रविवार, 20 नवंबर 2011

अमेरिका का धोखा, चीन झुका: अमेरिकी सरकार की नजर में पीओके पाकिस्‍तान का हिस्‍सा!

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नई दिल्‍ली. अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने पाकिस्‍तान के कब्‍जे वाले कश्‍मीर (पीओके) को पाकिस्‍तान का हिस्‍सा करार दिया है। पीओके पर भारत कब्‍जा जताता रहा है और संयुक्‍त राष्‍ट्र की नजर में भी यह विवादित क्षेत्र है। लेकिन अमेरिकी विदेश मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट पर इसे पाकिस्‍तान का हिस्‍सा बताया गया है।

मंत्रालय की वेबसाइट पर दुनिया के उन सभी देशों का क्रमवार प्रोफाइल और उनका नक्‍शा दिया गया है जिनके अमेरिका से राजनयिक रिश्‍ते हैं। इस सूची में भारत का नक्‍शा भारत के आधिकारिक नक्‍शे से अलग है। इसमें पीओके पर भारत के दावे को पूरी तरह नकार दिया गया है। अमेरिकी प्रशासन ने इस इलाके को नक्‍शे पर विवादित क्षेत्र बताने की भी जहमत न‍हीं उठाई है।

उत्‍तर में अक्‍साई चीन के मामले में अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने भारत का समर्थन किया है। अमेरिका की नजर में चीन के कब्‍जे वाले अक्‍साई चीन इलाके पर भारत का दावा है और नक्‍शे पर इसकी पुष्टि की गई है। अक्‍साई चीन इलाके से चीन की सीमा लगती है। केवल पीओके के मामले में ही अमेरिका ने भारत के दावे को नकारते हुए इसे पाकिस्‍तान का हिस्‍सा बताया है।

जानकारों का मानना है कि पीओके को पाकिस्‍तान का हिस्‍सा बताना अमेरिका का पाकिस्‍तानपरस्‍त कदम है जबकि गिलगित-बालतिस्‍तान सहित समूचे पीओके को संयुक्‍त राष्‍ट्र विवादित मानता है।

उधर, दक्षिण चीन सागर में वर्चस्‍व बनाने पर अड़े चीन ने कुछ नरम पड़ने के संकेत दिए हैं। बाली में आसियान शिखर सम्‍मेलन में भारत सहित अधिकतर एशियाई देशों की ओर से दक्षिण चीन सागर विवाद पर बातचीत के लिए दबाव पड़ने के बाद चीन के रुख में नरमी दिख रही है। चीन ने कहा है कि वह इस विवाद को सुलझाने के लिए एशियाई देशों के साथ मिलकर एक आचार संहिता पर काम करने का इच्‍छुक है।

चीन के प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ ने अपने रुख में नरमी के संकेत दिए। बाली में भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने दक्षिण चीन सागर विवाद को सुलझाने के लिए द्विपक्षीय वार्ता पर जोर दिया था लेकिन चीन शुरुआत में इसे मानने को तैयार नहीं था। खनिज संसाधनों से भरपूर इस पूरे समुद्री क्षेत्र पर चीन अपनी संप्रभुता का दावा करता है और उसने अन्य देशों को चेतावनी भी दी है कि वे इस क्षेत्र में दखल न दें जबकि दक्षिण एशिया के अन्‍य देश वियतनाम, फि‍लिपींस, ताईवान, मलेशिया और ब्रुनेई अपने आसपास के समुद्री क्षेत्र में अपनी संप्रभुता का दावा करते हैं।

वेन ने कहा कि चीन और अन्‍य एशियाई देशों के बीच दक्षिण चीन सागर को लेकर एक संधि हुई है जिसके तहत इस क्षेत्र में आवाजाही की आजादी में खलल नहीं डाली जा सकती है। हालांकि चीन इस पूरे मसले से अमेरिका को अलग रखना चाहता है। चीन के सहायक विदेश मंत्री लियू झेनमिन ने कहा कि चीन हमेशा इस बात पर जोर देता रहा है कि केवल इस विवाद से जुड़े पक्ष ही सीधी बातचीत के जरिये इस मसले का हल निकालें।
sabhar : bhaskar.com

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