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रविवार, 13 नवंबर 2011

संपत्ति बेचकर कर्ज चुकाएंगे विजय माल्‍या? बजाज बोले- जो मर रहे हैं उन्‍हें मरने दो

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नई दिल्‍ली. कर्ज में डूबी किंगफिशर एयरलाइंस को ‘रनवे’ पर लाने के लिए कंपनी बोर्ड की आज बैठक हो रही है जिसमें संपत्ति बेचकर कर्ज चुकाने पर विचार किया जाएगा। एयरलाइंस पर करीब 1.3 अरब डॉलर का कर्ज जिसमें आधे की भरपाई संपत्ति बेचकर किए जाने का प्रस्‍ताव बोर्ड की बैठक में लाया जा सकता है। ऐसे में सभी की निगाहें इस बैठक की ओर लगी हैं। इस बीच किंगफिशर के शेयरों के दाम में आज चार फीसदी का उछाल दर्ज किया गया है।


गौरतलब है कि पिछले हफ्ते कंपनी ने अपनी 200 उड़ानें रद्द कर दी थीं। इससे यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। कंपनी पर 6500 करोड़ रुपए का कर्ज है और वह इसे घटाकर 3,000 करोड़ रुपए करना चाहती है। इसके लिए वह अपनी कई संपत्ति बेचना चाहती है जिसमें उसका मुख्यालय किंगफिशर हाउस भी है। इसके अलावा कंपनी अपने 675 रुपए के कर्ज को इक्विटी में बदलना भी चाहती है जिससे उसका बोझ हल्का होगा।

  

एयरलाइंस को सरकारी मदद की मांग के खिलाफ उद्योग जगत से भी आवाज उठने लगी है। बजाज ऑटो के प्रमुख राहुल बजाज ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा कि निजी क्षेत्र की कंपनियों को सरकारी मदद नहीं मिलनी चाहिए। एक चैनल से बातचीत में उन्‍होंने कहा, ‘खुले बाजार की व्यवस्था में जो मर रहे हैं, उन्हें मरने देना चाहिए। मैं गर्व से कहता हूं कि मैं निजी क्षेत्र का व्यक्ति हूं। सरकार द्वारा निजी कंपनियों को बेलआउट पैकेज दिए जाने का तर्क मुझे समझ नहीं आ रहा।’



हालांकि नागरिक उड्डयन मंत्री व्यालार रवि ने साफ किया कि किंगफिशर एयरलाइंस ने केंद्र से किसी राहत पैकेज की मांग नहीं की है। रवि ने कहा, ‘सरकार के समक्ष न तो इस तरह का कोई राहत पैकेज लंबित है और न ही किंगफिशर एयरलाइंस के लिए नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने इसे प्रस्तावित किया है। मेरी माल्या से मुलाकात हुई लेकिन मैं यह खुलासा नहीं कर सकता कि उन्होंने क्या चर्चा की।’  



इससे पहले किंगफिशर को पूंजी मुहैया कराने वाले बैंकों ने मुंबई में बैठक की। लेकिन अभी तक मदद देने पर फैसला नहीं लिया गया है। एसबीआई की अध्यक्षता में 13 बैंकों के संघ ने पहले दौर की बैठक के दौरान कंपनी से कहा कि वो अपनी ओर से और अधिक निवेश करे। साथ ही बैंकों को अतिरिक्त वित्तीय विवरण मुहैया कराए। वित्तीय विवरण की जांच-पड़ताल के लिए बैंकों ने समिति का भी गठन किया है। इन सभी बैंकों का किंगफिशर में कुल 23.4 प्रतिशत हिस्सा है जो कि तकरीबन 7700 करोड़ रुपए का है।

sabhar: bhaskar.com

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