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कैसी होंगी भविष्य की दवाएं

रिसर्चर फिलहाल जिस तरह की दवाओं पर काम कर रहे हैं वे आज की गोलियों जैसी बिल्कुल नहीं दिखेंगी. कोशिकाओं में प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले एक अणु की इसमें सबसे अहम भूमिका होगी.


शरीर की कोशिकाओं के प्लाज्मा में पाए जाने वाले "मैसेंजर आरएनए" को रिसर्चर बहुत सारी संभावनाओं से भरा मानते हैं. यह कोशिकाओं को ऐसा मॉलिक्यूलर ब्लूप्रिंट देता है, जिस पर चल कर कोशिकाएं किसी भी तरह का प्रोटीन बना सकती हैं. फिर यही प्रोटीन शरीर के भीतर होने वाली सभी गतिविधियों पर असर डालते हैं. अब इस अणु के इसी गुण का इस्तेमाल कर वैज्ञानिक नए जमाने की दवाएं और टीके बनाने की कोशिश कर रहे हैं. इन दवाओं से फेफड़ों के कैंसर से लेकर प्रोस्टेट कैंसर तक का प्रभावी रूप से इलाज किया जा सकेगा. इस जादुई अणु की संभावनाओं को समझ चुका वैज्ञानिक समुदाय इसे दवाओं के रूप में विकसित करवाने के लिए पूरे विश्व की ओर देख रहा है. जर्मनी के ट्यूबिंगन में वैज्ञानिक मेसेंजर आरएनए की खूबियों को समझने में लगे हैं और इसे एक ऐसा अणु बता रहे हैं जो शरीर को खुद अपना इलाज करने की क्षमता दे सकता है. यहां काम करने वाली जीवविज्ञानी, मारियोल…
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नपुंसकता

नपुंसकता के मरीज़ लगातार बढ़ रहे है। ज़्यादातर मरीज़ो में तनाव मुख्य वजह है। एक रिसर्च के मुताबिक ज़्यादातर मरीज युवा होते है। इनकी उम्र 25 से 40 के बीच होती है। साथ ही यह ज़रूरी नहीं की बॉडी बिल्डर व्यक्ति इस समस्या से ग्रहसित नहीं होते। यह किसी को भी हो सकती है। यह कहना है केजीएमसी के आयुर्वेदिक चिक्त्सिक डॉ सुनित कुमार मिश्र का। उन्होंने बताया कीं नपुंसकता के दो कारण होते हैं। शारीरिक और मानसिक। चिन्ता और तनाव से ज्यादा घिरे रहने से मानसिक रोग होता है।
 नपुंसकता शरीर की कमजोरी के कारण भी होती है। ज्यादा मेहनत करने वाले व्यक्ति को यदि पौष्टिक आहार नहीं मिल पाता, तो कमजोरी बढ़ती जाती है और नपुंसकता पैदा हो सकती है

 नपुंसकता शरीर की कमजोरी के कारण भी होती है। ज्यादा मेहनत करने वाले व्यक्ति को यदि पौष्टिक आहार नहीं मिल पाता, तो कमजोरी बढ़ती जाती है और नपुंसकता पैदा हो सकती है।

नपुंसकता के रोगी को अपने खाने पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए। आहार में पौष्टिक खाद्य पदार्थों घी, दूध, मक्खन के साथ सलाद भी ज़रूर खाना चाहिए। फ़ल और फ़लों के रस के सेवन से शारीरिक क्षमता बढ़ती है। नपुंसकता की चिकित्सा के चलत…

Suchira singh ki kalam se

आदरणीय मेयर उमेश गौतम जी (बरेली), ( भूड़ मोहल्ले में भी कोई बंदर किसी मां का आंचल सूना ना कर दे)

.................आज बरेली के अखबार में एक खबर पढ़कर दिल दहल गया। खबर थी कि एक बंदर मां की गोद से नवजात बच्चा छीनकर ले गया, इससे पहले मां कुछ करती बंदर ने बच्चे को जमीन पर पटक दिया और बच्चे का चेहरा नोच दिया।बच्चे की मौत हो गई। कुछ ऐसा ही आतंक हमारे भूड़ मोहल्ले में बंदरों ने मचा रखा है। यहां छतों पर बंदर हर समय डटे रहते हैं।सड़क पर फैले कूडे के ढेर पर ना जाने कितने बंदर खाने का सामान टटोलते रहते हैं। सड़क से गुजरने वाले राहगीर और बच्चों को बंदर काट खाने को दोड़ते हैं।

