मंगलवार, 1 नवंबर 2011

डायनोसोर के पैर के निशानों के साथ मिले दूसरे निशानों से मच गया है बवाल


अमेरिका के टेक्सास स्टेट की पालूक्सी नदी के तल में कई सालों से डायनोसोर के पैरों के निशान देखने के दावे किए जा रहे हैं। इसके साथ ही वहां इंसानों के पैरों के निशान भी हैं, इसलिए यह मामला हमेशा विवादों में रहा है। इनकी उम्र के अलावा क्या इंसान और डायनोसोर एक वक्त में धरती पर रहे हैं, इस पर भी बहस होती है।

कहते हैं कि नदी के आसपास बने निशान नकली हैं, इन्हें इंसानों ने ही बनाया है। फिर भी जो निशान नदी के तल में हैं, उनके बारे में ऐसा नहीं कहा जा सकता। साइंस के अनुसार डायनोसोर और इंसानों के बीच करीब छह करोड़ साल का अंतर था। इस तरह ये निशान एक राज़ बनकर रह गए हैं।

ये किस्सा 1909 से शुरू हुआ था। एक स्थानीय बच्चे ने ग्लैन रोज़ के पास तीन अंगुलियों वाले पंजे के निशान देखे थे। अनुमान लगाया गया कि ये मांसाहारी डायनोसोर थेरोपॉड्स के निशान हैं। 1910 में वहां दो युवा भाई नदी किनारे मछलियां पकड़ रहे थे। वे थेरोपॉड्स के पैरों के निशान के बारे में जानते थे। उन्हें वहां एक इंसान का बड़ा सा पंजा बना हुआ दिखा। ये पैर का निशान करीब 15-16 इंच लंबा था।

1930 तक वहां के जिम रायल्स ने डायनोसोर और राक्षसों के पैरों के बहुत से निशान तलाश लिए और पर्यटकों को आकर्षित करने लगे। एक और व्यक्ति जॉर्ज एडम्स ने भी इस तरह के निशान बनाने शुरू कर दिए। लोगों की ऐसी हरकतों ने मामले को गुमराह कर दिया। कई साल बाद अमेरिकन म्यूजियम ऑफ नेचुरल हिस्ट्री के रोलेंड बर्ड ने इन पर रिसर्च शुरू की। वहां पर डायनोसोर की एक नई प्रजाति के निशान भी मिले। उनके बाद क्लिफोर्ड बुर्डिक ने यहां रिसर्च की। उनकी रिपोर्ट 1950 में छपी थी।

फिर जॉन विटकॉम्ब और हैनरी एम मॉरिस ने 1961 में यहा रिसर्च की। 1965 और 1970 में भी कुछ वैज्ञानिकों ने इन निशानों पर रिसर्च की। ये तो साबित हो गया कि डायनोसोर के निशान असली हैं लेकिन इंसान भी उस दौर में थे ये पता नहीं चलता। इसके अलावा ये निशान बने कैसे ये भी एक राज़ है।

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