेलर नस्ल का 10 वर्षीय टाइटन तो उनके प्यार में काफी बिगड़ा हुआ है। टाइटन जिद कर बैठे तो ग्रेवाल को उसे अपने साथ बेड पर सुलाना ही पड़ता है।


यह है खानपान का हिसाब


600 ग्राम फीड प्रतिदिन एक कुत्ते को (कीमत 140 रुपये प्रति किलोग्राम) 250 ग्राम दही दिन में (कीमत 25 रुपये) छह अंडे रोज (30 रुपये) फूड सप्लीमेंट रोजाना सुबह (15 रुपये एक गोली) प्रत्येक मास्टर पर खर्च 8 से 20 हजार


इन नस्ल के डॉग्स हैं ग्रेवाल के पास


रॉट वेलर : 28 शारपेई : 3 डेशन्ड हाउंड : 1 लैब्राडोर : 1


मुझे इनसे उतना ही प्यार है, जितना अपने बच्चों से। यह मेरा परिवार है। इनका सौदा करने का सवाल ही नहीं उठता। रॉट वेलर खतरनाक नहीं बदनाम ज्यादा हैं।

sabhar : bhaskar.com

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