स्कूली बच्चे हैं दहशत में
........पास ही छोटे बच्चों का स्कूल है, जिनको बंदर कई बार काट चुके हैं। साथ ही कन्या डिग्री कालेज हैं जहां छात्राएं बंदरों से बचती-बचाती कालेज तक पहुंचती है। मोहल्ले की घर की खिड़की व दरवाजों के सामने बंदर खाने की चीजों को छीनने के लिए बैठे रहते है। जिसके चलते वह घरों में हर समय दरवाजा बंद कर रहने को मजबूर हैं।

माएं अपने नवजातों को आंचल में छुपा लेती हैं
.........मोहल्ले में कुछ नवजात बच्चे हैं जिनक…

24 घंटे' असर करेगी गोली

समाचार
'चौबीस घंटे' असर करेगी गोली
यह नई दवाई चौबीस घंटे तक अपना असर बरक़रार रखेगी
नपुंसकता के शिकार पुरुष अब एक नई दवाई की बदौलत रात दिन जब चाहें यौन संबंध क़ायम करने में सक्षम रहेंगे.

सियालिस नाम की इस दवाई को बनाने वालों का दावा है कि इसका असर चौबीस घंटे तक रहेगा.

अब तक काम आने वाली गोली वायग्रा यौन क्रिया शुरू करने से एक घंटे पहले लेनी होती थी और वह सिर्फ़ चार घंटे ही प्रभावी रहती थी.


अब तक इस बाज़ार पर वायग्रा का ही एकाधिकार था लेकिन वायग्रा की तरह ही यह दवाई भी नुस्ख़े से ही मिलेगी, जो चाहे उसे नहीं.

इस दवाई की निर्माता कंपनी लिली यूके का कहना है कि इससे दम्पत्ति अधिक सहज और स्वाभाविक रूप से यौन क्रिया का आनंद ले सकते हैं.

जब चाहे...

उनके लिए कोई समय के बंधन नहीं होंगे.

एक ख़ास बात और. इस दवा का असर तो पूरे दिन रहेगा लेकिन यौन क्रिया की ज़रूरत उत्तेजित होने पर ही महसूस होगी.

पुरुष आमतौर पर तभी उत्तेजित होते हैं जब शारीरिक संपर्क या इस तरह के विचार उनके दिमाग़ में आते हैं.

उस समय एक रासायनिक तत्व पैदा होता है जो उनकी यौनेंद्रिय की रक्त वाहिकाओं को फैला देता है.

एक ख़ास एंज़ाइम

यह रास…

चीन / दुनिया का पहला फोल्डेबल स्मार्टफोन लॉन्च, 7.8 इंच के टैबलेट को बना सकते हैं 4 इंच का फोन

फोल्डेबल स्मार्टफोन की कीमत 95,400 रुपए से शुरू
अमेरिकी स्टार्टअप कंपनी रोयॉल ने फोल्डेबल स्मार्टफोन लॉन्च किया
सैमसंग और हुवावे जैसी बड़ी कंपनियों से यह उम्मीद थी
Dainik Bhaskar
Nov 02, 2018, 11:16 AM IST
गैजेट डेस्क. अमेरिकी कंपनी रोयॉल ने दुनिया का पहला फोल्डेबल स्मार्टफोन गुरुवार को चीन में हुए एक ईवेंट में लॉन्च कर दिया। इस स्मार्टफोन का नाम 'Flexpai' रखा गया है। तकनीकी तौर पर ये फोन एक टैबलेट की तरह ही है क्योंकि इसमें 7.8 इंच की स्क्रीन दी गई है, लेकिन इसे मोड़कर 4 इंच का फोन बनाया जा सकता है।

सैमसंग, हुवावे जो नहीं कर पाए वह स्टार्टअप ने कर दिखाया
सैमसंग पहली और हुवावे दुनिया की दूसरी बड़ी स्मार्टफोन कंपनी है। यह उम्मीद की जा रही थी कि इन दोनों में से कोई एक दुनिया का पहला फोल्डेबल स्मार्टफोन पेश करेगी। लेकिन, 6 साल पुरानी अमेरिकी स्टार्टअप कंपनी रॉयोल ने ऐसा कर दिखाया।

