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मंगलवार, 29 नवंबर 2011

जेपी की बुआ ने कहा-गांधी-जेपी के सपनों को पूरा कर रहे अन्ना

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आरा।भ्रष्टाचार के विरूद्ध लड़ाई को छेड़ने वाले समाज सेवी अन्ना हजारे को समर्थन कर रही शाहाबाद के धरती के संभवत: सबसे बुजूर्ग महिला लोकनायक जयप्रकाश नारायण के 120 वर्षीय फुआ ने कहा कि अन्ना हजारे राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी और लोकनायक जयप्रकाश नारायण के सपनों को पूरा कर रहे है। वहीं उन्होंने मुख्यमंत्री नीतिश कुमार के कामों को प्रशंसा करते हुए कहती है कि वे भी भ्रष्टाचार के विरूद्ध मुहिम छेड़े हुए है जो एक अच्छा शासन का प्रतीक है।

शाहाबाद का पुराने मुख्यालय आरा से महज 20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित बसमनपुर गाँव में विवाहित जेपी के फूआ दादी के नाम से प्रसिद्ध तपेश्वरी देवी का विवाह करीब 1900 ई. में हुआ था। वहीं पुराने जमाने को याद करते हुए अपने पति स्व. दीपा सिंह के बारे मे कहती है कि वो अंग्रेज के जमाने में बिहार रेजिमेंट में सिपाही के पद पर कार्य करने वाले स्व. सिंह की नियुक्ति मुंगेर में हुई थी।

1953 में रिटायर्ड होने वाले पति की मृत्यु 1958 में होने के बाद तपेश्वरी देवी को गहरा झटका तो लगा। वहीं बेटी के छ: पीढ़ीयों और बेटे के चार पीढियों को देखने वाली तपेश्वरी आज भी अपना पेंशन उठाने घर से पाँच किलोमीटर दूर बेनवलीया बैंक जाती है। कान से कम सुनाई पड़ने के बावजूद आधुनिकता में विश्वास रखने वाली तपेश्वरी कहती है कि आधुनिकता के साथ-साथ अपने अतीत को नहीं भूलना चाहिए।

आज दो साल पहले रेडियों पर समाचार सुनने व पैदल पेंशन लेने जाने वाली तपेश्वरी देवी के स्वाथ्य में परिजनों के अनुसार अंतर तो आया है लेकिन आज भी पूर्ण रूप से स्वस्थ है। परिजनों के अनुसार याद नहीं है कि कभी गंभीर रूप से बीमार पड़ी है। जेपी को याद करते हुए कहती है कि जेपी का जन्म मेरे सामने हुआ था। उनके बातों को याद करते हुए गुस्सा में बोलती है कि जब तक देश से गलत काम खत्म नहीं होता तब तक जिंदा रहूँगी। वो भोजपुरी में गलत काम बोलती है जिसका आज के समय में नाम भ्रष्टाचार दिया गया है। बेटे-बेटी को देखकर कहती है इनलोगों के और एक पीढ़ी को देखूँगी।

जेपी के गाँव में सिताब दियार में जन्मी तपेश्वरी देवी के मायके के लोग वर्तमान में कटीहार जिले सेमापुर में रहते है। कमर से झुक कर चलने वाली तपेश्वरी आज भी चश्मे और लाठी से अपने आप को दूर रखी हुई है। 1953 में 28 रूपया पेंशन पाने वाली तपेश्वरी देवी आज के समय में 5500 रूपया पेंशन पाने पर कहती है कि यह तो सरकार की महिमा है ।

120 वर्ष के इस उम्र में उनके इसे जज्बे को देख गाँव से प्रदेश रहने वाले युवक हो या बुजुर्ग सभी उनकी चर्चा पूरे दिन में एक बार तो जरूर कर लेते है। sabhar :bhaskar.com

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