पहला फोन जिसमें 7nm स्नैपड्रैगन 8150 प्रोसेसर का इस्तेमाल
Flexpai न सिर्फ दुनिया का पहला फोल्डेबल स्मार्टफोन है बल्कि ये दुनिया का ऐसा पहला फोन भी है जिसमें 7nm स्नैपड्रैगन 8150 प्रोसेसर का इस्तेमाल हु…

तो क्या रोबोट छीन लेंगे ये नौकरियां?

रोबोट अब ऑपरेशन थिएटर में भी पहुंच गए हैं. लेकिन इन्हें चलाना तो डॉक्टरों को ही पड़ता है. और अगर रोबोट को संभालने के लिए मुश्किल सॉफ्टवेयर से जूझना पड़े, तो यह मदद की जगह परेशानी का सबब बन सकते हैं. आने वाले सालों में 40 फीसदी नौकरियां रोबोट के हाथों में होंगी. जानिए वह कौन कौन सी नौकरियां हैं, जो इन मशीनों ने करनी शुरू भी कर दी हैं या फिर जल्द करने वाले हैं और जहां शायद भविष्य में इंसानों की कोई जरूरत ना रह जाए. जर्मनी की डाक सेवा डॉयचे पोस्ट ने इनका इस्तेमाल शुरू कर दिया है. पीले रंग के रोबोट डाक ले कर लोगों के घर तक जाते हैं. हालांकि क्योंकि अभी इन्हें सीढ़ियां चढ़ना नहीं आता है, इसलिए एक व्यक्ति मदद के लिए इनके साथ रहता है. तो क्या रोबोट छीन लेंगे ये नौकरियां? सेल्समैन आप दुकान में पहुंचें और एक रोबोट आपसे पूछे कि बताइए, मैं आपकी क्या मदद कर सकता हूं. यह किसी फिल्म का सीन नहीं है, बल्कि ऐसा होने लगा है. जर्मनी में पॉल नाम का रोबोट इलेक्ट्रॉनिक्स के स्टोर पर काम करता है. पिज्जा के लिए मशहूर डॉमिनोज काफी समय से डिलीवरी वाले रोबोट पर काम कर रहा है. बहुत जल्द आपके घर पिज्जा की डिलीवरी रोबोट किय…

योग के बाद अब ध्यान में डूबते अमेरिकी

बाहरी दुनिया शोर गुल से भरी है और भीतर मन की उथल पुथल है. ऐसे में क्या ध्यान शांति दे पाएगा? योग के बाद अब ध्यान अमेरिका को अपनी आगोश में ले रहा है. शाम के पांच बजते ही 31 साल की जूलिया लायंस अपना काम काज समेटती हैं. न्यू यॉर्क से सटे शहर मैनहटन में रहने वाली जूलिया सीधे ध्यान केंद्र की ओर बढ़ती हैं. वहां वह आधे घंटे गहरे ध्यान में डूबने की कोशिश करेंगी. जूलिया इनवेस्टमेंट बैंकर हैं. अप्रैल 2016 में अचानक उन्होंने ध्यान शुरू किया. ध्यान केंद्र के सोफे में बैठकर वह कहती हैं, "मैं शांति का एक लम्हा चाहती हूं. इस शहर में आप हमेशा भाग रहे होते हैं और यहां कोई भी ऐसा कोना नहीं जहां शांति हो." योग भले ही दुनिया भर में मशहूर हो चुका हो, लेकिन ध्यान अभी भी चुनिंदा लोगों तक ही सीमित है. पश्चिम में अब तक ध्यान को आध्यात्मिकता की ओर् झुके हुए लोगों से जोड़कर देखा जाता रहा है. लेकिन अब तस्वीर बदल रही है. अमेरिका के कई अस्पतालों में गंभीर बीमारियों के इलाज में ध्यान की मदद ली जा रही है. स्कूलों में टेलिविजन के जरिये ध्यान सिखाया जा रहा है. स्मार्टफोन तक सिमट चुकी जिंदगी का ही नतीजा है क…